Author, Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

June 7, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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Experience With Truth.

* This is my Hindi language article translated into English language. If there is any error in some place, then sorry.*[gallery ids=”4379,4377,4378″ type=”rectangular”

The effect of your compatible and the social environment around you must surely influence your conscious and unconscious mascot. That is why a consistent and decent social environment of a positive person has the ability to communicate a positive life energy directly or indirectly in your life, directly and indirectly affecting your personality.

  It is also worth mentioning that an incompatible and non-social environment can make life vulnerable to your life by making it easier to harm the positive life energy from your happy life.

  Ultimately, the essence is that you can develop the ability to instinctively communicate a positive energy in your life despite the presence of all types of non-social environment around you by a proper and decent person. And along with your life, you can also provide a sense of their calmness by communicating a positive energy in your family’s life.

  Thank you.

  Written by Vikrant Rajliwal (A true experience inspired by their life struggle.)

  07/06/2016 at 8:08 pm

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June 7, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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सत्य अनुभव।

आपकी संगत का और आपके आस पास के सामाजिक वातावरण का प्रभाव आपके चेतन एव अचेतन मस्तिक्ष को अवश्य ही प्रभाविक करता है। इसीलिए एक सकारात्मक व्यक्त्वि के व्यक्तियों की संगत एव सभ्य समाजिक वातावरण आपके व्यक्तित्व को प्रत्यक्ष एव अप्रत्यक्ष रूप से प्रभाविक करते हुए आपके जीवन मे प्रत्यक्ष एव अप्रत्यक्ष रूप से एक सकारात्मक जीवन ऊर्जा का संचार करने की क्षमता रखता है।

इसका तातपर्य यह भी होता है कि एक असंगत एव असमाजिक वातावरण आपके जीवन को नकरात्मक तरीके से प्रभाविक करते हुए आपके सुखी जीवन से सकारात्मक जीवन ऊर्जा का हनन सहज ही कर सकता है।

अंततः सार यह है कि आप एक उचित एव सभ्य व्यक्तियों कि संगत के द्वारा अपने आस पास के हर प्रकार के असमाजिक वातावरण की उपस्थिति के बावजूद अपने जीवन मे एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार सहज ही करने की क्षमता का विकास कर सकते है। एव अपने जीवन के साथ साथ अपने परिजनों के जीवन मे भी एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर उन्हें भी उनकी आत्मशांति का एक अनुभव प्रदान कर सकते है।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। उनके जीवन संघर्ष से प्रेरित एक सत्य अनुभव। (2003 से अब तक)

07/06/2019 at 7:50 pm

June 2, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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ट्वीट्स। My Twittes (एक लघु संग्रह )

✍️ यह एक लघु संग्रह है बीते कुछ दिनों में मेरे मैन ट्विटर अकाउंट और बैकअप ट्विटर अकाउंट के कुछ दिल को छू देने वाले ट्वीट्स के। 1) @vikrantrajliwal 2) @RajliwalVikrant 3rd one है @VRajliwala

This is a short collection of my main Twitter Twitter accounts and some of my backup Twitter Twitter accounts that touched your heart. 1) @vikrantrajliwal 2) @RajliwalVikrant is 3rd one @VRajliwala

केवल आनन्द एव कटाक्ष के दृष्टिकोण से पाठन कीजिएगा। एव यदि कोई ज्ञान वर्धक पन्तिया पाठन हेतु प्राप्त हो जाए तो उनको लिखने के वास्तविक कारण तक पहुचने का प्रयास कीजिए।

Only read from the point of view of joy and sarcasm. And if any knowledge-seeker is available for reading, then try to reach the real cause of writing them.

👉 😇 कोई अपने धर्म मे है मलंग, तो कोई अपनी जात के सम्प्रदाय में है मलंग।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
25 may 2019 @VRajliwala
(Translated)

👉 😇 Someone in his religion is Malang, then someone is in the caste of his caste Malang.

Written by Vikrant Rajliwal

🤠 आप किसी के गुण देखने से पूर्व उसके धर्म एव जात को क्यों देखते है? क्या किसी व्यक्ति के गुण उसके धर्म या जात से मिट सकते? यदि नही तो आपको अपने व्यवहारों एव विकारो का पुनः एक बार आंकलन करने की गहन आवश्यता है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
25may @VRajliwala
@vikrantrajliwal @RajliwalVikrant

Translated

🤠 Why do you see his religion and caste before seeing someone’s qualities? Can a person’s qualities be erased from his religion or caste? If not, then you need a deeper assessment of your behaviors and disorders once again.

Written by Vikrant Rajliwal

💥 सुप्रभात।

जीवन का दूसरा नाम संघर्ष ही है। जीवन के हर क्षण एक नया इम्तिहां समक्ष होता है और उसके लिए स्वम् को सशक्त करना ही जीवन है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। https://t.co/eCeNEb4m6J https://t.co/PfdoW0vLN0

25may @RajliwalVikrant
💥 Good Morning.

The second name of life is conflict only. Every moment of life is present in a new era and for him, empowering the Self is life.
Written by Vikrant Rajliwal (Translation by Vikrant Rajliwal) https://t.co/gcA0Lficr9 https://t.co/MvZPLIVUKK
25May @RajliwalVikrant

😇 आप को आपके अधिकारों के ज्ञान का ज्ञान होने से बढ़कर कोई ज्ञान नही।

यह आपका धर्म है कि आपके अधिकारों का ज्ञान आपको होना।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
25May @VRajliwala
@RajliwalVikrant @vikrantrajliwal

Translated

😇 You do not have any other knowledge than knowing knowledge of your rights.

It is your religion that you have knowledge of your rights.

Written by Vikrant Rajliwal
@RajliwalVikrant @vikrantrajliwal
25may VRajliwala

💥 मानुष को तुमने कभी मानुष ना समझा, भूल कर धर्म मनुष्यता का तुमने कभी भी धर्म मनुष्यता का नही समझा।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

@RajliwalVikrant @vikrantrajliwal
Translated by Vikrant Rajliwala (विक्रांत राजलीवाल)

💥 You never thought of a Human as a human. You have never understood religion as a human.

Written by Vikrant Rajliwal
@RajliwalVikrant @vikrantrajliwal

👉 जब मानुष स्वम् के धर्म या सम्प्रदाय के रिवाजो और कुप्रथाओं के विरुद्ध आवाज उठाने से भयभीत हो जाते है।

तब मानुष दुसरो के धर्म एव समप्रदाय पर कलंक लगाने लगते है और स्वम् की कमियॉ नज़रंदाज़ कर अपने धर्म की कुप्रथाओं को ईष्वर का आदेश एव अन्य जनो के धर्म रिवाजों को यह क्या बकवास है ( व्हाट दा हैल इस डिस ) कहने लगते है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
26may@VRajliwala
@RajliwalVikrant @vikrantrajliwal

Translated by Vikrant Rajliwala

👉 When the man becomes frightened by raising his voice against the rituals and practices of his religion or community.

  Then the men start to blame others’ religion and community and ignore their own weeknesses , by ordering the laws of their religion and the rituals of other people what is this nonsense. (What the hell is this this)?

  Written by Vikrant Rajliwal
  @RajliwalVikrant @vikrantrajliwal

26may @VRajliwala

🕊️ जिनकी कलम ही उनका धर्म है और हर अक्षर एक एहसास।
करता हु प्रणाम तुम्हे तुम हो संघर्ष की जिंदा एक मिसाल।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। (Vikrant Rajliwala) ✍️
@RajliwalVikrant @vikrantrajliwal https://t.co/P1LniB0vmv

👹 एक धर्म स्वार्थ का सब पर भारी, स्वार्थ स्वार्थ से निखरे साथ साथ जितने भी जो स्वार्थी।

कर हत्या विशवास कि है चूर घमंड से धर्म सत्य का त्याग, क्रूर जितने भी जो स्वार्थी।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
@RajliwalVikrant @vikrantrajliwal

😋 सोशल साइड्स।

😎 छुप छुप कर देखना और उस देखे हुए का रिकार्ड को गर्व से बताना भी एक धर्म बन गया है।

कभी जो मिलते थे सीना थोक कर आज छुप छुप कर व्यू से उपस्थिति दर्द कर जाते है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। https://t.co/2W9cwjgp3O

😋 Social Sides. (Translated)

😎 Hiding and hiding the record of that seen with pride proudly became a religion.

Ever wanted to meet you occasionally. Today, the same person hides his sight from the view of the hidden person.

Written by Vikrant Rajliwal https://t.co/ZDLHHpWXVy

😇 यह एक आशीर्वाद है एक दुआ है मेरे स्वम् के मासूम बच्चों समेत हर एक मासूम बच्चों के लिए।

ईष्वर तुम्हे हर बुराईयों से सुरक्षित रखे। और मेरी उम्र भी तुम्हे मिल जाए।

🕊️ चलो तो ऐसे चलना की देख कर तुम्हारे व्यक्त्वि की चमक ज़माना भी ठहर जाए। झुक जाए हर मंजिल कदमो में तुम्हारे, आसमां भी झुक कर करे नमन।

जीते रहो।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

Published on blog site 02/06/2019 at 07:25am

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May 28, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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दर्द। (नई ग़ज़ल)

जब खाई शिखस्त हमनें, अपनो के हाथों ही खाई, नही पाए पहचान जो हाथ वो खंजर उतारा दिल मे बेदर्दी से जो गया।

हो कर बेपरवाह ज़िन्दगी से, सलूख ज़िन्दगी के हम सीखते रहे, जान हर सलूख जिंदगी के, जान जिंदगी की निकलती रही।।

दर्द हर हक़ीक़त का करते रहे जान कर भी नज़रंदाज़ हम जिनकी, सितम ये के एतबार बेवफ़ाई पर उनकी हम जो करते रहे।

धूल थी चश्मे पर फ़रेब कि उनके हमारे और हम थे नादां इस कदर की बिन बात ही आँखों को अपनी जो मलते रहे।।

हर आह को टूटी सांसो से अपने दबाए, हर ख़ुशी से हो कर अंजान, बेरूखिया जमाने की हम जो झेलते रहे।

हर अंजाम बरबादियों का लगा कर सीने से अपने, बर्बाद खामोशियों से अक्सर हम जो होते रहे।।

हर दर्द ए ज़िन्दगी को जान कर अपना, अश्क़ बहाती है आँखे, अश्क़ अक्सर नम आँखों से अपने हम जो छुपाते रहे।

बहे गए अश्क़ सरेराह फ़िर भी कई, जिन अश्को को नम आँखों मे अपनी, हम कभी जो छुपा ना सके।।

टूटे दिल की उखड़ती सांसे और दर्द तड़पती धड़कनो का वो अपने, बंद जुबां से हर दर्द को खामोशी से अक्सर हम जो दबाते रहे।

हर दर्द ए ज़िंदगी हर दर्द ए दवा को हमारे बेअसर करते रहे, और हर दर्द से एक दास्ताँ ज़िन्दगी की अपनी हम जो लिखते रहे।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
28/05/2019 at5:20 pm

May 27, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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An important notification.

This is a translation of my Hindi-speaking article in the English language. If there is an error in translation in error, then I apologize.

🙏 Hello all my dear readers who read this blog, Friends, today I have come to share some very interesting topics with you, friends, I will soon be your own friend, Vikrant Rajliwal, your own blog site https://vikrantrajliwal.com has some extremely interesting facts on the impact and behavioral changes on full child mental conditions related to child psychologist at the very real time of our childhood. The written and expressed by the poignant experiences will own an attempt by an upcoming psychological articles.

How rarely can life be complicated by the timing of complex situations, but you have little hesitation. If you make an effort to show some signs through a scale, then there is a very small situation and 10 very complex mental state. So you will find that complex situations start with scale 1 and reaching 10, it becomes very complex and frightening. An innocent child who has just started going to play school, and will make an effort to express those small problems which are complex and frightening of the life of that innocent (ounself), kg orbit, first, and so on. Even today, my conscious and unconscious mind is in the same way as I can still feel them.

In the end, I would like to say that the complexity that you see today can be neither the circumstances nor the answer. That is why it is very important to understand your child’s psychology. I will try my best to get some very exciting fact from the time of my childhood, through some psychological facts related to the life of my childhood, to the present tense, through all of your upcoming psychological blog, all of you I can express it.

Thank you.

Written by Vikrant Rajli1wal
27/05/2016 at 8:27 am

May 27, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

1 comment

एक महत्वपूर्ण सूचना।

🙏 नमस्कार इस ब्लॉग का पाठन करने वाले मेरे समस्त प्रिय पाठको को, मित्रों आज मैं आपसे कुछ अत्यंत ही जटिल विषय सांझा करने आया हु, मित्रों शीघ्र अति शीघ्र ही मैं आपका अपना मित्र विक्रांत राजलीवाल आपकी अपनी इस ब्लॉग साइट https://vikrantrajliwal.com पर बाल मनोवैज्ञानिक से सम्बंधिक पूर्ण बाल मानसिक स्थितियों पर प्रभाव एव व्यवहार परिवर्तन पर कुछ बेहद ही रोचक तथ्यों को अपने बाल काल के वास्तविक अत्यंत ही जटिल एव मार्मिक अनुभवों के द्वारा व्यक्त करते हुए अपने एक आगामी मनोवैज्ञानिक लेख के द्वारा प्रस्तुत करने का एक प्रयास करूंगा।

कि कैसे कभी कभी जीवन जटिल परिस्थितियां किस सिमा तक जटिल हो सकती है इसका आपको किंचित मात्र भी कोई अंदेशा नही हो पाता। अगर एक स्केल के जरिए में आपको कुछ संकेत दर्शाने का एक प्रयास करू तो 1 अत्यंत ही लघु स्थिति एव 10 अत्यंत ही जटिल मानसिक स्थिति है। तो आप पाएंगे कि स्केल 1 से जटिल परिस्थियों की शुरुआत होती है एव 10 तक पहुचते हुए वह अत्यन्ति ही जटिल एव भयावह हो जाती है। एक मासूम बालक जिसने अभी प्ले स्कूल में जाना आरम्भ किया है एव kg कक्षा, फिर ukg कक्षा, पहली, और इसी प्रकार से उस मासूम (स्वम् के) के जीवन की जटिल एव भयावह उन छोटी छोटी समस्याओं को व्यक्त करने का एक प्रयास करूँगा जो आज भी मेरे चेतन और अचेतन मस्तिष्क में वैसे ही अंकित है जैसे कि मैं आज भी उन्हें महसूस कर सकता हु।

अंत मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि आज जो जटिलता आपको दिखती है वह यू ही तो नही हालात और भी बत्तर हो सकते थे। इसीलिए आपका बाल मनोविज्ञान को समझना अत्यंत ही आवश्यक हो जाता है। मेरा भरपूर प्रयास रहेगा कि शीघ्र अति शिघ्र ही अपने बाल काल के जीवन से सम्बंधित कुछ मनोवैज्ञानिक तथ्य के द्वारा अपने स्वम् के बाल काल से युवा अवस्था से गुजरते हुए वर्तमान काल तक के कुछ अत्यंत ही रोमांचक तथ्य को अपने आगामी मनोवैज्ञानिक ब्लॉग के द्वारा आप सभी से व्यक्त कर सकूँ।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
27/05/2019 at 8:11 am

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