Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

June 10, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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रेप। / Rape

रेप! कहने को तो एक शब्द होता है। परन्तु इस शब्द रेप की वास्तविकता अत्यन्त ही भयानक होती है। रेप और रेपिस्ट? क्या रेप करने वाला ही रेपिस्ट होता है या जिन्होंने वह अनैतिक हालात उतपन किए क्या कहि ना कहि वास्तविक दोषी वही तो नही होते? यदि उन व्यक्तियों ने, जिन्होंने एक मासूम को […]

June 10, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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जब हमें जरूरत थी उनकी तो हम उनके किसी भी काम के ना थे। जब पड़ी जरूरत उन्हें हमारी तो वो हमारे किसी काम के ना रहे।। विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। When we needed him we were not of any of his work. When they need us, then they will not be of any use […]

June 8, 2019
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One truth. (1)

A 17-year-old young boy recruits at the Rehabilitation Center. And with every passing moments, he begins to remember every single sentence of his life one by one. With whose influence an infallible change in his life has come easily. Some changes may be positive and some of them may be negative. Do you know that […]

June 2, 2019
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ट्वीट्स। My Twittes (एक लघु संग्रह )

✍️ यह एक लघु संग्रह है बीते कुछ दिनों में मेरे मैन ट्विटर अकाउंट और बैकअप ट्विटर अकाउंट के कुछ दिल को छू देने वाले ट्वीट्स के। 1) @vikrantrajliwal 2) @RajliwalVikrant 3rd one है @VRajliwala This is a short collection of my main Twitter Twitter accounts and some of my backup Twitter Twitter accounts that […]

May 28, 2019
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दर्द। (नई ग़ज़ल)

जब खाई शिखस्त हमनें, अपनो के हाथों ही खाई, नही पाए पहचान जो हाथ वो खंजर उतारा दिल मे बेदर्दी से जो गया। हो कर बेरवाह ज़िन्दगी से, सलूख ज़िन्दगी के हम सीखते रहे, जान हर सलूख जिंदगी के, जान जिंदगी की निकलती रही।। दर्द हर हक़ीक़त का करते रहे जान कर भी नज़रंदाज़ हम […]

May 26, 2019
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एहसास

ये रात भी बीत जाएगी और एक एक कर के दिन तमाम, भागते रहे करने को ख़िदमत, खड़े बांध कतार में तुम अपने हाथ। करि ख़िदमत शहंशाहों की उम्र तमाम, मिला एक लम्हा भी सकूँ का फिर भी नही, करा नज़रंदाज़ साए को अपने, छोड़ अपनो का साथ।। कर दिए हर लव्ज़ महोबतों के बेअसर […]

May 24, 2019
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अधुरे एहसास। (नई ग़ज़ल)

ज़िन्दगी में चेहरे धुंधलाते से पड़ गए जितने, देखा है हमने ज़िन्दगी में अक्सर हमे वही चेहरे याद रहे। रहे ना रहे हम ज़िन्दगी में ए ज़िन्दगी फ़क़त रह जाएंगे निसान ज़िन्दगी में ज़िन्दगी के जो हमने कभी मिटने नही दिए।। एहसास हैं मुझे हर लम्हा उन एहसासों का अपने, धूल जिन पर बदलते वक़्त […]