Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

अपने दिल में छुपा कर रखता हूं बहुत से मैं एहसास, के आज भी ये दिल मेरा एक धड़कती धड़कन को रोता है। गर ज़िन्दगी को जीना एक ज़ुल्म है तो ये सांसे क्यों हर लम्हा जिंदा ज़िन्दगी को धड़का कर जाती है।। खो गया हूं पा कर के कुछ तो खुद सा खुद के […]

via 🍂 लम्हें। — Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation’s -स्वतंत्र लेखक-

Mar 23, 2019

नमस्कार मित्रों, जल्द ही मैं आपका अपना रचनाकार एव कवि-शायर मित्र विक्रांत राजलीवाल अपनी आजतक की सबसे बहेत्रिन नज़्म दस्ताने। या इसे आप कुछ इस तरह से भी कह सकते है कि मेरे साधारण से जीवन की मेरी आजतक की नज़्म शायरियों में से यह दस्ताने मैने सबसे पहले लिखी थी। अन्य नज़्म शायरी मेने […]

via 🌹 दास्तां। (दर्दभरी महोबत की अति विस्तृत दस्ताने) — Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation’s -स्वतंत्र लेखक-

Mar 17, 2019

अब वो महफिले ना रही, अब वो हुनरबन्ध क़लमकार भी कहा दिखते है जमाने में। सुनते थे कभी जो बुज़ुर्गो से अपने कि लहू बहता था उन महफ़िलो में शायरी से शायरों के।। वो दौर, वो दस्तूर, वो ज़माना, जरूर रहे होंगे, बहता लहू भी जम जाता होगा हुस्न ओ इश्क़ के बाजारों में, वर्ना […]

via 💏 महोबतें — Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation’s -स्वतंत्र लेखक-

Mar 16, 2019

महोबत से कायल है महबूब की वो अपने, लम्हा लम्हा मर्ज़ ए महोबत से घायल है महबूब की वो अपने। देखता है सूरत ए यार बेहद नज़दीक से वो अपने, करता है प्यार महबूब को बेहद नज़दीक से वो अपने।। हुस्न के वार से इश्क़ तड़प जाता है बेहिंतिया, उठ उठ कर सर्द रातो में […]

via 🌹अश्क़। — Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation’s -स्वतंत्र लेखक-

Mar 16, 2019

Feb 9, 2019
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

2 comments

💦 एहसास ( Written by Vikrant Rajliwal)

🙏 Hello loved ones and heart loved ones, Written by me, my first published book of my Hindi poems एहसास^Realization^ whose center point is an attempt to strike through our poems on the rigid behavior of today’s civilized society towards the important values ​​of humanity and socialism from our civil society. . All the wise […]