एक हक़ीक़त।

सुलगते हर एहसासो से अपने सुलगता सा जा रहा हु मैं।

बिखरते हर अरमानो से अपने बिखरता सा जा रहा हु मैं।।

दिख जाता है आईना आज भी जब मुझे, बतलाता है दर्द तन्हाई का अपनी एक ख़ामोशी से मुझे।

हक़ीक़त है जो हक़ीक़त नही, हर हक़ीक़त को करता बयां एक हक़ीक़त से वो मेरी मुझे।।

एक उड़ान अधूरी उड़ना आज भी है ख्वाहिश, हर उड़ान जिंदगी की उड़ने से पहले पँछी जो कैद हो गए।

कदमो से बंधी जंजीरे, लहूलुहान सी तड़पती सांसे, ख़ामोश हर एहसास मेरे एक ख़ामोशी से जो टूट गए।।

कोई तम्मना, कोई आरज़ू अधूरी सलामत ना बचा सके जो हम।

हर बढ़ते कदम से खुद को तन्हा और तन्हा सा करते गए जो हम।।

बदलते मौसम ने बतलाया है हर बार हमें कि ए मुसाफिर समय के, दूर है बहुत काफिला तेरा अब भी बहुत जो कहि खोया हुआ।

एक उम्मीद मेरी जो एक दुआ अब भी है सलामत, राह ए हक़ीक़त से है रौशन उमीदों का मेरा जो टूटा दिया।।

अक्स ए हक़ीक़त मिटा देगा जल्द ही हर अंधेरा, दिख जाएगा मुझ को मेरा फिर से जब वो खोया काफ़िला।।।

हो कर मज़बूर खुद से सिमट जाएगी हर तन्हाइयां एक रोज़ मुझ में, मिटते हर निशां जिंदगी के जब खुद ही एक रोज़ लौट आएंगे।

कब के बिछुड़े हम खुद से ही एक रोज़ जब अचानक से टकराएंगे, हक़ीक़त है ये किस्सा, हर गम ज़िन्दगी के उस रोज मिट जाएंगे।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

21/08/2019 at 12:05 pmFB_IMG_1509257727466

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💥 VIKRANTRAJLIWAL.COM AND MY SPIRITUAL PROGRAM (NA) ✍️

In the last few days, some inspirational ideas and articles written by my pen on various platforms of social media to promote my blog site vikrantrajliwal.com and my spiritual program.

बीते कुछ दिवसों में अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com एवं अपने आध्यात्मिक कार्यक्रम के प्रचार प्रसार हेतु सोशल मीडिया के अनेक मंचो पर मेरी कलम के द्वारा लिखे गए कुछ प्रेरणदायक विचार एव लेख।

💥 मित्रों जीवन को जीना है तो अपनो के प्रति अपने सच्चे मित्रों के प्रति हर प्रकार कि दुर्भावनाओं को अपनी ठोकर से मार कर कुचल दीजिए।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

मेरी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com को फॉलो कीजिए।

Translated

💥 Friends, if you want to live your life, then you can crush all kinds of maliciousness towards yourself and your true friends by crushing them with your feet.

Written by Vikrant Rajliwal.

Follow my blog site vikrantrajliwal.com.

💥
भृम है आँखों पर आपका जो आपके अपनो के प्रति कठोर हर भाव हर व्यवहार को दर्शाता है।

क्योंकि कभी जो दिखता एवं महसूस होता है वो सत्य से विपरीत आपका भृम भी हो सकता है।

ज्ञान और अज्ञान के बीच भृम की अत्यंत ही महीन परत होती है। जिसे कोई उचित ज्ञान का जानकर एवं एक दिव्य ज्ञान से शुशोभित ज्ञानी व्यक्ति ही आपके जीवन से मिटाते हुए, आपको एक दिव्य ज्ञान एव दिव्य प्रकाश को महसूस करने का एक अलौकिक अनुभव प्रदान कर सकता है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित सत्य अनुभवो से प्ररित।

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Translated

💥
The ignorance that you have on your eyes reflects your hard feelings and every harsh behavior towards your loved ones.

Because sometimes what you see and feel can be your ignorance contrary to the truth.

There is a very thin layer of misunderstanding between knowledge and ignorance. Whom a person knowing with proper knowledge and a knowledgeable person of divine knowledge can erase from your life, giving you a divine knowledge and a supernatural experience of feeling divine light.

Inspired by true experiences written by Vikrant Rajliwala

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💥 सुप्रभात मित्रों।

यदि आप अपने से श्रेष्ठ अनुभवों के व्यक्तियों का एवं उनके निःस्वार्थ भाव से किए हुए कार्यो का सम्मान नही करते है। तो वास्तव में आप स्वयं का, स्वयं के व्यक्तित्व का भी सम्मान नही करते है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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💥 Good Morning Friends.

If you do not respect the people with best experiences than you and the work done by them selflessly. So in reality you do not respect yourself, your personality also.

Written by Vikrant Rajliwal.

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💥 मित्रों जीवन को जीना है तो अपनो के प्रति अपने सच्चे मित्रों के प्रति हर प्रकार कि दुर्भावनाओं को अपनी ठोकर से मार कर कुचल दीजिए।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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Translated

💥 Friends, if you want to live your life, then you can crush all kinds of maliciousness towards yourself and your true friends by crushing them with your feet.

Written by Vikrant Rajliwal.

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💥
भृम है आँखों पर आपका जो आपके अपनो के प्रति कठोर हर भाव हर व्यवहार को दर्शाता है।

क्योंकि कभी जो दिखता एवं महसूस होता है वो सत्य से विपरीत आपका भृम भी हो सकता है।

ज्ञान और अज्ञान के बीच भृम की अत्यंत ही महीन परत होती है। जिसे कोई उचित ज्ञान का जानकर एवं एक दिव्य ज्ञान से शुशोभित ज्ञानी व्यक्ति ही आपके जीवन से मिटाते हुए, आपको एक दिव्य ज्ञान एव दिव्य प्रकाश को महसूस करने का एक अलौकिक अनुभव प्रदान कर सकता है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित सत्य अनुभवो से प्ररित।

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💥
The ignorance that you have on your eyes reflects your hard feelings and every harsh behavior towards your loved ones.

Because sometimes what you see and feel can be your ignorance contrary to the truth.

There is a very thin layer of misunderstanding between knowledge and ignorance. Whom a person knowing with proper knowledge and a knowledgeable person of divine knowledge can erase from your life, giving you a divine knowledge and a supernatural experience of feeling divine light.

Inspired by true experiences written by Vikrant Rajliwala

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💥 इस स्वार्थी संसार मे किसी भी भाव व्यवहार की अपनी ओर से पहल करना इस सृष्टि के प्रारम्भ से ही अत्यंत जटिल एवं कठिन भाव व्यवहार रहा है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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💥 Taking initiative on behalf of any behavior in this selfish world has been a very complex and difficult behavior since the beginning of this creation.

Written by Vikrant Rajliwala

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💥
ऐसा क्यों?

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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💥
Why is this?

Written by Vikrant Rajaliwal.

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💥
क्योंकि हम मनुष्य इस सृष्टि के प्रारम्भ से ही प्रत्येक नवीन विचार एवं व्यवहार के द्वारा एक अनजाने भय से भयभीत होते आए है। और उन्हें अपनाने या समझने के विचार मात्र से ही हमारा हलक सुख कर बैठ जाता है और हमारी व्याकुल आत्मा स्वयं के व्यक्तिव में परिवर्तन की आशंका मात्र से काँप जाती है। चाहे वह परिवर्तन सकरात्मक ही क्यों न हो।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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💥
Because we humans have been afraid of an unintentional fear from the beginning of this creation through every new thought and behavior. And with the thought of adopting or understanding new ideas and practices, our throat gets dry and our distraught soul is shaken by the possibility of change in our personality. Even if that change is positive.

Written by Vikrant Rajliwala.

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💥
आज जमाना बदल गया है मित्रों, अब किसी भी लेखक कलाकार, कवि, एवं शायर को किसी भी घमंड से चूर अत्यचारी के समक्ष अपनी चप्पलें घिसते हुए अपने आत्मसम्मान को स्वयं अपने ही हाथो क़त्ल करते हुए किसी भी घमंड से चूर अत्यचारी के समक्ष अपनी कला को जीवित रखने हेतु झुकने की कतई भी आवश्यकता नही है।

आज ईष्वर की कृप्या से इंटरनेट जिंदाबाद है और अनेकों ऑनलाइन मंच है जहाँ से आप अपनी कला का प्रदर्शन जारी रखते हुए एक आत्मसम्मान के साथ अपनी कला को जीवित रख सकते है।

हो सकता है इसमें आपको कामयाब होने में एक अरसा भी लग जाए, परन्तु मैं विक्रांत राजलीवाल आपको विशवास देता हूं कि उस एक अरसे के बाद भी आप एक बादशाह के सम्मान ही स्वयं के आत्मसम्मान की रक्षा करते हुए खुद को सम्मानित महसूस कर सकेंगे। मुझ को यकीन है आपको तो यकीन है ना!

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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Translated

💥
Today, the time has changed, friends, now any writer, artist, poet and poet is not required to bow down to keep his art alive by killing his own self-esteem in front of an arrogant person.

Today, due to the kindness of God, the Internet is alive and there are many online forums from which you can continue to showcase your art and keep your art alive with a self respect.

It may take you an time to succeed in this, but I mean that your friend Vikrant Rajliwal gives the assurance to all of you that even after that one time you will protect your self-respect like a king. Will be able to feel honored. I’m sure are you sure?

Written by Vikrant Rajliwala

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#curruption #Literature #System #भृष्ट #साहित्यिक #व्यवस्था #इंटरनेट #internet #poetry #Shayari #Vikrant #Rajliwal #freedom #wisdom

💥 सुप्रभात मित्रों,

जीवन का एक अचूक मन्त्र है यही तंत्र है कि हम अपने जीवन के प्रत्येक क्षण व्यस्त रहे, व्यवस्त रहे एवं स्वच्छता को अपनाते हुए प्रभु की मस्ती में मस्त रहे।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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Translated

💥 Good morning friends

There is an unmistakable mantra of life, this is the system that we remain busy at every moment of our life, stay busy in the joy of God while adopting cleanliness.

Written by Vikrant Rajliwala

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💥आपने आपके अपनो को हानिकारक व्यसनो की चपेट में एक बीमार व्यक्ति के सामान तड़पते देखा है।

पर क्या आपको यह ज्ञात है कि वह वास्तव में एक बीमार व्यक्ति ही है जिसका उपचार केवल आध्यात्मिक कार्यक्रम के तहत कुछ गिने चुने जानकर व्यक्तियों के द्वारा ही सम्भव है।

जरा कुछ क्षण स्वयं के चित्त को शांत रखते हुए एक बार पुनः विचार कीजिए।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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You have seen your loved ones suffering like a sick person in the grip of harmful addictions.

  But do you know that he is really a sick person whose treatment is possible only by a few people knowing that under the spiritual program.

  Just think again, keeping yourself calm for a few moments.

  Written by Vikrant Rajliwala

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इस संसार मे कुछ व्यक्तियों को इंकलाब की बोली ही समझ मे आती है। उनसे आप कितना ही विन्रम क्यों ना हो जाए परन्तु वो आपको निर्जीव समझते हुए आपकी हर विन्रमता को नकारते हुए आपके व्यक्तिव को गारेंटिड लेने से बाज नही आते।

ऐसे ही व्यक्तियों के लिए मैं यानी कि विक्रांत राजलीवाल आज सरेआम अपने इस फेसबुक के पेज़ से अपने हज़ारो फॉलोवर्स मित्रों को साक्षी मानते हुए कहता हूं कि आप बाज़ आ जाए कहि ऐसा ना हो सच्चाई का दिव्य प्रकाश आपकी मलिन आत्मा को जिंदा ही ना भस्म कर दे।

स्मरण रहें जब जब उस संसार से किसी सच्चे व्यक्तिव ने इस संसार के किसी भी भाग से इंकलाब किया है तब तब जन जागृति क्रान्तियों का एक सैलाब उमड़ा है। फिर चाहे आप स्वयं को कितना ही सभ्य साबित करने का प्रयत्न क्यों ना करें। परन्तु जब अध्यात्म की बुलन्द आवाज़ के साथ इंकलाब हुआ है तब हर सभ्य चेहरों से उनका सभ्य होने का नक़ाब सच्चाई की एक हुंकार मात्र से खण्ड खण्ड हुआ है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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Vikrant Rajliwal
(Recovery Addict)
Author, Writer, Poet, Dramatist, Spiritual Thinker And Writer.

💥
इस मनुष्य जीवन मे आप अपने व्यक्तिव में एक सकरात्मक परिवर्तन रातो रात या अकस्मात ही उप्पन नही कर सकते। इसके लिए आपको एक योग्य मार्गदर्शक की अति आवश्यकता जीवन के पग पग पर हर कदम पर अवश्य महसूस होती रहेगी।

क्यों कि आज आप जिस जटिल समाजिक स्थितियों का सामना कर रहे है वह जटिल स्थितियां या गम्भीर समस्याएं भी रातो रात या अकस्मात ही आपके जीवन मे प्रवेश नही कर सकी है।

इसीलिए उनके समाधान हेतु आपको एक योग्य गुरु एव ज्ञानी मार्गदर्शक के अंतर्गत एक गहन चिंतन एवं एक उचित जीवन प्रणाली को समझना एव अपनाना ही होगा।

आपका मित्र विक्रांत राजलीवाल।
(रिकवरी एडिक्ट)

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Translated

Vikrant Rajliwal
(Recovery Addict)
Author, Writer, Poet, Dramatist, Spiritual Thinker And Writer

💥
In this human life, you cannot achieve a positive change in your personality in the night or accidentally. For this, you will definitely feel the need of a qualified guide at every step on the path of life.

Because the complex social situations you are facing today, even complex situations or serious problems could not enter your life overnight or accidentally.

That is why you have to understand and adopt a deep thinking and a proper life system under a qualified guru and knowledgeable guide to solve them.

Your friend Vikrant Rajliwal.
(Recovery Addict)

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💥
एक निर्जीव होता या निष्क्रिय होता वृक्ष (घर, परिवार या कोई संस्था) जब एक दिव्य उजाले की दिव्य ऊर्जा से स्वयं की निष्प्राण होती शाखाओं की जीवन धारा में कोई भी जीवन प्राण रूपी ऊर्जा प्रदान करने हेतु कोई भी प्रयास ना करे तो ज्ञात रहे उसका अंत अब निच्छित है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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#Narcotics #Anonymous #Programme #Recovery #Life #Vikrant #Rajliwal #Experience

Translated

💥
A tree that is a lifeless ( Home, Family and Institution) or a tree lying dormant, when one does not make any effort to provide life-like energy in the life stream of the branches, which is self-sacrificed by the divine energy of a divine light, then its end is now certain.

Written by Vikrant Rajliwal.
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#Narcotics #Anonymous #Programme #Recovery #Life #Vikrant #Rajliwal #Experience

💥
आज मै यानी कि अपनी अंतरात्मा से एक अध्यात्म प्रोग्राम का फालोवर एक रिकवरी एडिक्ट विक्रांत राजलीवाल अपने इस फ़ेसबुक पेज़ के इन चंद गिने चुने से मेरे ह्रदय अज़ीज़ फॉलोवर्स समेत इस संसार के प्रत्येक उस एडिक्ट के लिए जो आज भी किसी ना किसी हानिकारक व्यसन की चपेट में एक अशांत जीवन जीने को मजबूर है के लिए उनकी आत्मा के शांति के लिए अपनी उच्च शक्ति उस परमपिता परमेश्वर से एक आत्मशांति की प्रार्थना करता हु। ईष्वर हम हम की आत्मा को एक आत्मशांति प्रदान करने की कृपया करे।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल।
(रिकवरी एडिक्ट)

मेरी सेवा का लाभ प्राप्त करने हेतु वट्सअप के जरिए सम्पर्क कीजिए। जी इस पेज पर अंकित है।

#NA #Programme #Vikrant #Rajliwal #HaiPower

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

Thank You.

Written By

Vikrant Rajliwal

इस ज़िन्दगी में हर शख्स खुद को सफलता की बुलन्दियों पर दूसरे को क्यों दिखलाना चाहता है।

माहौल चाहे किसी और की बारात का ही क्यों ना हो परFB_IMG_1549024876696 वह खुद को ही दूल्हा क्यों दिखलाना चाहता है।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
13/08/2019 at 4:55 pm

एक चीख सुनाई देती है आज भी अनजाने मुसाफ़िर मुझे। ये रुकी सांसे ये ठहरी ज़िन्दगी ये एहसास ए जुदाई, मेरे खुद के नही।। खो गए है जो एहसास न वो मेरे थे और कॉयम है जो एहसास अभी टूटी धड़कनो में मेरे न ही ये मेरे है। हम मिले के नही एक दूजे से […]

via एक अधुरा फ़साना। — Author, Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal

🕯️ ख़ामोशीया

रुकती सांसो से रुक सी जाए जब धड़कने, हर धड़कन पर पहरा कोई, शिकंजा शिकारी सा कसने जब लगे।

ख़ामोश हर लव्ज़ बंद जुबां से बोलने जब लगे,दबे एहसास भी झिलमिलाती नज़रो से झलकने जब लगे।।

हर आरज़ू एक फ़रियाद ख़ुद ही बनने जब लगे, हर फ़रियाद से जान जिंदगी की निकलने जब लगे।

हसीं हर ख़्वाब भी टूटने एकदम से जब लगे, सामना हक़ीक़त से हक़ीक़त का होने जब लगे।।

लहू जिस्म से धड़कनो तक पहुचते हुए रुकने जब लगे, हर धड़कन भी धक से धड़कना भूलने जब लगे।

होश नागवार से महसूस सरेराह बेहोशी सी छाने जब लगे, हर साया साये से अपने दूर कहि जाने जब लगे।।

दम तोड़ती ज़िन्दगी दबी जुबान से जिंदगी को बुलाने जब लगे, निसान चाहतो के खुद चाहते मिटाने जब लगे।

हर कदम एक इम्तेहां और हर नज़र ज़हर बरसाने जब लगे, एहसास खुद एहसासों से अपने एहसास चुराने जब लगे।।

ज़हर जिंदगी का जिंदगी से जिंदगी में उतारने हम जब लगे, टूटी सांसो को टूटी धड़कनो से छुपाने हम जब लगे।

बोलते एहसासों को ख़ामोश एहसासों से दबाने हम जब लगे,
बेपरवाह जिंदगी को लगा कर गले, जिंदगी खामोशी से हम जीने जब लगे।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
10/05/2019 at 5:57 pm

💥 जागरूक नागरिक कर आंकलन राजनेताओं का प्रकाश सत्य से…🇮🇳

जागरूक नागरिक कर आंकलन राजनेताओं का प्रकाश सत्य से,

तदुपरांत चित शांत से व्यवहार मत का बदल देगा तस्वीर बिगड़ी हर तकदीर।

दृढ़ संकल्प विशवास स्वम का स्वम पर कर धारण, चल राह सत्य से,

ज्ञान स्वम् का, निर्भयता से मुक्त निर्भरता, चुनाव ईमानदारी का ईमान से।।

कर देगा दूर हर भर्ष्टाचार हर भृष्ट व्यवस्था, कर देगा न्याय न्याय का मत एक सत्य का,

व्यर्थ ये अधिकार ना जाए तुम्हारा, राम बाण है राम चंद्र का, केवल सत्य एक मत तुम्हारा।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

22/04/2019 at 12:55 pm

क़िताब ए महोबत के पाक पन्नों पर दर्द, एक दीवाने का लहू जो अब बरस गया। जख़्मी दिल के ज़ख्मो से तमाम, तेज़ाब कोई जो सरेराह अब बरस गया।। याद आई बिछुड़े महबूब की जब जब अपने, बेदर्द यह ख़ूनी सावन भी तब तब गरजा बेहिंतिया और टूट कर बरस गया। देख कर तड़प एक […]

via 💌 एक इंतज़ार… महोबत। (दास्ताँ श्रुंखला के अंतर्गत प्रथम दास्ताँ) — Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation’s -स्वतंत्र लेखक-

नमस्कार मित्रों, जल्द ही मैं आपका अपना रचनाकार एव कवि-शायर मित्र विक्रांत राजलीवाल अपनी आजतक की सबसे बहेत्रिन नज़्म दस्ताने। या इसे आप कुछ इस तरह से भी कह सकते है कि मेरे साधारण से जीवन की मेरी आजतक की नज़्म शायरियों में से यह दस्ताने मैने सबसे पहले लिखी थी। अन्य नज़्म शायरी मेने […]

via 🌹 दास्तां। (दर्दभरी महोबत की अति विस्तृत दस्ताने) — Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation’s -स्वतंत्र लेखक-