💥 Recovery is your birthright.

Recovery of which you really have the right. Recovery Through those positive actions and sacred prayers, those emotions, those rights, those honorable things and things that your addiction * addiction * has thrown you away from you and pushed you into an eternal poverty.

Poverty is of good quality, poverty is not able to accept a lack of selflessness, living a free and immersive life away from its addictions. Eliminating all these types of poverty, accepting the real person of yourself. Ever living daily with virtuous habits and for his favors and for all those devils, who are still being spent in some way while still wasting their precious lives in the wake of some kind of addiction. By praying with your conscience in your heart’s heart for your self and self-satisfaction, you can achieve your eternal life by living a daily recovery every day.
For this, you need a proper guidance and a realistic experience that will enable you to save your ability to provide a positive and positive environment through every possible step of your real experience and knowledge.

The rest of the next sequence …

Written by Vikrant Rajliwal

(Tralslation by Vikrant Rajliwal)

09/12/2018 at 21:47FB_IMG_1534055668460pm

💥 Truth is a cultural belief.

FB_IMG_1536414617181Often, I read about the ancient Vedic history that Arya was an important class belonging to Hindu religion that came from Europe.

But I believe in our Hindu religion and Goddesses, Puranas, Vedas and Culture of our India, that it may be that Aryans reside in Europe or an ancient royal class of Arya is there.

But it does not seem to suggest that the Aryan had come from Europe in India, the possibility of this fact appears to be equally non-existent while being shuddering. On the contrary, the Aryans had gone towards Europe for years, the possibility of this fact is excessive. Not only this, I am not saying that friends are also an important fact behind this when India was living like a primitive tribe in the Stone Age, at that time India was passing through a golden age of its golden age.

And it can also be that at the time when this fact was given to this fact, India was a helpless country bound by chains of slavery, and by breaking those cultural beliefs and beliefs of India, a conspiracy to eradicate India’s culture Negative try can also happen!

The above thoughts are my personal opinion of Swamy which is inspired by my Hindu religion and mythological cultural beliefs of India.

Thank you.

Written by Vikrant Rajliwal

(This is a translation of my Hindi article in English, if any mistake has been made in error, then I apologize.)

3/12/2018 at 21:30 pm

💥 Real experience

20181123_164911Always keeping your mind calm while keeping faith in your God’s grace.

Surprising in front of an experienced personality, protecting himself from all forms of addiction.

You can get a happy opportunity of your lost self-esteem and life advancement.

Are you ready to accept of your own real person, to achieve such a golden dream, which can help you to get an eternal experience of your real calmness? Which you really deserve.

Written by Vikrant Rajliwal
(Translation of my Hindi articles by me)
3/12/2018 at 00:42 am

💥 सुधार का मार्ग एव आकर्षण। (रिब्लाग)

सुधार के मार्ग पर हम प्रत्येक क्षण अपने कमजोर या विचलित होते एहसासों एव भृमित मानसिकता से उतपन भृमित विचारो का सामना करते हुए जीत के एक कदम और समीप पहुच जाते है या फिर हम अपना मार्ग बदलते हुए अपने असंगत एव असमाजिक एडिक्शन को पुनः थाम सकते है।

यहाँ से हमे ज्ञात होते है दो मार्ग और दोनों का आरम्भ एक साथ ही होता है परंतु दोनों की दिशा कदापि एक समान नही होती है।

सुधार के मार्ग पर इस दोराहा से हर एक सुधार के मार्ग के राही का सामना होना सुनिचित होता है। और इस दोराहे का आरम्भ होता है एक आकर्षण से।

जी हा आकर्षण से! सर्वप्रथम हम आकर्षित होते है अपने उस असमाजिक एडिक्शन के प्रति जिसका हम कभी सेवन करते हुए भृमित रहते थे एव उस आकर्षण के कारण यहाँ से कुछ राही जिन पर ईष्वर कि आपकी उच्च शक्ति कि एक असीम कृपा बरसती है वह अपनाते है सत्य राह को एव वह सत्य कर्मो एव सत्यविचारो कि शक्ति से अपने उस विनाशमय आकर्षण का सामना करते हुए विजय के एक कदम और समीप पहुच जाते है।

एव दूसरे वह राही होते है जिन पर ईश्वर की कृपा नही बरसती या जो राही असयमीत हो अपनी भृमित मानसिकता के वशीभूत हो कर अपने कमजोर आत्मविश्वास के समक्ष झुक कर एक समझौता कर लेते है और वह अपनी कमजोर मानसिकता एव भृमित सोच के कारण पुनः अपने असमाजिक एडिक्शन को अज्ञान वश अपना लेते है।

यहाँ हमने दो मार्ग एव दो प्रकार के राही के विषय मे जाना जिनका उद्गम स्थान एक ही दिशा से निकलता है और वह दिशा है आकर्षण एव समर्पण। परन्तु आपको यह ज्ञात रहे कि इन दोनों मार्गो के परिणाम भी दो प्रकार के होते है जैसे…

प्रथम वह राही जिन पर उनके ससँगत कर्मों के फलस्वरूप ईश्वर कि कृपा बरसती है एक जो अपने सत्यकर्मो की शक्ति से सामना करते है अपने हर प्रकार के एडिक्शन से उतपन भृमित आकर्षण का, जिसके फल स्वरूप उनके समुख होते है पुनः दो मार्ग।

1) प्रथम होता है जीत का मार्ग जो उनको उचित व्यवहारिक ज्ञान एव उचित सानिध्य से सहज ही प्राप्त हो जाती है एव उनको सुधार के मार्ग पर एक कदम और आगे की ओर बढ़ाते हुए उनकी विजय सुनिचित करता है।

2) एव दूसरा होता है उचित सानिध्य के अभाव के कारण हर विकट परिस्थितियों में अपने सत्यकर्मो एव अपने ईश्वर की शक्ति पर विशवास करते हुए एक उचित सानिध्य एव एक असल विजेता के समुख अपनी कमजोर मानसिकता को स्वीकार करते हुए उनके मार्गदर्शन से स्वम् को अपने एडिक्शन से उतपन भृमित आकर्षण से बचाते हुए जीत के एक कदम ओर आगे को बढ़ जाना।

👉 इसके विपरित दूसरे प्रकार के वह राही होते है जो सुधार के मार्ग पर चलते हुए भी अपने हर प्रकार के असमाजिक एडिक्शन के आकर्षण की ओर न चाहते हुए भी, एक उचित सानिध्य के अभाव से, वह न चाहते हुए भी अपने एक गलत कदम के कारण पुनः अपने असंगत एव असमाजिक एडिक्शन की ग्रस्त में आ जाते है जिसके फलस्वरूप उन पर उनके ईष्वर कि शक्ति की कृपा नही बरसती और वह पुनः एक ऐसे जंजाल में फस जाते है यहाँ उनको मिलता है दर्द और सिर्फ दर्द! दर्द टूटते एहसासों से टूटते रिश्तों का, दर्द एक अनजाने डर का, दर्द जो उनको उनके उस एक गलत कदम के कारण प्राप्त होता है जिससे वह बच सकते थे केवल और केवल उचित व्यवहारिक ज्ञान एव एक ससँगत सानिध्य से प्राप्त एक दिव्य ज्ञान एव प्रयोग से, वह बच सकते थे एक उचित सानिध्य से प्राप्त एक सही मार्गदर्शन के फलस्वरूप एक उचित कदम से।

👉 यहाँ से उनके समुख भी होते है दो मार्ग!

1) प्रथम जो उनको पुनः एक उचित सानिध्य कि प्राप्ति से सत्यकर्मो की ओर अग्रसर करते हुए पुनः सुधार के मार्ग की ओर प्रशिक्षित करता है। एक उनका दर्द मिटाते हुए उन्हें एक कदम और जीत कि ओर बढ़ाते हुए हमें एक आत्मशांति का अनुभव प्रदान करता है।

2) एव दूसरा होता है वह कदम जो एक उचित सानिध्य के अभाव के फलस्वरूप अपने आप को अपने असंगत एव असमाजिक एडिक्शन कि ओर एक कदम और आगे को बढ़ाते हुए हमारा एक अनन्त एव अनिचित काल तक दर्द से परिचय करवा देता है। जहाँ दुख, गरीबी, बीमारी एव मानसिक परेशानी न केवल उनका अपितु उनके अपनो का जीवन भी बर्बाद करते हुए नरक से भी बतर बना देती है।

इसीलिए सुधार के मार्ग पर उचित सानिध्य की प्राप्ति एव उचित ज्ञान एव उचिर अनुभव अति आवश्यक होता है क्योंकि विजय का मार्ग (आत्मशांति का मार्ग) उचित सानिध्यता से और भी दृढ़ होता है और यह उचित सानिध्य हमे प्राप्त होता है सभ्य एव ज्ञानीजनों के समक्ष एक आत्मसमर्पण से, उनके साथ बैठकों में एक उचित एव दिवद वातावरण में उनके अनुभवों से ज्ञान अर्जित करते हुए एक आत्मशांति का एक दिवद अनुभव प्राप्त करते हुए एव अपने जैसे अन्य सुधार के राही के इर्द गिर्द। जो हमे उचित समय पर उचित मार्गदर्शन उवलब्ध करवाते हुए हमें अपने हर प्रकार के असंगत एव असमाजिक एडिक्शन के मनमोहक परन्तु खतरनाक जहरीले आकर्षण से सुरक्षा प्रदान करते हुए हमे विजय के एक कदम और समीप पहुचा देते है।


रचनाकार, लेखक, एव विचार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।,(रिकवरी एडिक्ट at जीवन)

💥 Has a right.

IMG_20181102_081045_576This is the right of every child born in this world.
He also got education initiation and knowledge of sanskars and a right of his development ..

The above verse written by Vikrant Rajliwal (by myself) is an authentic experience, a feeling of change, a realization of Vikrant Rajliwal (Swamy), which is certified and motivated by his private life struggle, how a disorganized child (Mr. Vikrant Rajliwal ) In his raw age (2004, 18 years), by struggling with drug addiction, he was defeated by the blessings of his master, Faced with the perseverance of the complex and complex situations, not only the drugs became addicted to drugs but by transforming their illiterate life with their satyakarma, they passed 12th class from the year 2009 and graduated from Delhi University in the year 2013.

Taking inspiration from your education, taking inspiration from your education and civilized literature, in the year 2016, in January 2016, his first poetic book * Realization *, whose center point was a humiliating feeling from the civil society of all of us, to humanity, the harsh feeling of socialism and humanity. The effort is simply written and published. And now using online technology, you are constantly trying for more positive social change while sharing your hearted feelings with all your loved ones.

It seems as simple as all this is actually never really that simple. In this life, the common people also face the most complex type of confrontation while struggling for an opportunity, and a drug addiction, whether it is due to their ignorance at the age of 15 to 16 years, using drugs to get rid of drug addiction. Or who has not only consumed this addiction during that raw age with the knowledge of a particular age, but once it is rehabilitated Endra (addiction that is reached in the center), his life changes. In short, you can say this in the way that the opportunity (education and sports jumping) available only ever saved, it seems like a war, like a bitter truth, a feeling of being in front of him, Do it.

At any given time in this life, no one can get any opportunity for the development of a discharged child or person from a rehabilitation center for its development. And every opportunity is an unknowable tale of pain in itself, behind which there are hidden behind it, and only if it is helpless and suffering from the exploitation of a cruel person, her tears filled with sing of tears, a Nissan.

I hope all the dear readers can reach the real reason of writing this article.

Thank you.

Written by Vikrant Rajliwal

(Translation by Vikrant Rajliwal)

18/11/2018 at 15:35 pm

*After the error correction in republished typing. The last time was marked as 10th in place of 12th.*

💥 Feeling…🕊

Often in this world worldly people and relationships change like the changing season. Sometimes it may seem very brutal and extremely gentle towards you. There is no blame in this. Is it all the effect of changing weather? Weather, it is not rainy or natural weather that changes according to its particular season. Rather it can be a seasonal change, whose point is always the same, and this change happens according to your social and economic status.

Here selfishness and ambiguity are very important parts of this seasonal transformation feeling. A person suffering from a hungry hunger to prove his self is a very important member of this group, who can fall down to the extent of humanity in order to fulfill his selfishness by any combination, and if he gets opportunity For the sake of this mutual self-interest, it does not hesitate to strike one another.

Those who try to prove this kind of selfish, unhappy and self-righteous, Itselfs selfish character, as a changing season in Itself having a capacity to produce a cruel selfish transformation in family and social relationships, and their own cruel selfish It is known to all the maladies that exploit innocent innocent people with their cruel selfish behavior and thought of the result of change. It may be said that soon after becoming a part of the Terrible curse of God for all their misdeeds, God Himself can not protect those wicked people.

And soon all the males in this world, who have not known the innocent innocent, have been sleeping for anonymity and slander in a blind grave, including their full-fledged Cries of pain, a true feeling that this time the weather will again By changing Itself from them, when ever, has been swiftly transformed, and all the villagers like them, along with their soul, went to Fire of true. Inserting images truth incomes the feelings As a result of positive changes, unlike any penalty from punishment for their misdeeds every positive seasonal changes thinking very fierce and make them have been punished them divine fired fire to realize a truth.

As a result, there will be a true tribute to all the victims of those devils who have now fallen asleep in this deep and eternal state of death, or who have died in the death of an eternal period of eternal death Anonymity has been solved.

O God, I am Vikrant Rajliwal today, with all of my readers and those divine souls who are not born in any age in this world, even if their divine energy prevailed in this universe? I consider them as witnesses to you all those who have been exploited by any kind of exploitation in any form in any age, and whose painful voice is a help While ignoring everyone and hearing the person, giving them a cruel contribution in some way in their exploitation, they have caused a death and the cause of their death in the blindness of anonymity and in the future such justice I pray to you for all those innocent disadvantaged people and for the peace of your soul. Please give us such calmness that we have not to be born again in this cruel world and our soul can get a sense of peace.

Thank you.

His personal feeling written by Vikrant Rajliwal, inspired by his highly convincing feelings.
(Translation by Vikrant Rajliwal)

17/11/2018 at 10:20 am

(Once again I am reprinting after fixing some very shiny typing mistakes at 12:07p


💥 True Light.

It is one thing to exploit and exploit the victims from the big platforms of this civilized society and to give relief to the victims of their exploitation and to give a variety of blessings to their well-being and to get acquainted with the truth of those facts at the grassroots level It is a different way to get rid of the weaker sections of society (victim and exploited) by the exploitation of the society.

Do not know how many such innocent people are never heard from anyone. But his courage and every loud voice were crushed while trying to make him a blame or mental patient.

Today, I raise a voice from this great platform of social media for all the masses and unemployed, and pray for a peace of mind from their devoted god Paramatma for the peace of their soul.

God Himself will do justice to Him and give him a peace of mind and all his kins.

All my readers and my readers, who read the pain of this article, should give me such goodness, so that our soul can experience a sense of peace.

Thank you.

A pain written by Vikrant Rajliwal, inspired and related to his personal life experience.
(Translation by Vikrant Rajliwal)

16/11/2018 at 20:27 pm

🇮🇳 लोकतंत्र एव मर्यादा।

जब भी कभी मैं किसी न्यूज़ चैनल या सोशल मीडिया के किसी भी मंच से यह सुनता या पढ़ता हूं कि एक चाय वाला भारत वर्ष का प्रधानमंत्री बन गया है या कोई भी देश के सम्मानित प्रधानमंत्री जी के लिए यह कहता है कि एक चाय वाला प्रधानमंत्री बन गया है तो यह सच है कि मुझे उन समस्त महानुभवों की ऐसी निम्न स्तरीय मानसिकता पर बेहद आचर्य होता है।

क्या यह सच है कि देश के प्रधानमंत्री जी ने अपनी चाय की दुकान से सीधे तौर पर प्रधानमंत्री के चुनाव के लिए पर्चा भरा था और उन्होंने अपनी चाय की दुकान से अपनी लोकतांत्रिक विजय के लिए प्रचार प्रसार किया था। एव वह केवल अपनी चाय की दुकान के बलबूते ही प्रधानमंत्री का चुनाव पूर्ण बहुमत से विजयी हो कर के लोकसभा गए थे?

तो यहाँ मैं उन सभी महानुभवों से इतना ही कहूंगा कि ऐसा हो भी सकता था और हो भी जाता तो भी उसमे देश के मजबूत लोकतंत्र की ही विजय होती। परन्तु माननीय प्रधानमंत्री के पूर्ण बहुमत के साथ एक ऐतिहासिक विजय के मामले में यह तथ्य की प्रधानमंत्री का चुनाव विजयी होने से पूर्व वह केवल और केवल एक चाय वाले ही थे पूर्णतः असत्य सिद्ध होता है। क्योंकि जेसा की मैने कहा कि अगर ऐसा होता भी तो वह भी इस देश के मजबूत लोकतंत की एक विजय ही होती परन्तु देश के माननीय प्रधानमंत्री जी अपने प्रधानमंत्री का चुनाव पूर्ण बहुमत से विजयी होने से पूर्व इसी देश के एक प्रतिष्ठित राज्य के मुख्यमंत्री थे न कि केवल और केवल चाय की दुकान चलाने वाले एक चायवाले थे। इसके साथ ही मैं यह भी कहना चाहता हु की क्या वह एक चाय की दुकान से सीधा इस देश के एक प्रतिष्ठित राज्य के मुख्यमंत्री बन गए थे? यहाँ मैं एक बार पुनः उन सभी महानुभवों से यह कहना चाहूंगा कि अगर ऐसा होता भी तो वह भी इस देश के मजबूत लोकतंत्र की एक विजय ही होती परन्तु माननीय प्रधानमंत्री जी के संदर्भ में यह तथ्य भी पूर्णतः सत्य सिद्ध नही होता। क्या उन्होंने अपनी चाय की दुकान से ही सीधे तौर पर इसी देश के एक प्रतिष्ठित राज्य के मुख्यमंत्री के चुनाव का पर्चा भरा था और क्या उस समय उन्होंने अपनी चाय की दुकान से ही अपना प्रचार प्रसार किया था यहाँ मैं आप सभी महानुभवों से पुनः यह कहना चाहूंगा कि अगर ऐसा हुआ भी होता तो भी वह इस देश के मजबूत लोकतंत्र की ही एक विजय होती परन्तु माननीय प्रधानमंत्री जी के संदर्भ में यह तथ्य सत्य सिद्ध नही होता क्योंकि वह मुख्यमंत्री बनने से पूर्व अपनी राजनितिक पार्टी में कई महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे।

फिर क्यों बार बार यह असत्य कहा जाता है कि एक चाय वाला देश का प्रधानमंत्री बन गया। क्या सिर्फ माननीय प्रधानमंत्री जी पर एक व्यंग्य कसने के लिए या जो भी ऐसी निम्न स्तर की मानसिकता रखते है उन्हें ऐसा प्रतीत होता होगा कि शायद ऐसा बोलने से उनकी राजनीतिक पार्टी आगामी चुनाव विजयी हो जाएगी तो यहां मैं इतना ही कहना चाहूंगा ऐसी निन्म मानसिकता वाले व्यक्ति ऐसा कर के न केवल देश के माननीय प्रधानमंत्री जी का अपितु इस देश के गरीब का उनकी गरीबी का भी एक मख़ौल बनाने का प्रयास करते है।

क्योंकि अगर ऐसा हुआ होता कि एक चाय वाला देश का प्रधानमंत्री बन गया तो वह वर्ष, वह दिवस एव वह क्षण अपने आप मे एक ऐतिहासिक महत्व का हो जाता एव अगर भविष्य में कभी भी कोई योग्य उम्मीदवार प्रधानमंत्री बनने की योग्यता रखता हो चाहे फिर वह एक मामूली चाय वाला ही क्यों न हो उसे इस देश का मजबूत एव विश्वसनीय लोकतंत्र अवश्य देश का प्रधानमंत्री बनने का एक अवसर अवश्य प्रदान करेगा। क्योंकि अगर योग्यता हो तो एक चायवाला भी देश का प्रधानमंत्री बन सकता है यही तो हम सब के प्रिय लोकतंत्र की एक सबसे अहम और महान विशेषता है।



विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। (एक स्वतन्त्र लेखक)

(मेरे इस लेख में अगर कहि तंकन में त्रुटी हो गई हो एव उस तंकन मे त्रुटि के कारण किसी भी व्यक्ति या संगठन को तनिक भर भी ठेस पहुची हो तो अपने ह्रदय से क्षमा प्राथी हु।)

16/11/2018 at 14:45 pm

💥 Character.

 FB_IMG_1539591820037 Character character, very strange knowledge. Sometimes knowingly and unknowingly, he always bewildered. Yes, here is the subject of knowledge.

Sometimes a person can not even realize that when he speaks only in words, or because of ignorant lust, his precious charismal qualities, when his fall from the ignorance or unconsciousness of his own self And that’s going to increase.

However, if ever, that person has been blessed with God’s grace, due to the connotation of the enlightenment, or if the person has knowledge of the sleeping enlightenment, then it can be realized that on the path that he has forgotten, or Due to ignorance, it is going away, this is the path which once had a common knowledge. In fact, walking on this path has resulted in its character decline or may have happened.

It seems to me that in today’s highly occupied society, today’s human beings have not had enough time to improve themselves. And when the man in this highly organized society unknowingly let his character fall down and he can not even get the same sense of that thing, then it should not be surprising even slightly.


When the dark darkness rises, then it will be seen that his character will be innocent, when it will be his, and the innocent character will become somewhat depressed.

 It seems to me, that person’s lost character will be received again.

If the mirror of a civilized society is to shine, it is not for itself, it is also a civil society for us.

So stop and fall, you – your character, that is very horrible, which is not in itself, not only yourself but also yourself.

Then, doing yourself a tax, you own the character
Now you, yourself, have to burn yourself …

These values ​​will not be erased either by burning or by dying.
The more you drink, the more kundan will become.

Everything else is going on, making yourself a character, making life happy.

For example, there are no good people like this, for generations, the upcoming victims, the character and themselves, have to go on this path.

 Truth-non-violence and virtuous qualities, then centuries old.

 It is not easy to walk on the path of righteousness, it is all around corruption! today it is a time of dishonesty.

Even then, whatever has been done, its character is created, not only himself but also has changed, it is here that every selfless person

 Good and virtuous, whatever the person is, there is a separate identity in every society.

Whether it is a lacquer, its resistance, does not decrease bright brightness and its noble identity …

 Written by Vikrant Rajliwal

(Translation one of my hindi articles including hindi poetry चरित्र by Vikrant Rajliwal)