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यक़ीन दिल से।

इस ज़माने में सदियों से है कायम जो।
नाम यक़ीन अहसास से है जख़्मी जो।।

अक्स है यार की यारी का इस दिल मे जो।
इन्तेहाँ है जिंदगी, यार पर अपने निछावर जो।।

एक खेल जज़्बात का, जज़्बात से है जज़्बाती जो।
उम्र, तजुर्बा, ये अपनापन, अपनेपन से है झलकता जो।।

रखना महफ़ूज, इस दिल मे हमेशा, धड़कनो से अपने, ऐतबार ए यार, ज़िन्दगी से अपने लगाकर।

न करना यक़ीन, दगा ये ज़िन्दगी, जिंदा है ज़िन्दगी, ए यार, हर गम ए ज़िन्दगी, साय से यार अपने हराकर।।

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल।

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राही और रास्ता।

टूट गया, थक कर चूर हो गयार जो राही, अनहोनिया ये टूटती सासे, क्या अब वो थाम पायेगा।

काफिला खो गया, चाहतो का जो, टूटे कदमो से क्या अपने, मन्ज़िल तक अब पहुँच पायेगा।।

 

निसान सीने पर अपने, अब भी जख्म वो ताज़ा है जो
नासूर हर जख्म-अहसासों को, क्या कभी भर पायेगा।

हालात ये बेरुखिया,फरमान कोई ये आसमानी है जो
अक्स ये टूटा आईना अपना, क्या कभी जोड़ पायेगा।।

 

दुआ ये रूह से, ए-ज़िन्दगी-ज़िन्दगी के लिए।
जी जाए ये ज़िन्दगी, ज़िन्दगी अपनो के लिए।।

 

मिटा कर, हर निसान, हर आरज़ू वो, अनचाही सी है जो।
खिल जाए, गुल चाहतो के, चाहतो से, दिल मे दबे है जो।।

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल।

Rahi oar raasta

Tut gya, thak kar chur ho gya jo rahi, anhoniya ye tutti sase, kya ab wo tham payega

Kaafila kho gya, chahto ka jo, tute kadamon se kya apane, manzil tak ab pahunch payega

 

Nisaan seene par apane, ab bhi jakham wo taza hai jo
Nasoor har jakham-ahsaaso ko, kya kabhi bhar payega

Haalat ye berukhiya, farmaan koi ye aasamani hai jo
Akas ye tuta aaina apana, kya kabhi jod payega

 

Dua ye ruh se, ae-zindagi-zindagi ke liye
Jee jaye ye zindagi, zindagi apano ke liye

 

Mitakar har nisaan, har aarzoo wo, anchaahi si hai jo
Khil jaye gul-chahaton ke chahato se, dil me dabe hai jo

Lekhan dwara Vikrant Rajliwal

#Hindi Poetry, Shayari & Story Article’swritervikrantrajliwal-#

 

 

चाहत।

दर्द ए दिल,जख्म वो अपना, तकलीफ़ से सरोबार हो गया। मुस्कान चेहरे पर अब भी है उसके, उसकी एक मुस्कान से दर्द-दिल, दर्द दीवाने का झलक गया।

ये बेबसी, ये तड़प, ये दामन मेरा, आँसुओ से सरोबार हो गया। चाहत सीने में मेरे, अब भी घायल, उसकी एक आह से आह ए दिल, दिल दीवाने का अब फ़ना हो गया।।

लेखन द्वारा विक्रान्त राजलीवाल।

अहसास-ज़िन्दगी।

कभी कभी मेरे दिल में एक ख़याल आता है।
दिल धड़कनो को वह हर पल बेहद सताता है।।

हर घड़ी एक इम्तेहां ये जिंदगी, इतनी कठोर क्यों है।
माया मोह से जंजाल, ये जिंदगी, इतनी लाचार क्यों है।।

कभी तन्हाई, तो कभी जलसा ये ज़िन्दगी, इतनी बेवफ़ा क्यों है।
खुशबू बहारो की, ये प्यास रेगिस्तानों की, ये ज़िन्दगी इतनी संगदिल क्यों है।।

जो भी हो, ये ज़िन्दगी, ये धड़कती-धड़कने, ये तड़पती सासे, जान ये ज़िन्दगी, ये पहरा सासो पर, इतना प्यारा क्यों है।

हर एक सास, एक कर्ज, ये अहसास अपनो का, हर पल हर अहसास एक दुआ, ये सितम ज़िन्दगी, इतना प्यारा क्यों है।।

लेखम द्वारा विक्रांत राजलीवाल।

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तन्हाइयां।

क्यों ये दिल उदास है मेरा
मासूम अहसासों से अपने।

घायल है क्यों हर अहसास
सितम धड़कनो पे जो अपने।।

 

उठते है सवाल दब जाते है क्यों
नही है जवाब सवालो क्यों अपने।

ज़िन्दगी हर लम्हा है एक अजीब सी दास्तां
हर दास्तां है साथ ज़िन्दगी अधूरी क्यों अपने।।

 

खता नही ये कोई जुल्म भी नही है बेगाने
टूट गयी जो धड़कने अब साथ क्यों नही है।

हर हालत ये ज़िन्दगी, सख्त कोई पत्थर से है क्यों
टूट गए जो रिश्ते दिल से दिल के अब साथ क्यों नही है।।

 

ये मौसम, ये विरानपन, हर लम्हा जो तन्हा, हिस्सा ज़िन्दगी
दर्द सासो में मेरे, खुशनुमा ये ज़िन्दगी अब साथ क्यों नही है।

ये यादें, ये बर्बादिया, हर सास एक ज़हर, जो हालात ज़िन्दगी।
साया पास कोई मेरे, हसीन कोई नग्मा अब साथ क्यों नही है।।

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल।

Tanhaiyan

Kyu ye dil udaas hai mera
Masum ahsaso se apane

Ghayal hai kyu har ahsaas
Sitam dharkano pe jo apane

 

Uthate hai sawaal dab jate hai kyu
Nhi hai jwaab, sawalo ka kyu apane

Zindagi har lamha hai ek ajeeb si dastan
Har dastan hai sath zindagi adhuri kyu apane

 

Khta nahi ye koi zulm bhi nhi hai begane
Tut gyi jo dhadkane ab sath kyu nhi hai

Har halaat ye zindagi sakhat pathar se hai kyu
Tut gye jo rishtey, dil se dil ke, ab sath kyu nhi hai

 

Ye mousam ye veeranapan, har lamha jo tanha hissa zindagi
Dard saso me mere, khushnuma ye zindagi ab sath kyu nahi hai

Ye yaadein ye barbadiya, har sas ek jaher, jo haalat zindagi
Saya koi pass mere, haseen koi nagma, ab sath kyu nahi hai

Lekhan dwara Vikrant Rajliwal

#Hindi Poetry, Shayari & Story Article’s#

 

پریمی کی آنسو (ترجمہ شدہ ہندی سے urdu زبان)

زندگی کے ہر لمحے کی یادوں کی یادوں کی طرف سے لکھا ہر خط

یاد رکھو، اب بھی، لیکن یاد رکھیں کہ وہ آپ کو زندگی کے ہر لمحے یاد کرتا ہے

دل کی کتاب پر، اس نے لکھا تھا کہ اس کے خون،
آپ کا نام خونی آنسو کے ساتھ، پراتتی روح جو اب زندگی کے ہر لمحے زندہ ہے

برا پیار، ٹوٹا ہوا دل، زخم دل، آپ کا عاشق
یہ آپ کو نظر انداز کرنے کے لئے پریشانی ہے، قاتل زندگی کے ہر لمحے آپ کا عاشق ہے.

لکھنے کی طرف وكرات راجلوال

ہندی شاعری، شیری اور کہانی آرٹیکل

Lover’s Tear(Translated Hindi to english language)

Every letter written by memories of memories of Every moment of life

Remember, still, but rememberl he remembers you, every moment of life

On the book of the heart, he wrote with the throbbing drowsiness that his blood,
your name with Bloody tears,Pratapati Soul which is now alive every moment of life

Bad love, broken heart, wounded heart, lover of yours
This is the persecution you have to ignore, the murderer is your lover every moment of life.

Written by Vikrant Rajliwal

Hindi Poetry, Shayari & Story Article

अश्क।

उड़ गए हर अक्षर यादो की किताब से लम्हा लम्हा।
याद हैं अब भी मगर, याद वो तेरी हर लम्हा लम्हा।।

दिल की किताब पर, टूटती धड़कनो से लिख दिया जो लहू से अपने,
अश्क लहू नाम वो तेरा, तड़पती रूह, ज़िंदा जिस्म से अब, हर लम्हा लम्हा।

रुसवाई ये महोबत, टूटती धड़कने, जख्मी ये दिल, दीवाने का तेरा,
बेपरवाई ये बेरुखिया, ये जुल्म तेरा, कत्ल ए दीवाना हर लम्हा लम्हा।।

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल।

Hindi Poetry, Shayari & Story Article’s

 

 

वीरान-अहसास।

मिलते है कुछ लोग, ज़िन्दगी अनजाने ही।
बिछुड़ जाते है फिर एक रोज़ अनजाने ही।।

 

ढूंढता है दिल धड़कनो से धड़कने फिर साया उनका,
नही मिलते खो गए, जो साथी बन के साया अनजाने ही।

वो यादे, कोई ख्वाब, चाहत है दिल की, दिल से जो उनसे,
हक़ीकत कहो या अफ़साना उन्हें, भूल गए जो अनजाने ही।।

 

तड़प ये कैसी, बेचैनी है अब, दिल-धड़कनो मे ये जो अक्सर,
ये ख़ामोशीया, बुलाती है उनको, दफ़न है साय,जो अनजाने ही।

जख्म ये नासूर, हालात है अब, जख्मी दिल के ये जो अक्सर।
ये अश्क, ढूंढते है कफ़न, वीरान अहसासों से जो अनजाने ही।।

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल।

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