दिल से. ..

महोबत में तेरी, ये दिल खो गया।
तन्हा है धड़कने, सितम हो गया।।

पहेलु ने यार के नशा हो गया।
देख के चेहरा हसीन, ये दिल खो गया।।

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल।

दर्द ए दिल।

आँख से आँसू रुकते नही, तड़प-दिल की कुछ कम तो नही।
लव्ज़ है मासूम से उसके, सुर्ख लबो से नज़रे, क्यों हटती नही।।

लेखन द्वारा विक्रांत राजलिवाल।

नक़ाब।

ज़िन्दगी ने सिखलाये है करीब से सबक-हालात ज़िन्दगी के
मुझको

हर हालात ने दिखलाय है करीब से नकाब-चेहरे ज़िन्दगी के
मुझको

हर चेहरे ने छुपाये है करीब से राज-नकाब हकीकत के
मुझ से

हर हकीकत ने दिखाए है करीब से चेहरे-ज़िन्दगी के
छुपे है जो नकाब मुझ से.. .

लेखन द्वारा विक्रांत।

*व्यू ऑन tumblr*

Pegasus. ..(Translated hindi to english)

When the pain passes through the limits, no medicines can come in handy,

Weak the wounds, boil them with their cups, poisons, poison

It is a pain that you, Tolerance limit, of birth and death, all this is your response
You will play with every life, life, life, life, life, life, life, life, life, life and life. .. Written by Vikrant Rajliwal.

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कशमकश।

दर्द जब हद से गुज़र जाए, कोई दवा भी काम न अपने आए,
जख्म कुरेद लेते है अपने, प्याला-ज़हर हलक से उड़ेल लेते है

निशानी है दर्द ये तेरे, इन्तेहाँ की, जनून-ज़िन्दगी ये सब तेरे उत्तर-चढ़ाव की
हर इम्तेहां जान-ज़िन्दगी, से खेलेगा तेरी, मुकदर ये सितम , कशमश सासो में तेरी… लेखन द्वारा विक्रांत राजलिवाल।

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पैगाम ए महोबत।

FB_IMG_1496891185943वख्त ए ज़माने ने आज, जख्म ये कौन सा दीवाने को दिया।
चिर के दिल, ख़ंजर बिना, रगों में बहता लहू जमा दिया।।

हुआ गजब, ये आसमां भी बरस गया।
गरज के वो भी, टूट कर बरस गया।।

देखा जो जनाजा, अश्को से, आशिक का एक।
रो दिया दिल, ठहर गयी धड़कन हर एक।।

चल रही माशूका उसकी, उसके जनाजे के साथ।
झलक रही महोबत, खड़ी है अब भी वो उसके साथ।।

लाई थी हाथो हाथो में ,आँचल से छुपाके गुलाब कई।
पड़ रहे है जख्म दिल पे, हर काटे उन गुलाब से कई।।

चाल थी मतवाली उसकी, आखो से नमी बरस रही।
दर्द ए दिल, हर लम्हे से बहुत, लबो पे मुस्कान झलक रही।।

बदल गया रंग ए आसमां, दर्द उसका झलक गया
देख के रंग ए लहू, हाथो में उसके महेंदी सा

मिल गया आकर के वी भी उससे,
उसका भी रंग ए लहू महेंदी सा

कर गए रुख्सत,सब लोग दीवाने को जहा
खड़ी है महबूबा,अब भी बगल में,
दफ़न है दीवाना उसका जहा

बरसा रहा लहू असमा, ये जमीं भी पुकार रही
देख के ये हाल ए महोबत, खुद महोबत भी रो रही

बिजली टूट रही, जिगर पे, वफ़ा का वहा पैगाम दिया
खोल के बन्द शीशी ज़हर, आशिक का फिर नाम लिया

पी लिया प्याला-ज़हर, फिर उसने सरेआम
कब्र-दीवाने से लग के, दम अपना तोड़ दिया

दम तोड़ने से पहले, तड़प ए महोबत, बरस रही
दबी-आरज़ू थी आखरी, बुझती नज़र से झलक रही

टूटता दम, रुकती वो सासे आख़री, उसने थाम लिया
ख़ंजर से चिर के सीना, नाम ए महोबत, वो माशूका,
जो कब्र दीवाने पे उसने लिख दिया. ..

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल।(नई कृति)
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सितमगर हसीना।

FB_IMG_1498212746772अक्सर सितमगर एक हसीना का, दीदार किया करता हूँ

आती है जब वो सामने तो मुह फेर लिया करता हूँ

देखना तो चाहता हूँ उसको मैं जी भर

मगर न जाने उसके हाव भाव से, क्यों डर जाता हूँ

उस सितमगर हसीना की शख्सियत भी कमाल लगती है

उसके चेहरे पे हमेशा आग ग़ुसे की दिखती है

चमक से उस आग की , ठिठर जाता हूँ

ख्यालो में मगर, उससे अक्सर बतियाता हूँ

उस समय हिमत मुझ में भी कुछ, जाग जाती है

सुनाने को हल-दिल ,तबियत मेरी भी मचल जाती है

फिर देख के हाव-भाव वो चहरे के उसके

दम तोड़ महोबत, मेरी जाती है

उसकी उस चेहरे की आग से क्यों जल जाता हूँ

करता हूँ महोबत, जब बेहिंतिया उससे

ये उससे क्यों, कहे नही पाता हूँ

चाल क्या चल जाती है वो, तन्हाई में अक्सर मुझ से बतियाती हैं वो

आती है सामने जब वो सब के, तो मुझको भूल जाती हैं

जख्मी दिल इस तरह, सरेआम वो मेरा कर जाती है

दिखा के चहरे की आग अपने, इस दिल पे जख्म

दे जाती है…

लेखन द्वारा

✍विक्रांत राजलीवाल।

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बेरुखिया।

FB_IMG_1498381443086कर गए नज़र-अंदाज़ वो, फेर के मदहोश नज़रो को अपनी
ज़ला दिया दिल ए दीवाना,कातिल हर अदा से अपनी

कर के कत्ल मदहोश निगाहों से,मुस्कुराता हैं हुस्न बेबाक
छोड़ के तन्हा बेपरवाई से, ज़ख्म -दिल पे दे जाता हैं हुस्न बेबाक

दिखती नही राह कोई, बच के निकल जाये जो दीवाना
हर राह हैं सनम से मेरी,बीच के कैसे गुज़र ,जाये दीवाना

आशिक है महोबत से उनकी, घायल मेरे अरमान
देखा हैं नूर ए हुस्न उनका
कातिल हैं उनकी हर चाल

घायल अरमानो से हैं ख़्वाब कई, हर ख्वाब में रहती हैं वो, मेरी जान

हर अदा होती हैं हुस्न की संगीन,करता हैं मुलाकाते अक्सर उनसे दीवाना ख्यालो में अपने रंगीन

कहते हैं आशिक पुराने हैं रोग ए महोबत सदियों पुराना
चलता हैं तीर निगाहों से,बेबस हो जाता हैं दीवाना

कर के नज़र-अंदाज़ ज़माने जी रुस्वाइया
खड़ा हैं चोखट ए सनम
ले रहा हैं नाम ए महोबत
थाम के धड़कता -दिल दीवाना

रुख से पर्दा अपने हटा दे, चल ये कोई नही
मरता हैं तेरे नाम से अब भी तेरा दीवाना…👤लेखन द्वारा ✍ विक्रान्त राजलीवाल। व्यू ऑन tumblr site.

बेपरवा सनम।

FB_IMG_1498402445529.jpgदेखा था ख़्वाब कभी दीवाने ने एक
जगमगाते सितारो से हसीन
था वो चेहरा एक

थी परवान-महोबत, चाँद की रात में एक
छा गए फिर क्यों उनपे वो
बदल काले, हो गए जुदा वर्षो से मिले
पल में एक

हुस्न की बहार से,इश्क मेरा छली हुआ
खाया खंज़र सिने पे,इश्क मेरा नीलाम हुआ

महोबत के बज़ार में , बिकती नही महोबत
वफ़ा-ऐतबार से, ज़िंदा हैं महोबत

बिक जाती हैं फिर भी वफ़ा
करती हैं बेवफ़ा कोई जब महोबत

सकूँ दिल का जो अब लूट गया
दाग धड़कनो पे ये कैसा पड़ गया

चला तीर निगाहों से कही
छली ये दिल मेरा हो गया

भरी हैं जो इस दिल में वफ़ा
मिलते हैं अक्सर बेवफ़ा

ज़ख्म दिल के दिख गये
नासूर बन के उभर गये

सकून ए दिल जो हसीना ने एक
सरेआम मेरा लूट लिया

धड़कनो पे दे के निशान-जुदाई
तन्हा जो मुझ को छोड़ दिया

महोबत दिलरुबा की,चिर के दिल घायल करे
दिखा के आईना-महोबत,ऐतबार से फिर बेवफाई करे

खाया धोखा प्यार से, तन्हा जो अब हो गया
रोशनी हैं बहुत,फिर भी, जुदा साये से अपने हो गया

हुस्न की सुराई से, अमृत कलश ,चुरा लेंगे,
कदमो में ऐ दिल-कश हसीना
चिर के दिल अपना हम बिछा देंगे…

लेखन द्वारा विक्रान्त राजलीवाल।

*my second ready to published book is based on shayri-najam*(count…next post)^view on tumblr site^

महोबत।

दिखा किसी गुलिस्ता में
जब भी कोई गुलाब

छूने को पंखुड़ी,लेने को खुशबू
दिल ए दीवाना मचल गया

काटो पे रख के दिल अपना
दीवाना फिर से सम्भल गया

सुने है, किसे वफ़ा ए ऐतबार के
खाये धोखे जब अपने यार से
छली ये दिल हो गया।

भूल गया, नाम ए महोबत
दर्द ए दिल, जो तड़प गया

जी रहा तन्हा-तन्हाई में
देख आईना रुस्वाई का

सह गया, धड़कनो से अपने
सितम ए यार सब हस्ते हुए

जल रही जो रूह उसकी
जीते जी ही वो मर गया

कहते हैं महोबत, आशिक़ दीवाने
सदियों से जमाने मे जिसे

जहनुम हैं वो,दरिया FB_IMG_1496691743228आग का
जल जाता हैं दिल ए दीवाना
वफ़ा का उस-में काम नही

देखता हैं हुस्न परवाना फिर भी
तैयार है वो जल जाने को

आलम है मदहोशी का
दिल धड़कनो में उनके
रहम नही

चलते हैं बेपरवा निग़ाहों से बाण
आशिक निगाहे, बेदर्द है सनम हमारे

देख के मदहोशी से सूरत ए यार
मुस्कुराते हैं दर्द-बेदर्दी सनम हमारे

हो जाता हैं ज़ख़्मी ये दिल
तड़पती हैं रूह ज़िंदा ज़िस्म में
फिर हमारे

दे देते हैं ज़ख्म दिल पे, स्यार वो निगाहे
महोबत-सनम के दीवाने

करता हैं महोबत, तड़प ए महोबत
देख चेहरा दीवाना उनका, वो रूमानी

दे-देगा,दगा, हुस्न ए यार
दिखा के बेहुदा कोई चल अपनी

फाड़ के आ जायेगा केसः(मज़नू)
कब्र से बाहर अपनी।

नाम लेला का ज़ुबा से अपने
दीवाना फिर पुकारेगा

दिखा के आइना-वफ़ा
दीवाना हर ज़ुल्मो-सितम को
ललकारेगा।

मुफलिसी का हैं दामन मेरा
टाट का पेमन्द लिए

ढूंढता हैं मुकाम कोई
तन्हा ज़िन्दगी के लिए….👤लेखन द्वारा✍ विक्रान्त राजलीवाल।

(My second ready to published book is based on nazam-shayri.these are some of post s not a based on book topics!!! )*View on tumblr*