Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

June 12, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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Resolution Power. (Translated by Vikrant Rajliwal)

You need to have a positive feeling that you have wasted the precious time due to the misdeeds and misdeeds of your past, and by adopting the path of truth in the current era, while improving your own dilapidated person, Use of time and your persistence on that divine path can be a path of […]

June 8, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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One truth. (1)

A 17-year-old young boy recruits at the Rehabilitation Center. And with every passing moments, he begins to remember every single sentence of his life one by one. With whose influence an infallible change in his life has come easily. Some changes may be positive and some of them may be negative. Do you know that […]

May 28, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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दर्द। (नई ग़ज़ल)

जब खाई शिखस्त हमनें, अपनो के हाथों ही खाई, नही पाए पहचान जो हाथ वो खंजर उतारा दिल मे बेदर्दी से जो गया। हो कर बेरवाह ज़िन्दगी से, सलूख ज़िन्दगी के हम सीखते रहे, जान हर सलूख जिंदगी के, जान जिंदगी की निकलती रही।। दर्द हर हक़ीक़त का करते रहे जान कर भी नज़रंदाज़ हम […]

May 20, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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✍️ मेरी क़लम।

मैंने बीते कुछ वर्षों के दौरान हम सब के इस सभ्य समाज पर और लगभग सभ्य समाज के हर वर्ग चाहे वो धनी हो या निर्धन। कोख़ में पलती लड़की और उसके जन्म से भयभीत होते कटरपंथी विचारधारा के व्यक्तियो के भाव व्यवहार हो या विकृत होती जा रही राजनीति। संसार से कट एकांकी जीवन […]

May 18, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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Religion and language.

It is true that languages ​​have been often banned in the name of religion since the ages.   When selfish politics happens, language ends up tempers.   I wish every language would be independent from selfish politics.   Everyone gets free freedom and every language is called language only ..   The relationship between the […]

May 7, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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📖 एहसास

महोबत में उनकी हमने उनको याद हर लम्हा किया, फ़क़त आरज़ू एक महोबत कि मुक्कमल अब भी बाकी है। गुज़र गए जो लम्हे तन्हा तन्हा से, दूर तन्हाइयों में दूर उनसे कहि, हिसाब ज़िन्दगी का हर गुजरे लम्हे से अभी बाकी है।। राह अंजान, हर मंज़िल अंजानी सी है यहाँ, दर्द एक हकीकत का बेदर्द […]

May 4, 2019
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हमे देख कर हौसला भी…(पढ़िए सम्पूर्ण रूप से प्रथम बार)

हमे देख कर हौसला भी खुद हौसले को अपने अक्सर जांचने लग जाता है यहाँ। पता है उसे भी कि हमने ही मुर्दा सांसो को किया है जिंदा जो कइयों की यहाँ।। ना करना गरूर उचाईयों पर अपनी कोई, हर उचाईयों को सिमट कर कदमों पर गिरते देखा है हमने यहाँ। चल सको तो ए […]