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बेरुखिया।

FB_IMG_1498381443086कर गए नज़र-अंदाज़ वो, फेर के मदहोश नज़रो को अपनी
ज़ला दिया दिल ए दीवाना,कातिल हर अदा से अपनी

कर के कत्ल मदहोश निगाहों से,मुस्कुराता हैं हुस्न बेबाक
छोड़ के तन्हा बेपरवाई से, ज़ख्म -दिल पे दे जाता हैं हुस्न बेबाक

दिखती नही राह कोई, बच के निकल जाये जो दीवाना
हर राह हैं सनम से मेरी,बीच के कैसे गुज़र ,जाये दीवाना

आशिक है महोबत से उनकी, घायल मेरे अरमान
देखा हैं नूर ए हुस्न उनका
कातिल हैं उनकी हर चाल

घायल अरमानो से हैं ख़्वाब कई, हर ख्वाब में रहती हैं वो, मेरी जान

हर अदा होती हैं हुस्न की संगीन,करता हैं मुलाकाते अक्सर उनसे दीवाना ख्यालो में अपने रंगीन

कहते हैं आशिक पुराने हैं रोग ए महोबत सदियों पुराना
चलता हैं तीर निगाहों से,बेबस हो जाता हैं दीवाना

कर के नज़र-अंदाज़ ज़माने जी रुस्वाइया
खड़ा हैं चोखट ए सनम
ले रहा हैं नाम ए महोबत
थाम के धड़कता -दिल दीवाना

रुख से पर्दा अपने हटा दे, चल ये कोई नही
मरता हैं तेरे नाम से अब भी तेरा दीवाना…👤लेखन द्वारा ✍ विक्रान्त राजलीवाल। व्यू ऑन tumblr site.

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बेपरवा सनम।

FB_IMG_1498402445529.jpgदेखा था ख़्वाब कभी दीवाने ने एक
जगमगाते सितारो से हसीन
था वो चेहरा एक

थी परवान-महोबत, चाँद की रात में एक
छा गए फिर क्यों उनपे वो
बदल काले, हो गए जुदा वर्षो से मिले
पल में एक

हुस्न की बहार से,इश्क मेरा छली हुआ
खाया खंज़र सिने पे,इश्क मेरा नीलाम हुआ

महोबत के बज़ार में , बिकती नही महोबत
वफ़ा-ऐतबार से, ज़िंदा हैं महोबत

बिक जाती हैं फिर भी वफ़ा
करती हैं बेवफ़ा कोई जब महोबत

सकूँ दिल का जो अब लूट गया
दाग धड़कनो पे ये कैसा पड़ गया

चला तीर निगाहों से कही
छली ये दिल मेरा हो गया

भरी हैं जो इस दिल में वफ़ा
मिलते हैं अक्सर बेवफ़ा

ज़ख्म दिल के दिख गये
नासूर बन के उभर गये

सकून ए दिल जो हसीना ने एक
सरेआम मेरा लूट लिया

धड़कनो पे दे के निशान-जुदाई
तन्हा जो मुझ को छोड़ दिया

महोबत दिलरुबा की,चिर के दिल घायल करे
दिखा के आईना-महोबत,ऐतबार से फिर बेवफाई करे

खाया धोखा प्यार से, तन्हा जो अब हो गया
रोशनी हैं बहुत,फिर भी, जुदा साये से अपने हो गया

हुस्न की सुराई से, अमृत कलश ,चुरा लेंगे,
कदमो में ऐ दिल-कश हसीना
चिर के दिल अपना हम बिछा देंगे…

लेखन द्वारा विक्रान्त राजलीवाल।

*my second ready to published book is based on shayri-najam*(count…next post)^view on tumblr site^

महोबत।

दिखा किसी गुलिस्ता में
जब भी कोई गुलाब

छूने को पंखुड़ी,लेने को खुशबू
दिल ए दीवाना मचल गया

काटो पे रख के दिल अपना
दीवाना फिर से सम्भल गया

सुने है, किसे वफ़ा ए ऐतबार के
खाये धोखे जब अपने यार से
छली ये दिल हो गया।

भूल गया, नाम ए महोबत
दर्द ए दिल, जो तड़प गया

जी रहा तन्हा-तन्हाई में
देख आईना रुस्वाई का

सह गया, धड़कनो से अपने
सितम ए यार सब हस्ते हुए

जल रही जो रूह उसकी
जीते जी ही वो मर गया

कहते हैं महोबत, आशिक़ दीवाने
सदियों से जमाने मे जिसे

जहनुम हैं वो,दरिया FB_IMG_1496691743228आग का
जल जाता हैं दिल ए दीवाना
वफ़ा का उस-में काम नही

देखता हैं हुस्न परवाना फिर भी
तैयार है वो जल जाने को

आलम है मदहोशी का
दिल धड़कनो में उनके
रहम नही

चलते हैं बेपरवा निग़ाहों से बाण
आशिक निगाहे, बेदर्द है सनम हमारे

देख के मदहोशी से सूरत ए यार
मुस्कुराते हैं दर्द-बेदर्दी सनम हमारे

हो जाता हैं ज़ख़्मी ये दिल
तड़पती हैं रूह ज़िंदा ज़िस्म में
फिर हमारे

दे देते हैं ज़ख्म दिल पे, स्यार वो निगाहे
महोबत-सनम के दीवाने

करता हैं महोबत, तड़प ए महोबत
देख चेहरा दीवाना उनका, वो रूमानी

दे-देगा,दगा, हुस्न ए यार
दिखा के बेहुदा कोई चल अपनी

फाड़ के आ जायेगा केसः(मज़नू)
कब्र से बाहर अपनी।

नाम लेला का ज़ुबा से अपने
दीवाना फिर पुकारेगा

दिखा के आइना-वफ़ा
दीवाना हर ज़ुल्मो-सितम को
ललकारेगा।

मुफलिसी का हैं दामन मेरा
टाट का पेमन्द लिए

ढूंढता हैं मुकाम कोई
तन्हा ज़िन्दगी के लिए….👤लेखन द्वारा✍ विक्रान्त राजलीवाल।

(My second ready to published book is based on nazam-shayri.these are some of post s not a based on book topics!!! )*View on tumblr*

Last Knowledge.

FB_IMG_1498449131618This wonderful world, this beautiful nature is ours.

Wants a change

For centuries, in every particle, there is hidden

Nothing, no one, a change

First childhood, then the youth, the final form is

called old age

This body also changes our

Childhood caress, youth wrangle, Then there is

old man dependent

By taking away all the walks of life, leaving it,

leaving this world, the body is ours

Change the season, change it, change all this

world

It was the first time that the sunshine, now it is

only black night

The black night was not able to stop, when it

happened, self-realization

This is the ultimate knowledge animate that it is

our soul

Now you know this knowledge …

Written by Vikrant Rajliwal

#^Hindi Poetry, Shayari & Story Article’s^#
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अन्तिम ज्ञान।

FB_IMG_1498448201100.jpgयह अद्धभुत संसार, यह सुंदर प्रकृति हमारी।

चाहती है एक बदलाव।

छुपा है सदियों से, हर कण-कण में, यहाँ

कही न कही, कोई न कोई, एक बदलाव

पहले बचपन, फिर जवानी, अंतिम रूप बुढापा

बदल जाता है यह शरीर भी हमारा

बचम की दुलार, जवानी की तकरार, फिर है बुढापा मोहताज

झेल कर सब हालात-जिंदगी के, चला जाता है, छोड़ कर

नष्वर-संसार, देह फिर हमारा

मोसम बदला, समा बदला, बदल गया ये सारा संसार

पहले था मोसम जहा, सुहाना, अब है सिर्फ काली रात

रात भी काली ठहर न पाई, हो गया जब आत्म-साक्षात्कार

यह है अंतिम ज्ञान, चेतन है यह आत्मा हमारी

कर लो अब तुम यह ज्ञान…

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल।

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लम्हा।

जशन है फ़िज़ा में, दिल ये उदास

ढूंढता है अब भी,

कदमो के बेगाना, अपने जो निसान।

हालात ए ज़िन्दगी, ये ख़ामोशी है क्यों,

FB_IMG_1497117823044 भूल गया जो लम्हा,

वो ये नही।।. ..लेखन द्वारा विक्रांत राजलिवाल।
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लव्ज़ महोबत।

🍒 लव्ज़ ए महोबत…

नफ़रत है लव्ज़-महोबत से, दीवाने को अब बेहिंतिया

नफ़रत है हर एक उस आरज़ू-अधूरी से, दीवाने को अब बेहिंतिया

एक मुकम्बल अंजाम से पहले, जिसे, महोबत ने तोड़ दिया

नफरत है हर एक, काफ़िर उस हसीना से, दीवाने को अब बेहिंतिया

थाम के हाथ महोबत का महोबत से, तन्हा फिर दीवाने को छोड़ दिया

नफ़रत है हर एक अदा ए हुस्न, जहरीली से, दीवाने को अब बेहिंतिया

दिखा कर, ख़्वाब ए महोबत, एक धोखा, वो रंगीन

सरे-राह, बेदर्दी से, जिसे फिर तोड़ दिया.. .

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल।

💔

Lavaj ae mahobat…

nafrat hai lavaj mahobat se, deewane ko ab, behintiya

nafrat hai har ek us adhuri aarzo se, deewane ko ab, behintiya

Ek mukammal anjaam, se phele, jise, mahobat ne toad diya

nafrat hai, har ek, kafeer us haseena se, deewane ko ab, behintiya

Tham ke hath mahobat ka, mahobat se, tanha fir, deewane ko chod diya

Nafrat hai har ek adaa ae husn, zahreeli se, deewane ko ab behintiya

Dikha kar kawab ae mahobat, ek dhokha, wo rangeen

Sare rah, bedardi se, jise fir tod diya.. .

Lekhn dwara Vikrant Rajliwal.

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तन्हा महोबत।

🎻तन्हा महोबत.. .💌

रात है चाँद से, धड़कनो में एक तन्हाई।
छुप गया है, सनम मेरा, काले इन बदलो में कही।।

दर्द ए दिल, दे रहा पुकार, सुनने वाला कोई नही।
खता जो हो गयी यार से, माफ़ करने वाला कोई नही।।

कत्ल दीवाने का हुस्न ने, बहुत ही मासूमियत से किया।
बिना खंज़र, जख्म दिल-धड़कनो
नज़रो को मदहोश अपनी, फ़ेर कर दिया।।

असूल ए महोबत, वफ़ा के सिखलाए नही जाते।
वफ़ा ए महोबत, सनम से है
बिना मतलब हक उस पर नही जताते।।

महोबत है ऐतबार ए सनम,जान भी जिस पर
निछावर कर देगा दीवाना।

रुसवाई है बगावत एक जिस मे,बन्द लबो को भी
सी देगा दीवाना।।

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल।

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एहसास।

मेरे द्वारा लिखी गई मेरी प्रथम हिंदी कविताओं की पुस्तक जिसका केंद्र बिंदु, हमारे समाज और हमारे मानव ह्र्दय से समाप्त होती जा रही समाजिकता और मानवता की भावनाओ के प्रति अपनी कविताओं के माध्यम द्वारा एक प्रहार की कोशिश मात्र है।

उम्मीद है आप सब को मेरा यह प्रथम प्रयास पसन्द आएगा।

धन्यवाद।
विक्रांत राजलीवाल।

The book of my first Hindi poems written by me whose center point, our society and our humane hearts are my attempts to strike a human heart through the medium of socialism and the poem of humanity through their poems.

Hopefully all of you will like my first try.

Thank you.
Vikrant Rajlewal

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