Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। -स्वतंत्र लेखन-

Mar 19, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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🍂 लम्हें।

अपने दिल में छुपा कर रखता हूं बहुत से मैं एहसास, के आज भी ये दिल मेरा एक धड़कती धड़कन को रोता है। गर ज़िन्दगी को जीना एक ज़ुल्म है तो ये सांसे क्यों हर लम्हा जिंदा ज़िन्दगी को धड़का कर जाती है।। खो गया हूं पा कर के कुछ तो खुद सा खुद के […]

Mar 16, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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💏 महोबतें

अब वो महफिले ना रही, अब वो हुनरबन्ध क़लमकार भी कहा दिखते है जमाने में। सुनते थे कभी जो बुज़ुर्गो से अपने कि लहू बहता था उन महफ़िलो में शायरी से शायरों के।। वो दौर, वो दस्तूर, वो ज़माना, जरूर रहे होंगे, बहता लहू भी जम जाता होगा हुस्न ओ इश्क़ के बाजारों में, वर्ना […]

Mar 16, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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💏 प्रेमी।

बग़ीचे गाना गाते है, फूल नाच दिखाते है। रात चांदनी में हर प्रेमी एक दूजे से मिलना चाहते है।। खुशबू प्रेम की पाकर के हर उदास ह्रदय भी झूम जाते है। हर प्रेमी प्रेम भावनाओं से तृप्ति प्रेम की कर प्राप्त तृप्त हो जाते है।। पवित्र भावनाओं से होकर के वशीभूत ह्रदय से ह्रदय, भाव […]

Mar 15, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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🌠 एहसास

रगों में बहता लहू रवानगी पर है अपनी, ऐसा लगता है ज़िन्दगी कि हर रवानगी एकदम से अब रुक जाएगी। बदलते बदलते खुद को बदल गए हर एहसास, बदलते हर एहसासों से बदलते गए हर एहसास। मौसम हो गए वीरान जो इंतजार में बहार के, अब और भी वीरान से नज़र आते है वो। क़त्ल […]

Mar 15, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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🌹 एक ख़्वाब।

कभी कभी कुछ कहते कहते कुछ भी ना कह पाना। ह्रदय एहसासों के एहसासों से किसी अजनबी को अपने बेहद करीब पाना।। उसकी हर खुशी से दर्द जिंदगी के अपने भूल जाना। रातो को उठ उठ कर के उसका नाम दिल की हर धड़कन पर धड़कनो से अपने लिखते जाना।। अश्क़ बहाते कभी तो कभी […]

Mar 11, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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💃 सितमगर हसीना। With Today’s Live Performance Video Link from My YouTube channel.

अक्सर सितमगर एक हसीना का दीदार किया करता हूँ। आती है पर जब वो सामने तो मुह फेर लिया करता हूँ।। देखना तो चाहता हूँ उसको मैं जी भर, मगर न जाने उसके हाव भाव से क्यों डर जाता हूँ।।। उस सितमगर हसीना की शख्सियत भी कमाल लगती है। चेहरे पर उसके हमेशा आग ग़ुस्से […]

Mar 8, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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🇮🇳 दौर आखरी नियम चुनावी। with Today’s Live video performance Link from YouTube.

क्यों पूछते हो आप सवाल टेड़ा, उठ जाता है सवाल सीधा, सवाल से आपके है जो टेड़ा, शौर्य पर सेना के हमारे। पूछना है तो पैमाना पूछ लेते, नापना है तो सीना नाप लेते, हर पैमाने से झलकती विरता, एक एक इंच सीने से शौर्यता सेना के हमारे।। शहीदों की है अमर गाथा, शहादत की […]