🇮🇳 Martyr.

Kashmir is the crown of my country

The martyrdom where the soldiers have given me
The name of that land is Kashmir.

Take the iron enemies from the hero
Cut your head
That is born our Kashmir

Not wound up my wounds
Has given the name a vatan
On every wound, where is the head-crown Kashmir.

Written by Vikrant Rajliwal

Writer Poet Vikrant Rajliwal Poetry, Shayari & Article’s-

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(Translation by Vikrant Rajliwal)

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🇮🇳 शहीद।

मेरे देश का ताज है कश्मीर।
दी है शहादत जहाँ जवानों ने मेरे,
उस सरजमीं का नाम है कश्मीर।।

लेते है लोहा दुश्मनो से वीर मेरे।
कटवा देते है सिर अपना जहाँ,
वो जन्न्त है हमारा कश्मीर।।

न कुरेदना ज़ख्मो को मेरे।
लिख दिया है नाम ए वतन हर ज़ख्मो पे जहाँ,
वो सर-ताज है हमारा कश्मीर।।

रचनाकार एव लेखक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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एक आह-एक उम्मीद।

FB_IMG_1534055749911उम्मीद है जल्द ही होगा उदय एक सूर्य नया इस ब्रह्मांड में फिर से कहि।

जला देगा हर अंधेरे को करने को स्थापित एक प्रकाश नया इस धरातल पर फिर से कहि।।

देख रहा है वक़्त भी खड़ा जो खामोशी से इंतजार में ओट ए धड़कनो की सच्चाई से अपनी कहि।

नाउम्मीदी हर एक आह है जो दिल की बेबस, जला न दे जुल्मी को किसी मजबूर की कहि।।

स्वतँत्र लेखक एव विचारक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

25/03/2018 at 18:27 Pm

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एक हक़ीक़त।

रात चांदनी ये चमक सितारों सी कोई, झिलमिलाते ख़्वाब झिलमिलाती नज़रो में है जिंदा कई।IMG_20181005_181729_728.jpg

दम तोड़ती ये धड़कने दबा उफ़ान सा जिनमे कोई, ख़ामोश है जो नज़ारे अहसास यहाँ जिंदगी के कई।।

एक आरज़ू एक सलाम है आख़री, हर एक शख्स जिंदा है हर लम्हा जिंदगी, नकाब ये दर्द जो मरते हुए।

एक सकूँ एक अहसास है आखरी, हर एक अहसास साथ है हर लम्हा धड़कने, हक़ीक़त ये सकूं जो तड़पते हुए।।

स्वतँत्र लेखक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

22/04/2018 at 23:07 pm
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❤ एक तड़प।

एक नही दो नही भरा जो खाली ये याम ए मेरे साकी जो अब मुझको।

पि लेने दो मुह से लगा कर बोतल ये सरेआम शराब की ए मेरे साकी अब मुझको।।

खून बन के दौडेगी रंग ए लहू सी दहकती ये सुर्ख शराब फड़कती हर नब्ज़ में अब मेरे।

हट जाओ ए खामोश नज़रों हर खोई आरज़ू लौटेगी IMG_20180712_074905_439.jpgहर एक जाम ए लहू से वीरान फिज़ाओ में अब मेरे।।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

(शुक्रवार 2 फरवरी 20:43 pm on wordpress site)

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❤ अहसास।

कर गुस्ताखी ए दिल धड़कनो से कोई अपने,
हर धड़कन यहाँ साथ ज़िन्दगी से अब छूटने लगी है।

न देख मुड़ के दोबारा अक्स बिछुड़े को अपने,
ये वख्त ए श्याही यहाँ अब मिटने लगी है।।

न कर कोशिश हालात ये नसूर है अपने,
हर दवा ये ज़िन्दगी यहाँ अब बेमतलब से है।

कर ले नया फिर कोई समझौता बेगाने,
हर यक़ीन ए अहसास यहाँ आजमाए हुए है।।

रचनाकार एव लेखक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

Writer & Poet Vikrant Rajliwal’s blog sites creation’s

*Republish after some correction’s of typing errors at 17/11/2018 at 16:25 Pm*

💥 Feeling…🕊

Often in this world worldly people and relationships change like the changing season. Sometimes it may seem very brutal and extremely gentle towards you. There is no blame in this. Is it all the effect of changing weather? Weather, it is not rainy or natural weather that changes according to its particular season. Rather it can be a seasonal change, whose point is always the same, and this change happens according to your social and economic status.

Here selfishness and ambiguity are very important parts of this seasonal transformation feeling. A person suffering from a hungry hunger to prove his self is a very important member of this group, who can fall down to the extent of humanity in order to fulfill his selfishness by any combination, and if he gets opportunity For the sake of this mutual self-interest, it does not hesitate to strike one another.

Those who try to prove this kind of selfish, unhappy and self-righteous, Itselfs selfish character, as a changing season in Itself having a capacity to produce a cruel selfish transformation in family and social relationships, and their own cruel selfish It is known to all the maladies that exploit innocent innocent people with their cruel selfish behavior and thought of the result of change. It may be said that soon after becoming a part of the Terrible curse of God for all their misdeeds, God Himself can not protect those wicked people.

And soon all the males in this world, who have not known the innocent innocent, have been sleeping for anonymity and slander in a blind grave, including their full-fledged Cries of pain, a true feeling that this time the weather will again By changing Itself from them, when ever, has been swiftly transformed, and all the villagers like them, along with their soul, went to Fire of true. Inserting images truth incomes the feelings As a result of positive changes, unlike any penalty from punishment for their misdeeds every positive seasonal changes thinking very fierce and make them have been punished them divine fired fire to realize a truth.

As a result, there will be a true tribute to all the victims of those devils who have now fallen asleep in this deep and eternal state of death, or who have died in the death of an eternal period of eternal death Anonymity has been solved.

O God, I am Vikrant Rajliwal today, with all of my readers and those divine souls who are not born in any age in this world, even if their divine energy prevailed in this universe? I consider them as witnesses to you all those who have been exploited by any kind of exploitation in any form in any age, and whose painful voice is a help While ignoring everyone and hearing the person, giving them a cruel contribution in some way in their exploitation, they have caused a death and the cause of their death in the blindness of anonymity and in the future such justice I pray to you for all those innocent disadvantaged people and for the peace of your soul. Please give us such calmness that we have not to be born again in this cruel world and our soul can get a sense of peace.

Thank you.

His personal feeling written by Vikrant Rajliwal, inspired by his highly convincing feelings.
(Translation by Vikrant Rajliwal)

17/11/2018 at 10:20 am

(Once again I am reprinting after fixing some very shiny typing mistakes at 12:07p

m)

💥 एहसास…🕊

अक्सर इस संसार में संसारी व्यक्ति एव रिश्ते बदलते मौसम के समान बदल जाते है। कभी वह आपको स्वम् के प्रति अत्यंत क्रूर एव कभी अत्यंत सौम्य प्रतीत हो सकते है। इसमें उनका कोई भी दोष नही यह सब बदलते मौसम का असर होता है साहब? मौसम! यह कोई बरसाती या प्राकृतिक मौसम नही है जो अपनी एक विशेष ऋतु के अनुसार ही परिवर्तित होता है। बल्कि यह मौसमी परिवर्तन कभी भी हो सकता है जिसका केंद्र बिंदु हमेशा एक ही होता है और यह परिवर्तन होता है आपके समाजिक एव आर्थिक स्थिति के अनुसार।

यहाँ स्वार्थ एव महत्वकांशा इस मौसमी परिवर्तन रूपी एहसास के अत्यंत महत्वपूर्ण अंग होते है। एव स्वम् को महान सिद्ध करने की एक भृमित भूख से पीड़ित व्यक्ति इस समूह के अति महत्वपूर्ण सदस्य होते है जो आपसी ताल मेल से अपने स्वार्थ की पूर्ति हेतु किसी भी सिमा तक स्वम् को मानवता की दृष्टि में नीचे गिरा सकते है एव अवसर मिलने पर अपने इस आपसी स्वार्थ की सिद्धि हेतु एक दूसरे पर प्रहार करने से तनिक भर भी नही हिचकिचाते।

इस प्रकार के स्वार्थी, निर्लज एव स्वम् को महान सिद्ध करने का एक प्रयास करने वाले, स्वम् में बदलते मौसम के समान स्वम् के स्वार्थी चरित्र, पारिवारिक एव समाजिक रिश्तों में एक क्रूर स्वार्थी परिवर्तन उतपन करने की एक क्षमता रखने वाले एव अपने उस क्रूर स्वार्थी परिवर्तन के फल स्वरूप उतपन अपने क्रूर स्वार्थी व्यवहार एव विचार से निर्दोष मासूमो का शोषण करने वाले समस्त दुर्जनो को यह ज्ञात हो जाए कि अति शीघ्र ही उनके हर कुकृतियों के लिए उन्हें ईष्वर के महा कोप का भागी बनने से स्वम् ईश्वर भी उन दुर्जनों की रक्षा अब नही कर सकता है।

एव जल्द ही इस संसार मे मौजूद समस्त दुर्जनो को जिनके कारण न जाने कितने निर्दोष मासूमो को अपनी एक बेबसी से पूर्ण सिसकती सिसकियों समेत किसी अंधियारी कब्र में एक गुमनामी एव बदनामी की नींद सुला दिया गया है एक सत्य एहसास अवश्य होगा कि इस बार मौसम फिर से स्वम् को बदलते हुए उनके साथ भी कब का स्करात्मकतापूर्वक परिवर्तित हो चुका है और उन जैसे समस्त दुर्जनो को उनकी आत्मा सहित सत्य अग्नि से ज्वलित सत्य एहसासों से उतपन इस सकारात्मक परिवर्तन के फलस्वरूप, सकारात्मक मौसमी परिवर्तन के साथ उनके हर कुकृत्यों के दंडस्वरूप एक अत्यंत भयंकर एव उनकी सोच से भी विपरीत दंड स्वरूप एक सत्य एहसास की दिव्य ज्वलित अग्नि से उन्हें दण्डित किया जा चुका है।

जिसके परिणाम स्वरूप उन दुर्जनों के शिकार हुए समस्त मासूमो को एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी जो अब इस स्वार्थी संसार को छोड़ कर एक गहरी और अनन्त काल की चिर निंद्रा में सो चुके है या जिन्हें उस अनन्त काल की चिर निंद्रा में एक मौत की निंद्रा में एक गुमनामी के साथ सुला दिया गया है।

हे ईष्वर मैं विक्रांत राजलीवाल आज अपने समस्त पाठको एव उन दिव्य सच्चे मनुष्यों की उस दिव्य ऊर्जा के साथ जो चाहे इस संसार मे किसी भी कल में क्यों न जन्मे हो एव चाहे इस समय उनकी वह दिव्य ऊर्जा इस ब्रह्मांड में कही भी व्याप्त क्यों न हो मैं उन्हें साक्षी मान कर आपसे उन समस्त मासूमो को जो किसी भी काल मे किसी भी स्वरूप में किसी भी प्रकार के शोषण से शोषित हुए हो एव जिनकी दर्द भरी एक मदद की आवाज को हर सुनने एव जानने वाले व्यक्ति ने अनदेखा करते हुए उनके उस शोषण में किसी न किसी प्रकार से अपना क्रूर योगदान देते हुए उन्हें एक मौत एव उनकी मौत के कारण को एक गुमनामी की अंधियारी खाई में लुप्त कर दिया है एव भविष्य में ऐसे ही न्याय से वंचित उन समस्त मासूमो के लिये उनकी एव अपनी आत्मा की शांति के लिए आपसे प्रार्थना करता हु। कृपया हमें ऐसी आत्मशांति प्रदान करे जिससे हमें इस क्रूर संसार मे फिर से जन्म न लेना पड़े और हमारी आत्मा एक शांति का अनुभव प्राप्त कर सके।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित उनके निजी एहसास जो उनकी अति संवेशनशील भावनाओं से प्रेरित है।

17/11/2018 at 10:20Am

(एक बार पुनः प्रकाशित कर रहा हूँ कुछ एक तंकन मे त्रुटि सुधार उपरांत 11:57 am पर)

 

💥 True Light.

It is one thing to exploit and exploit the victims from the big platforms of this civilized society and to give relief to the victims of their exploitation and to give a variety of blessings to their well-being and to get acquainted with the truth of those facts at the grassroots level It is a different way to get rid of the weaker sections of society (victim and exploited) by the exploitation of the society.

Do not know how many such innocent people are never heard from anyone. But his courage and every loud voice were crushed while trying to make him a blame or mental patient.

Today, I raise a voice from this great platform of social media for all the masses and unemployed, and pray for a peace of mind from their devoted god Paramatma for the peace of their soul.

God Himself will do justice to Him and give him a peace of mind and all his kins.

All my readers and my readers, who read the pain of this article, should give me such goodness, so that our soul can experience a sense of peace.

Thank you.

A pain written by Vikrant Rajliwal, inspired and related to his personal life experience.
(Translation by Vikrant Rajliwal)

16/11/2018 at 20:27 pm

💥 सत्य प्रकाश।

इस सभ्य समाज के बड़े बड़े मंचो से शोषित एव पीड़ितों को उनके शोषण से मुक्ति प्रदान करने हेतु बड़ी बड़ी बातें करना और उनकी भलाई के लिए अनेक प्रकार के आश्वाशन देना एक बात है और जमीनी स्तर पर उन तथ्यों की सच्चाई से परिचित होना एव हर प्रकार के शोषण से सभ्य समाज के कमजोर वर्ग (पीड़ित एव शोषित) को मुक्ति दिला पाना एक अलग है।

न जाने कितने ऐसे मासूम होते है जिनकी कभी भी किसी ने कोई सुनवाई ही नही करि। अपितु उन पर कोई न कोई दोष या उनको मानसिक रोगी बनाने की कोशिश करते हुए उनकी हिम्मत एव हर एक बुलन्द आवाज़ को कुचल दिया गया।

आज मैं ऐसे ही समस्त मासूमो एव बेबसों के लिए सोशल मीडिया के इस महान मंच से एक आवाज़ उठता हु और उनकी आत्मा की शांति के लिए अपने इष्ट देव परम् परमात्मा से एक आत्मशांति की प्रार्थना करता हु।

ईश्वर उनका इंसाफ अब स्वम् करे और उनको एव उनके समस्त परिजनों को एक आत्मशांति प्रदान करें।

एव मेरा ईष्ट मेरा परम् परमात्मा इस लेख रूपी दर्द का पाठन करने वाले समस्त पाठको एव स्वम् मुझ को भी एक ऐसी सदबुद्धि प्रदान करे जिससे हमारी आत्मा को भी एक आत्मशांति का अनुभव प्राप्त हो सके।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित एक दर्द जो उनके निजी जीवन अनुभव से प्रेरित एव सम्बंधित है।

16/11/2018 at 20:21 pm