💥 एक संकल्प एक योगदान।

मित्रों मेरे जीवन का केवल एकलौता मकसद यही है कि मैं अपने जीवन अनुभवो से उन मासूम बालको को एक उचित दिशा का ज्ञान करवा सकूँ जो आज भी किसी ना किसी नशे की गिरफ्त में फंस कर अपना उज्वल भविष्य अनजाने ही बर्बाद कर रहे है।

काव्य शायरी नज़म ग़ज़ल दास्ताने लिखना एवं गाना केवल मेरा निजी शोक है एवं मैं जो पोस्ट करता हु की आप मेरा काव्य नज़म ग़ज़ल दस्तानों का कार्यक्रम बुक कर सकते है तो इसके पीछे केवल और केवल एकलौता कारण यही है कि मुझ को उन मासूम नशे से पीड़ित उन अबोध बालको की मदद करने हेतु बहुत सा रुपया चाहिए। जिससे मैं उन्हें कुछ मूलभूत सुविधाए प्रदान कर सकूँ। जिससे उनका उनके परिवार में पुनर्वास हो कर उनका जीवन  स्तर कुछ सुधर सके।

इसीलिए आप मेरा साहित्यिक काव्य शायरी का कार्यक्रम बुक कर के सीधे उन मासूम बच्चों को एक नया जीवन सहज ही प्रदान कर सकते है। इसके साथ ही यदि आप स्वयं किसी नशा मुक्ति या बाल सुधार कार्यक्रम के संचालक है तो आप आप ही मेरा साहित्यिक काव्य शायरी का कार्यक्रम निःशुल्क बुक कर अपना स्थान सुनिचित कर सकते है। मुझ को पूरी उम्मीद है कि जब आपके पेशेंट अपने बीच मे से ही निकले हुए किसी साहित्यकार की रचनाओँ को सुनेंगे तो उन्हें अवश्य ही आत्मशांति प्राप्त होएगी।
निम्नलिखित नम्बर के ज़रिए व्हाट्सएप पर मुझ से सम्पर्क कर सकते है

91+9354948135
दिल्ली 84

💥 नशा एवं पारिवारिक कलेश एक दूसरे के साथ साथ ही चलते है। यहाँ नशे से तातपर्य है कि जब आप का आपके व्यसनों पर नियन्त्रण शेष नही बच पाता। या फिर आप नशे के समक्ष स्वयँ को जर्जर महसूस करते हुए अपना नियन्त्र खो देते है।

जब ऐसा होता है तो आपका सामना होता है पारिवारिक कलेश से एवं तब आपको आवश्यकता होती है एक ऐसे ज्ञानी या अनुभवी व्यक्तित्व के व्यक्ति की जो आपकी उस स्थिती को समझने में आपकी सहायता कर सकें।

यदि आप भी ऐसी ही किसी समस्या से सामना कर रहे है तो आज ही विक्रांत राजलीवाल जी से यानी कि मुझ से मिल कर अपनी समस्या का 100%स्थाई  समाधान प्राप्त कर सकते है वह भी बिल्कुल निशुल्क।

क्योंकि रचनात्मक रचनाएँ लिखना मेरा शौक है एवं नशा मुक्ति से पारिवारिक कलेश मुक्ति मेरा कर्म है। मैं नज़म शायरी, दास्तानों के कार्यक्रम के लिए पेमेंट इसलिए लेता हूं क्यों कि उन रुपयों से मैं अधिक विस्तृत पैमाने पर नशा मुक्ति एवं पारिवारिक कलेश मुक्ति हेतू निःशुल्क सेवा इस समस्त संसार के उन पीड़ित परिवारों को उपलब्ध करवा सकूँ।

इसलिए आप यदि मुझ से मेरी नज़म दस्तानों, काव्य, नज़म ग़ज़ल का कोई भी कार्यक्रम करवाते है तो आप सीधे तौर पर समाज के उन पीड़ित परिवारों के कल्याण हेतु अपना एक अनमोल सहयोग सहज ही प्रदान कर देते है।

अंतः एक बार पुनः आप सभी को सूचित करता हु की यदि आप उपरोक्त विषय नशा मुक्ति एवं पारिवारिक कलेश मुक्ति की समस्या का एक स्थाई समाधान प्राप्त करना चाहते है तो आज ही विक्रांत राजलीवाल जी से यानी कि मुझ से सीधा सम्पर्क कीजिए।

साथ ही आप मेरा कोई नज़म ग़ज़ल, काव्य-कविताओं के साथ नज़म दस्तानों का सांस्कृतिक एवं मंनोरंजक कार्यक्रम भी बुक कर सकते है। मेरा सम्पर्क सूत्र नीचे अंकित है।

धन्यवाद।
विक्रांत राजलीवाल।

सम्पर्क सूत्र है।

वट्सअप नम्बर:: 91+9354948135

दिल्ली 84

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💥 सत्य स्वीकार। / 💥 Accept The Truth.

स्वयं को सबसे ख़ास समझते हुए अपने जीवन के हादसों को नकारना! कि मैं तो सबसे अलग हु मेरे साथ ऐसा कैसे हो सकता है। मेरी तो कोई भी ग़लती नही है। फिर मेरे साथ ऐसा कैसे हो सकता है? नही, नही मैं बिल्कुल सही हु, ऐसा तो हुआ है या नही हुआ है, मुझ को पता ही नही! अपने जीवन की समस्याओं को अस्वीकार करते हुए हमेशा ही मैं भागता रहा हु। और आज भी स्वयं को सबसे ख़ास या महत्वपूर्ण मानते हुए वास्तविकता को स्वीकार ना करू! तो मैं अपने जीवन को एक ऐसी क्रूर नरकाग्नि में स्वयं के द्वारा ना चाहते हुए भी स्वयं अपने जीवन को झुलसा दूंगा।

इसीलिए सर्वप्रथम मैं यह स्वीकार करता हु कि मैं भी एक पूर्णतः सामान्य जन के समान प्रसन्ता एवं आत्मशांति का हकदार हु। इसीलिए आज मैं अपने जीवन के उन सभी हादसों और समस्याओं को स्वीकारते हुए अपने स्वयं के विकास एवं आत्मशांति के प्रति ईमानदारी पूर्वक व्यवहार करता हु।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

Accept The Truth.

Considering myself to be the most special, denying the accidents of my life, how can I be so different with me. There is no mistake of mine. How can this happen to me then? No, no, I am absolutely right, whether this has happened or not, I do not know! I have always been running away while rejecting the problems of my life. And even today, considering myself as the most special or important person and not accepting the reality, I will scorch my life in a cruel inferno fire even without wanting to by myself.

That is why, first of all, I accept that I am entitled to happiness and self-peace like a normal person. That is why today I accept all those accidents and problems in my life and behave honestly for my own development and self-peace.

Thank you

Written by Vikrant Rajliwal.

एक टिस। // A Pain.

आज बहुत से व्यक्ति मेरे प्रति यही सोचते है कि मैं अपने जीवन उदेश्यों में असफल हो चुका हूं। अपने जीवन मे हार चुका हूं। यदि वह आज ऐसा कहते या सोचते है तो इसके पीछे भी कोई ना कोई कारण भी अवश्य ही होगा? परन्तु उन कारणों की वास्तविकता क्या है और क्यों है? ऐसे जानने कि किसी भी व्यक्ति की कभी भी कोई रुचि ना होगी। यदि आज कोई मुझ को असफल या हारा हुआ कहते हुए मुझ को तोड़ने का प्रयत्न करते हुए तोड़ देता है? तो क्या, मैं उन्हें अपने जीवन को संकट में डालने का दोषी सिद्ध करते हुए स्वयँ के संघर्ष को धुत्कार दु!

नही! मैं ऐसा नही कर सकता हु। परंतु आज वर्षो के संघर्ष के उपरांत मुझ को एहसास होता है कि जीव ने जीवन को अपने स्वयँ ही सँवारा है स्वयँ ही बिगाड़ा है, स्वयं ही बिगाड़ा है, हा स्वयं ही बिगाड़ा है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
24/10/2019 at 9:10 am

A Pain.

Today many people think towards me that I have failed in my life objectives. I have lost in my life. If he says or thinks so today, there must be some reason behind it too? But what is the reality of those reasons and why? Knowing that no person will ever have any interest. If today someone breaks me while trying to break me by calling me a failure or a loser? So what, while proving them guilty of putting their lives in jeopardy, I despise my own struggle!

no! I can not do this But today, after years of struggle, I realize that the creature has spoiled life on its own, has spoiled itself, has spoiled itself, and has spoiled itself.

Written by Vikrant Rajliwal.
24/10/2019 at 9:10 am

💥 कर्म एवं कर्मफल। / 💥 Karma And Karma.

यदि आप स्वयं में सकरात्मक बदलाव उतपन्न करते हुए अपने जीवन में आत्मशांति का अनुभव प्राप्त करना चाहते है, तो आज और अभी से किसी भी एक महान व्यक्त्वि के व्यक्ति के जीवन अनुशाशन, एवं विचारों का अनुसरण करना प्रारंभ कर दीजिए।

इस प्रकार से आप पाएंगे कि कुछ समय के उपरांत आप नकल से असल को प्राप्त हो जाएंगे। क्योंकि मात्र सोचने से हम मनुष्यों के जीवन मे कोई भी सकरात्मक बदलाव उतपन्न नही हो सकेगा। इसके लिये हमें सकरात्मकता का अनुसरण करते हुए नकल से असल तक पहुचना ही पड़ेगा।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
23 अक्टूबर, 2019 समय 10:57 am

💥 Karma And Karma. (Translated)

If you want to get a sense of self-peace in your life by creating a positive change in yourself, then start following the life, discipline and thoughts of any one great person today and now.

In this way you will find that after some time you will get the real one by copying. Because just thinking, we will not be able to create any positive change in our human life. For this, following the positiveness, we have to reach from imitation to the real.

Thank you.

Written by Vikrant Rajliwal.

23 October, 2019 time 10:57 am

एक चोटिल एहसास। // A Hurt Feeling.

🙏🇮🇳 आज मैं यानी कि आपका मित्र एक साधारण से परिवार का भारतीय बालक स्वयँ के कुछ एहसासों को आप सभी प्रियजनो के साथ साँझा करने जा रहा हु। इस संसार मे प्रत्येक व्यक्ति का समय अत्यंत ही मूल्यवान होता है चाहे वह कोई सेलिब्रिटी हो या मेरे जैसा एक साधारण सा लेखक। और जब कोई आपके समय के मूल्य को अनदेखा करते हुए, आपके सामाजिक एवं रचनात्मक कार्यो पर अनैतिक प्रशन चिन्ह लगाने का प्रयत्न करें तो, उससे हमारे ह्रदय को अत्यंत चोट पहुचती है। ऐसे ही कुछ संवेदनशील विषय को मैं निमोक्त बताने का एक प्रयत्न करूँगा।

Today I mean that your friend is going to share some of his own feelings with an ordinary Indian boy. Every person’s time in this world is extremely valuable whether it is a celebrity or a simple writer like me. And when someone tries to put an unethical question mark on your social and creative works, ignoring the value of your time, it hurts our heart immensely. I will make an effort to declare some sensitive subject like this.

ShameOnYouFacebook

मेरी इन समाजिक पोस्ट के समान ही बहुत सी पोस्ट्स को फेसबुक ने डिलीट किया है। आखिर मेरी इन पोस्ट्स में क्या अनैतिक विषय वस्तु है? अभी तक मैं अपने माता पिता के मेहनत की कमाई के 15,000 रु से अधिक इस फ़ेसबुक पेज पर खर्ज कर चुका हूं। और अब जब मैने भुतकाल से शिक्षा प्राप्त करते हुए, इस फेसबुक पेज़ पर पैसा लगाना बन्द कर दिया है तो फ़ेसबुक मेरी सामाजिक पोस्ट्स को डिलीट एवं पेज़ के फंक्शन्स पर रोक लगा रहा है।

Shame on you Facebook. Like my social posts, Facebook has deleted many posts. After all what is the unethical content in my posts? So far, I have spent more than Rs 15,000 of my parents’ hard earned money on this Facebook page. And now that I have stopped spending money on this Facebook page while getting education from the past, Facebook is deleting my social posts and prohibiting page functions.

Shame on you Facebook.

मुझे एवं मेरे जैसे बहुत से लेखकों एवं पाठको को फेसबुक से बहुत सी समस्या है। इसीलिए मैंने अपनी वेबसाइट बनाई थी। जहाँ मैं अपनी लेखनी के माध्यम द्वारा अपने पाठकों से जुड़ सको।

यदि फेसबुक ऐसा ही अनैतिक व्यवहार करता रहा तो मुझ को अपना फेसबुक अकाउंट निष्क्रिय करना ही होगा।

मेरी जिन सामाजिक पोस्ट्स को फेसबुक अनैतिक कह कर उन्हें डिलीट किया है उन्हें मैं यानी कि विक्रांत राजलीवाल अब अपनी स्वयं की वेबसाइट पर प्रकाशित करूँगा।

मैं कोई करोड़पति नही की हर महीने हज़ारो रुपए बेमतलब ही फेसबुक पेज़ पर खर्ज कर सकूँ। इसीलिए फेसबुक के इस अनैतिक व्यवहार से मैं अत्यंत ही आहात हुआ हूं।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

फेसबुक लिंक
https://www.facebook.com/vikrantrajliwal85/
Shame On You Facebook

I and many writers and readers like me have a lot of problems with Facebook. That’s why I created my website. Where I can connect with my readers through my writing.

If Facebook continues to behave like this, then I have to deactivate my Facebook account.

My social posts, which have been deleted by Facebook as unethical, I will publish them on my own website, ie Vikrant Rajliwal.

I am not a millionaire, I can spend hundreds of thousands of rupees on a Facebook page every month. That is why I am extremely shocked by this unethical behavior of Facebook.

Thank you.

Written by Vikrant Rajliwal.

Facebook link👇👇👇👇
https://www.facebook.com/vikrantrajliwal85/
Shame On You Facebook🖕🖕🖕

💥 One Truth. 6 (Sixth Blog) A truth inspired by true experiences.

Now further …

On a deserted road of a scooter, as soon as we stop in an empty space on one side, we all, one by one, get off the scooter and stand on the side of the road. Thereafter, Uncle X, (fictitious name), located about 50 meters away, while looking at an office, says that he is an office, let’s go. As soon as he said this, I was convinced that there is a party in that office today and there must have already been a sprinkling of liquor and sprinkles of liquor. On thinking this, I very enthusiastically walk with them towards that office. But upon reaching there, my forehead gets a tinkle. There, a middle-aged man Sukesh Shonthi (fictitious name) was sitting on the chair. He smiles at us and welcomes us. And there were other decent people standing around him. We enter the office and sit on the chair in front of him. While sitting in our chair, that middle-aged man smilingly asks me, do you know me? I was feeling very strange all this. While somehow controlling my restlessness, I tell him very easily that no, I do not know you. Then he asks me whether you smoke cigarettes or alcohol. My hidden uneasiness began to appear from their conversation. At that time I could not understand why he was asking me such a question. When we come to party here, we will naturally drink alcohol, then why are they behaving so strangely. Bowing to all these thoughts, then I tell them that yes I am Drinking alcohol. Get it now. As soon as I say this, Uncle X stands up from the chair and along with him Uncle Y (Moussa ji) and I also get out of the office while standing in my chair. Then where Uncle X had parked his scooter, he comes and stands near a closed door. Then Uncle Ekus tells me that Vicky (my nick name) let’s go inside. As soon as they say this, I feel that the party is going to start. And as soon as I turned behind them, then Uncle Yai (Moussa ji) held my hand and insisted with great confidence, told me not to go inside Vicky. This is what remained with me. Uncle Yai (Mausa ji) who works in Delhi Police Department. I was very surprised by his strange behavior. At that time, I could not even realize why he was saying this to me. Then Uncle X makes a voice saying that Vicky come. And I tell Uncle Yai (Mousa ji) that nothing will happen, come and go. Saying so, I enter inside with Uncle X through that closed door.

At that time it seemed to me that behind the closed door there must be some colorful program of alcohol’s or any such colorful program is going to be there today. That is why we have come on such a scooter today to party at such a deserted and secret place. I almost reached there by sitting at Stepney. But as soon as I enter through the closed door, my senses fly away. As soon as I entered inside that closed door, in front of my eyes, my young boys and young men who looked like some mushtando (Healthy boys), there was a whole army. The first thought that came to me after seeing them was that this is definitely a child prison. And today we have come to this party. With this one feeling behind Uncle X, I enter a nearby room, through that closed door. Where a bed and some other discount put-alike was present. As soon as I entered that room, I felt that this is where the party will be today. The only place Uncle X and I sit in that room is to sit on that bed. Then Uncle X says take off your shoes and sit comfortably, I come now. As soon as he said this, I realized that he definitely went to call Uncle Yai (Mausa ji) and arrange the party. After he left, I sat there for about five minutes, and after that I took off my socks and smoked a bidi (cigar), and lay very leisurely on that bed. At the same time a person of a weak body enters the room in the most ordinary clothes. Don’t know why he was smiling at me. Before I tell him anything, he starts to poach in that room. Then I lie down to him in the same way that Uncle X I came in with is said? As soon as I say this, he smiles without missing a single moment and says that he has gone!

What did he mean at that time? I could not understand that. For about five to ten minutes or some time I kept taking the lonely inside the room, trying to understand those words of the person that he had gone. Suddenly with a jerk, inside the room, a wrestler type of my father’s age, a body builder, and a few other hatted young men enter with him. I was surprised to see them entering the room like this. But I kept lying down like that. All those people stand near me and then I get up and sit and tell them that where is Uncle X I said? Then he, like that first person, tells me that he has gone. As soon as they say this, I start wearing my socks. He was saying something to me, but after listening to him that he went. My Rome Rome (inside my body) was burning like a burning ember. And I was not interested in hearing any of his words. After wearing my socks, I now stand up wearing my shoes. Now we all stood face to face each other. At that time my Rome Rome (my body inside) was burning with anger and all of them were still smiling while looking at me. All this seemed to me very strange. With this strange poor mood I tell them that I have to go out. Just then a young man removes the curtain of the room and stares at me, looking inside the room. Then the scene that I saw entering inside the closed door once again appears that many such mustandas (Healthy Boys) were present here.

Suddenly I realize that I am stuck here very badly. After a while, after staring at him with anger, that Body Builder Uncle’s age, I try to knock him out of the room with his arm. Then he smiles in the same way that you can no longer go out. They were all still smiling. Which made me feel a little comfortable now. But hiding that ease, I ask him to go out in the same way. Then without losing even a single moment, he says to another young man, who appears like a mustanda standing near him, that he should take a search. As soon as he says this, he proceeds to search, but I remove him from one side and say that I have nothing. Then he starts searching himself, who looks like a Body builder. First he searches for the shirt pocket but he finds nothing there. Then I tell them that I had said that I have nothing. Then he searches my paint pocket and suddenly a smile comes on his face and he gets a pudding. Then I tell them, now you have got the pudiya. Now let me go out. But while continuing his search, he smiles again, getting another pudiya. Then I tell them that it was just this pudiya anymore. Now let me go out. But by continuing his search in the same way, he also obtains the third and final pudiya. I tell him once more that this was now the last lap and it is not my lap. Someone caught me to keep. After a few moments and searching, he is now convinced that I was telling the truth. Then he tells me that now you have to be here. On hearing this, I too smiled towards them and kept a control on myself and said how could this happen? I have to go now. Then the sir says very simply that this is a de-addiction center. And now you have to be the same. On hearing this from his mouth, the fire of anger once again ignited in my veins. But realizing the seriousness of that situation, I take a silence.

Then he calls a young man Shakir (fictional name) to get his family introduced with introduction. At that time, it seemed to me that my mother and father are present here and are taking me to get my talks once before placing me here. If this happens then I will get out of here today and now because it is not yet known to me how dangerous and menopaulated I can be. I was just contemplating all this when Shakir comes near to me and tells me that let’s do the family introduction. What will you say after reaching there? After a few moments of silence, he again explains to me, what is your name? Yes, I Vicky. Then he says don’t speak like that, say my name is Addict Vicky. On hearing this from his mouth, I felt as if he was trying to make fun of me. Then I enter the hall behind a closed curtain close behind him.

From the next next blog…

Written by Vikrant Rajliwal

(Translated)

21 October 2019 Time at 8:12 pm.

💥 एक सत्य। 6 (छटवा ब्लॉग) सत्य अनुभवों से प्रेरित एक सत्य।

अब आगे…

स्कूटर के एक सुनसान सड़क पर, एक तरफ खाली स्थान पर रुकते ही, हम एक, एक कर के सभी जन स्कूटर से उतर कर सड़क के किनारे खड़े हो जाते है। तदोपरांत प्रथम अंकल एक्स, (काल्पनिक नाम) लगभग 50 मीटर की दूरी पर स्थित, एक ऑफिस को देखते हुए कहते है कि वह रहा ऑफिस, आओ वही चलते है। उनके इतना कहते ही मुझे विशवास हो गया कि उस ऑफिस में ही आज पार्टी है और वहाँ पहले से ही दौर ए शराब के जाम की महफ़िल सजी हुई होगी। यह विचार करते ही मैं अत्यंत ही उत्साह से उनके साथ उस ऑफिस की ओर चल देता हूं। परन्तु वहाँ पहुँच कर मेरा माथा कुछ ठनक जाता है। वहाँ एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति सुकेश शोन्थि (काल्पनिक नाम) कुर्सी पर बैठे हुए थे। हमे देखते ही वह मुस्कुराते हुए हमारा स्वागत करते है। और उसके आस पास कुछ सभ्य से दिखाई देते हए अन्य व्यक्ति भी खड़े थे। हम ऑफिस में प्रवेश करते हुए उनके सामने की कुर्सी पर विराजमान हो जाते है। हमारे कुर्सी पर बैठते ही वह अधेड़ उम्र के व्यक्ति मुस्कुराते हुए मुझ से पूछते है कि क्या मुझ को जानते हो? मुझे यह सब कुछ अत्यंत ही अज़ीब से महसूस हो रहा था। अपनी उस बेचैनी पर किसी प्रकार नियन्त्रण करते हुए मैं उनसे अत्यन्त ही सहज भाव से कहता हूं कि नही! मैं आपको नही जानता। तब वह मुझ से पूछते है कि सिगरेट या शराब पीते हो। उनके इस प्रकार के वार्तालाप से मेरी छुपी हुई बेचैनी कुछ कुछ प्रकट होने लगी। उस समय मैं यह नही समझ पा रहा था कि वह मुझ से ऐसा प्रश्न क्यों पूछ रहे है। जब हम यहाँ पार्टी करने आए है तो जाहिर है कि शराब पिएंगे ही, फिर वह ऐसा अज़ीब व्यवहार क्यों कर रहे है। इन सभी विचारो से झुझते हुए तब मैं उनसे कहता हु की हा पिता हु। मंगवा लीजिए। मेरे इतना कहते ही अंकल एक्स कुर्सी से खड़े हो जाते है एवं उनके साथ ही अंकल वाई (मौसा जी) और मैं भी अपनी अपनी कुर्सी से खड़े होते हुए ऑफिस से बाहर निकल जाते है। फिर जहा अंकल एक्स ने अपना स्कूटर खड़ा किया था ठीक वही आकर एक बन्द दरवाजे के समीप खड़े हो जाते है। तब अंकल एकस मुझ से कहते है कि विक्की (मेरा पेट नाम) आओ अंदर चलते है। उनके इतना कहते ही मुझ को ऐसा लग की हा अब पार्टी शुरू होने वाली है। और मैं उनके पीछे जैसे ही मुड़ा तभी अंकल वाई (मौसा जी) ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बहुत ही आत्मविश्वास के साथ जोर देते हुए, मुझ से कहा कि विक्की अंदर मत जाइओ। यही मेरे पास खड़ा रहे। अंकल वाई (मौसा जी) जो कि दिल्ली पुलिस विभाग में कार्य करते है। उनके इस प्रकार के अज़ीब व्यवहार से मुझ को अत्यंत ही हैरानी हुई। उस समय मुझ को किंचित मात्र भी एहसास नही हो सका कि वह मुझ से ऐसा क्यों कह रहे है। तभी अंकल एक्स एक आवाज़ लगाते हुए कहते है कि विक्की आ जा। और मैं अंकल वाई (मौसा जी) से कहता हूं कि कुछ नही होगा आ जाओ अंदर ही पार्टी है। इतना कहते हुए मैं अंकल एक्स के साथ उस बन्द दरवाजे से होते हुए अंदर घुस जाता हूं।

उस समय मुझ को ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उस बन्द दरवाजे के पीछे अवश्य ही शराब और नशे का कोई रंगारंग कार्यक्रम चल रहा होगा या ऐसा ही कोई रंग रंगीला कार्यक्रम आज अवश्य ही होने को है। तभी तो ऐसे सुनसान एवं ख़ुफ़िया स्थान पर हम पार्टी करने के लिए आज इस प्रकार से स्कूटर पर बैठ कर आए है। मैं तो लगभग स्टेपनी पर बैठ कर वहा पहुचा था। परन्तु जैसे ही मैं उस बन्द दरवाजे से होते हुए भीतर प्रवेश करता हु, तो मेरे होश ओ हवास उड़ जाते है। उस बन्द दरवाजे के अंदर प्रवेश करते ही मेरी नज़रो के सामने मेरी हम उम्र नोजवान लड़को एवं कुछ मुश्तण्डो की तरह दिखाई देने वाले जवान लड़को कि एक पूरी फ़ौज थी। उन्हें देख कर प्रथम विचार मुझ यही आया था कि यह जरूर कोई बच्चा जेल है। और आज यही पार्टी करने के लिए हम आए है। इस एक एहसास के साथ अंकल एक्स के पीछे पीछे मैं उस बन्द दरवाजे से होते हुए समीप के एक कमरे में प्रवेश कर जाता हु। जहाँ एक बिस्तर और कुछ अन्य छूट पुट सा साज समान मौजूद था। उस कमरे मैं प्रवेश करते ही मुझ को ऐसा लगा कि हा यही वह स्थान है जहाँ पार्टी होगी। अंकल एक्स और मैं उस कमरे में मौजूद बैठने लायक एकमात्र स्थान उस बिस्तर पर बैठ जाते है। तब अंकल एक्स कहते है कि अपने जूते उतार कर आराम से बैठ जाओ, मैं अभी आता हूं। उनके इतना कहते ही मुझ को ऐसा एहसास हुआ कि जरूर वह अंकल वाई (मौसा जी) को बुलाने के साथ ही पार्टी कि व्यवस्था करने के लिए गए है। उनके जाने के उपरांत, मैं लगभव पांच मिनट तक, वैसे ही बैठा रहा तदोपरांत मैं अपनी जुराबें उतार कर एक बीड़ी सुलगाते हुए, उस बिस्तर पर बहुत ही इत्मीनान से लेट जाता हूं। उसी समय एक कमजोर शरीर का एक व्यक्ति अत्यंत ही साधारण से कपड़ो में उस कमरे के भीतर प्रवेश करता है। वह मुझ को देख कर ना जाने क्यों मुस्कुरा रहा था। मैं उससे कुछ कहता उससे पूर्व ही वह उस कमरे में पोचा लगाना प्रारम्भ कर देता है। तब मैं उसी प्रकार से लेटे हुए उससे कहता हूं कि जिन अंकल एक्स के साथ मैं अंदर आया था वह कहा है? मेरे इतना कहते ही वह बिना एक क्षण भी गवाए मुस्कुराते हुए कहता है कि वह तो गए!

उस समय उसके कहने का क्या मतलब था! वह मेरी समझ मे नही आ रहा था। लगभग पांच से दस मिनट या कुछ समय तक मैं तन्हा उस कमरे के भीतर लेता हुआ, उस व्यक्ति के द्वारा कह गए उन शब्दों को समझने का प्रयास करता रहा कि वह तो गए। अचानक से एक झटके के साथ उस कमरे के भीतर मेरे पिता की उम्र का एक पहलवान के जेसा दिखाई देने वाला, बाड़ी बिल्डर व्यक्ति और उसके साथ कुछ अन्य हट्टे कट्टे युवा प्रवेश करते है। उन्हें इस प्रकार से उस कमरे के भीतर प्रवेश करते देख, मुझे कुछ हैरानी हुई। परंतु मैं उसी प्रकार से लेटा रहा। वह सभी व्यक्ति मेरे समीप ही आ कर खड़े हो जाते है तब मैं उठ कर बैठ जाता हूं एवं उनसे कहता हूं कि अंकल एक्स कहा है? तब वह भी उस प्रथम व्यक्ति के समान ही मुझ से कहते है कि वह तो गए। उनके इतना कहते ही मैं अपनी जुराबें पहनना प्रारम्भ कर देता हूं। वह मुझ से कुछ कह रहे थे परन्तु उनकी उस बात को सुनकर कि वह तो गए। मेरा रोम रोम जलते हुए अंगार के समान जलने लगा था। और मुझे उनके किसी भी शब्द को सुनने में अब कोई भी दिलचसबी नही थी। अपनी जुराबें पहनने के उपरांत अब में अपने जूते पहन कर खड़ा हो जाता हूं। अब हम सब एक दूसरे के आमने सामने अड़ कर खड़े थे। उस समय मेरा रोम रोम क्रोध से ज्वलित था और वह सब अब भी मेरी ओर देखते हुए मुस्कुरा रहे थे। मुझ को यह सब कुछ अत्यंत ही अज़ीब सा प्रतीत ही रहा था। इसी अजीबो गरीब मनोस्थिति के साथ मैं उनसे कहता हूं कि मुझ को बाहर जाना है। तभी एक हटा कट्टा मुस्टंडा युवक उस कमरे का पर्दा हटा कर अंदर देखते हुए मुझ को घूरता है। तभी मुझ को वह दृश्य जो मैने उस बन्द दरवाज़े के भीतर प्रवेश करते हुए देखा था एक बार पुनः दिखाई देता है कि यहाँ ऐसे बहुत से मुस्टंडे मौजूद गए।

अकस्मात ही मुझ को एहसास होता है कि मैं बहुत ही बुरी तरह यहाँ फंस गया हूं। कुछ देर तक उस बाड़ी बिल्डर अंकल की उम्र के उस व्यक्ति को क्रोध से घूरने के उपरांत में उनके बाजू से उस कमरे के बाहर निलने का प्रयास करता हु। तब वह उसी प्रकार से मुस्कुराते हुए कहते है कि अब आप बाहर नही जा सकते हो। वह सब अब भी निरन्तर मुस्कुरा रहे थे जिससे मैं अब कुछ सहज महसूस कर रहा था। परन्तु अपनी उस सहजता को छुपाते हुए मैं उसी प्रकार से बाहर जाने के लिए कहता हूं। फिर वह बिना एक क्षण भी गवाए अपने समीप खड़े एक मुस्टंडे की तरह दिखाई देने वाले मेरे हम उम्र नवयुवक से वह कहते है कि सर्चिंग लो। उनके ऐसा कहते ही वह सर्चिंग के लिए आगे बढ़ता है परन्तु मैं उसको एक ओर को हटा कर कहता हूं कि मेरे पास कुछ भी नही है। तब वह बाड़ी बिल्डर की तरह दिखाई देने वाले महोदय स्वयँ सर्चिंग प्रारम्भ कर देते है। सर्वप्रथम वह कमीज की जेब तलाशते है परंतु उन्हें वहा कुछ भी प्राप्त नही होता। तब मैं उन्हें कहता हूं कि मैने कहा था ना कि मेरे पास कुछ नही है। तब वह मेरी पेंट की जेब तलाशी करते है अचानक ही उनके चेहरे पर एक मुस्कुराहट आ जाती है और उन्हें एक पुड़िया प्राप्त हो जाती है। तब मैं उनसे कहता हूं अब आपको पुड़िया मिल गई ना। अब मुझ को बाहर जाने दीजिए। परन्तु वह अपनी सर्चिंग जारी रखते हुए एक और पुड़िया की प्राप्ति करते हुए पुनः मुस्कुराते है। तब मैं उनसे कहता हूं कि बस यही पुड़िया थी अब और नही है। अब मुझ को बाहर जाने दीजिए। परन्तु वह उसी प्रकार से अपनी सर्चिंग जारी रखते हुए तीसरी और अंतिम पुड़िया भी प्राप्त कर लेते है। मैं एक बार और उनसे कहता हूं कि अब यह आखरी पुड़िया थी और यह सब मेरी पुड़िया नही है। किसी ने मुझ को रखने के लिए पकड़ाई थी। कुछ क्षण और सर्चिंग के उपरांत उन्हें अब यकीन हो जाता है कि मैं सत्य कह रहा था। तब वह मुझ से कहते है कि अब तुम्हें यहीं रहना है। यह सुनते ही मैं भी उनकी ओर मुस्कुराते हुए स्वयँ पर एक नियन्त्रण रखते हुए कहता हूं कि ऐसा कैसे हो सकता है! मुझ को तो अभी जाना है। तब वह महोदय अत्यंत ही सहज भाव से कहते है कि यह नशा मुक्ति केंद्र है। एवं अब आपको यही रहना होगा। उनके मुंह से यह सुनते ही मेरे रग रग में एक बार पुनः क्रोध की अग्नि ज्वलित हो उठती है। परंतु उस स्थिति की गम्भीरता को समझते हुए, मैं एक मौन धारण कर लेता हूं।

तब वह एक युवक शाक़िर (काल्पनिक नाम) को कहते है कि इनका फैमली के साथ इंट्रोडक्शन (पहचान) करवा आओ। उस समय मुझ को ऐसा लगा कि मेरे माता जी और पिता जी यहाँ मौजूद है एवं मुझ को यहाँ रखने से पूर्व एक बार उनसे मेरा वार्तालाव करवाने के लिए ले जा रहे है। यदि ऐसा हुआ तो मैं आज और अभी यहाँ से बाहर निकल जाऊंगा क्यों कि यह अभी मुझे जानते नही है कि मैं कितना खूंखार एवं मेनोप्लेटिड हो सकता हु। मैं अभी यह सब कुछ विचार कर ही रहा था कि तभी शाक़िर मेरे समीप आ कर मुझ से कहता है कि आओ फैमली से इंट्रोडक्शन कर लेते है। वहाँ पहुच कर आप क्या कहोंगें? कुछ क्षण की ख़ामोशी के उपरांत वह मुझ को पुनः समझाते हुए कहता है कि तुम्हारा क्या नाम है? मैं जी विक्की। तब वह कहता है कि ऐसे मत बोलना, कहना मेरा नाम है नशेबाज विक्की। उसके मुँह से यह सुनते ही मुझ को ऐसा लग की वह मेरा मजाक बनाने को कोशिश कर रहा है। फिर मैं उसके पीछे पीछे समीप के एक बन्द पर्दे के पीछे मौजूद हॉल में प्रवेश कर जाता हूं।

शेष अगले ब्लॉग से…

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

21 अक्टूबर 2019 समय दोपहर 2:42 बजे।

🌹 Book A Nazam Dastan’s And Poetry program By Vikrant Rajliwal.

कवि, शायर एवं उपन्यासकार श्री विक्रांत राजलीवाल।

Book A Nazam Dastans And Poetry program By Vikrant Rajliwal

श्री विक्रांत राजलीवाल के रोमानी स्वरों के साथ उनके द्वारा लिखित उनकी सैकड़ो नज़म, ग़ज़ल, काव्य, कविताएं एवं बहुत सी सदाबहार विस्तृत अत्यधिक दर्दभरी मोहब्ब्त की नज़म दास्तानो के साथ एक कामयाब कार्यक्रम करवाने के लिए, आप आज ही निम्लिखित मोबाईल नंबर पर सम्पर्क करें। व्हाट्सएप नंबर है 91+9354948135.

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🙏 आज ही जुड़िए आपकी अपनी ब्लॉग साइट https://vikrantrajliwal.com से।

विक्रांत राजलीवाल एक लघु परिचय।

अ) काव्य पुस्तक एहसास : अत्यधिक संवेदनशील काव्य पुस्तक एहसास, जिसका केंद्र बिंदु हम सब के असंवेदनशील होते जा रहे सभ्य समाज पर अपनी काव्य और कविताओं के द्वारा एक प्रहार की कोशिश मात्र है।

Sanyog (संयोग) प्रकाशन घर शहादरा द्वारा प्रकाशित एव ए वन मुद्रक द्वरा प्रिंटिड। प्रकाशन वर्ष जनवरी 2016. प्रकाशित मूल्य 250:00₹ मात्र।

आ) नज़म दास्ताने:: विक्रांत राजलीवाल जी के द्वारा लिखी एवं उनकी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित करि गई, अत्यधिक दर्दभरी विस्तृत नज़म दास्तानो का जल्द ही एक संग्रह पुस्तक के रूप में आप सभी प्रियजनों को एक भरी भेंट स्वरूप प्रदान कर दी जाएगी। उनकी दर्दभरी नज़म दस्तानों के नाम इस प्रकार से है। कि जैसे अ) एक इंतज़ार… मोहब्ब्त। आ) पहली नज़र। इ) बेगुनाह मोहब्ब्त। ई) एक दीवाना। उ) मासूम मोहब्ब्त। ऊ) सितमगर हसीना। ए) अक्सर सोचता हूं तन्हा अंधेरी रातो में। ऐ) एक खेल जिंदगी। ओ) धुंधलाता अक्स। इत्यादि। इनमें से कुछ की रिकॉर्डिड वीडियो लिंक इस प्रकार है। 1) एक इंतज़ार…मोहब्ब्त। https://youtu.be/aOBlMrmejqk 2) पहली नज़र। https://youtu.be/A_5bLVHS9yo 3) सितमगर हसीना। https://youtu.be/F8TKFt7G4Us 4) अक्सर सोचता हूं तन्हा अंधेरी रातो में कि… https://youtu.be/ElipaWVQOrw 5) धुंधलाता अक्स। https://youtu.be/_tKFIu1onQw 6) एक खेल जिंदगी। https://youtu.be/02TpemeSFsA इत्यादि।

आशा करता हु आपको पसन्द आए।

इ) नज़म, ग़ज़ल और शायरी:: वर्ष 2016-17 से अब तक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित कई सैकड़ो दर्दभरी नज़म, ग़ज़ल एवं सैकड़ो शायरी। को उन्होंने अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर एवं कुछ को अन्य सोशल मीडिया के समूह में प्रकाशित किया है। जिनका एक संग्रह पुस्तक के रूप में आप सभी प्रियजनो को एक प्रेमभरी भेंट स्वररूप प्रदान कर दिया जाएगा। आशा करता हु आपको पसंद आए। विक्रांत राजलीवाल। उनकी बहुत से रिकॉर्डिड नज़म, ग़ज़ल एव गीतों को आप उनके YouToube चैनल Voice Of Vikrant Rajliwal पर कर उनकी रचनाओं को स्वयं उनकी आवाज़ के साथ देख और सुन कर लुफ्त प्राप्त कर सकते है। उनके चैनल का यूआरएल पता है। https://www.youtube.com/channel/UCs02SBNIYobdmY6Jeq0n73A आशा करता हु आपको पसंद आए।

ई) ह्रदय स्पर्शी काव्य कविताए:: जनवरी 2016 में अपनी प्रथम काव्य कविताओं की पुस्तक “एहसास” के संयोग प्रकाशन(sanyog publication) के द्वारा प्रकाशन के उपरांत। अक्टूबर 2016 से अब तक बहुत सी ह्रदय स्पर्शी काव्य एवं कविताओं की रचना करि तदोपरांत उन्हें अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित किया। उनमे से कुछ काव्य कविताओं की रिकॉर्डिड वीडियो आप उनके YouTube चैनल Voice Of Vikrant Rajliwal पर देख एवं सुन कर उनके काव्य-कविताओं का आनन्द प्राप्त कर सकते है। उनके चैनल का लिंक है। https://www.youtube.com/channel/UCs02SBNIYobdmY6Jeq0n73A आशा करता हु आपको पसंद आए।

उ)”मसखरे”:: “मसखरे” विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित एक अत्यधिकमनोरंजक व्यंग्यात्मक किस्सा है। जिसको उन्होंने कुछ समय पूर्व ही अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित किया है। व्यंग्यात्मक किस्से “मसखरे” की रिकॉर्डिड वीडियो लिंक इस प्रकार से है। https://youtu.be/LSGHIitR1Bg आशा करता हु आपको पसंद आए।

ऊ) भोंडा।:: वर्ष 2019 में 2 अक्टूबर की रात्रि 10:20 बजे, विक्रांत राजलीवाल जी ने अपनी एक विस्तृत अत्यधिक दिलचस्प एवं मनोरंजक कहानी ‘भोंडा।” (लघु उपन्यास) का अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशन किया है। जिसके शरुआती भूमिया के कुछ अंश इस प्रकार से है कि… नमस्कार प्रिय पाठकों, आज अपनी एक अत्यंत ही दिलचस्प और भावनात्मक प्रेम कहानी “भोंडा।” का आपकी अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रथम प्रकाशन करते हुए, मुझ को अत्यधिक हर्ष एवं रोमांच की अनुभूति प्राप्त हो रही है। भोंडा केवल एक कहानी ही भी है बल्कि यह स्वयं के भीतर एक ऐसे भावनात्मक एहसासों को, संजोए हुए है जिसको लिखते समय मैं स्वयं अत्यधिक भावुक हो गया था। … [ 16,335 more words ]
https://vikrantrajliwal.com/2019/10/02/ आशा करता हु आपको पसंद आए।

ए) भोंडा। 2 Upcoming Soon:: विक्रांत राजलीवाल जी द्वारा लिखित उनका प्रथम लघु उपन्यास “भोंडा।” का 2 अक्टूबर 2019 रात्रि 10:20 बजे उनकी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशन के उपरांत, अब भोंडा। 2 का लेखन कार्य प्रारम्भ किया है। जब भी भोंडा। 2 का लेखन कार्य अपने अंजाम तक पहुच जाएगा, उसी क्षण भोंडा। 2 को आपकी अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित कर दिया जाएगा। धन्यवाद।

क) आज वर्ष 2016-17 से वर्तमान वर्ष तक, अपनी कई सैकड़ो नज़म, ग़ज़ल, बहुत सी काव्य, कविताओं, गीत, कुछ व्यंग्य किस्से, सैकड़ो शेर, बहुत से सामाजिक, आध्यात्मिक एवं मनोवैज्ञानिक विस्तृत एवं लघु लेखों को आपकी अपनी इस साइट पर लिखने एवं प्रकाशित करने के उपरांत!

ख) एवं सबसे महत्वपूर्ण अपनी बहुत सी विस्तृत एवं लघु नज़म दास्ताँ को लिखने के उपरांत!

ग) एवं 2/10/2019 की रात्रि अपनी विस्तृत (long term), अत्यधिक दिलचस्प एवं रोमांचक प्रेम कहानी “भोंडा।” को आपकी अपनी ब्लॉग साइट https://vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित करने के उपरांत!

घ) आज पुनः मेरे हाथों में मेरी वह अधूरी कहानी आ गई है जिसके 300+ A4 साइज के पृष्ठ (75% कहानी) वर्ष 2016 में लिखने के उपरांत मुझ को कुछ निजी कारणों से उसको रोक कर अपने लॉकर में रखना पड़ा था।

अब मेरा पुरजोर प्रयास रहेगा कि अब मैं अपनी उस अधूरी कहानी जो कि पूर्णतः अति संवेदनशील एवं रोमाचक संवादों सहित है को पूर्ण कर आपको एक ऐसी भेंट उपलब्ध करवा सकूँ। जिसको आप हमेशा अपने एहसासो में महसूस कर सके।

इसके लिए मुझ को आप सभी के आशीर्वाद की अति आवश्यकता रहेगी।

आशा करता हु आप मेरी भावनाओं को समझ सकें।

विक्रांत राजलीवाल।

अपना प्रेम एवं आशीर्वाद आपके अपने मित्र विक्रांत राजलीवाल की ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर यू ही बनाए रखें।

💥 कर्म फल।

दम था बहुत उड़ने का ऊँची उड़ान उसमें, जब जब उड़ना चाहा उसने, तो हर बार आसमान सिमट कर सिमट गया।

टूटे परों में थी जो जान कुछ बाकी, वक़्त की हर चाल पर बच ना सकी, बच गई फिर भी अधूरी जो, वो थी एक ख़्वाहिश, एक ख्वाहिश, एक ख़्वाहिश… एक ख़्वाहिश एक उन्मुक्त उड़ान की, एक आत्मस्वाभिमान भरी पूर्ण एक अधूरी पहचान की!

घाव एहसासो के एहसासो को तोड़ देते है। चक्रव्यूह जीवन का कभी कभी अर्जुन को भी पीछे मोड़ देते है। ज्ञान को अज्ञान और हर अज्ञान एक सार्थी ए पथिक द्वार ज्ञान से मुक्त कर देते है।

सत्य शक्ति का एहसास अब जग को सत्य स्वयं करवाएगा। असत्य सत्य अग्नि से अब बच ना पाएगा। आज और अभी होगा निर्णय, सत्य प्रतिबिंब स्वयं विजय दर्पण से विजय एवं पराजय का दिखलाएगा।

ये सृष्टि, ये ब्रह्मांड, ये अनन्त एहसास, भृम है ये जीवन, ये जीवित प्राण। जीव जीवन से मुक्त है, मुक्त है हर श्वास, मुक्त है हर श्वास। सत्य एवं असत्य दर्पण सत्य एहसासों का, सत्य है जिनके हर एहसास, सत्य है जिनके हर एहसास।

वायु प्राण, अग्नि श्वास, शीतल आत्मज्ञान, रोग द्वेष, पाप एवं पुण्य फल कर्मो का ज्ञान, फल कर्मो का ज्ञान, फ़ल कर्मो का ज्ञान।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

16/09/2019 at 1:30 pmPicsArt_09-16-01.24.36

💥 चेतना। (नवीन काव्य)

हमनें खाया है दगा बहुत एतबार से यारों, दुआ है यही की अब कोई कभी अपनो से दगा ना करें।

जो करें विशवास तो निभा देना उसका साथ, भूल से भी विशवास से किसी के अब कोई कभी घात ना करें।।

हर ज़ख्म जज्बातों के दिल ही नही धड़कनों को भी तोड़ने जब लगें, वार पीठ पर हँसते मुस्कुराते रिश्तों में एक आग सी जब लगाने लगें।

टूटते एहसासों पर सरेराह जब चोट पर चोट लगने लगें, हर रिश्ता एक जहर और हर मरहम नासूर जिंदगी को जब करने लगें।।

गीत सुहाना एक बद्दुआ कोई जब बनने लगें, घात से विशवास पर अपने मासूम परिंदा (राही) बेहिंतिया जब तड़पने लगें।

हर राह जिंदगी की अचानक से सिमट कर जब खत्म होने लगें, हर बढ़ते-सिमटते कदम से राही जाल घिनोने में जब फँसने लगें।।

हर आशा एक निराशा में परिवर्तित जब होने लगें, डोर जीवन की अचानक से छूटते हुए जब टूटने लगें।

एक मृत्यु, एक जीवन, प्रतीक सत्य का मृत्यु जब बनने लगें, विपरीत सत्य से सहमा जीवन, मृत्यु जीवन जब लगने लगें।।

एक निर्णय, एक विचार, कौन सत्य, कौन असत्य, सत्य दबा जहा मृत्यु कोख में मृत्यु सा लाचार।

सत्य, असत्य की अपनी वाणी, स्वाहा सत्य जो एक वाणी, सत्य कोख मृत्यु में जागृत PicsArt_09-14-10.23.41चेतन व्यवहार।।

14/09/2019 at 10:27 pm