भय मुक्त क्रोना से। / Bhay Mukt Crona Se / #FacebookLive #YouTubeVideo.

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भय मुक्त क्रोना से। /Bhay Mukt Crona Se.
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भय मुक्त क्रोना से। (विक्रांत राजलीवाल)

आओ करे पालन हम लॉक डाउन का, मात दे संक्रमण क्रोना को, पाए जीवन स्वास्थ्य हम अपना, पालन सावधानियों का हम करे।

धोएं हाथ बारम्बार हम अपने, स्वास्थ्य रहे, मस्त रहे, फहराए विजय पताका हम क्रोना पर, योग-ध्यान-प्राणायाम करें।।

स्टेटस क्रोना देख कर ना घबराना, दृढ़ संकल्प, स्वास्थ्य दिनचर्या से जीवन मे अपने आगे हमेशा बढ़ते जाना।

याद रहे देव भूमि भारत के है हम वासी, संस्कारी व्यक्तित्व, अनुशासित दिनचर्या से, मिलकर हमे क्रोना को हराना।।

जीत जाएंगे मार संक्रमण हम क्रोना, शंख-घण्टिया बजा-बजाकर, सात्विक वातावरण करें हम उतपन।

जोश-उमंग जीवन से अपने मिटने ना पाए, हरा क्रोना को हम स्वछता से आगे को बढ़ते जाए, नित्य दिन प्रतिदन।।

हौसला ना टूटने पाए, आस-पास, हम साथ साथ, करे सतर्क एक दूजे को, मिलकर संक्रमण से क्रोना के हमे लड़ना है।

लोकतंत्र के रक्षकों पर हो विशवास, जमखोरी-मारामारी, भय के वातावरण से हमे बचना है।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

26/3/2020 समय प्रातः 8:21 बजे।

💥 Truth. ( Vikrant Rajliwal)

You need to have a positive feeling that you have wasted the precious time due to the misdeeds and misdeeds of your past, and by adopting the path of truth in the current era, while improving your own dilapidated person, Use of time and your persistence on that divine path can be a path of improvement.

And if you do not want to use the path of that improvement, you will not be able to use it even if you do not want it at the present time. That is, you see the destruction of the time of your present period as a result of the unbelieving of the people of the higher power of yourself, or even the precious time when the existence is destroyed. After this you awakened the power of Swam and continued towards the path of truth continuously. If you are able to reclaim those lost priceless opportunities while advancing on the path of reform, then it can be your recovery. By whom you have recovered the opposition of the people of the highest power by having your determination power, keeping faith in the integrity and determination power of themselves.

You can do a real miracle by working on determination power and its development. By making use of his own determination power and discipline of miracles, the miracle is to create a high quality of himself and to make the other needy aware of that divine path through that bright person too.

In this way, you can develop a positive development of your personality by constantly developing your own resolve power through real experiences of yourself.

Inspired by the true experiences of written by Vikrant Rajliwal

First publication on12 June 2019 1:55 pm

(Republish)

💥 सत्य। (विक्रांत राजलीवाल।)

आप अपने दुष्विचारो एव दुर्व्यवहारों के कारण भूतकाल में जो अनमोल समय व्यर्थ बर्बाद कर चुके है उसका आपको एक सकारात्मक एहसास होना अति आवश्यक है एव वर्तमान में सत्य मार्ग को अपनाते हुए स्वम् के जर्जर व्यक्त्वि में सुधार करते हुए वर्तमान समय का सदुपयोग करना एव उस ओर अडिग रहना एक सुधार का मार्ग हो सकता है।

एव उस सुधार के मार्ग मार्ग पर चलते हुए अपने वर्तमान समय का ना चाहते हुए भी सदुपयोग ना कर पाना। अर्थात अपने से उच्च शक्ति के व्यक्त्वि के व्यक्तियों के अविश्वाश के फलस्वरुप उस अनमोल समय का भी अस्तित्व नष्ट हो जाना। एव तदुपरांत स्वम् की संकल्प शक्ति को जाग्रत कर निरंतर सत्य मार्ग की ओर अग्रसर रहते हुए। सुधार के मार्ग पर अग्रसर रहते हुए उन नष्ट हुए अनमोल अवसरों की पुनः प्रप्ति आपकी रिकवरी हो सकती है। जिसको आपने अपनी दृढ़ संकल्प शक्ति के द्वारा समस्त उच्च शक्ति के व्यक्त्वि के व्यक्तियों के विरोध स्वम् की ईमानदारी एव संकल्प शक्ति पर विशवास रखते हुए पुनः प्राप्त किया है।

संकल्प शक्ति एव उसके विकास पर कार्य के द्वारा आप एक वास्तविक चमत्कार कर सकते है। चमत्कार स्वम् की संकल्प शक्ति एव अनुशाशन के प्रयोग द्वारा स्वम् के एक उच्च व्यक्त्वि का निर्माण कर के एव उस उज्ज्वल व्यक्त्वि के द्वारा अन्य जरूरतमन्दों को भी उस दिव्य मार्ग से अवगत करवाना।

इस प्रकार से आप स्वम् के वास्तविक अनुभवों के द्वारा स्वम् की संकल्प शक्ति का निरन्तर विकास करते हुए अपने व्यक्त्वि का एक सकरात्मक विकास कर सकते है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित स्वम् के सत्य अनुभवों से प्रेरित।

प्रथम प्रकाशन 12 जून 2019 1:55 pm

(पुनः प्रकाशित)

🌹 शायरी। (विक्रांत राजलीवाल की कलम से।)

💔 ना जिन्हें दिन को है सकूँ साँसों में; ना रातों को है आराम।

हम है वो जो रहते है हर लम्हा लेकर धधकती धड़कनों में सुलगता एक  अंगार।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

🌹 टूटा गुलाब, बिखुड़ी जो पंखुड़ियां; हर जख्म महोब्बत के नासूर हो गए।
याद में एक सितमगर कि ए दोस्त; हम जीते जी ही जो फ़ना हो गए।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

💗
हम तुम्हें ना पा सकें और तुम हर बार हमारे मासूम एहसासों का कत्ल करते गए।

नही एतबार अब हमें ख़ुद के एहसासों पर शायद, फक्त यकीं एहसासों पर तुम्हारे हम जो करते गए।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

🌹  दर्द ए दिल की अपने कोई दवा अभी तक जो मुझे मिली नही।

हर जख्म फट गए मेरे बेअसर हर मरहम को कर के खुद ही।।

टूट कर मासूम एहसास हर लम्हा मेरे जो मरते गए; हर लम्हा ही हम टूटे एहसासों से जो टूटते गए।

सितम ज़िंदगी के हंसते हुए हम सहते गए; हर सितम से जिंदगी के सबक कोई नया जो सीखते गए।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

19 जनवरी रविवार। समय दोपहर 2:52 बजे

🌹 फूल, पते, ग़ुलाब की पंखुड़ियां सब के सब खिल कर मुरझा गए; सब मौसम, आ कर गुजर गए, एक तुम ना आए, आ आ कर अश्क़ आँखों मे हमारी सुख गए।

बादल, वर्षा, वो बहता पानी, याद किसी की दिला गया; धड़कती धड़कन, वो बहता झरना, नाम बंद जुबां पर किसी का जो याद आ गया।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

🌹 मोहब्ब्त करना हर एक हसीन गुलाब से, काटो को चूम कर सीने से लगाना।

प्रेम पुजारी की प्रेम प्रतिज्ञा, हर हसीना को दिल मे बसाना, नैन लड़ाना गाना गाना।।

हर तीर मोहब्ब्त के दिल चिर ना दे, परीक्षा प्रेमी के प्रेम की, धड़कने तुम्हारी ना रोक दे।

दर्द जिंदगी के देख कर तुम मुड़ ना जाना, खड़ा है राह में प्रेम पुजारी हमे देख कर पलट ना जाना।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
28 जनवरी दोपहर 2:35 बजे on my writing blog site.

Book My Poetry show.

🎻 एक दर्द। (दर्दभरी नज़म) *पुनः प्रकाशित*

नही आती है नींद दीवाने को क्यों आज-कल।

विक्रांत राजलीवाल।

भूल गया है रंगीन हर ख़्वाब वो क्यों आज-कल।।

हो गया है खुद से ही बेगाना वो क्यों आज-कल।

रह गया है तन्हा भरे संसार में वो क्यों आज-कल।।

लेता है रुसवा बेदर्द रातो में नाम वो किसका आज-कल।

तड़पता है देख हाल ए दीवाना सा वो अपना आज-कल।।

ढूंढता है निसान ए महोबत, ए दर्द ए जुदाई इन काली श्याह रातो में वो किसके आज-कल।

पूछता है सवाल ए महोबत, मांगता है जवाब ए हक़ीक़त, आईने से टूटे वो किसके आज-कल।।

क्यों है इंतज़ार अब भी उसे, दर्द यह अवमस्या की रात,  ख्वाहिश है एक आखरी दीदार ए पूनम का वो एक चाँद।

क्यों है टूटती हर उम्मीद, अब भी उसे एक आरज़ू आखरी, यक़ीन है एक दर्द महोबत, अहसास ए धड़कन, उसकी हर एक बात।। विक्रांत राजलीवाल द्वरा लिखित।

Rachnakar Vikrant Rajliwal “Creation’s”

Source of publication
(Republish vikrantrajliwal.com)

बाल कविता।

आओ बच्चों , प्यारे बच्चों, नन्हे नन्हे दुलारे बच्चों।
सुबह सुबह शौच को तुम जाओ, जीवन मे अपने स्वास्थ्य दिनचर्या को अपनाओ।

सैर सुबह और सांझ करें, कसरत की शैली अपनाए। ज8वन में संगीत कोउ सुहावना हम गाए।

माता और पिता का करें सत्कार, संस्कारी जीवन हो उद्देश्य महान।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

नमस्कार मित्रों, आज से चार वर्ष पूर्व अपनी जिस अधूरी कहानी एक अत्यधिक दिलचसब नाटक के एहसासों को लिखने का प्रयास किया था! अब अपने अंतिम चरण; यानी कि लगभग अपनी 50% फाइनल एडिटिंग का कार्य सम्पन्न कर चुका हूं।

शीघ्र ही मेरी वह प्रथम अत्यधिक विस्तृत दर्दभरी कहानी एक पुस्तक के रूप में आपके विश्वसनीय हाथों के सपुर्द्ध कर दी जाएगी।

विक्रांत राजलीवाल।

Hello friends, four years ago, I had tried to write my first incomplete story of this very interesting drama. Now its last stage; That is, almost 50% of final editing has been completed.

Soon my first very detailed story , very sensitive drama will be made in the form of a book with your trusted hands.

Vikrant Rajliwal.

work on my upcoming novel+drana story

सत्य।

आज मेरा ह्रदय कुछ आहात है कुछ स्वयं के टूटते एहसासों से और कुछ…

जब एक सत्य एहसास बेमाना सा सिद्ध होते हुए स्वयं के होने पर स्वयं से ही घृणा करने को मजबूर हो जाए; तब हर दिशा से एक गूंज सम्पूर्ण ब्रह्मांड को झंझोर कर रख देगी।

जब जब ऐसा होता है तब तब उन समस्त दुराचारियो का जो उस सत्य के दोषी होते है का अंत स्वयं सत्य के द्वारा अत्यंत ही भयावह रूप से सहज ही हो जाता है।

फिर भी यदि कोई दुराचारी अपने अंत से पूर्व अपने कुकर्मों को सत्य के समीप स्वीकारले तो उसे उस भयावह पीड़ा से मुक्ति भी सहज ही प्राप्त हो जाती है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

विक्रांत राजलीवाल।