🌹 टूटा गुलाब, बिखुड़ी जो पंखुड़ियां; हर जख्म महोब्बत के नासूर हो गए।
याद में एक सितमगर कि ए दोस्त; हम जीते जी ही जो फ़ना हो गए।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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हम तुम्हें ना पा सकें और तुम हर बार हमारे मासूम एहसासों का कत्ल करते गए।

नही एतबार अब हमें ख़ुद के एहसासों पर शायद, फक्त यकीं एहसासों पर तुमरे हम जो करते गए।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

मेरा एक Your qoute पर लिखा गया एक दर्द।
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एक सूचना।

🌅 सुप्रभात मित्रों शीघ्र ही आपको मेरी ब्लॉग वेबसाइट पर प्रकाशित मेरी रचनाओँ एवं कहानी के संग्रह के साथ ही ; मेरी प्रथम विस्तृत कहानी पाठन हेतु उपलब्ध करवा दी जाएगी।

जिसके शीर्षक से आपको शीघ्र ही सूचित कर दिया जाएगा। कृपया अपना अनोमोल प्रेम स्वरुप आशीर्वाद प्रदान कीजिए।

कवि शायर एवं कहानीकार विक्रांत राजलीवाल।

👥 टूटता यकीं।

जब आपको बार बार खुद अपने आप को अपने रिश्तों का एहसास करवाना पड़े। कि वह मेरा मित्र है, वह मेरे पिता जी, वह मेरी माया जी, या अरे हा वह मेरी पत्नी और बच्चे ही है। तो समझ जाना वह ड़ोर जिसे यकीन कहते है रिश्तों पर, कहि खो सा गया है।

🕯️ टूट गई ड़ोर ए ज़िंदगानी, एहसास यह यू ही अचानक से तो नही।

खाई है हर बार शिखस्त खुद करके यकीन, एहसासों पर अपने जख्मी।।

ये हालात जो बर्बाद से मालूम होते है वो यू ही अचानक से तो नही।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

खामोश एहसास।

भूतकालीन जीवन के कर्मों पर लगा कलंक; अपने जिस्म में बहते हुए लहू के आखरी कतरो से भी जब मिटा ना सके। हर बढ़ते कदम से खुद को जब हम और भी तन्हा महसूस करते गए।। हर आँसू बेमाने और ये ज़िंदगी, ये साँसे, ये धड़कती हर धड़कने इल्जाम कोई बेहूदा सा सिद्ध होने लगे।

आज दिल और रात स्वयं को सुधार के मार्ग पर किसी प्रकार स्थिर रखते हुए। जिंदगी के प्रत्येक क्षण सत्य का सामना करते हुए। गैरो की क्या बात करू खुद अपनो से झूझते हुए। अनजान चेहरों के समक्ष, अंजान माहौल में अपने जीवन पर लगे कलंक को धोते हुए। जब हिम्मत टूट जाती है। जिन्दगी खुद जिन्दगी को ठोकर मारने पर विवश हो जाती है। तब भी स्वयं को किसी प्रकार से सम्भालते हुए।

ऐसे निर्मोही कठोर मार्ग पर सत्य को थामे हुए; साक्षरता को अपना एक मित्र, और अपनी रचनाओं को अपना जीवन मानते हुए। चले जा रहा हु; हर कदम से स्वयं के समीप और अपनो से दूर हुए जा रहा हु। आदत नही अपना दुख बयां करने की फिर भी हर इल्जाम को बेदर्द जिंदगी के ख़ामोशी से सहता जा रहा हु। हा मैं एक रचनाकार हु जो अपनी कलम से अपने जीवन के कलंक को मिटाने का एक असफल प्रत्यन करते हुए बस जीवन को जिए जा रहा हु; हा बस जिए जा रहा हु; हा बस जिए जा रहा हु।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

🌹 सुलगते एहसास।

ना जिन्हें दिन को है सकूँ साँसों में; ना रातों को है आराम।

हम है वो जो रहते है हर लम्हा लेकर धधकती धड़कनों में सुलगता एक अंगार।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

🕯️🏷️एहसास।/🕯️🏷️ My Feeling's.

आज किसी ने पूछा कि क्या आप शायरी के कार्यक्रम के लिए प्रतिष्ठित संस्थाओं से सम्पर्क के इच्छुक है तो हम आपकी भेंट करवा सकते है?

तो मैंने अत्यंत ही सरल शब्दों में उत्तर दिया कि जी शुक्रिया परन्तु साहित्य के मसले में मैं किसी किंग से कम स्वयं को नही समझता हूं। यस आई एम ए किंग ऑफ़ एक्सप्रेस मय ओं फीलिंग्स थ्रो मय पोएट्री 📝।

इससे अलग मैं चपड़ासी भी हु, क्लर्क भी हु, ग्रेजुएट हु, वन ईयर कम्प्यूटर कोर्स किया है। टाइपिंग जानता हूं। जीवन में कड़ा संघर्ष करने के उपरांत, 17 वर्ष की उम्र में पुनर्वास का कठोर दंड भुगतने के उपरांत, जीवन के प्रत्येक क्षण सत्य का सामना करते हुए। 10वी से दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातक, कम्प्यूटर कोर्स, टाइपिंग सिख सका हु। हा मै एक मामूली आदमी के समान कार्य करता हु।

परन्तु यहाँ साहित्य का विषय आता है तो मै विकाऊ नही, आई एम ए किंग। मैं स्वयं के लिए लिखता हूं, गाता हु, रिकार्ड करता हु। अपनी सेल्फ पब्लिश्ड किताब प्रकाशित करवाता हु। क्यों? क्योंकि ई आम नॉट फ़ॉर सेल।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल।

Today someone asked if you are willing to contact prestigious institutions for the program of poetry, then we can meet you?

So I replied in very simple words, thank you, but in the matter of literature, I do not think of myself as less than a king. Yes I’m a King of Express May On Feelings Through My Poetry.

Apart from this, I am a peon, a clerk and a graduate, have done one year computer course. I know typing After struggling hard in life, at the age of 17, after facing the harsh punishment of rehabilitation, facing the truth every moment of life. I graduated from Delhi University from 10th, computer course, learned typing. Yes, I act like a modest man.

But here comes the subject of literature, so I am not sold, Yes, I MA King of my literature. I write for myself, sing, record. I get my self published book published. Why? Because I am not for sale.

Thank you.

Vikrant Rajliwal.

एहसास ए ज़िन्दगी। With YouTube Video Link.

रुक गए है जो लम्हे, ठहर गयी ये जिंदगी, 
टूट गया जो राही, जुड़ती अब किसी उम्मीद के साथ।

छूट गए है जो साथ, धुंधला गए जो अक्स, 
नजरो से छलकते, हर पैमानों के साथ।।

उड़ते हौसलो से एक उम्मीद, रुकी सांसो से, छीलते जख़्म, 
हर ज़ख्म नासूर है मेरे, घुटती हर उम्मीद के साथ।

एक निसान, दर्द ए ज़िन्दगी, दब गई जो चाहते, 
दम तोड़ते  अक्षर, जलती किताब, टूटती अपनी कलम के साथ।।

एक पथ है अंधेरे से कायम, टूटे कदम, चल रहा एक राही,
हर कदम से दबाए है साए कई, उठे जो ज़हरीले काटो के साथ।

हर आह से मिला है जख़्म ए दिल, आईना ए हकीकत, लगा जो ख़ंजर जख्मों पर मेरे, मासूम अहसासों के साथ।।

क़लम तड़पती है मेरी, अश्क ए श्याही, हाल ए दिल करते है बयां, 
साए जिंदगी के, बैठे जो राही मेरी कब्र के साथ।

चल रही है सांसे, बेरुखिया जो खुद से, चटका जो आईना ए दिल,
जख़्म रूह पर मेरे, टूटी अपनी कलम के साथ।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
(Republish at vikrantrajliwal.com)

YouTube Video Link is https://youtu.be/RX9_9T9X_Ec

दर्द ए मोहब्ब्त। With वाच "दर्द ए मोहब्ब्त। ( विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित एवं ओरसरित। )" on YouTube

हो गया हैं फ़ना, एक दीवाना जो कहि,
सनम से अपने, बिछुड़ जाने के बाद।

बिखर गयी हैं चाहते, अश्क़ जख्मो पर जो कहि,
टूट गयी सांसे, दिल उसका टूट जाने के बाद।।

हो गया है दफ़न, परत समय कि में जो कही,
रह गए निसान ए इश्क़ बाकी, उसके चले जाने के बाद।

जल गयी है चिता, मासूम-अरमानो की उस के जो कहि,
एक अहसास ये जुदाई, बाकी ये चीखती तन्हाई, उसके खो जाने के बाद।।

एहसास है धड़कनो को, खामोश धड़कनो का, ज़ुल्म धड़कनो पर उस के जो कहि,
सो गया जो मुसाफ़िर, राह ए महोबत, अपनी लूट जाने के बाद।

चाहत हैं ज़िन्दगी, मजबूरी अब भी ये महोबत, चल रही  जो जिंदगी जो कहि,
उखड़ रही जो सांसे, एक दर्द बन्द सीने में कहि, धड़कने 
उस की रुक जाने के बाद।।

विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।
(Publish at vikrantrajliwal.com)

क़त्ल ए एहसास। With YouTube video link.

नशा है फ़िज़ाओं में आज, बहकी-बहकी सी सांसे, कुछ-कुछ मदहोश सी है।

साथी है साथ में आज, उफ़ान ए धड़कन, अंजाम ए हक़ीक़त, हैरानी सी है।।

रास्ते है साथ में आज, तलाश ए हौसले, मंजिले कुछ-कुछ अंजान सी है।

जशन है साथ माहौल में आज, निसान ए उदासी, अब भी मेरे साथ सी है।।

आरज़ू है साथ मे आज, अक्स ए जुदाई, पहेलु में खुशियां, धड़कने फिर भी हैरान सी है।

अल्फ़ाज़ है साथ रूह में आज, ख़ामोश ये जुबां, कत्ल ए एहसास, कलम मेरी दम तोड़ने को है।।

कलम है हाथ मे आज, नासूर ए जख़्म, खून ए श्याही, फड़कती हर एक नब्ज़, गुम सी है।

यक़ीन है साथ साए में आज, उदास ये लम्हे, इंतज़ार अब भी सांसो में, हर साया साथ छोड़ने को हैं।।

विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।

शायरी।

🌹 आज भी दिखती है बोतल शराब की, होती है महसूस वो सुगंध उसकी समीप अपने जैसे बहार की।

जी हाँ मोहब्ब्त है आज भी मुझ को सुर्ख लहू के रंग सी, बेटी जो अंगूर की, वो है मोहब्ब्त पहली मेरी, बोतल शराब की, बोतल शराब की, बोतल शराब की।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।