Author, Writer, Poet, Drama and Story Writer Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

July 22, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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🌹 एक इंतज़ार… महोबत। (दर्दभरी नज़्म श्रंखला दास्ताँ के तहत मेरी पहली नज़्म दास्ताँ) With the video link of my YouTube channel

❣️ मेरी इस दर्दभरी नज़्म दास्ताँ एक इंतज़ार…महोबत। को मैने स्वंय की आवाज़ और अंदाज़ ए बयानगी के साथ रिकॉर्ड कर के आज ही अपने YouTube चैनल Vikrant Rajliwal पर अपने सभी चाहने वालो के लिए अपलोड किया है। मेरी एक दर्दभरी नज़्म दास्ताँ का स्वयं मेरी आवाज में रिकॉर्डिड मेरी एक नवीनतम वीडियो का […]

July 6, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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ज़िन्दगी

हर तन्हा कदम आपका हौसले से भरा, मिला देगा जल्द ही काफ़िला तुम्हे खोया हुआ। जो ना हो साया साथ अपना कोई, तो गम ना कर, हर तन्हाइयों से महोबत को गले लगा लेगा अपने दीवाना।। हर आहत से अनजानी, छुटती सी मेरी कलम, टूटते हर एहसासों से तड़प जाती है मेरी कलम। हर वाक्या […]

June 10, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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रेप। / Rape

रेप! कहने को तो एक शब्द होता है। परन्तु इस शब्द रेप की वास्तविकता अत्यन्त ही भयानक होती है। रेप और रेपिस्ट? क्या रेप करने वाला ही रेपिस्ट होता है या जिन्होंने वह अनैतिक हालात उतपन किए क्या कहि ना कहि वास्तविक दोषी वही तो नही होते? यदि उन व्यक्तियों ने, जिन्होंने एक मासूम को […]

June 10, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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जब हमें जरूरत थी उनकी तो हम उनके किसी भी काम के ना थे। जब पड़ी जरूरत उन्हें हमारी तो वो हमारे किसी काम के ना रहे।। विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। When we needed him we were not of any of his work. When they need us, then they will not be of any use […]

June 8, 2019
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One truth. (1)

A 17-year-old young boy recruits at the Rehabilitation Center. And with every passing moments, he begins to remember every single sentence of his life one by one. With whose influence an infallible change in his life has come easily. Some changes may be positive and some of them may be negative. Do you know that […]

June 8, 2019
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एक सत्य। (1)

एक 17 वर्षीय अबोध युवक जब रिएबीटेशन सेंटर में भर्ती हो जाता है। एव हर गुजरते लम्हों के साथ उसे उसके जीवन के वह प्रत्येक वाक्य एक एक करके स्मरण होने लगते है। जिनके प्रभाव से उसके जीवन मे एक अचूक परिवर्तन सहज ही आ गए। जिनमे से कुछ परिवर्तन सकरात्मक हो सकते है एव […]

May 28, 2019
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दर्द। (नई ग़ज़ल)

जब खाई शिखस्त हमनें, अपनो के हाथों ही खाई, नही पाए पहचान जो हाथ वो खंजर उतारा दिल मे बेदर्दी से जो गया। हो कर बेपरवाह ज़िन्दगी से, सलूख ज़िन्दगी के हम सीखते रहे, जान हर सलूख जिंदगी के, जान जिंदगी की निकलती रही।। दर्द हर हक़ीक़त का करते रहे जान कर भी नज़रंदाज़ हम […]