Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

June 10, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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जब हमें जरूरत थी उनकी तो हम उनके किसी भी काम के ना थे। जब पड़ी जरूरत उन्हें हमारी तो वो हमारे किसी काम के ना रहे।। विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। When we needed him we were not of any of his work. When they need us, then they will not be of any use […]

June 8, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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One truth. (1)

A 17-year-old young boy recruits at the Rehabilitation Center. And with every passing moments, he begins to remember every single sentence of his life one by one. With whose influence an infallible change in his life has come easily. Some changes may be positive and some of them may be negative. Do you know that […]

June 8, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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एक सत्य। (1)

एक 17 वर्षीय अबोध युवक जब रिएबीटेशन सेंटर में भर्ती हो जाता है। एव हर गुजरते लम्हों के साथ उसे उसके जीवन के वह प्रत्येक वाक्य एक एक करके स्मरण होने लगते है। जिनके प्रभाव से उसके जीवन मे एक अचूक परिवर्तन सहज ही आ गए। जिनमे से कुछ परिवर्तन सकरात्मक हो सकते है एव […]

June 2, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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ट्वीट्स। My Twittes (एक लघु संग्रह )

✍️ यह एक लघु संग्रह है बीते कुछ दिनों में मेरे मैन ट्विटर अकाउंट और बैकअप ट्विटर अकाउंट के कुछ दिल को छू देने वाले ट्वीट्स के। 1) @vikrantrajliwal 2) @RajliwalVikrant 3rd one है @VRajliwala This is a short collection of my main Twitter Twitter accounts and some of my backup Twitter Twitter accounts that […]

May 20, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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✍️ मेरी क़लम।

मैंने बीते कुछ वर्षों के दौरान हम सब के इस सभ्य समाज पर और लगभग सभ्य समाज के हर वर्ग चाहे वो धनी हो या निर्धन। कोख़ में पलती लड़की और उसके जन्म से भयभीत होते कटरपंथी विचारधारा के व्यक्तियो के भाव व्यवहार हो या विकृत होती जा रही राजनीति। संसार से कट एकांकी जीवन […]

May 15, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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एक दर्पण। // A Mirror.

कल तक जो अय्याश थे आज साधु हो गए है। कल तक जो हाथ बांधे खड़े थे आज उन्ही के हाथों शमशीर है। कल तक जो पनतियो में प्रतीक्षा से बेठे थे आज वही खुद से शहंशाह हो गए है। औकात से बाहर जाकर एव खुद को ही शहंशाह समझना भूल हो सकती है उनकी, […]

May 11, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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अन्धकार और उजाला

अन्धकार और उजाला काव्य नज़्म रचना मेरी प्रथम प्रकाशित पुस्तक एहसास से है। जिसका प्रकाशन वर्ष 2016 में जनवरी माह में दिल्ली विश्वपुस्तक मेला में संयोग प्रकाशन शहादरा द्वारा किया गया है। इस रचना के माध्यम द्वारा मैने एक नशे से ग्रस्त व्यक्ति के दर्द को अपनी लेखनी के द्वारा व्यक्त करने का एक प्रयास […]