Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

June 10, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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रेप। / Rape

रेप! कहने को तो एक शब्द होता है। परन्तु इस शब्द रेप की वास्तविकता अत्यन्त ही भयानक होती है। रेप और रेपिस्ट? क्या रेप करने वाला ही रेपिस्ट होता है या जिन्होंने वह अनैतिक हालात उतपन किए क्या कहि ना कहि वास्तविक दोषी वही तो नही होते? यदि उन व्यक्तियों ने, जिन्होंने एक मासूम को […]

June 2, 2019
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ट्वीट्स। My Twittes (एक लघु संग्रह )

✍️ यह एक लघु संग्रह है बीते कुछ दिनों में मेरे मैन ट्विटर अकाउंट और बैकअप ट्विटर अकाउंट के कुछ दिल को छू देने वाले ट्वीट्स के। 1) @vikrantrajliwal 2) @RajliwalVikrant 3rd one है @VRajliwala This is a short collection of my main Twitter Twitter accounts and some of my backup Twitter Twitter accounts that […]

May 28, 2019
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दर्द। (नई ग़ज़ल)

जब खाई शिखस्त हमनें, अपनो के हाथों ही खाई, नही पाए पहचान जो हाथ वो खंजर उतारा दिल मे बेदर्दी से जो गया। हो कर बेरवाह ज़िन्दगी से, सलूख ज़िन्दगी के हम सीखते रहे, जान हर सलूख जिंदगी के, जान जिंदगी की निकलती रही।। दर्द हर हक़ीक़त का करते रहे जान कर भी नज़रंदाज़ हम […]

May 18, 2019
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जुबां

सत्य है यही सदियोँ से धर्म के नाम पर जुबां अक्सर बट जाती है। होती है सियासत जब घिनोनी तो जुबां दम अपना तोड़ जाती है।। काश ये होता कि हर जुबां घिनोनी सियासत से आजाद होती। मिलती सबको खुली आजादी और हर जुबां भी सिर्फ जुबां होती।। जुबां का जुबां से रिश्ता नज़र कुछ […]

May 15, 2019
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एक दर्पण। // A Mirror.

कल तक जो अय्याश थे आज साधु हो गए है। कल तक जो हाथ बांधे खड़े थे आज उन्ही के हाथों शमशीर है। कल तक जो पनतियो में प्रतीक्षा से बेठे थे आज वही खुद से शहंशाह हो गए है। औकात से बाहर जाकर एव खुद को ही शहंशाह समझना भूल हो सकती है उनकी, […]

May 11, 2019
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अन्धकार और उजाला

अन्धकार और उजाला काव्य नज़्म रचना मेरी प्रथम प्रकाशित पुस्तक एहसास से है। जिसका प्रकाशन वर्ष 2016 में जनवरी माह में दिल्ली विश्वपुस्तक मेला में संयोग प्रकाशन शहादरा द्वारा किया गया है। इस रचना के माध्यम द्वारा मैने एक नशे से ग्रस्त व्यक्ति के दर्द को अपनी लेखनी के द्वारा व्यक्त करने का एक प्रयास […]

May 7, 2019
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📖 एहसास

महोबत में उनकी हमने उनको याद हर लम्हा किया, फ़क़त आरज़ू एक महोबत कि मुक्कमल अब भी बाकी है। गुज़र गए जो लम्हे तन्हा तन्हा से, दूर तन्हाइयों में दूर उनसे कहि, हिसाब ज़िन्दगी का हर गुजरे लम्हे से अभी बाकी है।। राह अंजान, हर मंज़िल अंजानी सी है यहाँ, दर्द एक हकीकत का बेदर्द […]