भय मुक्त क्रोना से। / Bhay Mukt Crona Se / #FacebookLive #YouTubeVideo.

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भय मुक्त क्रोना से। /Bhay Mukt Crona Se.
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भय मुक्त क्रोना से। (विक्रांत राजलीवाल)

आओ करे पालन हम लॉक डाउन का, मात दे संक्रमण क्रोना को, पाए जीवन स्वास्थ्य हम अपना, पालन सावधानियों का हम करे।

धोएं हाथ बारम्बार हम अपने, स्वास्थ्य रहे, मस्त रहे, फहराए विजय पताका हम क्रोना पर, योग-ध्यान-प्राणायाम करें।।

स्टेटस क्रोना देख कर ना घबराना, दृढ़ संकल्प, स्वास्थ्य दिनचर्या से जीवन मे अपने आगे हमेशा बढ़ते जाना।

याद रहे देव भूमि भारत के है हम वासी, संस्कारी व्यक्तित्व, अनुशासित दिनचर्या से, मिलकर हमे क्रोना को हराना।।

जीत जाएंगे मार संक्रमण हम क्रोना, शंख-घण्टिया बजा-बजाकर, सात्विक वातावरण करें हम उतपन।

जोश-उमंग जीवन से अपने मिटने ना पाए, हरा क्रोना को हम स्वछता से आगे को बढ़ते जाए, नित्य दिन प्रतिदन।।

हौसला ना टूटने पाए, आस-पास, हम साथ साथ, करे सतर्क एक दूजे को, मिलकर संक्रमण से क्रोना के हमे लड़ना है।

लोकतंत्र के रक्षकों पर हो विशवास, जमखोरी-मारामारी, भय के वातावरण से हमे बचना है।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

26/3/2020 समय प्रातः 8:21 बजे।

💥 सत्य। (विक्रांत राजलीवाल।)

आप अपने दुष्विचारो एव दुर्व्यवहारों के कारण भूतकाल में जो अनमोल समय व्यर्थ बर्बाद कर चुके है उसका आपको एक सकारात्मक एहसास होना अति आवश्यक है एव वर्तमान में सत्य मार्ग को अपनाते हुए स्वम् के जर्जर व्यक्त्वि में सुधार करते हुए वर्तमान समय का सदुपयोग करना एव उस ओर अडिग रहना एक सुधार का मार्ग हो सकता है।

एव उस सुधार के मार्ग मार्ग पर चलते हुए अपने वर्तमान समय का ना चाहते हुए भी सदुपयोग ना कर पाना। अर्थात अपने से उच्च शक्ति के व्यक्त्वि के व्यक्तियों के अविश्वाश के फलस्वरुप उस अनमोल समय का भी अस्तित्व नष्ट हो जाना। एव तदुपरांत स्वम् की संकल्प शक्ति को जाग्रत कर निरंतर सत्य मार्ग की ओर अग्रसर रहते हुए। सुधार के मार्ग पर अग्रसर रहते हुए उन नष्ट हुए अनमोल अवसरों की पुनः प्रप्ति आपकी रिकवरी हो सकती है। जिसको आपने अपनी दृढ़ संकल्प शक्ति के द्वारा समस्त उच्च शक्ति के व्यक्त्वि के व्यक्तियों के विरोध स्वम् की ईमानदारी एव संकल्प शक्ति पर विशवास रखते हुए पुनः प्राप्त किया है।

संकल्प शक्ति एव उसके विकास पर कार्य के द्वारा आप एक वास्तविक चमत्कार कर सकते है। चमत्कार स्वम् की संकल्प शक्ति एव अनुशाशन के प्रयोग द्वारा स्वम् के एक उच्च व्यक्त्वि का निर्माण कर के एव उस उज्ज्वल व्यक्त्वि के द्वारा अन्य जरूरतमन्दों को भी उस दिव्य मार्ग से अवगत करवाना।

इस प्रकार से आप स्वम् के वास्तविक अनुभवों के द्वारा स्वम् की संकल्प शक्ति का निरन्तर विकास करते हुए अपने व्यक्त्वि का एक सकरात्मक विकास कर सकते है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित स्वम् के सत्य अनुभवों से प्रेरित।

प्रथम प्रकाशन 12 जून 2019 1:55 pm

(पुनः प्रकाशित)

कुछ सकरात्मक विषय।/ Some Motivational Rules of life.

हानिकारक आदतों से करें परहेज़, प्रत्येक क्षण, जीवन सजीव जो अनमोल में अपने।

यम एवं नियम को कर स्थापित, आत्मशांति, सुख, समृद्धि में वृद्धि जीवन जो अनमोल मे अपने।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

Some Motivational Rules of Life (translated)

Abstain from harmful habits, every moment, lifelong life which is precious in itself.

Established by doing Death and Rules, increase in self-peace, happiness, prosperity, life which is precious in your own life.

Written by Vikrant Rajliwal.

vikrantrajliwal.com

ब्रह्मांड और मस्तिष्क। (पुनः प्रकाशित)

हमारा यह विशालकाय ब्रह्माण्ड अनेक प्रकार के रहस्यों को अपने में समाय हुए हैं। और इस ब्रह्माण्ड के रहस्य अनेक प्रकार के आचर्यो से परिपूर्ण हैं। उन रहस्यो या आचार्यो कि कलपना भी कोई साधारण मनुष्य मस्तिक्ष नही कर सकता। परन्तु फिर भी कुछ  होनहार मस्तिक्ष उन तमाम अदभुत ब्रह्माण्ड के रहस्यों में से किसी ना किसी रहस्य का से पर्दा उठाने की एक भरपूर कोशिश करते हुए अनेक प्रकार के प्रमाण नित्य नए दिन जग जाहीर करते हैं।

ब्रह्मांड और मस्तिक्ष।

यहाँ मैं हर उस मस्तिक्ष से यह पूछना चाहूंगा कि क्या वह प्रमाण हमेशा सौ प्रतिशत सत्य होते है? कई बार वो प्रमाण सत्य होते हुए भी सत्य प्रतीत नही होते।  साधारण मस्तिक्ष कहे या अपने में व्याकूल मस्तिक जिनकी संख्या अमूमन ज्यादा ही होती हैं। उन्हें वो तथ्य या प्रमाण केवल काल्पनिक ही प्रतीत होते हैं। तो क्या वह मस्तिक्ष पूरी तरह असत्य साबित हो सकते हैं? या उन साधारण से प्रतीत होते हुए मस्तिक्षो की सोच के पीछे कोई असाधारण सोच छुपी हुई है? खैर जो भी हो… कई बार हम सभी ने देखा हैं कि जो प्रमाण किसी सहस्य के उजागर कि दिशा में आज सत्य प्रतीत होते हैं कुछ समय उपरांत कोई अन्य ज्ञानी या असाधारण मस्तिक्ष उस प्रमाण को अपने द्वारा एकत्रित प्रमाणों के द्वारा असत्य सिद्ध  करते हुए एक नए प्रमाण या तथ्यों के साथ जग जाहिर कर देता हैं।

हमारा मस्तिक्ष कई बार अपने तथ्यों को सुलझाये बिना ही परिमाण घोषित कर देता हैं। दरअसल हमारा यह मानव मस्तिक्ष हैं क्या? कही इसमें भी कम्प्यूटर की भांति केवल तथ्यों (data) का केवल संग्रह मात्र ही तो नही?

हमारे इस संसार में कई होनहार और जिज्ञासा से परिपूर्ण मस्तिक्ष मौजूद हैं। परंतु फिर भी अगर कोई ज्ञानी मस्तिक्ष
कोई गलती कर दे तो क्या यह पूरी तरह उसी का दोष होता हैं? आखिर यह गलत जानकारी या असत्य तथ्य उस मस्तिक्ष में आया कहा से? कही यह तो नही कि किसी चालक या भृमित मस्तिक्ष ने यह असत्य तथ्य उस मस्तिक्ष के सॉफ्टवेयर प्रोग्राम में स्थानांतरण या अपलोड कर दिया हो? और खुद सामने आये बिना ही अपना प्रयोग उस मस्तिक्ष के द्वारा कि करे गए असफल प्रयोगों  से खुद के प्रयोग या प्रमाण सत्य सिद्ध कर रहा हो?

खैर जो भी हो! मैं आपसे पूछना चाहूंगा कि अगर कोई दूषित या भृमित मस्तिक्ष आपके सम्मुख आ जाये तो क्या…? किसी न किसी को तो इस दूषित मानव मस्तिक्ष साफ्टवेयर  का तोड़ ढूँढना ही पड़ेगा। पर कैसे ?

दरअसल यह एक दूषित सॉफ्टवेर होते हुए भी एक प्रकार का * हानिकारक वायरस * कि ही भांति हमारे मानव मस्तिक्ष के कार्य प्रणाली को प्रभावित करते हुए उसे नष्ट कर सकता है। परन्तु इस वायरस का भी तोड़ हमारे अपने मानव मस्तिक्ष में ही कहि छुपा हुआ है। जिसे बस एक उचित मार्गदर्शन की आवश्यकता मात्र होती है। यह पूर्णता सत्य है। जी हा आज से ही नही बल्कि अनादि-काल से हमारे अपने मानव मस्तिक्ष के पास ऐसे -ऐसे एंटी वायरस या तोड़ मौजूद है जिंकी कल्पना भी कोई साधारण मानव मस्तिक्ष नही कर सकता।

आज के संदर्भ में अगर हम बात करे तो आज का मानव मस्तिक्ष खुद को कुछ ज्यादा ही तीव्र और तरार * fast * समझने की भूल करता जा रहा हैं। और उन तमाम एंटी-वायरसो को नकारते हुए उन्हें फिजूल का या बेकार का सिद्ध करने पर उतारू होता जा रहा हैं।

क्या आप को ज्ञान है कि आखिर क्या हैं यह एंटी-वायरस? और यह कार्य कैसे करता हैं?

जी इसका जवाब छुपा हैं अधयातम में, जी हा अपने सही ही सुना है अधयातम! अध्यात्म ही एक मात्र ऐसा जरिया हैं जिसके द्वारा हम उन तमाम दूषित मस्तिक्षो के साथ साथ अपने मस्तिक्ष की भी मरम्मत करते हुए उन समस्त दूषित मानव मस्तिक्षो का इलाज अध्यात्म के एंटी-वायरस के द्वारा करते हुए उन्हें सुधारा जा सकता हैं।

फिर भी आज का तेज मस्तिक्ष उन सभी आधात्मिक साफ्टवेयरो को नकारते हुए नित्य नए प्रयोग करता ही जा रहा हैं। कई बार स्थिति अत्यंत ही भयानक रूप धारण कर लेती हैं। और कोइ एंटी वायरस भी फिर उन दूषित मानव मस्तिक्षो के काम नही आ पता। फिर उन तमाम दूषित मानव मस्तिक्षो को उनके दूषित हो चुके साफ्टवेयर को उपचार हेतु  मानव मस्तिक्ष साफ्टवेयर इंजीनियर यानि मानव मस्तिक्ष सुधार गृह *mental hospital* जिस को हम पागलखाने के नाम से भी जानते है उन्हें वहा दाखिल, नाम दर्ज करवाना पड़ता हैं। परन्तु ध्यान रहे कि अक्सर लोग रिपेयर कि हुई हर वस्तु को एक शंखा की नज़रो से देखते आये हैं तो क्या?

मस्तिक्ष की दुनिया भी बड़ी अजीब दुनिया हैं साहब। मेरी नज़रो में वह मानव मस्तिक्ष बड़े ही निराले होते है जो बिना वायरस के या गड़बड़ी होने पर अध्यात्म के एंटी वायरस के डोज से काम चला लेते हैं। और स्वस्थ्य महसूस करते हुए प्रसन्नचित रहते है।

आज कल नित्य नई खोज हो रही हैं। और वो नई खोज नई न होते हुए भी बहुत ही प्राचीन होती हैं अध्यात्म के मार्ग पर। कई बार अपने में कुछ विद्वान् मस्तिक्षो को हम अक्सर कहते सुनते आए है कि यह विषय या यह अधयातम का मार्ग या आध्यात्मिक सॉफ्ट-वेयर बेकार हैं और यह तो महिला मस्तिक्ष का या कायर मस्तिक्षो से सम्बंधित सॉफ्ट वेयर हैं। तो क्या हमें ये बात मन लेनी चाहिए कि महिला मसितक्ष और पुरुष मस्तिक्ष भिन -भिन होते हैं। और उनका सॉफ्टवेयर अलग-अलग ढंग से कार्य करते हैं? या प्रकृति ने उन्हें अलग -अलग ढंग से या अलग अलग विचारो के साथ बनाया हैं। यह तो साधारण मानव मस्तिक्षो कि कोरी कल्पना मात्र हैं साहब।

सदियों से पुरुष मस्तिक्ष ने महिला मस्तिक्ष को अपने से शीर्ण या कम बुद्धि का ही समझा हैं। तो क्या एक मस्तिक्ष केवल लिंग के आधार द्वारा उच्च या निम्न हो सकता हैं?
देखा जाये तो आज पुरुष मस्तिक्ष कुछ हैरान और परेसान सा हैं आखिर क्यों?

सबसे पहले तो मैं यहाँ स्पष्ट कर दु कि कोई भी मानव मस्तिक्ष केवल लिंग के आधार द्वारा उच्च या निम्न कोटि का कदापि नही ही सकता है। अगर कोई ऐसा सोचता है तो यह उस मानव का, उसके दूषित मानव मस्तिक्ष का ही दोष है। मेरे इस कथन के द्वारा हो सकता है कि कई दूषित मानव मस्तिक्षो के मन में एक विचार उतपन हो रहा होगा कि आखिर ऐसा क्यों?

तो जानिए जनाब क्यों की आज महिला मस्तिक्ष ने अपने आपको, अपने असाधारण मस्तिक्ष को इस संसार के हर क्षेत्र में स्थापित कर यह साबित कर के दिखा दीया है कि उनका महिला मस्तिक्ष मानव सॉफ्टवेयर किसी भी प्रकार से किसी भी पुरुष प्रधान मानव मस्तिक्ष सॉफ्टवेयर से शीर्ण या कम बुद्धि नही रखता है।

आज महिलाए नित्य नए इतिहास रच रही हैं। क्यों की अगर कोई गलती होती हैं तो दोष किसी मस्तिक्ष का नही होता बल्कि उस सोच का या उस सॉफ्ट-वेयर का होता हैं जो उसे चलता हैं। दोष उन आकड़ो का होता है जो उसमे जाने अनजाने अपलोड हो जाते हैं या कर दिए जाते है।

आज जिस प्रकार से महिला मस्तिक्ष ने अपने सॉफ्ट-वेयर का इस्तेमाल कर के दिखलाया हैं और जो इतिहास रचे हैं
उससे यह साबित हो गया हैं कि अगर हम अपने मस्तिक्ष का सही इस्तेमाल करे तो हर किसी मस्तिक्ष को अपने मानव मस्तिक्ष के सॉफ्ट-वेयर पर गर्व हो जायेगा।

इसी प्रकार से ब्रह्मांड और मस्तिक्ष के राज भला कोई पूरी तरह से हल कर सका हैं नही दोस्तों अभी तो केवल शुरुआत मात्र ही हैं। आज हमें एक ऐसे मानव मस्तिक्ष  सॉफ्ट-वेयर की अति आवश्यकता हैं जो हम सब कि आने वाली पीढ़ियों को नैतिकता, मानवता और समानता की एक नेक राह पर चला सके।

और उस मानवता से परिपूर्ण साफ्टवेयर या विचारों एवं आदर्शो के ऊपर कोई भी दूषित वायरस अपना कार्य न कर सके। तभी हर एक मस्तिक्ष खुद को स्वस्थ्य और ताज़ा महसूस करते हुए खुद पर गर्व पायेगा। आज की युवा पीढ़ी को चाहिए कि वह भविष्य के लिए ऐसे ही युवा मस्तिक्ष तैयार करे और यह हर एक जिम्मेवार व्यक्ति की ज़िमेदारी हैं मेरे मित्रों।

अगर ऐसा हो पाया तो वह दिन दूर नही जब कोई भी मस्तिक्ष खुद को हिन् और असहाय समझने की भूल नही करेगा। और इस सम्पूर्ण ब्रह्मांड पर केवल सुशासन का एक छत्र राज होगा। आखिर वह दिन कब आएगा!!! कब आएगा… वह दिन ?

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

(पुनः प्रकाशित आपकी अपनी ब्लॉग साइट  vikrantrajliwal.com पर)

🌹 कार्य, अनुभव एवं परिचय। ✍️(https://vikrantrajliwal.com)

नमस्कार मेरा नाम विक्रांत राजलीवाल है। मै हरित विहार बुराड़ी दिल्ली 84 भारत में रहता हूं। और मुझ को नई नई कहानियां, नाटक, सँवाद, किस्से, गीत, ग़ज़ल, नज़म, लिखना अत्यंत ही पसन्द है। और मैं अपने ह्रदय से इच्छुक हु की आपके साथ जुड़ सकूँ। एवं अपनी लेखन कला (कहानियां, सँवाद, नाटक, गीत ग़ज़ल) से कला साहित्य की सेवा कर सकूँ।

वर्ष 2016 मैं मेरी प्रथम पुस्तक एहसास प्रकाशित हुई थी जो कि सामाजिक एवं मानवतावादी भावनाओं से प्रेरित काव्य एवं नज़म के रूप में किस्से एवं कविताएं है।
अभी तक मेने सैकड़ो, नज़म, ग़ज़ल, कविताएं, लेख, ब्लॉग्स एवं

सबसे महत्वपूर्ण मेरी पहली अति रोमांचक कहानी भोंडा। (एक कहानी जो दिल को छू जाए) लिख कर अपनी ब्लॉग साइट https://vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित कर चुका हूं।

साथ ही मैंने कुछ समय पूर्व जिंदगी के हर रंग को दर्शाती हुई एक और कहानी+नाटक को पूर्ण किया है जो अभी तक अप्रकाशित है।
आशा करता हु आप तक मेरी आवाज अवश्य पहुच पाएगी।

आपका सेवक विक्रांत राजलीवाल।

मेरी लेखनी https://vikrantrajliwal.com

💥 एक सेवा। // 💥 A Social Service.

🕊️
🙏 यदि आप गरीब बच्चों, नशे से पीड़ित बच्चों, बीमार बच्चों के साक्षरता, स्वास्थ्य एवं बहेतर जीवन से सम्बंधित समाज कार्य करते है तो आप कभी भी मेरा चेरिटेबल नज़म, ग़ज़म, काव्य एवं शायरी का कार्यक्रम बिल्कुल मुफ्त करवा सकते है। इसके लिए मैं आपको कोई भी राशि नही लूंगा अपितु यकीन मानिए आप के इस नेक कार्य में अपनी रचनात्मक रचनाओं की प्रस्तुति कर मुझे ह्रदय से खुशी होगी।

विक्रांत राजलीवाल।

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🙏 If you work for the society related to literacy, health and better life of poor children, drug addicts, sick children, then you can get my charitable najam, ghazam, poetry and shayari program absolutely free. For this I will not take any amount from you, but believe me, I will be happy from my heart by presenting my creative works in this noble work of yours.

Vikrant Rajliwal.

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🕊️ कुछ अनकहे से एहसास।/ 🕊️ Realize something untold.

मेरे साथ मेरे जीवन संघर्ष में जुड़े हुए आप सभी मित्रजनों का मैं हार्दिक अभिवंदन करता हु।

आज मैं आपसे कुछ यूं ही ऐसे एहसासों को साँझा करना चाहूंगा जिनकी और कभी किसी का ध्यान नही जाता है जैसे जब आप एक अपरिपक्व उम्र में 16 वर्ष में अपने परिवार के मुखिया यानी कि अपने पिताजी से अपने स्वास्थ्य सुधार हेतु सहायता मांगते है फिर कई प्रकार के वेद, हकीमो, एवं हसपताल के इलाज से वह थक हार कर, आपको ऐसी जगह भेजने पर विवश हो जाते है जिसके बारे में सोचते हुए भी सामान्य जन भय से काँपने लगते हैं जैसे (नशा मुक्ति केंद्र) फिर आप वहाँ कई प्रकार के जटिल परिणामों को झेलकर बाहर आते है। एक ऐसी जगह (नशा मुक्ति केंद्र) से बाहर निकलते है जिसके बारे में सोचते हुए भी सामान्य जन काँपने लगते है। और वह भी ऐसे स्थान पर जहाँ अपने पहले किसी को नही देखा होता।

उस अनजान माहौल में एक ऐसे स्थान पर जहाँ आपका कोई भी पूर्व जानने वाला मित्र या परिचित नही होता। वहाँ आपको स्वयं को संभालते हुए, सर्वप्रथम स्वयं के उन अनजाने से एहसासों से झुझते होता है जो आपको प्रत्येक क्षण एक भय का एहसास करवाते है। फिर अपने उस परिवार का सामना करना होता है जिन्होंने किन्ही कारणों से विवश हो कर आपको उस जगह (नशा मुक्ति केंद्र ) में भर्ती करवाना पड़ा। उसके बाद आपको प्रत्येक क्षण उस स्थान का एहसास होता है जहाँ से आप कई प्रकार की असहनीय प्रताड़ना को झेल कर बाहर आए है। तदोपरांत आप को एहसास होता है वास्तविकता का कि इस सब एहसासों के साथ ही आपको अब सम्पूर्ण जीवन व्यतीत करते हुए, इसी एक पहचान के साथ संघर्ष करते हुए, स्वयं को सभ्य समाज में स्थापित करने का एक कठिन प्रयास करते रहना है। जहाँ आप के ऊपर उस समय कोई भी विशवास नही करता या करना चाहता। क्यों कि…?

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

🕊️ Realize something untold. Translated.

लेखक एवं कवि विक्रांत राजलीवाल।

I express my heartfelt appreciation to all of your friends associated with me in my life struggle.

Today I would like to share with you some such experiences which are never taken care of, like when you are 16 years old at the age of 16, when you ask the head of your family, ie your father for help in improving your health, then many types Due to the treatment of Vedas, Hakimo, and Hastapal, he is exhausted and forced to send you to such a place, which even after thinking about it, the common people tremble with fear. Ase (Rehabilitation Center) then you come out Jelkar complex results There are several types. Out of a place (de-addiction center), the ordinary people start trembling while thinking about it. And that too in a place where nobody would have seen anyone before.

In that unknown environment, in a place where none of your former friends or acquaintances are known. There, while handling yourself, first of all you are unaware of those unconscious feelings which make you feel a fear every moment. Then you have to face your family who for some reason forced you to get admitted to that place (de-addiction center). After that each moment you realize the place from where you have come out after facing many kinds of unbearable torture. Then you realize the reality that with all these realizations, you have to keep trying hard to establish yourself in a civilized society, while living your whole life, struggling with this same identity. Where no one believes or wants to do that over you at that time. Why that …?

Written by Vikrant Rajliwal.

मेरी कलम मेरी आवाज़।

यदि अपने से कोई भी नवन्तुक या प्रोफ़ेशनल कवि, शायर, ग़ज़लकार, व्यंग्यकार, कहानीकार, नाटककार मित्र जो अपनी रचनाओं के साथ समूह के प्रोजेक्ट्स पर भी परफॉर्मेंस प्रदान कर सकते है


एवं सबसे अहम जो एक टीम एक साहितीयिक परिवार के रूप में मेरे साथ कार्य करना करने के इच्छुक है तो अभी व्हाट्सअप नम्बर। 91+9354948135 पर मुझ से सम्पर्क कीजिए।

आपका मित्र एक रचनाकर, कवि, शायर, नज़्मकार, ग़ज़लकार, व्यंग्यकार, नाटककार एवं कहानीकार विक्रांत राजलीवाल।

🇮🇳 एक भारतीय। 🇮🇳 An Indian.

जिस सरकार में अपने प्रान्त एवं देश के गरीब जनता के प्रति संवेदनशीलता ना हो। एवं जो विपक्ष सरकार के हर फैसले का बिना किसी जांच पड़ताल के विरोध करें।

जो सरकार स्वयं को प्राचीनकालीन राज व्यवस्था के समान स्वयं को सर्वशक्तिमान समझते हुए 10 गुनहगारों के साथ 1 निर्दोष को कुचलने में कोई अनैतिकता नही मानती।

एवं जो विपक्ष निरंकुश तानाशाह को सत्ताधारियों के विकास की आड़ में क्रूर कदमो का विरोध नही करते।

वहाँ की धरती निर्दोषों एवं बेगुनाहों के अकारण शोषण से बंजर हो अपना अस्तित्व ही खो देगी।

विक्रांत राजलीवाल।

🇮🇳 An Indian. (Translated)

Government in which there is no sensitivity towards the poor people of our province and country. And those who oppose every decision of the opposition government without any investigation.

The government, which considers itself as almighty like the ancient royal system, does not consider it immoral to crush 1 innocent with 10 criminals.

And those who do not oppose the brutal steps of the opposition to the autocratic dictator under the cover of the development of the rulers.

The land there will be barren due to unprovoked exploitation of innocents and innocents will lose its existence.

Vikrant Rajliwal.

Author Vikrant Rajliwal (Poet, dramatist and novelist)