Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। -स्वतंत्र लेखन-

Apr 1, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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❤️ दर्द ए दिल।

🌹हमें कहते है के नही कोई गिला हमें जो शिक़वा है तुमसे, बहारों की नही कोई तम्मना, वीरानों के करते नही है हमें ख्वाहिशें। अभी जो आपने देखे है महोबत के निगाहों से, के हमें भी क़त्ल करने के शौक ऱखते है।। विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। (पुनः प्रकाशित) 🌹Hme kahete he ke nahi koi gila […]

Mar 28, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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🇮🇳 नरेंद्र दामोदरदास मोदी। //🇮🇳 Narendra Damodardas Modi

नरेंद्र दामोदरदास मोदी जी भारतवर्ष के उन चंद चुनिंदा प्रधानमंत्री की श्रेणी में अब हमेशा ही गिने जाएंगे जिन्होंने भारतवर्ष के चमत्कारों की चमक से इस सम्पूर्ण संसार की घमण्ड से चूर आंखों को चुंधिया दिया है। और सम्पूर्ण संसार को भारतवर्ष के सम्मान करने के लिए सहज ही विवश कर दिया है। इनके (नरेंद्र […]

Mar 27, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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दास्ताँ (एक सूचना)

नमस्कार मित्रों, जैसा कि आपको ज्ञात है कि मैने आपसे कहा था कि इस शुक्रवार देर रात्रि तक अपनी आगामी नज़्म शृंखला *दास्ताँ* के अंतर्गत मेरी प्रथम दर्दभरी नज़्म दास्ताँ एक इंतज़ार… महोबत। को प्रकाशित कर दूंगा। परन्तु आपको यह बताते हुए मुझ को अत्यंत ही खेद हो रहा है कि जिस टाइपराइटर को मैने […]

Mar 26, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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एहसास

उदास हो कर टूट जाए या झूम कर लड़खड़ा जाए हर एक बर्बादियों पर अपनी। जी जाए ज़िन्दगी या छोड़ जाए हर टूटती सांसे टूटती हर एक उम्मीदों से अपनी।। हर एक कदम से कदम चलते हुए, खुद को खुद से खुद के लिए तलाशते हुए। सह गए सितम ज़िन्दगी का जिंदगी के लिए, हर […]

Mar 24, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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🌹विक्रांत राजलीवाल एक परिचय।🙏

नमस्कार प्रिय पाठको एव ह्रदय अज़ीज़ श्रुताओं, अक्सर कुछ व्यक्ति मुझ से संदेशक एव e mails के द्वारा मेरा परिचय पूछते है तो उन सभी महानुभवों समेत अपने समस्त चाहने वालो के लिए मैं पुनः अपना एक लघु परिचय यहाँ उपलब्ध करवा रहा हु। मित्रों मैं एक स्वतंत्र लेखक, कवि, शायर एव कहानीकार-नाटककार हु। मेरी […]

Mar 19, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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🍂 लम्हें।

अपने दिल में छुपा कर रखता हूं बहुत से मैं एहसास, के आज भी ये दिल मेरा एक धड़कती धड़कन को रोता है। गर ज़िन्दगी को जीना एक ज़ुल्म है तो ये सांसे क्यों हर लम्हा जिंदा ज़िन्दगी को धड़का कर जाती है।। खो गया हूं पा कर के कुछ तो खुद सा खुद के […]

Mar 16, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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💏 महोबतें

अब वो महफिले ना रही, अब वो हुनरबन्ध क़लमकार भी कहा दिखते है जमाने में। सुनते थे कभी जो बुज़ुर्गो से अपने कि लहू बहता था उन महफ़िलो में शायरी से शायरों के।। वो दौर, वो दस्तूर, वो ज़माना, जरूर रहे होंगे, बहता लहू भी जम जाता होगा हुस्न ओ इश्क़ के बाजारों में, वर्ना […]