एक आभार। 🙏

वर्ष 2008 में, जीवन एक दम से बदल गया। अचानक ही मुझ को, जब पता चला कि इस बार जो मेरे हाथों में किताब है। वह वास्तविक रूप से सत्य है। एवं मैने परीक्षा की तैयारी, प्रारम्भ कर दी। अब मैं पूर्व की अपेक्षा, स्वयं को अधिक सन्तुष्ट, महसूस कर पा रहा था। आज लगभग 6 वर्षो के गेप के उपरांत, मेरे हाथों में एक बार पुनः सरस्वति विराजमान थी। जो मुझ से कह रही थी कि यही अवसर है पुत्र, स्वयँ के अज्ञान को दूर करते हुए। ग्रेजुएट साक्षरता को प्राप्त करने का।

उस समय मैं शायद अपनी उन भावनाओं से कुछ अनजान था। एवं आज लगभग 11 वर्षो के उपरांत दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट होने के उपरांत, एवं निरन्तर सक्रिय रहते हुए मुझ को, जो साहित्यिक रचनाओँ को रचने का एक अवसर, एक वरदान स्वररूप प्राप्त हुआ है। मैं चाह कर भी, अपनी इस भावना को, शायद व्यक्त ना कर सकूँ।

मैं यानी कि आपका अपना मित्र विक्रांत राजलीवाल, माँ सरस्वती समेत आपने इष्ट देवताओं एवं आप आप सभी प्रशंशको का हार्दिक आभार व्यक्त करता हु।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

3 नवम्बर वर्ष 2019 समय प्रातः 9:27 बजे।

Advertisements

एक सत्य।

अपने भूतकाल में क्या क्या कुकर्म किए थे! यह इस संसार के लिए इतना अधिक महत्व नही रखता, जितना कि आपके वर्तमान काल मे किए गए सत्यकर्म।

इसीलिए अपने भूतकाल की अज्ञानता को स्वीकारते हुए, जो मनुष्य अपने वर्तमान काल मे अपनी इंद्रियों को जागृत करते हुए, सत्यकर्म करते है वह वास्तविकता में प्रेम एवं सहानुभूति के पात्र होते है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखीत।

3 नवम्बर वर्ष 2019 समय प्रातः 7:48 बजे

एक टिस। // A Pain.

आज बहुत से व्यक्ति मेरे प्रति यही सोचते है कि मैं अपने जीवन उदेश्यों में असफल हो चुका हूं। अपने जीवन मे हार चुका हूं। यदि वह आज ऐसा कहते या सोचते है तो इसके पीछे भी कोई ना कोई कारण भी अवश्य ही होगा? परन्तु उन कारणों की वास्तविकता क्या है और क्यों है? ऐसे जानने कि किसी भी व्यक्ति की कभी भी कोई रुचि ना होगी। यदि आज कोई मुझ को असफल या हारा हुआ कहते हुए मुझ को तोड़ने का प्रयत्न करते हुए तोड़ देता है? तो क्या, मैं उन्हें अपने जीवन को संकट में डालने का दोषी सिद्ध करते हुए स्वयँ के संघर्ष को धुत्कार दु!

नही! मैं ऐसा नही कर सकता हु। परंतु आज वर्षो के संघर्ष के उपरांत मुझ को एहसास होता है कि जीव ने जीवन को अपने स्वयँ ही सँवारा है स्वयँ ही बिगाड़ा है, स्वयं ही बिगाड़ा है, हा स्वयं ही बिगाड़ा है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
24/10/2019 at 9:10 am

A Pain.

Today many people think towards me that I have failed in my life objectives. I have lost in my life. If he says or thinks so today, there must be some reason behind it too? But what is the reality of those reasons and why? Knowing that no person will ever have any interest. If today someone breaks me while trying to break me by calling me a failure or a loser? So what, while proving them guilty of putting their lives in jeopardy, I despise my own struggle!

no! I can not do this But today, after years of struggle, I realize that the creature has spoiled life on its own, has spoiled itself, has spoiled itself, and has spoiled itself.

Written by Vikrant Rajliwal.
24/10/2019 at 9:10 am

💥 कर्म एवं कर्मफल। / 💥 Karma And Karma.

यदि आप स्वयं में सकरात्मक बदलाव उतपन्न करते हुए अपने जीवन में आत्मशांति का अनुभव प्राप्त करना चाहते है, तो आज और अभी से किसी भी एक महान व्यक्त्वि के व्यक्ति के जीवन अनुशाशन, एवं विचारों का अनुसरण करना प्रारंभ कर दीजिए।

इस प्रकार से आप पाएंगे कि कुछ समय के उपरांत आप नकल से असल को प्राप्त हो जाएंगे। क्योंकि मात्र सोचने से हम मनुष्यों के जीवन मे कोई भी सकरात्मक बदलाव उतपन्न नही हो सकेगा। इसके लिये हमें सकरात्मकता का अनुसरण करते हुए नकल से असल तक पहुचना ही पड़ेगा।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
23 अक्टूबर, 2019 समय 10:57 am

💥 Karma And Karma. (Translated)

If you want to get a sense of self-peace in your life by creating a positive change in yourself, then start following the life, discipline and thoughts of any one great person today and now.

In this way you will find that after some time you will get the real one by copying. Because just thinking, we will not be able to create any positive change in our human life. For this, following the positiveness, we have to reach from imitation to the real.

Thank you.

Written by Vikrant Rajliwal.

23 October, 2019 time 10:57 am

कृपया अपने जीवन मूल्यों को पहचानिए। / Know The Value Of You Life.

नमस्कार प्रियजनों, वैसे तो मुझ को अपनी और आप सब की अपनी इस ब्लॉग साइट पर ही अपने विचारों को अपनी लेखनी के माध्यम द्वारा प्रस्तुत करना अधिक शांति प्रदान करवाता है। परन्तु कभी कभी आप भावुक हो कर अपनी भावनाओं बह जाते है। ऐसे ही बीते कुछ समय के दौरान मैंने अपने फेसबुक पेज के प्रिय फॉलोवर्स के लिए कुछ समाजिक एवं रचनात्मक विषय को पोस्ट के माध्यम द्वारा साँझा किया था। जिन्हें फेसबुक ने एक ही क्षण में डिलीट कर दिया। अभी तक मैं अपने फेसबुक पेज़ पर अपने माता एवं पिता की महेनत की कमाई के लगभग 15,000 हज़ार खर्ज कर चुका हूं। एवं कुछ महीने पूर्व फ़ेसबुक ने मुझ को 700 ₹ का टोकन दिया था। अपने फेसबुक पेज को प्रमोट करने हेतु। परन्तु जब मैने उसका इस्तेमाल किया तो मेरे पिताजी के बैंक खाते से 10000 हज़ार रुपए चोरी हो गए। खैर, आज मैं, अपनी इन ग़लतियो से सिख लेते हुए, अपनी उन्ही समाजिक एवं रचनात्मक विषयो को आपकी इस ब्लॉग साइट पर साँझा कर रहा हु।

Translated.

Hello dear ones, by the way, it gives me more peace to present my thoughts on your blog site through your stylus. But sometimes you get emotional and your feelings get carried away. During the same time, I had shared some social and creative topics through posts for the dear followers of my Facebook page. Which Facebook deleted in an instant. So far, I have spent about 15,000 thousand rupees on my Facebook page and the income of my mother and father. And a few months ago Facebook gave me a token of 700 ₹. To promote your Facebook page. But when I used it, 10,000 rupees were stolen from my father’s bank account. Well, today, while learning from these mistakes, I am sharing my same social and creative subjects on this blog site.

आज का विचार।

आप केवल सत्यकर्म कर सकते है परन्तु आपके द्वारा किए गए प्रत्येक सत्यकर्मो के प्रतिफल आपको सत्यकर्मी व्यक्त्वि के व्यक्तियों द्वारा सहज ही आशीष प्राप्त होगा एवं कुकर्मि व्यक्ति के व्यक्तियों द्वारा रचित छल, कपट एवं दुर्व्यवहारों से आपका प्रत्यक्ष सामना होगा सहज ही है।

एवं यहाँ आपके सत्यकर्म एवं आपका दृढ़ साहस ही आपको इस संसार के समस्त कुकर्मियों से सुरक्षा प्रदान करते हुए, आपके प्रत्येक सत्यकर्मो से आपके दिव्य व्यक्त्वि में एक ऐसी दिव्य शक्ति एवं ऊर्जा उतपन करेगा, जिसके समक्ष कोई भी कुकर्मी क्षण भी ठहर नही सकेगा एवं निच्छित ही वह अपने पतन को प्राप्त होंगे।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

18 अक्टूबर वर्ष 2019 समय प्रातः 9:17 बजे। (फेसबुक पर)

आज ही आपकी अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com से जुड़ जाए एवं YouTube चैनल Voice Of Vikrant Rajliwal को सब्सक्राइब करे।

यूआरएल है https://www.youtube.com/channel/UCs02SBNIYobdmY6Jeq0n73A

Today’s thought. (Translated)

You can only do Satyakarma but the reward for every Satyakarma you have done will be blessed by the people of the person of Satyakarm and you will be directly confronted with the deceit, deception and misconduct by the persons of Kukarmi (evil-doer).

And here only your Satyakarma and your steadfast courage will inculcate in your divine person a divine power and energy from each of your Satyakarma, giving you protection from all the misdeeds of this world, In front of which no evil-doer can stop even for a moment and he will surely achieve his downfall.

Written by Vikrant Rajliwal.

October 18, 2019 at 9:33 am (On Facebook)

Join your own blog site vikrantrajliwal.com today and subscribe to the YouTube channel Voice of Vikrant Rajliwal.

The URL is https://www.youtube.com/channel/UCs02SBNIYobdmY6Jeq0n73A

यदि आप हानिकारक व्यसनों से मुक्त होना चाहते है! तो स्वयं के प्रति एक विशवास उतपन कीजिए। एक दृढ़ संकल्प के साथ, एक स्वास्थ्य जीवन शैली को अपनाइए। अपने जीवन से प्रत्येक हानिकारक भोज (हानिकारक खाद्य प्रदार्थ, नशीले खाद्य प्रदार्थ) का त्याग कीजिए। शुद्ध विचारो को धारण कीजिए। एवं उनका पालन कीजिए। अपने धर्म को, यहाँ अपने धर्म से तत्प्रय है कि जिस धर्म या सम्प्रदाय को आपकी अंतरात्मा के द्वारा स्वीकार किया गया है। उस अपने धर्म के साथ अध्यात्म, योग एवं प्राकृतिक व्यायाम से भी जुड़ने का प्रयत्न कीजिए। एवं सबसे महत्वपूर्ण हर विपरीत परिस्थितियों में भी अपने आदर्शो के साथ ईमानदार रहिए।

जब उपरोक्त विषयों का आप अपने स्वास्थ्य जीवन शैली में पालन करते हुए उनका ईमानदारी से निर्वाह करना प्रारम्भ कर देंगे तब आपका जीवन स्वयँ ही सकरात्मक बदलाव के साथ परिवर्तित होते हुए दिव्यता से महक उठेगा।

क्योंकि इसके सिवाय और कोई भी मार्ग उपको शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य प्रदान नही कर सकेगा! यह मैं स्वयं के निजी अनुभवो के द्वारा प्राप्त एक स्वास्थ्य एवं निर्णयक जीवन शैली की प्राप्ति के उपरांत उपरोक्त विषय लिख या कह रहा हु।

मैं वर्ष 2003 या 04 से कई प्रकार के उतार चढ़ावों से गुजरने के उपरांत। बीते दो वर्षों से पूर्णतः किसी भी प्रकार के हानिकारक व्यसन के सेवन से मुक्त एक स्वास्थ्य जीवन जी रहा हु। क्यों कि जब आप के समीप स्वयं के मानसिक एवं शारिरिक विकास के लिए स्वतंत्रता होती है। एवं आप को उसका महत्व ज्ञात होता है। तो आपके जीवन मे एक सकरात्मक परिवर्तन सहज ही उतपन्न हो जाता है। आज मैं व्यायाम करता हु। अध्ययन करता हु। एवं बीते 26 महीनों और 6 दिनों से सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार के हानिकारक व्यसन से मुक्त सक्रिय भी हु। मैंने इस दौरान सैकड़ो रचनाए, काव्य, कविताएं, नज़म ग़ज़ल,गीत, व्यंग्य , एवं सामाजिक, आद्यात्मिक एवं मनोवैज्ञानिक लेखों को लिखा एव प्रकाशित किया एवं अपनी अति विस्तृत नज़म दस्तानों को भी अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित किया। इसी दौरान मैने अपना प्रथम लघु उपन्यास भोंडा। (एक कहानी जो दिल को छू जाए) को लिखा एवं कुछ दिन पूर्व ही अपनी ब्लॉग साइट पर प्रकाशित भी किया है। इसके साथ हु अपने यूट्यूब चैनल Voice Of Vikrant Rajliwal पर बहुत सी अपनी रचनाओं एवं दास्तानों की रिकार्डिन भी करि है।

यह सब कुछ उन्ही उपरोक्त विषय का दृढ़तापूर्वक पालन करने से ही सम्भव हो सका है।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

आज ही जुड़िए आपकी अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com से।

🇮🇳 वास्तविक स्वतंत्रता।

क्रूर, तानाशाह एवं अत्याचारी व्यवस्था से स्वतँत्रता प्राप्ति हेतु आपको सत्याग्रह के साथ आक्रामक हथियारों से भी शश्क्त होना पड़ता है।

एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंतर्गत जब आपका सामना, भृष्टाचारी संस्थाओ, क्रूर तानाशाह, एवं अत्याचारी व्यक्तित्व के व्यक्तियों के साथ, उनके द्वारा स्थापित उनके मकड़जाल से होता है और आप स्वयँ को उसमे सम्पुर्ण रूप से फंसा हुआ पाते है। तब उन से मुक्ति हेतु आपको सत्यकर्मो, अनुशाशन, के साथ अपने अधिकारों का ज्ञान भी अति आवश्यक है। यह ज्ञान आपको उचित शिक्षा की प्राप्ति के उपरांत सहज ही प्राप्त हो जाता है। इस भृष्ट मकड़जाल को तोड़ना सहज नही। परन्तु आप स्वयँ को दृढ़ आत्मविश्वास के साथ सत्यकर्मो एवं निस्वार्थ कर्मो के द्वारा ईमानदारी से इस दिव्य मार्ग पर अड़िग रख कर उस मकड़जाल से मुक्त हो जाएंगे।

यहाँ सबसे महत्वपूर्ण विषय यह है कि क्या आप वास्तविक रूप से एक उज्वल स्वतंत्र व्यक्तित्व की प्राप्ति के लिए प्रयासरत है या नही?

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

13 अक्टूबर प्रातः 8:19 बजे फेसबुक पर।

आज ही जुड़िए आपकी अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com से।

💥 चक्रव्यूह।

कर्मो की कर्मगति एवं विचारों के प्रभावों द्वारा रचित चक्रव्यूह के मध्य, ज्ञान एवं अज्ञान की, अत्यंत ही शुष्म परत होती है। प्रथम एवं एकमात्र स्थान ज्ञान को प्राप्त है। ज्ञान जो सत्य के स्वीकार स्वरूप सहज ही प्राप्त होता है। जिसके प्रभाव से हम चक्रव्यूह के मध्य होते हुए भी, उन्नति को प्राप्त हो जाते है। इस एक विषय को छोड़ कर, समस्त विषय अज्ञानता के सूचक होते है।

जिसके परिणामस्वरूप अज्ञानी व्यक्ति सुसंगत एवं उन्नतिपूर्ण वातावरण के मध्य होते हुए भी, ज्ञान एवं अज्ञान के मध्य उस शुष्म परत के अपरिचित होते हुए, स्वयं के अज्ञान एवं उस अज्ञान के परिणामस्वरूप, अपने कुकर्मो की कर्मगति के द्वारा रचित, विनाश के चक्रव्यूह के मध्य फंस कर, अकस्मात ही अपने पतन को प्राप्त हो जाते है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

आज ही जुड़िए आपकी अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com से।

💥 Trap Chakaravyuh (Translated)

In the middle of the chakravyuh composed by the effects of the actions and thoughts of karma, there is a very soft layer of knowledge and ignorance. Knowledge is the first and only place. Knowledge that is accepted in the form of truth is easily attained. Due to which we get progress despite being in the middle of Chakravyuh. Except this one subject, all subjects are indicative of ignorance.

As a result, the ignorant person, despite being in the middle of a coherent and prosperous environment, being unfamiliar with that sushma layer between knowledge and ignorance, as a result of his ignorance and that ignorance, composed by the deeds of his kukarmo, stuck between the cycle of destruction.

Constructed by the deeds of his kukarmo, he suddenly gets his downfall, trapped in the middle of the cycle of destruction.

Written by Vikrant Rajliwal.
Join your own blog site vikrantrajliwal.com today.

आज का विचार। रचनात्मक एवं जीवन अनुभव लेखन लेखनी या कलात्मक क्रिया सम्बंधित कला, कोई प्रतियोगिता या प्रतिस्पर्धा की विषय वस्तु नही है। अपितु रचनात्मक या जीवन अनुभव लेखन लेखनी, या कलात्मक क्रिया सम्बंधित कला, स्वयं को अत्यंत ही समीप से जानने एवं समझने का एक सत्य अनुभव है। इसीलिए जब आप स्वयँ को विजयता घोषित करने हेतु या अपनी कला से अन्य जनो की कला को पछाड़ने के लिए, अपनी कला का प्रदर्शन करते है, तो आप अध्यात्म एवं प्राकृतिक एहसासो से विमुख होते हुए, एक अनचाहे चक्रव्यूह में अंजाने ही फंस कर अपने दिव्य ईष्वरीय प्राकृतिक एहसासों को सहज ही खो देते है। धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

आज ही जुड़े आपकी अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com से। (21 अक्टूबर 2019 समय प्रातः 7:24 बजे इंस्टाग्राम)

आज का विचार एवं परामर्श। 😇 स्वयं को आवश्यकता से अधिक चतुर समझना, आपको इस भरे संसार में एक दिन एक दम से तन्हा एवं बर्बाद कर देगा। क्योंकि यह बिल्कुल वैसा ही जैसे कि आप स्वयं जिस डाल के सहारे बैठे हुए है उसी डाल को आप स्वयं की काट डाले। इसीलिए दुसरो को दोषी ठहराने से पूर्व स्वयं के गिरेबाँ में भी एक बार अवश्य आप झांक कर देखे कि कही आप स्वयं भी तो दोषी नही है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

आज ही जुड़े आपकी अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com से।

Today’s thoughts and advice. (Translated) Thinking yourself smarter than necessary, will single-handedly ruin you one day in this stuffy world. Because it is exactly the same as the one on which you are sitting on your own, you cut the same piece yourself. That is why, before convicting others, you must also peep once in your fall that you are guilty at all yourself.

Written by Vikrant Rajliwal.

Linked to your own blog site vikrantrajliwal.com today.

शायर!

जी हा मैं शायर हु और शायरी भी करता हु मियां। आज कल मैंने लिखना भी शुरू किया है और शायरी को सुनना भी! जी क्या कहा आपने शायरी शेरों का नही कायरों का काम है! टूट कर बिखर जाएंगे। मियां हम ही शेर है एक यहाँ, बाकी सब तो ढेर है सिर्फ यहा। शेर ए शायरी से शेर पे शेर कहने की हिम्मत रखते है मियां। अभी फ़िलहाल हमें फुर्सत नही, आपको फिर किसी और रोज़ पाठ हम ही पढ़ाएंगे मियां।

राम राखा

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

आज ही जुड़े मेरी साइट vikrantrajliwal.com से।

💥 एक कटु सत्य। यदि एक बकरी को एक खूंखार शेर के समीप बांध दिया जाए एवं उसको पोष्टिक से पोष्टिक आहार भी दिया जाए। तो भी वह शारिरिक एवं मानसिक रूप से जर्जर होते हुए, बीमारी को प्राप्त हो जाएगी। ऐसे ही यदि आपके परिवार में कोई नशे का सेवन करता है तो उसका नकारात्मक प्रभाव आपके चेतन एवं अचेतन मस्तिक्ष पर अवश्य ही होगा। जिससे प्रभाव से आप भी बीमार हो अपने पतन को अवश्य ही प्राप्त हो जाएंगे। कृपया ध्यान दीजिए। प्रथम उदाहरण में बकरी एक जानवर है एवं वह हम मनुष्य के समान बुद्धिमान नही है। इसीलिए उसको उस विषय का ज्ञान समझाने पर भी ज्ञात नही हो पाएगा कि शेर का अपना एक स्थान है एवं वह उस दायरे तक सीमित है। और आपका अपना एक सुरक्षित दायरा है आप उसमे निचिंत हो जाए।

द्वितीय उदाहरण में हम मनुष्यो में मनुष्य यानी कि वह मनुष्य जिन्हें ईष्वर की कृप्या प्राप्त है वह एक उचित मार्गदर्शन के द्वारा इस ज्ञान को समझ एवं अपने जीवन मे पूर्णतः ढाल पाते है कि आपके परिवार में जो मनुष्य नशा कर रहा है वह उसका जीवन है एवं उसका अपना एक उचित दायरा है यदि आप स्वयं ना चाहे तो वह आप तक कदापि नही पहुच सकता है। पुनः इस विषय पर प्रकाश डालता हु की हम मनुष्य है जानवर नही। यहाँ हम स्वयं से अधिक उस परिवार के सदस्य या मित्र के लिए चिंतित हो जाएंगे। और मनुष्यो में मनुष्य यानी कि वह मनुष्य जिन्हें ईष्वर की कृप्या प्राप्त है। एक कदम आगे को बढ़ते हुए परिवार के उस नशेबाज सदस्य या मित्र जो कि वास्तविक रूप से एक बीमार व्यक्ति है को एक उचित मार्गदर्श, जिसे हम काउंसलिग भी कहते है, एक अनुभवी एवं ज्ञानी व्यक्ति के द्वारा अवश्य उपलब्ध करवाएंगे। जिससे उस परिवार के सदस्य या मित्र के जीवन मे भी एक प्रकाश उत्पन्न हो सकें।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

आज ही फॉलो करें एवं जुड़ जाए आपकी अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com से।

💥 A harsh truth. (Translated) If a goat is tied near a ferocious lion and a nutritious nutritious diet should also be given to it. Even then, while being physically and mentally disreputable, the disease will be acquired. In the same way, if someone in your family consumes intoxication, then it will definitely have a negative effect on your conscious and unconscious mind. Because of which you are also sick with the effect, your fall will definitely be achieved. Please Note. In the first instance the goat is an animal and he is not as intelligent as we humans. Therefore, even after explaining the knowledge of the subject to him, he will not be able to know that the lion has a place of its own and it is limited to that realm. And you have a safe circle of your own. In the second example, we humans in humans, ie the man who is blessed by God, through proper guidance, understand this knowledge and fully mold it in his life that the person who is intoxicated in his family is his life and He has a reasonable scope of his own, if you do not want to do it yourself, then he cannot reach you. Again, we throw light on the subject that we are humans and not animals. Here we will become more concerned about that family member or friend than ourselves. And humans in humans, that is, humans who have the grace of God. Going a step ahead, an intoxicated member or friend of the family, who is actually a sick person, must provide a suitable guide, also known as counseling, by an experienced and knowledgeable person. So that a light can arise in the life of that family member or friend.

Thank you.

Written by Vikrant Rajliwal.

Follow today and get connected to your own blog site vikrantrajliwal.com.

धन्यवाद।

यह वह समजिक एवं रचनात्मक विषय थे जिन्हें मैंने फेसबुक पर अपने कुछ फॉलोवर्स के लिए लिखा था एवं जिन्हें फेसबुक ने मात्र कुछ ही क्षणों में डिलीट कर दिया।

एक चोटिल एहसास। // A Hurt Feeling.

🙏🇮🇳 आज मैं यानी कि आपका मित्र एक साधारण से परिवार का भारतीय बालक स्वयँ के कुछ एहसासों को आप सभी प्रियजनो के साथ साँझा करने जा रहा हु। इस संसार मे प्रत्येक व्यक्ति का समय अत्यंत ही मूल्यवान होता है चाहे वह कोई सेलिब्रिटी हो या मेरे जैसा एक साधारण सा लेखक। और जब कोई आपके समय के मूल्य को अनदेखा करते हुए, आपके सामाजिक एवं रचनात्मक कार्यो पर अनैतिक प्रशन चिन्ह लगाने का प्रयत्न करें तो, उससे हमारे ह्रदय को अत्यंत चोट पहुचती है। ऐसे ही कुछ संवेदनशील विषय को मैं निमोक्त बताने का एक प्रयत्न करूँगा।

Today I mean that your friend is going to share some of his own feelings with an ordinary Indian boy. Every person’s time in this world is extremely valuable whether it is a celebrity or a simple writer like me. And when someone tries to put an unethical question mark on your social and creative works, ignoring the value of your time, it hurts our heart immensely. I will make an effort to declare some sensitive subject like this.

ShameOnYouFacebook

मेरी इन समाजिक पोस्ट के समान ही बहुत सी पोस्ट्स को फेसबुक ने डिलीट किया है। आखिर मेरी इन पोस्ट्स में क्या अनैतिक विषय वस्तु है? अभी तक मैं अपने माता पिता के मेहनत की कमाई के 15,000 रु से अधिक इस फ़ेसबुक पेज पर खर्ज कर चुका हूं। और अब जब मैने भुतकाल से शिक्षा प्राप्त करते हुए, इस फेसबुक पेज़ पर पैसा लगाना बन्द कर दिया है तो फ़ेसबुक मेरी सामाजिक पोस्ट्स को डिलीट एवं पेज़ के फंक्शन्स पर रोक लगा रहा है।

Shame on you Facebook. Like my social posts, Facebook has deleted many posts. After all what is the unethical content in my posts? So far, I have spent more than Rs 15,000 of my parents’ hard earned money on this Facebook page. And now that I have stopped spending money on this Facebook page while getting education from the past, Facebook is deleting my social posts and prohibiting page functions.

Shame on you Facebook.

मुझे एवं मेरे जैसे बहुत से लेखकों एवं पाठको को फेसबुक से बहुत सी समस्या है। इसीलिए मैंने अपनी वेबसाइट बनाई थी। जहाँ मैं अपनी लेखनी के माध्यम द्वारा अपने पाठकों से जुड़ सको।

यदि फेसबुक ऐसा ही अनैतिक व्यवहार करता रहा तो मुझ को अपना फेसबुक अकाउंट निष्क्रिय करना ही होगा।

मेरी जिन सामाजिक पोस्ट्स को फेसबुक अनैतिक कह कर उन्हें डिलीट किया है उन्हें मैं यानी कि विक्रांत राजलीवाल अब अपनी स्वयं की वेबसाइट पर प्रकाशित करूँगा।

मैं कोई करोड़पति नही की हर महीने हज़ारो रुपए बेमतलब ही फेसबुक पेज़ पर खर्ज कर सकूँ। इसीलिए फेसबुक के इस अनैतिक व्यवहार से मैं अत्यंत ही आहात हुआ हूं।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

फेसबुक लिंक
https://www.facebook.com/vikrantrajliwal85/
Shame On You Facebook

I and many writers and readers like me have a lot of problems with Facebook. That’s why I created my website. Where I can connect with my readers through my writing.

If Facebook continues to behave like this, then I have to deactivate my Facebook account.

My social posts, which have been deleted by Facebook as unethical, I will publish them on my own website, ie Vikrant Rajliwal.

I am not a millionaire, I can spend hundreds of thousands of rupees on a Facebook page every month. That is why I am extremely shocked by this unethical behavior of Facebook.

Thank you.

Written by Vikrant Rajliwal.

Facebook link👇👇👇👇
https://www.facebook.com/vikrantrajliwal85/
Shame On You Facebook🖕🖕🖕

🌹 Book A Nazam Dastan’s And Poetry program By Vikrant Rajliwal.

कवि, शायर एवं उपन्यासकार श्री विक्रांत राजलीवाल।

Book A Nazam Dastans And Poetry program By Vikrant Rajliwal

श्री विक्रांत राजलीवाल के रोमानी स्वरों के साथ उनके द्वारा लिखित उनकी सैकड़ो नज़म, ग़ज़ल, काव्य, कविताएं एवं बहुत सी सदाबहार विस्तृत अत्यधिक दर्दभरी मोहब्ब्त की नज़म दास्तानो के साथ एक कामयाब कार्यक्रम करवाने के लिए, आप आज ही निम्लिखित मोबाईल नंबर पर सम्पर्क करें। व्हाट्सएप नंबर है 91+9354948135.

To get a Nazam, poetry Show with Vikrant Rajliwal’s romantic voice written by him with hundreds of nazams, ghazals, poems and detailed emotional love nazm dastans, you can contact the following mobile numbers and contacts today. Whatsapp no is 91+ 9354948135

🙏 आज ही जुड़िए आपकी अपनी ब्लॉग साइट https://vikrantrajliwal.com से।

विक्रांत राजलीवाल एक लघु परिचय।

अ) काव्य पुस्तक एहसास : अत्यधिक संवेदनशील काव्य पुस्तक एहसास, जिसका केंद्र बिंदु हम सब के असंवेदनशील होते जा रहे सभ्य समाज पर अपनी काव्य और कविताओं के द्वारा एक प्रहार की कोशिश मात्र है।

Sanyog (संयोग) प्रकाशन घर शहादरा द्वारा प्रकाशित एव ए वन मुद्रक द्वरा प्रिंटिड। प्रकाशन वर्ष जनवरी 2016. प्रकाशित मूल्य 250:00₹ मात्र।

आ) नज़म दास्ताने:: विक्रांत राजलीवाल जी के द्वारा लिखी एवं उनकी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित करि गई, अत्यधिक दर्दभरी विस्तृत नज़म दास्तानो का जल्द ही एक संग्रह पुस्तक के रूप में आप सभी प्रियजनों को एक भरी भेंट स्वरूप प्रदान कर दी जाएगी। उनकी दर्दभरी नज़म दस्तानों के नाम इस प्रकार से है। कि जैसे अ) एक इंतज़ार… मोहब्ब्त। आ) पहली नज़र। इ) बेगुनाह मोहब्ब्त। ई) एक दीवाना। उ) मासूम मोहब्ब्त। ऊ) सितमगर हसीना। ए) अक्सर सोचता हूं तन्हा अंधेरी रातो में। ऐ) एक खेल जिंदगी। ओ) धुंधलाता अक्स। इत्यादि। इनमें से कुछ की रिकॉर्डिड वीडियो लिंक इस प्रकार है। 1) एक इंतज़ार…मोहब्ब्त। https://youtu.be/aOBlMrmejqk 2) पहली नज़र। https://youtu.be/A_5bLVHS9yo 3) सितमगर हसीना। https://youtu.be/F8TKFt7G4Us 4) अक्सर सोचता हूं तन्हा अंधेरी रातो में कि… https://youtu.be/ElipaWVQOrw 5) धुंधलाता अक्स। https://youtu.be/_tKFIu1onQw 6) एक खेल जिंदगी। https://youtu.be/02TpemeSFsA इत्यादि।

आशा करता हु आपको पसन्द आए।

इ) नज़म, ग़ज़ल और शायरी:: वर्ष 2016-17 से अब तक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित कई सैकड़ो दर्दभरी नज़म, ग़ज़ल एवं सैकड़ो शायरी। को उन्होंने अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर एवं कुछ को अन्य सोशल मीडिया के समूह में प्रकाशित किया है। जिनका एक संग्रह पुस्तक के रूप में आप सभी प्रियजनो को एक प्रेमभरी भेंट स्वररूप प्रदान कर दिया जाएगा। आशा करता हु आपको पसंद आए। विक्रांत राजलीवाल। उनकी बहुत से रिकॉर्डिड नज़म, ग़ज़ल एव गीतों को आप उनके YouToube चैनल Voice Of Vikrant Rajliwal पर कर उनकी रचनाओं को स्वयं उनकी आवाज़ के साथ देख और सुन कर लुफ्त प्राप्त कर सकते है। उनके चैनल का यूआरएल पता है। https://www.youtube.com/channel/UCs02SBNIYobdmY6Jeq0n73A आशा करता हु आपको पसंद आए।

ई) ह्रदय स्पर्शी काव्य कविताए:: जनवरी 2016 में अपनी प्रथम काव्य कविताओं की पुस्तक “एहसास” के संयोग प्रकाशन(sanyog publication) के द्वारा प्रकाशन के उपरांत। अक्टूबर 2016 से अब तक बहुत सी ह्रदय स्पर्शी काव्य एवं कविताओं की रचना करि तदोपरांत उन्हें अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित किया। उनमे से कुछ काव्य कविताओं की रिकॉर्डिड वीडियो आप उनके YouTube चैनल Voice Of Vikrant Rajliwal पर देख एवं सुन कर उनके काव्य-कविताओं का आनन्द प्राप्त कर सकते है। उनके चैनल का लिंक है। https://www.youtube.com/channel/UCs02SBNIYobdmY6Jeq0n73A आशा करता हु आपको पसंद आए।

उ)”मसखरे”:: “मसखरे” विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित एक अत्यधिकमनोरंजक व्यंग्यात्मक किस्सा है। जिसको उन्होंने कुछ समय पूर्व ही अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित किया है। व्यंग्यात्मक किस्से “मसखरे” की रिकॉर्डिड वीडियो लिंक इस प्रकार से है। https://youtu.be/LSGHIitR1Bg आशा करता हु आपको पसंद आए।

ऊ) भोंडा।:: वर्ष 2019 में 2 अक्टूबर की रात्रि 10:20 बजे, विक्रांत राजलीवाल जी ने अपनी एक विस्तृत अत्यधिक दिलचस्प एवं मनोरंजक कहानी ‘भोंडा।” (लघु उपन्यास) का अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशन किया है। जिसके शरुआती भूमिया के कुछ अंश इस प्रकार से है कि… नमस्कार प्रिय पाठकों, आज अपनी एक अत्यंत ही दिलचस्प और भावनात्मक प्रेम कहानी “भोंडा।” का आपकी अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रथम प्रकाशन करते हुए, मुझ को अत्यधिक हर्ष एवं रोमांच की अनुभूति प्राप्त हो रही है। भोंडा केवल एक कहानी ही भी है बल्कि यह स्वयं के भीतर एक ऐसे भावनात्मक एहसासों को, संजोए हुए है जिसको लिखते समय मैं स्वयं अत्यधिक भावुक हो गया था। … [ 16,335 more words ]
https://vikrantrajliwal.com/2019/10/02/ आशा करता हु आपको पसंद आए।

ए) भोंडा। 2 Upcoming Soon:: विक्रांत राजलीवाल जी द्वारा लिखित उनका प्रथम लघु उपन्यास “भोंडा।” का 2 अक्टूबर 2019 रात्रि 10:20 बजे उनकी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशन के उपरांत, अब भोंडा। 2 का लेखन कार्य प्रारम्भ किया है। जब भी भोंडा। 2 का लेखन कार्य अपने अंजाम तक पहुच जाएगा, उसी क्षण भोंडा। 2 को आपकी अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित कर दिया जाएगा। धन्यवाद।

क) आज वर्ष 2016-17 से वर्तमान वर्ष तक, अपनी कई सैकड़ो नज़म, ग़ज़ल, बहुत सी काव्य, कविताओं, गीत, कुछ व्यंग्य किस्से, सैकड़ो शेर, बहुत से सामाजिक, आध्यात्मिक एवं मनोवैज्ञानिक विस्तृत एवं लघु लेखों को आपकी अपनी इस साइट पर लिखने एवं प्रकाशित करने के उपरांत!

ख) एवं सबसे महत्वपूर्ण अपनी बहुत सी विस्तृत एवं लघु नज़म दास्ताँ को लिखने के उपरांत!

ग) एवं 2/10/2019 की रात्रि अपनी विस्तृत (long term), अत्यधिक दिलचस्प एवं रोमांचक प्रेम कहानी “भोंडा।” को आपकी अपनी ब्लॉग साइट https://vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित करने के उपरांत!

घ) आज पुनः मेरे हाथों में मेरी वह अधूरी कहानी आ गई है जिसके 300+ A4 साइज के पृष्ठ (75% कहानी) वर्ष 2016 में लिखने के उपरांत मुझ को कुछ निजी कारणों से उसको रोक कर अपने लॉकर में रखना पड़ा था।

अब मेरा पुरजोर प्रयास रहेगा कि अब मैं अपनी उस अधूरी कहानी जो कि पूर्णतः अति संवेदनशील एवं रोमाचक संवादों सहित है को पूर्ण कर आपको एक ऐसी भेंट उपलब्ध करवा सकूँ। जिसको आप हमेशा अपने एहसासो में महसूस कर सके।

इसके लिए मुझ को आप सभी के आशीर्वाद की अति आवश्यकता रहेगी।

आशा करता हु आप मेरी भावनाओं को समझ सकें।

विक्रांत राजलीवाल।

अपना प्रेम एवं आशीर्वाद आपके अपने मित्र विक्रांत राजलीवाल की ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर यू ही बनाए रखें।

💥 कर्म फल।

दम था बहुत उड़ने का ऊँची उड़ान उसमें, जब जब उड़ना चाहा उसने, तो हर बार आसमान सिमट कर सिमट गया।

टूटे परों में थी जो जान कुछ बाकी, वक़्त की हर चाल पर बच ना सकी, बच गई फिर भी अधूरी जो, वो थी एक ख़्वाहिश, एक ख्वाहिश, एक ख़्वाहिश… एक ख़्वाहिश एक उन्मुक्त उड़ान की, एक आत्मस्वाभिमान भरी पूर्ण एक अधूरी पहचान की!

घाव एहसासो के एहसासो को तोड़ देते है। चक्रव्यूह जीवन का कभी कभी अर्जुन को भी पीछे मोड़ देते है। ज्ञान को अज्ञान और हर अज्ञान एक सार्थी ए पथिक द्वार ज्ञान से मुक्त कर देते है।

सत्य शक्ति का एहसास अब जग को सत्य स्वयं करवाएगा। असत्य सत्य अग्नि से अब बच ना पाएगा। आज और अभी होगा निर्णय, सत्य प्रतिबिंब स्वयं विजय दर्पण से विजय एवं पराजय का दिखलाएगा।

ये सृष्टि, ये ब्रह्मांड, ये अनन्त एहसास, भृम है ये जीवन, ये जीवित प्राण। जीव जीवन से मुक्त है, मुक्त है हर श्वास, मुक्त है हर श्वास। सत्य एवं असत्य दर्पण सत्य एहसासों का, सत्य है जिनके हर एहसास, सत्य है जिनके हर एहसास।

वायु प्राण, अग्नि श्वास, शीतल आत्मज्ञान, रोग द्वेष, पाप एवं पुण्य फल कर्मो का ज्ञान, फल कर्मो का ज्ञान, फ़ल कर्मो का ज्ञान।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

16/09/2019 at 1:30 pmPicsArt_09-16-01.24.36

💥 चेतना। (नवीन काव्य)

हमनें खाया है दगा बहुत एतबार से यारों, दुआ है यही की अब कोई कभी अपनो से दगा ना करें।

जो करें विशवास तो निभा देना उसका साथ, भूल से भी विशवास से किसी के अब कोई कभी घात ना करें।।

हर ज़ख्म जज्बातों के दिल ही नही धड़कनों को भी तोड़ने जब लगें, वार पीठ पर हँसते मुस्कुराते रिश्तों में एक आग सी जब लगाने लगें।

टूटते एहसासों पर सरेराह जब चोट पर चोट लगने लगें, हर रिश्ता एक जहर और हर मरहम नासूर जिंदगी को जब करने लगें।।

गीत सुहाना एक बद्दुआ कोई जब बनने लगें, घात से विशवास पर अपने मासूम परिंदा (राही) बेहिंतिया जब तड़पने लगें।

हर राह जिंदगी की अचानक से सिमट कर जब खत्म होने लगें, हर बढ़ते-सिमटते कदम से राही जाल घिनोने में जब फँसने लगें।।

हर आशा एक निराशा में परिवर्तित जब होने लगें, डोर जीवन की अचानक से छूटते हुए जब टूटने लगें।

एक मृत्यु, एक जीवन, प्रतीक सत्य का मृत्यु जब बनने लगें, विपरीत सत्य से सहमा जीवन, मृत्यु जीवन जब लगने लगें।।

एक निर्णय, एक विचार, कौन सत्य, कौन असत्य, सत्य दबा जहा मृत्यु कोख में मृत्यु सा लाचार।

सत्य, असत्य की अपनी वाणी, स्वाहा सत्य जो एक वाणी, सत्य कोख मृत्यु में जागृत PicsArt_09-14-10.23.41चेतन व्यवहार।।

14/09/2019 at 10:27 pm

🌹 अश्क़। (एक दर्द भरी प्यारी सी सौगात के साथ)

ये अश्क़ है दिवाने (विक्रांत राजलीवाल।) के जो करते है बयां दर्द मोहब्ब्त का मोहब्ब्त से मेरे। हर दर्द से छलकता है अश्क़ मोहब्ब्त का मोहब्ब्त से मेरे।।
आज अपनी इस नज़म को एक दर्द भरी प्यारी सी सौगात के साथ आप सभी मित्रों के लिए पुनः प्रकाशित कर रहा हु। जिसमे आपको दर्द ए दिल को बयां करती हुई कुछ और पँक्तियों को पढ़ने का आनन्द एक लुफ्त प्राप्त हो सकें। तो पेश ए ख़िदमत है आपकी अपनी नज़म 🌹 अश्क़। (एक दर्द भरी प्यारी सी सौगात के साथ)

🌹 अश्क़।

मोहब्ब्त से कायल है मोहब्ब्त से महबूब की वो अपने, लम्हा लम्हा मर्ज़ ए मोहब्ब्त से घायल है मोहब्ब्त से महबूब की वो अपने।

देखता है सूरत ए यार बेहद नज़दीक से वो अपने, करता है मोहब्ब्त, महबूब को बेहद नज़दीक से वो अपने।।

हुस्न के वार से इश्क़ तड़प जाता है बेहिंतिया, उठ उठ कर सर्द रातो में ज़ख्मो को कुरेद देता है वो अपने बेहिंतिया।

उसकी मदहोश आँखें उसके दर्दो को बयाँ करती है, हर दर्द से उसके, उसका दीवाना तड़प जाता है आज भी बेहिंतिया।।

चिर के दिल ख़ंजर से ज़हरीले अपना, फैला दिया ज़हर रग रग में नाम ए मोहब्ब्त बेवफाई उसकी, है जो आज भी बहुत ज़हरीला।

पहुचाता है सकूँ जख्मों को मेरे, हर एक ज़ख्म नया, कर देता है जिंदा, ज़हर झूठी मोहब्ब्त का उसकी, है जो आज भी बहुत ज़हरीला।।

हर वफ़ा से उसकी फ़रेब कोई झलक कर दिख जाता है आज भी जो उसका।

हर वफ़ा से आज भी है कायल दीवाना, ज़हर मोहब्ब्त का कर के बर्दाश उसका।।

ज़ख्म जो दिल के कभी भर ना सके, हर ज़ख्मो को मान कर एक सौगात उसकी, हम जो कभी मर ना सके।

एहसास मिटा कर भी उसका हम जो उसको कभी भुला ना सके, मासूम चेहरे से सरेराह हम आज भी उसके नक़ाब फ़रेबी जो उठा ना सके।।

नाम मोहब्ब्त का मोहब्ब्त से लेते है उनकी, आज भी हम ए दिवाने।

हर राज मोहब्ब्त के बैठे है छुपा कर मोहब्ब्त से उनके, आज भी हम ए दिवाने।।

अक्स मोहब्ब्त का उनकी मिटता नही, आज भी टूटे दिल से जो ए दिवाने।

हर अक्स मोहब्ब्त का है बेनाम एक टूटा आईना उनकी, आज भी जो ए दिवाने।।

हर असूल ए मोहब्ब्त को निभाते हुए, हर दर्द ए दिल दर्द जो मोहब्ब्त का उनकी दिल से टूटे अपने छुपाते हुए।

कर गया बर्दाश हर दर्द मोहब्ब्त का दर्द मेरा, हर दर्द एक ज़ख्म दिल का बन गया नासूर, बयान फ़रेब उनका करते हुए।

बर्दाश नही दर्द ये दिल का, धड़कता दिल सीने में अब हमें,
धड़कती हर धड़कन सुनाती है फ़रेबी हर दास्ताँ ए मोहब्ब्त जो उनकी।

हर दर्द एक दास्ताँ जो अश्क़ है मोहब्ब्त का, छलकता दर्द, हर एहसास ए मोहब्ब्त सरेराह, आज भी फ़रेबी मोहब्ब्त से जो उनकी।।

उनकी वो मासूम अदाएं, मदहोश शराबी निगाहें, आज भी आ जाती है याद जो, हर एक बात उनकी सबक जिंदगी का बन गया छलकता अश्क़ जो हर एक दर्द मेरा।

हर दर्द जो एक सबक बन गए, जिंदगी को जीने का जिंदा एक हर्फ़ बन गए, किताब ए मोहब्ब्त है दास्ताँ ए जिंदगी, हर दास्ताँ करती है बयां, अश्क़ जो एक दर्द मेरा।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

5/09/2019 at 11:05 am1567654951010