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मोहब्ब्त।/Love (Mohabbat)

यह मेरी यानी कि आपके अपने विक्रांत राजलीवाल की नई ग़ज़ल है।

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🌹 बेगुनाह मोहब्ब्त। (दर्द ए मोहब्ब्त की एक दिलकश दास्ताँ) Republished with Facebook Live Video!

वक़्त की चादर पर जो अब एक गुनाह हो गया। समझा सनम को जो बेवफ़ा तो एक गुनाह हो गया।। दिल को उस के मासूम को एक इल्ज़ाम जो हमनें दे दिया। खुद ही मार कर दिल पर फिर ख़ंजर ख़ूनी जो दिल रो दिया।। जिस्म से बूढ़ा अब अपने जो हो गया हूं। झुर्रियोंContinue reading “🌹 बेगुनाह मोहब्ब्त। (दर्द ए मोहब्ब्त की एक दिलकश दास्ताँ) Republished with Facebook Live Video!”

एक एहसास-ज़िंदगी।

ज़िंदगी की कसौटियों से रूबरू होती हुई एक ग़ज़ल।

🖤 The Reality.

🕊️ Birds knows the principle of this world, the same person is alive here who has also shed his blood to save himself. Who’s mother, who’s father is here? The one who has power is the same mother, the same father is here. There are a lot of bookish things in this wild world, asul,Continue reading “🖤 The Reality.”

🖤 हक़ीक़त।

एक सत्य जो आज भी कही खामोश खड़ा है। /A truth that still stands silent today.

💥 Recovery Man Author Vikrant Rajliwal

💥
Dear Loved One’s,My First Introduction video is uploaded now!

Video link is mentioned in below!

https://youtu.be/oEdfhLIaUwE

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https://youtu.be/oEdfhLIaUwE 🙏💖💖

🌹 दर्द दिल का उत्तर गया। (ग़ज़ल) विक्रांत राजलीवाल।

दर्द दिल का उत्तर गया, हर अल्फ़ाज़ में मोहब्ब्त कोई खामोशी सी साथ अपने लिए। हर जख्म भी आतुर है बिकने को, नाम ए मोहब्ब्त वो नाम महबूब का कर दिया बदनाम सरेराह, हर अश्क़ भी मेरे बन गए, खुद एक मोहब्ब्त की कोई दास्ताँ।। ये कलम धड़कती है मेरी, हर धड़कन से एक शोरContinue reading “🌹 दर्द दिल का उत्तर गया। (ग़ज़ल) विक्रांत राजलीवाल।”

💥 एक एहसास! सत्य से प्रेरित है जो। (विक्रांत राजलीवाल) ✍️

अक्सर कई बार कई चिरपरिचित एवं अलग अलग व्यक्तित्व के व्यक्ति अक्सर मुझ से पूछते है कि विक्रांत राजलीवाल जी आप अभी कुछ समय पूर्व तक अनपढ़ 2008 तक(10th pass) की श्रेणी में थे। और आपको 2004 मे लगभग 19 महीने तक पुनर्वासकेन्द्र (रिएबीटेशन सेंटर) में रहना पड़ा था! यहाँ वर्ष की वास्तविक स्थिति काContinue reading “💥 एक एहसास! सत्य से प्रेरित है जो। (विक्रांत राजलीवाल) ✍️”

रहे आबाद ये दुनिया। (ग़ज़ल)

रहे महफूज़ ये दुनिया, घरों में रोक लो दुनिया, बचा लो खुद को क्रोना से, रहे आबाद ये दुनिया। घिर आई घटा है जो, जहरीली जहरीली, दम घोट देगी वो, धड़कने रोक देगी वो, हो कर दूर दुनिया से, बचा लो ये दुनिया।। वो खुली हवा, वो आज़ादी, जल्द ही लौट आएगी, देखना एक रोज़Continue reading “रहे आबाद ये दुनिया। (ग़ज़ल)”

👥 एक दर्द। (क्रोना एक, दर्द अनेक।)/👥 A Pain. (Crona is a but pain many.)

हमने पूछा जो एक राहगीर से कि लॉक डाउन में क्या करते हो आज कल! वह मुस्कुरा कर रोने लगा; बगल में उसके एक फावड़ा था जो, आँखों से बहते आँसुओ से बेबसी के उसके वो, बेबसी से भीगता रहा।  जी हां वो मजदूर था मेरे देश का, जो दूर अपनो से तड़पते हुए ,Continue reading “👥 एक दर्द। (क्रोना एक, दर्द अनेक।)/👥 A Pain. (Crona is a but pain many.)”