Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। -स्वतंत्र लेखन-

Apr 18, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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ज़िन्दगी।

कुछ लम्हो को ज़िन्दगी से लहुलुहान चुरा कर लाया हूं ज़िन्दगी। हर सितम ज़िन्दगी से खुद जिंदगी को तबाह कर आया हु ज़िन्दगी।। उन्होंने जो कहा ही नही उस को भी सुन कर आया हु ज़िन्दगी। हर एहसास रूह से अपने मिटा कर उनके आया हु ज़िन्दगी।। ये वख्त बदल सकता है हर एहसास बदल […]

Apr 11, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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🌹 दास्ताँ

नमस्कार मित्रों, जैसा कि मैंने आप सभी प्रियजनों से वचन दिया था कि जल्द ही अपनी आज तक कि बहेत्रिन दर्दभरी महोबत कि नज़्म दस्तानों को आपके पाठन हेतु आपकी अपनी इस ब्लॉग साइट पर प्रकाशित करूँगा। अपने जीवन के अत्यधिक व्यस्त एव व्यवस्त होने के उपरांत भी मैने रात दिन आपके पाठन हेतु कार्य […]

Apr 9, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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💌 एक इंतज़ार… महोबत। (दास्ताँ श्रुंखला के अंतर्गत प्रथम दास्ताँ)

क़िताब ए महोबत के पाक पन्नों पर दर्द, एक दीवाने का लहू जो अब बरस गया। जख़्मी दिल के ज़ख्मो से तमाम, तेज़ाब कोई जो सरेराह अब बरस गया।। याद आई बिछुड़े महबूब की जब जब अपने, बेदर्द यह ख़ूनी सावन भी तब तब गरजा बेहिंतिया और टूट कर बरस गया। देख कर तड़प एक […]

Apr 3, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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🌹 दास्ताँ

💗 एक इंतज़ार… महोबत। मेरी आगामी अति विस्तृत दर्दभरी नज़्म श्रंखला के अंतर्गत मेरी प्रथम दर्दभरी नज़्म दास्ताँ एक इंतज़ार… महोबत। एक ऐसी दर्दभरी महोबत की दास्ताँ है जो यक़ीनन आपके ह्रदय पर अपने दर्द की पीड़ा से दस्तक़ देगी। और जिसका प्रत्येक शेर एव कलाम आपके धड़कते दिल को बेहिंतिया धड़कातें हुए आपकी हर […]

Mar 27, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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दास्ताँ (एक सूचना)

नमस्कार मित्रों, जैसा कि आपको ज्ञात है कि मैने आपसे कहा था कि इस शुक्रवार देर रात्रि तक अपनी आगामी नज़्म शृंखला *दास्ताँ* के अंतर्गत मेरी प्रथम दर्दभरी नज़्म दास्ताँ एक इंतज़ार… महोबत। को प्रकाशित कर दूंगा। परन्तु आपको यह बताते हुए मुझ को अत्यंत ही खेद हो रहा है कि जिस टाइपराइटर को मैने […]

Mar 26, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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एहसास

उदास हो कर टूट जाए या झूम कर लड़खड़ा जाए हर एक बर्बादियों पर अपनी। जी जाए ज़िन्दगी या छोड़ जाए हर टूटती सांसे टूटती हर एक उम्मीदों से अपनी।। हर एक कदम से कदम चलते हुए, खुद को खुद से खुद के लिए तलाशते हुए। सह गए सितम ज़िन्दगी का जिंदगी के लिए, हर […]

Mar 24, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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🌹विक्रांत राजलीवाल एक परिचय।🙏

नमस्कार प्रिय पाठको एव ह्रदय अज़ीज़ श्रुताओं, अक्सर कुछ व्यक्ति मुझ से संदेशक एव e mails के द्वारा मेरा परिचय पूछते है तो उन सभी महानुभवों समेत अपने समस्त चाहने वालो के लिए मैं पुनः अपना एक लघु परिचय यहाँ उपलब्ध करवा रहा हु। मित्रों मैं एक स्वतंत्र लेखक, कवि, शायर एव कहानीकार-नाटककार हु। मेरी […]