💥 Recovery is your birthright.

Recovery of which you really have the right. Recovery Through those positive actions and sacred prayers, those emotions, those rights, those honorable things and things that your addiction * addiction * has thrown you away from you and pushed you into an eternal poverty.

Poverty is of good quality, poverty is not able to accept a lack of selflessness, living a free and immersive life away from its addictions. Eliminating all these types of poverty, accepting the real person of yourself. Ever living daily with virtuous habits and for his favors and for all those devils, who are still being spent in some way while still wasting their precious lives in the wake of some kind of addiction. By praying with your conscience in your heart’s heart for your self and self-satisfaction, you can achieve your eternal life by living a daily recovery every day.
For this, you need a proper guidance and a realistic experience that will enable you to save your ability to provide a positive and positive environment through every possible step of your real experience and knowledge.

The rest of the next sequence …

Written by Vikrant Rajliwal

(Tralslation by Vikrant Rajliwal)

09/12/2018 at 21:47FB_IMG_1534055668460pm

💥 रिकवरी आपका जन्म-सिद्ध अधिकार।

रिकवरी जिसके की आप वास्तव मे अधिकारी है। रिकवरी अपने सकरात्मक कर्मो एव पवित्र प्रार्थनाओं के द्वारा उन भाव-व्यवहारों की, उन अधिकारों की, उन मान सम्मान एव वस्तुओँ की, जिसे आपके व्यसनों *एडिक्शन* ने आपको भृमित कर आपसे कोसो दूर करते हुए आपको एक अनन्तकालीं दरिद्रता में धकेल दिया था।

दरिद्रता नेक भाव-व्यवहारो की, दरिद्रता अपने व्यसनों से दूर एक स्वतंत्र एव उन्मुक्त जीवन को जीने की, दरिद्रता स्वम् को स्वीकार न कर सकने की। इन सभी प्रकार की दरिद्रता को मिटाते हुए स्वम् के वास्तविक व्यक्तिव को स्वीकारते हुए। प्रतिदिन नेक भाव-व्यवहारों से पूर्व जीवन व्यतीत करते हुए एव अपने इष्ट से अपने एव उन सभी भृमित व्यसनियों के लिए जो आज भी किसी न किसी प्रकार के व्यसन की गिरफ्त में अपना अनमोल जीवन बर्बाद करते हुए किसी प्रकार से सिर्फ व्यतीत किए जा रहे है। अपनी एव उनकी आत्मशांति के लिए अपने ह्रदय स्वरूप अपनी अंतरात्मा से प्रार्थना करते हुए आप अपने जीवन स्वरूप अपनी एक अनन्तकालीं रिकवरी को प्रतिदिन जीते हुए प्राप्त कर सकते है।
इसके लिए आपको एक उचित मार्गदर्शन एव वास्तविक अनुभवशाली एक ऐसे व्यवक्त्वि की आवश्यकता होती है जो आपको अपने वास्तविक अनुभव एव ज्ञान के द्वारा आपको आपके हर एक बढ़ते कदम से एक उचित सकारात्मक वातावरण प्रदान करने की एक क्षमता सहेज ही उपलब्ध करवा सके।

शेष अगले क्रम से…

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

09/12/2018 at 11:30aFB_IMG_1534055668460m

❤ दिल से। (विक्रांत राजलीवाल शायरी)

💌
चल रहे है राही राह अंजान पर जिंदगी के हर ओर, सांसो में अपनी एक विशवास सा लिए।

हर ठोकर को कर नज़रअंदाज़ धड़कते दिल के अपने एक धड़कती धड़कन सी लिए।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
💌
रात कि तन्हाइयो में अब भी है कॉयम, टूटे दिल कि टूटती धड़कने वो यादे तेरी अब भी कही।

तेरे चेहरे कि मासूमियत वॉर फरेबी निगाहों से ज़ख्म जो ताजा टूटे दिल मे है अब भी कही।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
💌
इंतज़ार है हर लम्हा किसी के इकरार का।
किसी अपने का उसके एक इज़्हार का।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
💌
मैं हु एक मुसाफ़िर रास्ता ये अंजाना है।
हर मोड़ ज़िन्दगी ये वक़्त सदियों से है तन्हा,
ये दिल दीवाना है।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
💌
ये खेल ज़िन्दगी, बेदर्द एक अहसास, नही खेल है कोई।
हर अहसास, एक तरंग ज़िन्दगी, सांसोCollageMaker_20181029_122904945.jpg से है मेरे टकराई।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

👉💌

महोबत में तेरी,

यह दिल खो गया।

धड़कने है तन्हा मेरी

सितम हो गया।

पहेलु में यार के

नशा हो गया।

देख कर चेहरा-हसीन

यह दिल खो गया…

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

💌
करते है राज दिलों पर दिलवाले अक्सर,
हम तो पता ही भूल बैठे है दिल का अपने यारो।

दिख जाएगा राह ए महोबत एक निसान जो अक्सर।
दिल ये दीवाने का आता है नज़र टूटा सा जो अक्सर।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
💌
जिंदगी।

घुट घुट पी ली जो हवा, हर घुट से अहसास धड़कने।
तरंग एक दर्द, हर घुट से आरज़ू, ये धड़कती धड़कने।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

💌
लिखने वाले ने लिख दी दास्तां ए महोबत।
सुनाने वाले ने सुना दी दास्तां ए महोबत।।

क़त्ल हो गया!!! चढ़ गए सूली पर हर एक आशिक़, पढ़ने और सुनने वाले…दास्तां ए महोबत।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

पुनः प्रकाशित एक संग्रह के रूप में परतम बात 08/12/2018 at 13:35 pm

🕯 एक सफ़र-ज़िन्दगी।

IMG_20181026_073844_067ज़िन्दगी की भाग-दौड़ में मित्र साथी वो बच्चपन के दिन न जाने कहाँ खो गए।

दर्द तकलीफ़ एक घुटन सी जिंदगी, हर क्षण उदासी सी कोई साथ हमारे हो गए।।

मुस्कान ये चेहरे की बनावट, जो मुखोटा सा कोई, छल है हर क्षण साथ सांसो के जहर ये जो ज़िन्दगी।

सफर ये जलते शोले, राह ए शूल मंजिलो के मिटते निशान, ख़ामोश है राही हर लम्हा, ज़ख्म ये नासूर जो जिंदगी।।

न कोई दवा है न कोई दुआ, हर ज़ख्म बन गया जो एक बद्दुआ, तड़प सासों की तड़पती है अब धड़कने हर लम्हा।

जुल्म न सितम कोई अब बाकी रहा, बढ़ते हर कदमो से बढ़ते फासले, सफर अधूरा सा है अब भी ज़िन्दगी हर लम्हा।।

स्वतन्त्र लेखक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
21/04/2018 at 23:00pm

(पुनः प्रकाशित।)

🙏 धन्यवाद।🎉 🙏 Thank You.🎉

आपके सभी प्रियजनों एव मित्रजनों का आपके अपने रचनाकार मित्र विक्रांत राजलीवाल (स्वम्)की रचनाओं को अपना अनमोल प्रेम प्रदान करने लिए अपने ह्रदय से आपका आभारी आपका अपना विक्रांत राजलीवाल (एक स्वतंत्र लेखक)

20181205_195157Your heartfelt gratitude to your loved ones from your heart, to give your precious love to the creators of your own creator friend Vikrant Rajaliwal (Myself) of your loved ones and friends, Rajliwal (a freelance writer)

05/12/2018 at 19:59 pm

❤ धड़कती धड़कन।

धड़का धड़का कर रोक दी तुम-ने हर धड़कती ये जो धड़कने।

धड़कते धड़कते धड़कना ही भूल गयी, धड़कती ये जो धड़कने।।

धक धक धक धड़कती है धड़कती ये जो धड़कने।

धड़कनो में शायद तुमको ढूंढ़ती है ये जो धड़कने।।

धड़कनों का धड़कना, याद महबूब की बिछुड़े, हर अश्क़ नाम ए महबूब, छुपा रही है खुद से धड़कने, बेवफ़ा है ये जो धड़कने।

धड़कनो का टूटना, अक्स महोबत का वो अधूरी, धड़कनो से छुपा लिया, दर्द ए दिल, क़ायम है धड़कने, बेवफ़ा नही है ये जो धड़कने।।

धड़कती हर धड़कन, एक रोज़ ख़ामोश हो जाएगी।

धड़कती-धड़कनो से धड़कने-महबूब की महोबत जब खुद मिट जाना चाहेगी।।

धड़कती हर धड़कन उस रोज़ खुद ही रोक देगा दीवाना।

धड़कती धड़कनो को और धड़का कर, चिर के दिल रोक देगा IMG_20181102_081045_576धड़कने खुद अपनी दीवाना।।

विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।

(Republish at vikrantrajliwal.com)

💥 Truth is a cultural belief.

FB_IMG_1536414617181Often, I read about the ancient Vedic history that Arya was an important class belonging to Hindu religion that came from Europe.

But I believe in our Hindu religion and Goddesses, Puranas, Vedas and Culture of our India, that it may be that Aryans reside in Europe or an ancient royal class of Arya is there.

But it does not seem to suggest that the Aryan had come from Europe in India, the possibility of this fact appears to be equally non-existent while being shuddering. On the contrary, the Aryans had gone towards Europe for years, the possibility of this fact is excessive. Not only this, I am not saying that friends are also an important fact behind this when India was living like a primitive tribe in the Stone Age, at that time India was passing through a golden age of its golden age.

And it can also be that at the time when this fact was given to this fact, India was a helpless country bound by chains of slavery, and by breaking those cultural beliefs and beliefs of India, a conspiracy to eradicate India’s culture Negative try can also happen!

The above thoughts are my personal opinion of Swamy which is inspired by my Hindu religion and mythological cultural beliefs of India.

Thank you.

Written by Vikrant Rajliwal

(This is a translation of my Hindi article in English, if any mistake has been made in error, then I apologize.)

3/12/2018 at 21:30 pm

💥 सत्य एक सांस्कृतिक विशवास।

अक्सर मैं प्राचीन वैदिककालीन इतिहास के सम्बंध में पढ़ता हूं कि आर्य जो हिन्दू धर्म से सम्बंधित एक महत्वपूर्ण वर्ग है यूरोप से आए थे?

परन्तु मैं अपने भारतवर्ष के अपने हिन्दू धर्म एव देवी देवताओँ, पुराणों, वेदों एव संस्कृति पर विश्वाश रखते हुए यह मानता हूं कि हा हो सकता है कि आर्य यूरोप में भी निवास करते है या आर्य वहा की एक प्राचीन शाशक वर्ग हो।

परन्तु इसका तदपि यह तातपर्य नही निकलता की आर्य यूरोप से भारतवर्ष में आए थे इस तथ्य की संभावना अति शुष्म होते हुए न के बराबर प्रतीत होती है। इसके विपरीत आर्य भारत वर्ष से यूरोप की ओर गए थे इस तथ्य की संभावनाएं अत्यधिक है। यह बात मैं यू ही नही कह रहा मित्रों इसके पीछे भी एक महत्वपूर्ण तथ्य है जब सम्पूर्ण यूरोप पाषाण युग मे एक आदिम जनजाति के समान जीवन व्यतीत कर रहा था उस समय भारत अपने स्वर्णिम युग के एक स्वर्णिम दौर से गुजर रहा था।

एव यह भी हो सकता है कि जिस समय जिसने भी यह तथ्य दिए उस समय भारतवर्ष गुलामी की जंजीरों से जकड़ा हुआ एक बेबस देश था एव उन तथ्य के जरिए भारतवर्ष की सांस्कृतिक मान्यताओ एव विश्वाश को तोड़ते हुए भारतवर्ष की संस्कृति को मिटाने की एक साजिश या नकारात्मक कोशिश भी हो सकती है!

उपरोक्त विचार मेरे स्वम् के निजी विचार है जो मेरे हिन्दू धर्म एव भारतवर्ष की पुराणिक सांस्कृतिक मान्यताओं से प्रेरित है।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
3/12/2018 at 21:20 pmFB_IMG_1536414617181

🕊 Real knowledge.

The real knowledge that grows with the day-to-day positivity. And make a positive change in your personality from the level of your knowledge.

The real religion is that which remains stable. Just by the level of your knowledge, your faith changes.

Written by Vikrant Rajliwal
CollageMaker_20180722_193819056(translated by Vikrant Rajliwal)
13/09/2018

(Republish)

🕊 वास्तविक ज्ञान।

वास्तविक ज्ञान वह जो दिन प्रतिदिन सकारात्मकता के साथ बढ़ता जाए। एव आपके ज्ञान के स्तर से आपके व्यक्तिव में एक सकारात्मक बदलाव उतपन कर दे।

वास्तविक धर्म वह जो स्थिर रहता है। बस आपके ज्ञान के स्तर के हिसाब से आपकी आस्था बदल जाती है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

13/09/2018 at 16:35 pm

(पुनः प्रकाशित)CollageMaker_20180722_193819056