Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

June 12, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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Resolution Power. (Translated by Vikrant Rajliwal)

You need to have a positive feeling that you have wasted the precious time due to the misdeeds and misdeeds of your past, and by adopting the path of truth in the current era, while improving your own dilapidated person, Use of time and your persistence on that divine path can be a path of […]

May 28, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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दर्द। (नई ग़ज़ल)

जब खाई शिखस्त हमनें, अपनो के हाथों ही खाई, नही पाए पहचान जो हाथ वो खंजर उतारा दिल मे बेदर्दी से जो गया। हो कर बेरवाह ज़िन्दगी से, सलूख ज़िन्दगी के हम सीखते रहे, जान हर सलूख जिंदगी के, जान जिंदगी की निकलती रही।। दर्द हर हक़ीक़त का करते रहे जान कर भी नज़रंदाज़ हम […]

May 26, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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एहसास

ये रात भी बीत जाएगी और एक एक कर के दिन तमाम, भागते रहे करने को ख़िदमत, खड़े बांध कतार में तुम अपने हाथ। करि ख़िदमत शहंशाहों की उम्र तमाम, मिला एक लम्हा भी सकूँ का फिर भी नही, करा नज़रंदाज़ साए को अपने, छोड़ अपनो का साथ।। कर दिए हर लव्ज़ महोबतों के बेअसर […]

May 24, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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अधुरे एहसास। (नई ग़ज़ल)

ज़िन्दगी में चेहरे धुंधलाते से पड़ गए जितने, देखा है हमने ज़िन्दगी में अक्सर हमे वही चेहरे याद रहे। रहे ना रहे हम ज़िन्दगी में ए ज़िन्दगी फ़क़त रह जाएंगे निसान ज़िन्दगी में ज़िन्दगी के जो हमने कभी मिटने नही दिए।। एहसास हैं मुझे हर लम्हा उन एहसासों का अपने, धूल जिन पर बदलते वक़्त […]

May 24, 2019
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एहसास

राह ए ज़िन्दगी में निशान ए टूटी कलम देते है गवाही जो अक्सर कि गुज़रे थे मुझ से पहले भी राह ए बरबादियों से बर्बाद क़लमकार कई। देती है सुनाई ख़ामोश धड़कने वीरानियों में जो अक्सर, वो सदा है टूटे दिल की बेजां धड़कनो की मेरे। विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। 24/05/2019 at 06:20 pm

May 20, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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✍️ मेरी क़लम।

मैंने बीते कुछ वर्षों के दौरान हम सब के इस सभ्य समाज पर और लगभग सभ्य समाज के हर वर्ग चाहे वो धनी हो या निर्धन। कोख़ में पलती लड़की और उसके जन्म से भयभीत होते कटरपंथी विचारधारा के व्यक्तियो के भाव व्यवहार हो या विकृत होती जा रही राजनीति। संसार से कट एकांकी जीवन […]

May 18, 2019
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सुलगते एहसास।

आज फिर से मौसम ने अँगड़ाई ली है बदलते वख्त ने भी वख्त की दुहाई दी है। मिज़ाज अपना ना बदल देना कोई, देख कर बदलता रंग ए आसमां, रंग अपना ना बदल देना कोई।। कायम एहसासों से कायम है एहसास जितने, बदलते वख्त से मिटा ना देना तुम कायम एहसास अपने। असूल ये दुनियादारी […]