Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

June 8, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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एक सत्य। (1)

एक 17 वर्षीय अबोध युवक जब रिएबीटेशन सेंटर में भर्ती हो जाता है। एव हर गुजरते लम्हों के साथ उसे उसके जीवन के वह प्रत्येक वाक्य एक एक करके स्मरण होने लगते है। जिनके प्रभाव से उसके जीवन मे एक अचूक परिवर्तन सहज ही आ गए। जिनमे से कुछ परिवर्तन सकरात्मक हो सकते है एव […]

April 9, 2019
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💌 एक इंतज़ार… महोबत। (दास्ताँ श्रुंखला के अंतर्गत प्रथम दास्ताँ)

क़िताब ए महोबत के पाक पन्नों पर दर्द, एक दीवाने का लहू जो अब बरस गया। जख़्मी दिल के ज़ख्मो से तमाम, तेज़ाब कोई जो सरेराह अब बरस गया।। याद आई बिछुड़े महबूब की जब जब अपने, बेदर्द यह ख़ूनी सावन भी तब तब गरजा बेहिंतिया और टूट कर बरस गया। देख कर तड़प एक […]

February 20, 2019
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🌹 सदाबहार काव्य, नज़्म, ग़ज़ल एव शायरी कार्यक्रम।

❤ सदाबहार नज़्म काव्य ग़ज़ल एव शायरी। कवि एव शायर विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित काव्य, नज़्म ग़ज़ल एव शायरी के कार्यक्रम के लिए आज ही आप मुझ से सम्पर्क कर सकते है पता नीचे अंकित है। आगर आप मुशायरे एव कविसम्मेलन के आयोजक है तो आप अभी, मेरे यानी रचनाकार एव कवि, शायर, नज़्मकार ग़ज़लकार, […]

January 22, 2019
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💌एहसास /💌 Feeling’s (Translated)

🙏 नमस्कार प्रिय पाठकों, आज फिर से मैं आपका अपना मित्र विक्रांत राजलीवाल अपने एक अधूरे अति विस्तृत दर्दभरा जीवन के हर रंग को दर्शाता एक पारिवारिक एव प्रेम प्रसंगों से प्रेरित अपने प्रथम नाटक को पुनः पूर्ण करने का प्रयास कर रहा हु। आशा करता हु जल्द ही आप मेरी इस दर्द भरे रोमांटिक, […]

November 19, 2018
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🙏 एक सूचना।

नमस्कार प्रिय पाठकों एव हर दिलाज़िज़ श्रुताओं, मित्रों आ रहा हु इस शक्रवार रात्रि 9:00 बजे Live आपके अपने YouTube चैनल Vikrant Rajliwal पर अपनी एक आगामी अप्रकाशित नवीन काव्य व्यंग्य रचना मंत्री जी के साथ सिर्फ और सिर्फ आपके लिए। कृपया समय से आप सभी प्रियजन आपके अपने यूट्यूब चैनल Vikrant Rajliwal से जुड़ […]

October 19, 2018
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🇮🇳 सत्य है या भृम।

एक लघु नाटक आज की भृष्ट होती जा रही राजनीति पर एक प्रहार कि कोशिश मात्र है। सत्य है या भृम। एक सुबह  एक चाय की एक दुकान पर सुबह की चाय पीते दो व्यक्ति। प्रथम व्यक्ति: राम राम जी महोदय। द्वितीय व्यक्ति : राम राम जी! राम  राम। प्रथम व्यक्ति: आज वातावरण कुछ गर्म […]

October 18, 2018
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भोंड़ा।

आज भोंड़ा को, कुछ धुंधला-धुंधला सा, दिखाई दे रहा  है। पर उसको तो जैसे, दिखना-सुनना ही, बन्द हो गया है। तभी एक हवा के झोखे से, उसकी वो खामोश मूर्छा टूट जाती है। और सुनी नज़रो से अश्रु कि एक बूंद। और उसे फिर से, सब कुछ साफ-साफ दिखने-सुनने लग जाता है। पर अब भी […]