👺 बेदर्द ज़माना।

20181124_120423चले जाते है यार मेरे अक्सर बीच मझदार छोड़ कर।

देखता हूं राह मैं उनकी फिर काम सारे छोड़ कर।।

आते नही दुबारा से वो, फिर दिखते नही दोबारा से वो।

खड़ा हूँ अब भी राह पर वही, देख रहा हु रास्ता उनका, मगर दिखते नही फिर कहि वो।।

क्या ये ही जिंदगी है एक ख्वाब मेरा टूटा एतबार जो पुराना,
देख रहा हु जो एक ज़माने से वही पर अब भी मैं जो।।।

सितमगर हज़ारो मिले बेदर्द इस ज़माने में।

तोड़ा है दिल ए दीवाना यहाँ हर किसी ने।।

लगते है तन्हाई में इल्जाम कई संगीन, हो जाता है मजबूर दीवाना।

दिखता नही तड़पते साए से अपने, जब भी कोई खोया साथी पुराना।।

दिख तो जाते है चेहरे वही, पर दिखता नही उनमे वो उनका अक्स पुराना।।।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

(06/12/2018 at 21:05pm)

(पुनः प्रकाशित)

🕯 एक सफ़र-ज़िन्दगी।

IMG_20181026_073844_067ज़िन्दगी की भाग-दौड़ में मित्र साथी वो बच्चपन के दिन न जाने कहाँ खो गए।

दर्द तकलीफ़ एक घुटन सी जिंदगी, हर क्षण उदासी सी कोई साथ हमारे हो गए।।

मुस्कान ये चेहरे की बनावट, जो मुखोटा सा कोई, छल है हर क्षण साथ सांसो के जहर ये जो ज़िन्दगी।

सफर ये जलते शोले, राह ए शूल मंजिलो के मिटते निशान, ख़ामोश है राही हर लम्हा, ज़ख्म ये नासूर जो जिंदगी।।

न कोई दवा है न कोई दुआ, हर ज़ख्म बन गया जो एक बद्दुआ, तड़प सासों की तड़पती है अब धड़कने हर लम्हा।

जुल्म न सितम कोई अब बाकी रहा, बढ़ते हर कदमो से बढ़ते फासले, सफर अधूरा सा है अब भी ज़िन्दगी हर लम्हा।।

स्वतन्त्र लेखक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
21/04/2018 at 23:00pm

(पुनः प्रकाशित।)

🙏 धन्यवाद।🎉 🙏 Thank You.🎉

आपके सभी प्रियजनों एव मित्रजनों का आपके अपने रचनाकार मित्र विक्रांत राजलीवाल (स्वम्)की रचनाओं को अपना अनमोल प्रेम प्रदान करने लिए अपने ह्रदय से आपका आभारी आपका अपना विक्रांत राजलीवाल (एक स्वतंत्र लेखक)

20181205_195157Your heartfelt gratitude to your loved ones from your heart, to give your precious love to the creators of your own creator friend Vikrant Rajaliwal (Myself) of your loved ones and friends, Rajliwal (a freelance writer)

05/12/2018 at 19:59 pm

❤ धड़कती धड़कन।

धड़का धड़का कर रोक दी तुम-ने हर धड़कती ये जो धड़कने।

धड़कते धड़कते धड़कना ही भूल गयी, धड़कती ये जो धड़कने।।

धक धक धक धड़कती है धड़कती ये जो धड़कने।

धड़कनो में शायद तुमको ढूंढ़ती है ये जो धड़कने।।

धड़कनों का धड़कना, याद महबूब की बिछुड़े, हर अश्क़ नाम ए महबूब, छुपा रही है खुद से धड़कने, बेवफ़ा है ये जो धड़कने।

धड़कनो का टूटना, अक्स महोबत का वो अधूरी, धड़कनो से छुपा लिया, दर्द ए दिल, क़ायम है धड़कने, बेवफ़ा नही है ये जो धड़कने।।

धड़कती हर धड़कन, एक रोज़ ख़ामोश हो जाएगी।

धड़कती-धड़कनो से धड़कने-महबूब की महोबत जब खुद मिट जाना चाहेगी।।

धड़कती हर धड़कन उस रोज़ खुद ही रोक देगा दीवाना।

धड़कती धड़कनो को और धड़का कर, चिर के दिल रोक देगा IMG_20181102_081045_576धड़कने खुद अपनी दीवाना।।

विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।

(Republish at vikrantrajliwal.com)

🕊 Real knowledge.

The real knowledge that grows with the day-to-day positivity. And make a positive change in your personality from the level of your knowledge.

The real religion is that which remains stable. Just by the level of your knowledge, your faith changes.

Written by Vikrant Rajliwal
CollageMaker_20180722_193819056(translated by Vikrant Rajliwal)
13/09/2018

(Republish)

🕊 वास्तविक ज्ञान।

वास्तविक ज्ञान वह जो दिन प्रतिदिन सकारात्मकता के साथ बढ़ता जाए। एव आपके ज्ञान के स्तर से आपके व्यक्तिव में एक सकारात्मक बदलाव उतपन कर दे।

वास्तविक धर्म वह जो स्थिर रहता है। बस आपके ज्ञान के स्तर के हिसाब से आपकी आस्था बदल जाती है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

13/09/2018 at 16:35 pm

(पुनः प्रकाशित)CollageMaker_20180722_193819056

लक्ष्य। ✒

FB_IMG_1535948190951.jpgखुशनसीब होते है वो राह ए मुसाफ़िर, सफर ए ज़िंदगानी में साथ संघर्ष हर कदम है जिनके ए साथी।

हर एक सवेरा लाता है एक नई रौशनी, लिपटी अहसासों से चिंगारी कोई बेदर्द जो साथ अपने ए साथी।।

चक्रव्यूह नही अभिमन्यू सा, तोड़ न सके जिसे कोई, समाया विशवास सांसो में तेरे ए साथी।

तीर है अर्जुन सा भेद लक्ष्य निकल जाएगा, साथ न हो कोई चाहे तेरे, तन्हा तू चल ए साथी।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
(पुनः प्रकाशित)

सोचता हूं अक्सर तन्हा अंधेरी रातो में कि…💦

1536088001590-539524510.jpgयाद हैं अब भी गुजरा वो ज़माना, देखा था खोया अक्श नज़रो में उनकी अपना जब वो वर्षो पुराना।

रात थी वो चाँद की, आशिक था महोबत से उनकी
यह सारा ज़माना।।

रहता था उफ़ान धड़कनो में जब मेरे।

बजता हो साज कोई, जैसे साँसों से मेरे।।

उनकी वो हर एक अदा अब भी हैं याद मुझ को।

वख्त बे वख्त वो इतराना, तीर शराबी निगाहों से चलाना,
अब तक हैं याद मुझ को।।

वो मौसम, वो सर्द रात, वो थी मेरी तन्हाई की बात।

साया था पीपल का एक साथ मेरे, वो थी उनसे मेरी जुदाई की रात।।

अब तक हैं याद मुझ को…

देखी थी जब राह ए सनम, धड़कती तो कभी टूटती अपनी हर धड़कन के साथ।

वो आये नही थे देने को जब दीवाने का अपने, जो अब भी धड़कनो में कहि मेरे मेरा साथ।।

निकलती थी एक आह, गुजरते हर लम्हे के साथ।

आलम था बेदर्द बेहिंतिया, आया था जो एक बेबसी के साथ।।

खड़ा था दीवाना जो राह ए सनम, साए से अपने लिपट कर,
खो गयी राह ए मन्ज़िल, एक दर्द, वो महबूबा किसी गैर के साथ।

वख्त गुजरा, समा गुजरा, गुजर गया वो जमाना, चली गयी थाम के हाथ,
देखता रह गया जो तन्हा दीवाना, वो किसी गैर के साथ।।

अब तक हैं याद मुझ को…

खड़ा हैं अब भी वही उसका दीवाना, साए से उसी पीपल के साथ।

देख रहा हैं राह सुनी, अब भी न जाने किसकी वो, उसके चले जाने के बाद।।

अब तक हैं याद मुझ को…

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

(पुनः प्रकाशित कुछ तंकन त्रुटि सुधारूपरांत तारीख़ 02/11/2018 at 20:43pm)

💌 महोबत।

महोबत मिट नही सकती किसी के मिटाने से।

भावनाए(एहसास) दब नही सकती किसी के दबाने से।।

यह वो आग है दीवाने, भड़कती है जो दबाने से।।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
(पुनः प्रकाशित)a753b56c-61c9-499b-9e48-10ff7b5bbeae