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सत्य वचन।

FB_IMG_1496982003398.jpgसुबह सवेरे जाग के जल्दी , होता हैं साक्षात्कार
नयी सुबह, नया सवेरा भरता हैं देह-प्राण

सब-से पहले,नाम-ईशवर,नश्वर हैं बाकि ये संसार
रग-रग में जग जाए उमंग, करो न अब विचार

योग-प्रयाणं, धयान,करो,लेके प्रभु का नाम
नयी सुबहे, नया सवेरा भरता हैं देह-प्राण

खुश-हाली के संस्कार हे ये, आत्म-शांति का ज्ञान
माँत-पिता, एक वो ही ईशवर,तुम लो अब उसको थाम

सचाई के मार्ग पे आगे, चलो हमेशा बढ़ते
राह-शूल हो या कंकर पथर, या हो आग का दरिया

कर लोगो तुम पार भी उसको,पर न करना अभिमान
छोटे -बड़े, सब लोगो का करना हमेशा सम्मान

सुबह सवेरे जाग के जल्दी होता हैं साक्षात्कार
नयी सुबहे,नया सवेरा भरता है देह प्राण. ..

लेखन द्वारा ✍विक्रांत राजलीवाल।

#Hindi Poetry, Shayari & Story Article’s#

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गुलिस्तां।

FB_IMG_1497960266862.jpgख्वाबो में, अब भी मेरे, एक चेहरा नज़र आता है।

उजाड़ है गुलिस्तां मेरा, फिर न जाने क्यों, खिला वहाँ एक गुलाब नज़र आता है।

जब भी देखता हूं आईना ए महोबत, चेहरा ए सनम,
न जाने क्यों नज़र उसमे आता है।

हकीकत कहु जा अफ़साना कोई, तन्हाई में हमेशा से वो, बिछुड़ा सनम, याद बहुत आता है…💞

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल।

🎻

Gulsitan…

💘Kwaabu me, ab bhi mere, ek chehra nazar aata hai

Ujaad hai gulshal mera, fir na jane kyu, khila wha ek gulaab nazar aata hai

Jab bhi dekhta ho aaina ae mahobat, chehra ae sanam, na jane kyu, nazar uasme aata hai

Hakikat khu ya afsana koi, tanhai mei hamesha se wo, bichuda sanam yaad bhhut aata hai…💞

Lekhn dwara Vikrant Rajliwal

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एहसास।

मेरे प्रथम प्रयास, प्रथम पुस्तक एहसास से प्रथम कविता से प्रथम एव अंतिम पृष्ट… आपके लिए, आपके समुख।
धन्यवाद।
लेखक विक्रांत राFB_IMG_1498148520694FB_IMG_1498148525577.jpgजलीवाल।(Published on jan 2016 in Delhi world book fair, Published by sanjog publication^SP Publications^)

दरिया ए महोबत।

FB_IMG_1496980653687देख के आग सीने की तेरे
धहेक सीना मेरा भी गया

सोया था सदियों से, बन्द कब्र में जहा
नाम लैला का सुनते ही जग गया

दिल में लिए खामोशिया नज़रो में एक तूफान
ढूंढ रहा हैं अब भी शायद, इश्क ए निसान

दरिया ए महोबत से हो कर फ़ना
तड़प ए दिल,मरते हुए

छुपाये हुए धड़कनो से,जख्मी दिल के जख्म अपने
पूछती हैं राह ए वफ़ा,अब भी महबूब अपने का नाम

कोई कहे मंजनों, कोई कहे फरियाद
इश्क-महोबत से घायल हैं वो

कर रहा अब भी बड़ी शिदत से हैं जो
सनम-बिछुड़े को अपने याद. ..

लेखन द्वारा✍विक्रांत राजलिवाल।
#Hindi Poetry, Shayari & Story Article’s#

अहसास।

चिंगारी जब शोला बन जाये, हर एक धड़कन, गूंज कोई तूफ़ान

भूल जाना तुम खुद को, देना दिल से, तुम मुझे एक आवाज

छोड़ कर यह जहां सारा, आ जाएगा, ये दीवाना तेरा

हर एक धड़कन है महोबत, ये अहसास तेरे, दिल के पास…

लेखन द्वारा विक्रांत राजलिवाल।

Chingari jab shola ban jaye, har ek dharkan, gunj koi toofan

Bhul jana tum khud ko, dena dil se, tum muze ek awaaz

Chodh kar ye jahan sara, aa jayega, ye deewana tera

Har ek dharkan hai mahobat, ye ahsaas tere, dil ke pass…

Lekh dwara Vikrant Rajliwal.
# Hindi Poetry, Shayari & Story Article’s # view on tumblr# plus.google#m.facebookFB_IMG_1497533804440

प्रकाशित जनवरी 2016(pub… jan 2016 in delhi world book fair)

मेरे द्वारा लिखी गई मेरी प्रथम हिंदी कविताओं की पुस्तक जिसका केंद्र बिंदु, हमारे समाज और हमारे मानव ह्र्दय से समाप्त होती जा रही समाजिकता और मानवता की भावनाओ के प्रति अपनी कविताओं के माध्यम द्वारा एक प्रहार की कोशिश मात्र है।

उम्मीद है आप सब को मेरा यह प्रथम प्रयास पसन्द आएगा।

धन्यवाद।
विक्रांत राजलिवाल।

The book of my first Hindi poems written by me whose center point, our society and our humane hearts are my attempts to strike a human heart through the medium of socialism and the poem of humanity through their poems.

Hopefully all of you will like my first try.

Thank you.
Vikrant Rajlewal

#Hindi Poetry, Shayari & Story Article’s #

दिल से. ..

जशन है फ़िज़ा में, दिल ये उदास, ढूंढता है अब भी,

कदमो के बेगाना, अपने जो निसान।

हालात ए ज़िन्दगी, ये ख़ामोशी है क्यों, भूल गया जो लम्हा,

वो ये नही।।. ..लेखन द्वारा विक्रांत राजलिवाल।
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कशमकश ज़िन्दगी।

FB_IMG_1497158859549.jpg चल रही है किश्ती, ढूंढ़ने को किनारे कोई

उफान ए समंदर, से टुटते हौसले।

फंसे है मुसाफ़िर अनजाने कई

राह उमीद एक लिए हुए।।

देख के रोशन, चाँद से, उठती है तरंगे कई
हर तरंग साथ अपने,जान कई लिए हुए।

उमीद है, जल्द ही थम जायगा, तूफ़ान ए जज़्बात
हर जज़्बात, दुआ ए ज़िंदगी, साथ अपनो के, लिए हुए।।

लेखन द्वारा विक्रांत राजलिवाल।

⛈ Kashmakash.. .

Chl rhi hai kishti, dondene ko kinara koi
Ufaan ae samander Se tuttey hosaley

Fasey hai musafir anjane kai
Rah umeed ek liye huye

Dekh ke roshni chand se, uthti hai tarange kai

Har tarang , sath apne, jaan kai liye huye

Umeed ke jald hi tham jayega toffan ae jajbaat
Har jajbaat , dua ae zindagi, sath apno ke liye, huye…

lekhn dwara✍Vikrant Rajliwal.

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आप सब का हार्दिक स्वागत है।

आह सभी का यहाँ हार्दिक स्वागत है।

यह ब्लॉग, यह वेबसाइट, एक ऐसा मंच उपलब्ध कराता

है! यहाँ हर वह व्यक्ति अपने मन के बात, अपनी

कविताओं, शायरी-नज़्म और अपने द्वारा लिखी कहानी व

लेखों के माध्यम से उन तमाम लोगों तक पहुँचा सकने की

एक क्षमता उसमे आ जाती है। जो उन्हें सुनना व पढ़ना चाहते

है।

आज में इस मंच से उन तमाम व्यक्तिओ का अपने दिल-

से शुक्रिया अदा करता हूँ! जिन्होंने यह अनमोल मंच, हम

सब को यह महान मंच उपलब्ध कराया।

मेरे इस ब्लॉग-वेबसाइट पर आप सब, महानुभवों को, मेरे

द्वारा लिखे गए विचार, जो कि मेरे द्वारा लिखी गयी

कविताओ, नज़्म-शायरी, और लेखों के रूप में उपस्थित

है। इस महान मंच की जरिये उपलब्ध कराए गए है।

उम्मीद करता हूँ आपको मेरे द्वारा लिखी गयी यह रचनाएँ

पसन्द आए।

यहाँ आप सभी का यह ब्लॉग हार्दिक स्वागत करता है।

धन्यवाद।

आपका अपना रचनाकार एव लेखक विक्रांत राजलिवाल।FB_IMG_1497975739668