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दर्द दिल।

नज़रो में तेरी, एक दर्द, तन्हा वो अहसास, नज़र कोई अपना, मुझ-को आता है।

मायूस है चेहरा तेरा, अक्स ए यार, अधूरा कोई ख़्वाब, नज़र क्यों मुझ-को आता है

लेखन द्वारा विक्रांत राजलिवाल।

Nazro mai tere, ek dard, tanha wo ahsaas, nazar koi apna, muz-ko ata hai

Mayus hai chera tera, aks ae yar, adhura koi khwab, nazar kyu muz-ko ata hai

Lekh dwara Vikrant Rajliwal
#Hindi Poetry, Shayari & Story Article’s#FB_IMG_1498192200281.jpg

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रुठी महोबत।

FB_IMG_1497155926377देखा है ख़्वाब, दीवाने ने एक
अक्स महोबत से, आईना ए महोबत
नज़रो में तेरी देख के।

जागती नज़रो से, तस्वीर ए यार तेरी हुए।
दिल की संगीन हर धड़कनो से
दीदार ए सनम, आरज़ू एक लिए हुए।

असूल ए महोबत, संग-दिल, वो दिल-लगी तेरी
हर अदा से एक बेपरवाई
देखना भर के नज़रो में, झूठी वो महोबत तेरी

रुकी ज़िन्दगी से दिल अपना थामे हुए।
दामन से देखना, वो तेरा गैर के
ज़हर सासो में अपने कोई लिए हुए।

तोड़ देती है दिल की हर खामोश धड़कने
देख के साया वो पहलू में तेरा
किसी गैर के

तड़पती है सासे, रोती है हर एक आरज़ू अधूरी
उठते है शोले, वो बेपवाई तेरी,
घुटता है दम, ए महोबत, है जो अधूरी मेरी

दीवाना भी पा जाएगा एक दिन रूठी है जो महोबत तेरी।
फड़कती हर नव्ज़ से, इस दिल मे लिए,महोबत सिर्फ तेरी।

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल। *view on tumblr*

🕯
🎻आज निकला हैं, फिर से चाँद अमावस्या में कही
रोशन ये आसमां यू ही तो नही

✨भड़क उठी हैं चिंगारी दबी सिने में कही
ये दिल धड़कनो से यू ही बागी तो नही…

Aaj nikla hai, fir se chand awamasya mai kahi
Roshan ye asama, yu hi to nahi

Bhadak uthi hai, chingari dabi sene mai kahi
Ye dil dharkano se, yu hi baagi to nahi. ..

लेखन द्वारा✍विक्रांत राजलीवाल। view on tumblrFB_IMG_1497960667089

Feelings of heart.. .

FB_IMG_1497617865252.jpgSometimes the man does not want to be powerless and constrained. The person who is feeling sorry for him over the age.

He does not want his own desires, but he gives his own hands to those who had his life for him.

It also suggests that sometimes the human being is not obliged to end his own life with his own hands.

Never wanted to break or never wanted to break Courage was not even less.

Somebody who broke the minar wah

It was felt that when bloody styling could not find the identification of the hands, hands.. .

Written by ✍ Vikrant Rajliwal

#Hindi Poetry, Shayari & Story Article’s#

अहसास दिल से.. .

FB_IMG_1498033059009.jpgकभी कभी मनुष्य न चाहते हुये भी शक्तिहीन और विवश हो

जाता है।जिसका अफ़सोस उसे उम्र भर सताता है।

वह न चाहते हुये भी अपनी उन तमाम इछाओ का खुद अपने

ही हाथों दम घोट देता है जो उसके लिए उसकी ज़िन्दगी थी।

इसका तातपर्य यह भी निकलता है कि कभी कभी मनुष्य न

चाहते हुए भी खुद अपनी ज़िंदगी का अपने ही हाथों अंत करने

पर विवश हो जाता है।

टूटना तो चाहा, कभी न था । हौसला भी कुछ कम तो न था।

टूट गयी जो मीनार वो, चाहतो में कमी से, किसी के

लगा था खंज़र कमर पे जब, हाथ ख़ंजर वो, निशान अपनों के, पहेचान न पाया. ..

लेखन द्वारा ✍ विक्रांत राजलीवाल।

#Hindi Poetry, Shayari & Story Article’s#

सत्य वचन।

FB_IMG_1496982003398.jpgसुबह सवेरे जाग के जल्दी , होता हैं साक्षात्कार
नयी सुबह, नया सवेरा भरता हैं देह-प्राण

सब-से पहले,नाम-ईशवर,नश्वर हैं बाकि ये संसार
रग-रग में जग जाए उमंग, करो न अब विचार

योग-प्रयाणं, धयान,करो,लेके प्रभु का नाम
नयी सुबहे, नया सवेरा भरता हैं देह-प्राण

खुश-हाली के संस्कार हे ये, आत्म-शांति का ज्ञान
माँत-पिता, एक वो ही ईशवर,तुम लो अब उसको थाम

सचाई के मार्ग पे आगे, चलो हमेशा बढ़ते
राह-शूल हो या कंकर पथर, या हो आग का दरिया

कर लोगो तुम पार भी उसको,पर न करना अभिमान
छोटे -बड़े, सब लोगो का करना हमेशा सम्मान

सुबह सवेरे जाग के जल्दी होता हैं साक्षात्कार
नयी सुबहे,नया सवेरा भरता है देह प्राण. ..

लेखन द्वारा ✍विक्रांत राजलीवाल।

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गुलिस्तां।

FB_IMG_1497960266862.jpgख्वाबो में, अब भी मेरे, एक चेहरा नज़र आता है।

उजाड़ है गुलिस्तां मेरा, फिर न जाने क्यों, खिला वहाँ एक गुलाब नज़र आता है।

जब भी देखता हूं आईना ए महोबत, चेहरा ए सनम,
न जाने क्यों नज़र उसमे आता है।

हकीकत कहु जा अफ़साना कोई, तन्हाई में हमेशा से वो, बिछुड़ा सनम, याद बहुत आता है…💞

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल।

🎻

Gulsitan…

💘Kwaabu me, ab bhi mere, ek chehra nazar aata hai

Ujaad hai gulshal mera, fir na jane kyu, khila wha ek gulaab nazar aata hai

Jab bhi dekhta ho aaina ae mahobat, chehra ae sanam, na jane kyu, nazar uasme aata hai

Hakikat khu ya afsana koi, tanhai mei hamesha se wo, bichuda sanam yaad bhhut aata hai…💞

Lekhn dwara Vikrant Rajliwal

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एहसास।

मेरे प्रथम प्रयास, प्रथम पुस्तक एहसास से प्रथम कविता से प्रथम एव अंतिम पृष्ट… आपके लिए, आपके समुख।
धन्यवाद।
लेखक विक्रांत राFB_IMG_1498148520694FB_IMG_1498148525577.jpgजलीवाल।(Published on jan 2016 in Delhi world book fair, Published by sanjog publication^SP Publications^)

दरिया ए महोबत।

FB_IMG_1496980653687देख के आग सीने की तेरे
धहेक सीना मेरा भी गया

सोया था सदियों से, बन्द कब्र में जहा
नाम लैला का सुनते ही जग गया

दिल में लिए खामोशिया नज़रो में एक तूफान
ढूंढ रहा हैं अब भी शायद, इश्क ए निसान

दरिया ए महोबत से हो कर फ़ना
तड़प ए दिल,मरते हुए

छुपाये हुए धड़कनो से,जख्मी दिल के जख्म अपने
पूछती हैं राह ए वफ़ा,अब भी महबूब अपने का नाम

कोई कहे मंजनों, कोई कहे फरियाद
इश्क-महोबत से घायल हैं वो

कर रहा अब भी बड़ी शिदत से हैं जो
सनम-बिछुड़े को अपने याद. ..

लेखन द्वारा✍विक्रांत राजलिवाल।
#Hindi Poetry, Shayari & Story Article’s#

अहसास।

चिंगारी जब शोला बन जाये, हर एक धड़कन, गूंज कोई तूफ़ान

भूल जाना तुम खुद को, देना दिल से, तुम मुझे एक आवाज

छोड़ कर यह जहां सारा, आ जाएगा, ये दीवाना तेरा

हर एक धड़कन है महोबत, ये अहसास तेरे, दिल के पास…

लेखन द्वारा विक्रांत राजलिवाल।

Chingari jab shola ban jaye, har ek dharkan, gunj koi toofan

Bhul jana tum khud ko, dena dil se, tum muze ek awaaz

Chodh kar ye jahan sara, aa jayega, ye deewana tera

Har ek dharkan hai mahobat, ye ahsaas tere, dil ke pass…

Lekh dwara Vikrant Rajliwal.
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