Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Feb 16, 2019
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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🕯 एक शाम पुलवामा शहीदों के नाम ( एक शोकाकुल Live कार्यक्रम)

एक शाम पुलवामा के शहीदों के नाम एक भाव विभोर श्रद्धांजलि ऑनलाइन Live शोकाकुल कार्यक्रम YouTube चैनल Kavi Vikrant Rajliwal पर! 17/02/2019 रात्रि 8:00 बजे। एक शाम पुलवामा के शहीदों के नाम। यह एक ऑनलाइन Live भावमात्मक एव शोकाकुल कार्यक्रम है। देश के दुश्मनों ने देश के ह्रदय पर जो यह एक बेहद गम्भीर घाव […]

Feb 16, 2019
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🕊 सपूत।

ग़मगीन इस रात्रि की क्या कभी कोई सहर हो भी पाएगी। पूछता हूं मैं कि हो गया जिसका सपूत शहीद, कोई सहर उस माँ के भी आसुओ को कभी पोछ भी पाएगी।। हमे सुलाने को एक चैन की नींद, सो गया है वो। महफूज वतन को करने के लिए, शहीद हो गया है जो।। हर […]

Feb 15, 2019
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आहत ह्रदय।

आहत ह्रदय सहज ही हो जाता है मेरा,छल्ली घावों को एक घाव नया मिल जाता है जब। कहने को है दुखद ह्रदय की व्यथा अनन्त, कुछ कहते, कुछ सुनते मगर भर जाए व्याकुल कंठ जब।। निर्मोही ये संसार हुआ, हर बात सियासत से हुए जब। एहसासों की बात नही, हर एहसास निरर्थक हो जाए जब।। […]

Feb 14, 2019
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अधूरा एहसास

जिस्म से रूह का रिश्ता है हमारी शायरी। एहसासों की एक ईमानदारी है हमारी शायरी।। हर एहसास मिलते है रूह से जब, होती है मुक़म्मल तब हमारी शायरी। हर दर्द को सकूं, ज़ख्मो को मरहम, होती है एक एहसास हमारी शायरी।। ये माना हमने के क़ातिल ये जहां है सारा, क़त्ल हर एहसासों का हर […]

Feb 14, 2019
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दर्द ए एहसास।

रोशन हर चिरागों से कह दे कोई जा कर के, रोशनी न करें आज ये दिल कुछ उदास है मेरा। बहती हुई हवाओ ए सुनी मेरी फिज़ाओ, सुन सको तो सुन लेना एक आह, टूटे अरमानों से कभी निकलती थी जो मेरे।। जख़्मी हर एहसासों से आरज़ू कब की मर चुकी है ज़िंदगी, हर सांस […]

Feb 10, 2019
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🕊 एक खेल जिंदगी। (With My YouTube’s Live video link)

जीवन के हादसे, कब खेल बन गए। ये खेल हादसों के, अब सच्चाई बन गए।। बेहोशी से हो गयी, हार पर हार। हर बार हो गया, दिल पर वॉर।। एहसास चेतना का जब हुआ। बन गया खेल ये फिर हादसों का।। न जाने कमी क्या हर बार रह जाती है। रोशनी दिख कर कहि क्यों […]

Feb 10, 2019
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जशन ए बरबादियाँ

आप मारते हो किलकारियां अपनी हर एक बात पर, हमे होश भी नही के कहाँ खो गए है हम। आप के घर जश्नों की महफिले रोशन होती है हर रोज ही, हमे दो पल सकूं भी फुर्सत से जो नसीब नही हुआ आज तक।। आप कहते है कि ख़ुशनुमा है आपके आंगन का मौसम आज […]