Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

June 8, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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एक सत्य। (1)

एक 17 वर्षीय अबोध युवक जब रिएबीटेशन सेंटर में भर्ती हो जाता है। एव हर गुजरते लम्हों के साथ उसे उसके जीवन के वह प्रत्येक वाक्य एक एक करके स्मरण होने लगते है। जिनके प्रभाव से उसके जीवन मे एक अचूक परिवर्तन सहज ही आ गए। जिनमे से कुछ परिवर्तन सकरात्मक हो सकते है एव […]

June 2, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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ट्वीट्स। My Twittes (एक लघु संग्रह )

✍️ यह एक लघु संग्रह है बीते कुछ दिनों में मेरे मैन ट्विटर अकाउंट और बैकअप ट्विटर अकाउंट के कुछ दिल को छू देने वाले ट्वीट्स के। 1) @vikrantrajliwal 2) @RajliwalVikrant 3rd one है @VRajliwala This is a short collection of my main Twitter Twitter accounts and some of my backup Twitter Twitter accounts that […]

May 20, 2019
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✍️ मेरी क़लम।

मैंने बीते कुछ वर्षों के दौरान हम सब के इस सभ्य समाज पर और लगभग सभ्य समाज के हर वर्ग चाहे वो धनी हो या निर्धन। कोख़ में पलती लड़की और उसके जन्म से भयभीत होते कटरपंथी विचारधारा के व्यक्तियो के भाव व्यवहार हो या विकृत होती जा रही राजनीति। संसार से कट एकांकी जीवन […]

May 15, 2019
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एक दर्पण। // A Mirror.

कल तक जो अय्याश थे आज साधु हो गए है। कल तक जो हाथ बांधे खड़े थे आज उन्ही के हाथों शमशीर है। कल तक जो पनतियो में प्रतीक्षा से बेठे थे आज वही खुद से शहंशाह हो गए है। औकात से बाहर जाकर एव खुद को ही शहंशाह समझना भूल हो सकती है उनकी, […]

May 11, 2019
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अन्धकार और उजाला

अन्धकार और उजाला काव्य नज़्म रचना मेरी प्रथम प्रकाशित पुस्तक एहसास से है। जिसका प्रकाशन वर्ष 2016 में जनवरी माह में दिल्ली विश्वपुस्तक मेला में संयोग प्रकाशन शहादरा द्वारा किया गया है। इस रचना के माध्यम द्वारा मैने एक नशे से ग्रस्त व्यक्ति के दर्द को अपनी लेखनी के द्वारा व्यक्त करने का एक प्रयास […]

May 5, 2019
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🇮🇳 राजनीति एव धर्म। // 🇮🇳 Politics and religion

🕯️ अभी खबरों के द्वारा ज्ञात हुआ कि कुछ चन्द देशद्रोहियों ने एक बार पुनः हिन्दू धर्म पर लांछन लगाते हुए समाज में एक भय का वातावरण उतपन करने का एक अत्यंत ही घिनोना प्रयास किया है। सत्य है राजनीति जब धर्म की आड़ में अपनी स्वार्थी रोटियां सेंकने पर विवश हो जाती है ना, […]

May 1, 2019
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👷 मजदूर।

अच्छे दिन आएंगे जरूर जल्द, जाग जाएगा हिंदुस्तान सम्पुर्ण जब। नही सोएगा भूखे पेट गरीब कोई, करेगा इंसाफ, इंसाफ से स्वम् जब।। कामगार, मजदूर का रुक जाएगा शोषण जब, कहता है दिल अच्छे दिन अजाएँगे जब।।। मजदूरी करता है खाली पेट मजदूर जब, खून पसीना बहाता है खड़ी दोपहरी जब। खून पसीने से आबाद है […]