💥 Truth is a cultural belief.

FB_IMG_1536414617181Often, I read about the ancient Vedic history that Arya was an important class belonging to Hindu religion that came from Europe.

But I believe in our Hindu religion and Goddesses, Puranas, Vedas and Culture of our India, that it may be that Aryans reside in Europe or an ancient royal class of Arya is there.

But it does not seem to suggest that the Aryan had come from Europe in India, the possibility of this fact appears to be equally non-existent while being shuddering. On the contrary, the Aryans had gone towards Europe for years, the possibility of this fact is excessive. Not only this, I am not saying that friends are also an important fact behind this when India was living like a primitive tribe in the Stone Age, at that time India was passing through a golden age of its golden age.

And it can also be that at the time when this fact was given to this fact, India was a helpless country bound by chains of slavery, and by breaking those cultural beliefs and beliefs of India, a conspiracy to eradicate India’s culture Negative try can also happen!

The above thoughts are my personal opinion of Swamy which is inspired by my Hindu religion and mythological cultural beliefs of India.

Thank you.

Written by Vikrant Rajliwal

(This is a translation of my Hindi article in English, if any mistake has been made in error, then I apologize.)

3/12/2018 at 21:30 pm

🙏 एक सूचना।

नमस्कार प्रिय पाठकों एव हर दिलाज़िज़ श्रुताओं,

मित्रों आ रहा हु इस शक्रवार रात्रि 9:00 बजे Live आपके अपने YouTube चैनल Vikrant Rajliwal पर अपनी एक आगामी अप्रकाशित नवीन काव्य व्यंग्य रचना मंत्री जी के साथ सिर्फ और सिर्फ आपके लिए। कृपया समय से आप सभी प्रियजन आपके अपने यूट्यूब चैनल Vikrant Rajliwal से जुड़ जाए।

जिससे आप सभी प्रियजनों को मेरी इस आगामी काव्य व्यंग्य रचना का Live आनन्द प्राप्त हो सके।

धन्यवाद।

आपका अपना विक्रांत राजलीवाल (स्वंत्रत लेखक)

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💥 self-esteem.

The tree bends with the burden of its fruits, its desire to eradicate hunger from hunger, humility by its nature.

Human beings have begun acquaintance with self-respect, with their own self-esteem by the virtues of each and every virtue ..

Written by Vikrant Rajliwal
19/09/2018 at 19:47 pm

(This translation is a Hindi-language poem written by me, whose name is self-respect. The translation of which is done by me and whose central point is inspired by the spirit of Spirituality and Self-esteem.)

(Republish)

Heart’s of mother.

In which my whole world,

She is my pampering and love

Gives me happiness

I do not want to forget

Have nurtured, have given love

Yes he is a mother who always pamper me

and love

Of course, old and shabby, from the body

Even though, for her child, those dreams of

union

Every time she lives, she is happy, she

takes her children

Every misery by demanding

Do not ever hurt you mother’s heart

It is God who worships is also his where

That is the mother’s heart, that is the

mother’s heart, that is the mother’s heart …

Written by Athour Vikrant Rajliwal

(Translation one of my Hindi poetry माँ का दिल by Vikrant Rajliwal)
(Republish at vikrantrajliwal.com)

💥 सच्चा नाम।

💧 करता हूँ महसूस आत्मा से अपने, अस्तित्व उस ईष्वर का।

दिखाता हैं राह तन्हा जीवन मेँ जो ज़िन्दगी को ज़ीने का।।

नही छोड़ता थाम के हाथ, चाहें भूल ही क्यों न जाये, नादाँ उसको आज का स्वार्थी इंसान।

हर रूप मेँ उसका ही है अस्तित्व, राम कहो या कहो उसे तुम रहीम।।

बिन मांगे ही करता हैं दुआ हर पूरी राम वो रहीम।।।

जल जाता हैं ह्रदय ज्ञान का दीप।

करो न देरी आ जयो अब तुम उसके समीप।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

(Republish at vikrantrajliwal.com)

घुटती उम्मीद।

देश के किसी शहर में हो या देश के किसी गाँव में।

पीड़ा से हैं जो भी पीड़ित, पड़े हैं छाले जिसके पाव में।।

जी रहा हैं घुट घुट के जो, किसी अपने की एक तलाश में।

खड़ा हैं राह सत्य अब भी जो बदलाव के धुंधलाते उस साये के बदलाव के एक इंतज़ार में।।

मिट-मिट के भी, मिटने नही दी हैं जिसने, धुंधलाती हर एक आशा, धुन्धलाते अपने मन में।

मर मर के भी है जो जिंदा, मरने नही दी है पर जिसने मरती हर जीवन आशा जिंदा जो अपने मन मे।।

ठग जाता है बेशक से हर बार वो, देख के दर्पण सचाई का।

लिप्टा हैं तंगहाली से, भरता हैं फिर भी दम हमेशा वो अच्छाई का।।

जी हाँ, मैं भी हूँ वही, एक आम आदमी, जूझता हैं हर क्षण हर रोज़ ही जो।

खुद अपने से, बदलने को रूठी है तक़दीर न जाने क्यों अपनी जो।।

जी हाँ, करता हूँ बगावत मै भी खुद ही खुद से, मरता हू हर रोज ही जो।

जीने को, दम तोड़ती उम्मीद से, अभी शायद जिंदा है जो।।…पर!

रचनाकार विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।

(पुनः प्रकाशित चतुर्थ पन्ति के भावों में कुछ विस्तार के उपरांत जो अति आवश्यक थे उस पन्ति के भावो को समझने के लिए श्री विक्रांत राजलीवाल जी के द्वारा)
vikrantrajliwal.com

💥 शुभ मंगलम।

🙏 नमस्कार प्रिय प्रियजनों,

आज मैं विक्रांत राजलीवाल अपने समस्त प्रिय प्रियजनों एव साहित्य प्रेमियों कि सुख समृद्धि के लिए एक आत्मशांति की प्रार्थना करता हु।

💥आत्मशांति प्रार्थना।

हे ईष्वर हमे आत्मशांति दो

उन परिस्थितियों को स्वीकार करने

की जिन्हें हम बदल नही सकते

हिम्मत दो

उन परिस्थितियों को स्वीकार करने

की जिन्हें हम बदल

सकते है

और हमे ऐसी सद्बुद्धि दो

जिनसे हम इन दोनों का

भेद जान सके

विक्रांत राजलीवालLogopit_1541516320205.jpg

एक एहसास है संगीत।

🌅

सुप्रभात मित्रों,

ये दिल जब भी कुछ उदास होता है तो अख़्सर मैं यह संगीत सुनता हूं। जो मुझ को और भी उदास कर देता है और मेरी उदासी एक गहन चिंतन में तब्दील हो जाती है।

संगीत जिससे कुछ टूटी यादें फिर से जुड़ जाती है।
संगीत जो हमे किसी के न होते हुए भी उसके होने का एक एहसास करवाता है।

हक़ीक़त एव स्वप्न का एक साथ जो हमसे एक परिचय उपलब्ध करवाता है वह है संगीत।

जिन एहसासों को हम वास्तविकता में नही जी पाते, उन्हें जो जीवत रखता है वह है संगीत।

आशा करता हु आप मेरी भावनाओ को शायद कुछ हद तक समझ एक महसूस कर पाए।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

24/10/2018 at 08:21 am

It’s true.

1535089502788The man who tries to suppress the tone of truth.

The truth is that the universe has completely destroyed its complete destruction..

It is true that the path of truth that is holding the arm, on the path of truth.
The truth is that the universe has perfected its development..

Written by Vikrant Rajliwal
Translation of my hindi poetry सत्य है। by Vikrant Rajliwal

21/10/2018 at 14:57 pm