Writer & Poet Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari & Article's by Vikrant Rajliwal

Jan 18, 2019
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

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💦 निर्दोष धड़कन। (Live Video)

🌅 सुप्रभात प्रिय पाठकों एव ह्रदय अज़ीज़ श्रुताओं। सुबह की ताजगी से महक जाए आपके जीवन की सुंदर हर बाग़वानी। खिल उठे खुशियों के गुल दूर हो जाए जीवन से आपके हर परेशानी।। 👉 कल आपके और अपने यूट्यूब चैनल Kavi Vikrant Rajliwal पर अपनी प्रथम प्रकाशित पुस्तक से एक अति संवेदनशील कविता एक दर्द […]

Jan 15, 2019
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

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सितमगर हसीना। (YouTube Live video)

अक्सर सितमगर एक हसीना का दीदार किया करता हूँ। आती है पर जब वो सामने तो मुह फेर लिया करता हूँ।। देखना तो चाहता हूँ उसको मैं जी भर, मगर न जाने उसके हाव भाव से क्यों डर जाता हूँ।।। उस सितमगर हसीना की शख्सियत भी कमाल लगती है। चेहरे पर उसके हमेशा आग ग़ुस्से […]

Jan 14, 2019
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

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खण्डित विशवास। (मेरी Live परफॉर्मेंस वीडियो)

सत्य प्रेम से अगन ह्र्दय कि जवलित ज्वाला जो रंग इंद्रधनुषी स्थापित प्रेम गगन पर हुआ। थाप विद्रोह से पीड़ित जो ह्र्दय ध्वनियां, प्रहार ह्र्दय पर विच्छेद जो ध्वनियां, थामे व्याकुल जो पंछी प्रेमी, उलझे सम्बन्धों से उनका फिर विच्छेद हुआ।। करि ज्ञान से प्रेम परीक्षा घात ह्र्दय जो अटल प्रेम का, खंडित विशवास दुखी […]

Jan 12, 2019
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

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🎻 सोचता हूं अक्सर तन्हा अंधेरी रातो में… (YouTube Live performance)

याद हैं अब भी गुजरा वो ज़माना, देखा था खोया अक्श नज़रो में उनकी अपना जब वो वर्षो पुराना। रात थी वो चाँद की, आशिक था महोबत से उनकी यह सारा ज़माना।। रहता था उफ़ान धड़कनो में जब मेरे। बजता हो साज कोई, जैसे साँसों से मेरे।। उनकी वो हर एक अदा अब भी हैं […]

Jan 10, 2019
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

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एक विशेष सूचना।

नमस्कार मित्रों, मित्रों जेसा की आपको मैने सूचित किया था कि मेरी एक अप्रकाशित पुस्तक, एक नज़्म पुस्तक, एक अनकही महोबत की एक दर्द भरी अधूरी महोबत की दस्ताने है। जिसको मैं अपने साधारण से स्वर के साथ जल्द ही अपने यूट्यूब चैनल kavi Vikrant Rajliwal पर आप सभी प्रियजनों के साथ साँझा करने का […]

Jan 4, 2019
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

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🌅सत्य प्रकाश।

💥 सत्य प्रकाश। इस सभ्य समाज के बड़े बड़े मंचो से शोषित एव पीड़ितों को उनके शोषण से मुक्ति प्रदान करने हेतु बड़ी बड़ी बातें करना और उनकी भलाई के लिए अनेक प्रकार के आश्वाशन देना एक बात है और जमीनी स्तर पर उन तथ्यों की सच्चाई से परिचित होना एव हर प्रकार के शोषण […]

Jan 4, 2019
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

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आत्मस्वीकृति।

स्वीकार अस्तित्व व्यक्तिव का वास्तविक हम अपने कभी जो कर ना सके। भृम जीवन में जीवित हर श्वास साथ में, जीवन हम अपना जो जीते रहे।। बदल ना सके भावो को दूषित, व्यवहारों को भृमित कभी जो हम अपने। बदलते रहे स्वम् को बदलते भावो से व्यवहारों को दूषित जो हम अपने।। ह्रदय कक्ष से […]