Author, Writer, Poet, Drama and Story Writer Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

August 19, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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💥 एक सत्य। 4 (चौथा ब्लॉग) सत्य घटनाओं पर आधारित एक अलौकिक सत्य।

अब तक आपने जाना कि कैसे वर्ष 2003-04 में एक कच्ची उम्र से गुजरते हुए कैसे मेरे तुच्छ से जीवन मे एक महत्वपूर्ण परिवतर्न आया और उस दिन का प्रारम्भ कैसे और किन विचारों के साथ हुआ। एवं किस प्रकार मैं अपने पुलिसिया सरकारी क्वाटर से निकल कर मंडी (एशिया की सबसे बड़ी फल एवं […]

August 18, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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💥 नया ज़माना।

नया ज़माना कविता को मैने कुछ संशोधित कर उसमें चंद भावुक पंक्तियों की बढ़ोतरी करि है। आशा करता हु आपको पसंद आए। 💥 नया ज़माना। बढ़ा कर हाथ, हट जाना पीछे को, चलन हैं आज-कल ये नए जमाने का। मुस्कुरा कर चरित्र उछालना यारो का, दौर हैं आज कल ये नये ज़माने का।। जता कर […]

August 15, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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🇮🇳15 अगस्त “स्वतँत्रता दिवस” के पवित्र दिन एक संदेश।

🇮🇳 🙏 सबसे पहले तो मैं आप सभी देशवासियों को “स्वतँत्रता दिवस” एवं “रक्षा बंधन” की हार्दिक शुभकामनाएं प्रदान करता हु। और अब बात करता हु मेरी काव्य कविता “राजनीति और धर्म” की जो मेरी प्रकाशित पुस्तक “एहसास” से मानवतावादी भावनाओं से प्रेरित होकर मैने लिखी थी। पुस्तक एहसास में सामाजिक, आध्यात्मिक एव मानवतावादी भावनाओं […]

August 10, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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💥 ONE Truth One Experience.

💥 You first need knowledge. And even after attaining a proper knowledge, you can teach or learn the style of living this human life only through your own experiences. As far as I have understood this simple human life of my own, I have come to know that it is only the personal experience of […]

August 10, 2019
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💥 एक सत्य एक अनुभव।

💥 आपको सर्वप्रथम ज्ञान की आवश्यकता होती है। एवं एक उचित ज्ञान प्राप्ति के उपरांत भी आप अपने स्वंय के अनुभवों से ही इस मनुष्य जीवन को जीने की शैली सिख सकते है या सिख पाते है। मैने जहा तक अपने इस साधारण से मनुष्य जीवन को समझा है तो यही जाना है कि मनुष्य […]