एहसास

मेरे द्वारा लिखी गयी मेरी प्रथम पुस्तक एहसास जिसका केंद्र बिंदु समाज के असमाजिक पहलुओ पर आप सबका ध्यान आकर्षित करना, आपको सावधान करना। प्रथम प्रयास, प्रथम पुस्तक एहसास से प्रथम कविता से प्रथम एव अंतिम पृष्ट… आपके लिए, आपके समुख।

धन्यवाद।

लेखक विक्रांत राजलीवाल।

(Published on jan 2016 in Delhi world book fair, Published by sanjog publication^SP Publications^)

Translated one of my hindi topic to english language.

🕊

The bird that flies, now it is free
Now it is free from every sadness a life

Measure again a new sky, it is free
New morning, new garden, now it is, now it is free…

Written by Vikrant Rajliwal
#Hindi Poetry, Shayari & Story Article’s #

ख़ामोश अल्फ़ाज।

ऐ यार बाट दो गम अपने हमे, हम भी है दर्द ए गम, अपनो के शिकार।
मुस्कुरा दे, ये सितम गुनाह तो नही, हर दर्द से छुपाए है दर्द जो तमाम।।

चले गए, साय जो तन्हा छोड़ कर, नादानियां ये गुनाह तो नही।
दिखाता है हर दर्द नज़दीक से आईना, ये जख्म ताज़ा जो अब नही।।

 

खफ़ा है दर्द क्यों मुझ-से ये मेरा साया,
दफ़न है साए से जो मुकदर, वो मेरा नही।

अहसास है वीरान ज़िन्दगी, ये अपनो के बीच
मुलाक़ात है खुद से, ये ज़िस्म ये रूह मेरी नही।।

 

ये नादानियां, ये दीवानापन, नया तो नही
ये आहट, ये खामोशियो यहाँ सदियो से है।

वक़्त की बिसात, ये चाल उलझी सी कोई
वॉर धड़कनो पर मेरे, तड़प ये अपनी सी है।।

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल

Hindi Poetry, Shayari & Story Article’s

Empty Place (Translated Hindi to english language)

This place is empty, your heart is empty

There is a sign rest on your wounds.

This pain will hurt you,This silence from a shocking life
Aim is far away, this is the restlessness of life. This pain is still there . ..

This road which is deserted,Your stranger is far away from the shadow. Thirsty is the soul, Life is still in the breath of life, the pain is still there . ..

These false blasphemy ourself, Life is restless at all times
It’s a lot of ruins, things are a poisonous life. This pain is still there. ..

This shadow which is along with, Not with that, every shadow is unaware now
Love is atrocious, With the rest of life’s life, this pain is still there

 

Written by Vikrant Rajliwal

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खाली जगह।

ये जो जगह खाली सी है दिल में तुम्हारे कहि।
एक निसान बाकी है जख्मो पर तुम्हारे अभी।।

ये दर्द तड़पायेगा तुमको, कसक ज़िन्दगी से ख़ामोशीया अभी।
मन्ज़िले है दूर बहुत, इन्तेहाँ ज़िन्दगी के बेदर्द बाकी है ये दर्द अभी।।

ये राह जो सुनसान ए राही, अंजान साए से आपने दूरिया अभी। प्यासी है रूह बहुत, सकूँ ज़िन्दगी के सासे बाकी है ये दर्द अभी।।

ये आलम जो रुसवाईयाँ हमको, हर लम्हा तड़प ज़िन्दगी अभी।
यक़ीन है बर्बादियों बहुत, हालात एक ज़हर ज़िन्दगी बाकी है ये दर्द अभी।।

ये जो साए साथ-साथ, साथ जो नही, हर साया अंजान अभी।
महोबत है जुल्म बहुत, साथ ज़िन्दगी से ज़िन्दगी का बाकी है ये दर्द अभी।।

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल।

Khali jagah.

Ye jo jagah khali si hai dil me tumhare kahi
Ek nisan baki hai jakhmo par tumhare abhi

Ye dard tadpayega tumko, kasak zindagi se khamoshiya abhi
Manzile hai dor bhut, inteha zindagi ke bedard baki hai ye dard abhi

Ye rah jo sunsaan ae rahi, anjaan saye se apne duriya abhi
Pyaasi hai ruh bhut, sakun zindagi se sase baki hai ye dard abhi

 

Ye aalam jo ruswaiya humko, har lamha tadap zindagi abhi
Yakeen hai barbadiya bhut, haalat ek zaheer zindagi baki hai ye dard abhi

Ye jo saye sath-sath, sath jo nahi, har saya anjaan abhi
Mahobat hai zulm bhut, sath zindagi se zindagi ka baki hai ye dard abhi

Lekhan dwara Vikrant Rajliwal

Hindi Poetry, Shayari & Story Article’s

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

एक कसक।

वो मुझ-से अंजान तो न थे।
मेरी हर एक सास, वो ही तो थे।।

ज़िन्दगी हर लम्हा, एक उनका इंतेज़ार क्यों है।
वो आए नही, शायद भूल गए हमको,
हर एक मेरी धड़कन, एक कसक के साथ क्यों है।।

उनकी वो यादे, ये ज़िन्दगी एक इम्तेहान क्यों है।
वो हक़ीक़त नही, दर्द ये अहसास हमको
हर सितम मेरी आरज़ू, एक दीदार उनका साथ क्यों है।।

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल।

Ek kasak

Wo muz-se anjaan toh na thhe
Meri har ek sas wo hi toh thhe

Zindagi har lamha, ek unka intezaar kyu hai
Wo aae nhi, shayad bhul gye humko
Har ek meri dharkan, ek kasak ke sath kyu hai

Unki wo yaadein, ye zindagi ek imtehan kyu hai
Wo hakikat nahi, dard ye ahsaas humko
Har sitam meri aarzo, ek deedar unka sath kyu hai

Lekhan dwara Vikrant Rajliwal

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जख़्मी-अहसास।

हक़ीक़त ये ख़्वाब, इश्क मेरा, एक रोज़ तुमको भी दिख जाएगा।
दर्द ए दिल, ये दर्द मेरा, एक रोज़ दिल को तुम्हारे भी तड़पाएगा।।

 

टूट के बिखर न जाना, देख-आईना-महोबत, नज़रो से दीवाना दिखाएगा।
अक्स नज़दीक से सितम, हर धड़कती-धड़कन, दीवाना जब सुनाएगा।।

खोई आरज़ू, हर बेबसियों से अपनी, एक रोज़ सामने आ-जाएगा।
दफ़न-ज़मीर सदियो से जिंदा जो सनम, ज़िंदा दीवाना कर जाएगा।।

 

अहसास ये दर्द ए जुदाई, एक आह दर्द से भरी
चिर कर दिल ये धड़कने , लहू जिगर बतलाएगी

मौसम ये हर लम्हा रुसवाई, खामोश-ज़िन्दगी ये मेरी तन्हाई।
ज़मीं ये आसमां, ए बेवफा सनम, जख्म-दिल पर दे जाएगी।।

 

चांद ये तारे, ये बहता लहू, नासूर है ज़ख्म ये जख्मी,
हर अहसास मेरे।
धोखा ये बवफ़ाई, ये महोबत का नाम, ज़हर है हर दवा, ज़ख्म-अहसासो पर मेरे।।

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल।

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मिटा दी, वो सुर्ख लकीरे, अश्को से, ए बेवफ़ा,
महोबत की तेरे

खिंची थी, बड़ी शिदत से, धड़कनो पे, बेदर्दी से,
जो वख्त ने मेरे. ..

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल।
🌹
Mita di, wo surkh lakirey, ashko se, ae bewfafa, mahobat ki tere

khichi thi bdi shidat se, dharkano pe, bedardi se, jo wkht ne mere…

lekhn dwara✍Vikrant Rajliwal.

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जलवा ए हुस्न।

FB_IMG_1495674896147देख कर बदलते मौसम की सुर्ख लाली
उफान हैं दबी-दबी धड़कनो में एक

चेहरे पर उसके है नूर ए हुस्न का जलवा
मदहोश निगाहों में हैं कोई आग एक

लाली से हैं लबो के उसके, दिलकश ये मदहोश समा सारा
हाल ए दिल, बेहाल हैं सुनाए जो उसको दीवाना वो एक

दिल तोड़ दिया, नज़रो को फेर के अपनी
हाल ए दिल सुनने से पहले उसने वो एक

कर रहा फरियाद, चोखट पर उसके रख कर सर
हुस्न से दीदार का,अब भी दीवाना उसका वो एक…लेखन द्वारा✍विक्रांत राजलीवाल।

बेरुखिया। ( (After some of editing)

कर गए नज़र-अंदाज़ वो, फेर के मदहोश-नज़रे जो अपनी
ज़ला दिया दिल ए दीवाना, कातिल हर अदा से जो अपनी

कत्ल कर के मदहोश निगाहों से, मुस्कुराता हैं हुस्न वो बेबाक
छोड़ तन्हा बेपरवाई से,ज़ख्म -दिल पे दे जाता हैं हुस्न वो बेबाक

दिखती नही राह कोई, बच के निकल जाये जो दीवाना
हर राह हैं सनम से मेरी, बच के कैसे गुज़र ,जाये दीवाना

आशिक है महोबत से उनकी, घायल ये मेरे अरमान
देखा हैं नूर ए हुस्न का जलवा, कातिल उनकी हर चाल

जख्मी हैं अरमान मेरे, अधूरे कई ख़्वाब,
हर ख्वाब में रहती हैं वो, एक मेरी जान

हर अदा होती हैं हुस्न की संगीन,
करता हैं मुलाकाते दीवाना
ख्यालो में अक्सर अपने रंगीन

कहते हैं आशिक पुराने हैं रोग ए महोबत ये सदियों पुराना
चलता हैं तीर निगाहों से, बेबस हो जाता हैं दीवाना

कर के नज़र-अंदाज़ ज़माने जी रुस्वाइया
खड़ा हैं राह ए सनम, सनम का दीवाना

थाम के धड़कता-दिल, काँपते हाथो से अपने
ले रहा हैं नाम ए महोबत, चोखट से उनका दिवाना

 

रुख से पर्दा अपने हटा दे, चाल ये कोई नही
मरता हैं तेरे नाम से, अब भी तेरा दीवाना. ..

👤लेखन द्वारा ✍ विक्रान्त राजलीवाल।

(After some editing)
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