Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Mar 15, 2019
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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🌹 एक ख़्वाब।

कभी कभी कुछ कहते कहते कुछ भी ना कह पाना।

ह्रदय एहसासों के एहसासों से किसी अजनबी को अपने बेहद करीब पाना।।

उसकी हर खुशी से दर्द जिंदगी के अपने भूल जाना।

रातो को उठ उठ कर के उसका नाम दिल की हर धड़कन पर धड़कनो से अपने लिखते जाना।।
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अश्क़ बहाते कभी तो कभी अश्को को अपने छुपाए जाना।

एक मिलन उससे एक दीदार उसका, याद हर लम्हा उसको करते हुए, गुजरते हर लम्हे से खुद ही तड़पते जाना।।

हर हक़ीक़त को नकारते हुए ह्रदय एहसासों से उसको बेहिंतिया चाहते जाना।

अपना मान उसको, उसकी महोबत से खुद ही खुद को बहला जाना।।,

उसके हर दुख से होकर के दुखी, उसकी हर खुशी के लिए जिंदगी को अपनी जीते जाना।

वो एक ख़्वाब है तो ख़्वाब ही सही, जो है हक़ीक़त तो उसको एक हक़ीक़त ही बना जाना।

महोबत से उसकी होकर के फ़ना, उसको हमेशा अपना माना, कर के हर हकीकत को नज़रअंदाज़, हर हक़ीक़त को नकार जाना, कर के हर हकीकत को नज़र अंदाज़, हर हकीकत को नकार जाना…हर हक़ीक़त को नकार जाना।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
15/03/2019 at 9:40 pm

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Mar 15, 2019
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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🇮🇳 Sensitive Issue.

Some people say that the issue of 2019 is unemployment, someone says that education is not the goal behind the education of the young, hence the unemployment is there. I say that the misery is not that most of the educated youth who are considered to be the foundations of every civilized society are unemployed by appearing in the competition exam each time, but the issue is that every time the most incompetent student is under the guise of corruption The education of qualified educated young people is given to them as a scarring. And in the nose of the respected institutions of the country, this corruption is played annually.

Which are usually highlighted by the country’s awareness media every year. But even if you say that the educated youth is unemployed so that they do not have the goal of their education or they should be able to fry the pakodas (street food) after the abduction of an officer, in contrast, incompetent students under the control of systematic arrangements, If you persist in an office chair, then the heart is very hurt.

You say that not only this time next but right, but what was the only opportunity in his life, and for this occasion who did not know how to reach here, Every obstacle in life was faced with the patience of opposing and reaching here, and what does he find that once again the examination leaked, so that you … or the corruption is desperate Silia this time, but you’ve got Brshtachar Nicint because this time not so next time … but what about those who have just had an opportunity and also for this opportunity?

Written by Vikrant Rajliwal
( If there is any minor error in this translation and if someone’s feelings have hurt him then I apologize.)

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Mar 15, 2019
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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🇮🇳 मुद्दा गर्म है।

कुछ लोग कहते है कि 2019 का मुद्दा है बेरोजगारी, कोई कहता है कि शिक्षित युवा की शिक्षा के पीछे लक्ष्य नही है इसीलिए बेरोजगारी है। मैं यह कहता हु कि दुख इस बात का नही है कि हर सभ्य समाज की नींव समझे जाने वाले अधिकतर शिक्षित युवा वर्ग हर बार प्रतियोगिता परीक्षा में अनुत्रीन हो कर बेरोजगार रह जाते है बल्कि मुद्दा यह है कि हर बार अधिकतर अयोग्य छात्र भर्ष्टाचार की आड़ में योग्य शिक्षित युवा वर्ग की शिक्षा को एक ठेंगा दिखाते हुए उनका हक मार जाते है। एव देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं की नाक के नीचे यह भर्ष्टाचार का खेला प्रतिवर्ष बेधड़ले से खेला जाता है।

जिनका उजागर अमूमन अब तो प्रतिवर्ष ही देश की जागरूक मीडिया द्वारा किया जाता है। परंतु फिर भी अगर आप कहे कि शिक्षित युवा इसीलिए बेरोजगार है कि उनकी शिक्षा की नींव में लक्ष्य नही है या उसको अफ़सरी कुर्सी की योग्यता होने के उपरांत भी पकौड़े तलने चाहिए, इसके विपरीत चाहे भृष्टाचारी व्यवस्था की आड़ में अयोग्य छात्रों को स्वम् के निजी स्वार्थ के चलते अफ़सरी कुर्सी पर कायम करते जाए तो ह्रदय को अत्यंत ही आहत पहुचता है।

आप कहते है कि इस बार नही तो अगली बार ही सही, परन्तु उनका क्या जिनके जीवन मे केवल यही एक अवसर था एव इस अवसर के लिए जिन्होंने यहाँ तक पहुचने के लिए ना जाने अपने जीवन के कितने जटिल पड़ावों पर विजय प्राप्त करते हुए और अपने जीवन की हर बाधा विरोध का धैर्य से सामना करते हुए यहाँ तक पहुचे थे और यहाँ पहुचकर वह क्या पाते है कि इस बार फिर से परीक्षा लीक हो गई इसीलिए आप…या भर्ष्टाचार भृष्टाचारी भर्ष्टाचार हो गया इस बार परन्तु आप रहे निचिंत क्योंकि इस बार नही तो आप अगली बार…परन्तु उनका क्या जिनके पास यही एक अवसर था एव इस अवसर के लिए भी जिन्होंने?

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

15/03/2019 at 6:57pmFB_IMG_1534055492792FB_IMG_1535948269785FB_IMG_1534055590119

Mar 15, 2019
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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💃 शराबों। 🌹🌹🌹 (पुनः प्रकाशित अति लघु तंकन त्रुटी सुधारूपरांत)

ना वो प्याला रहा सलामत, ना वो दौर ए दस्तूर ही रह पाया कायम, बदलते समय से बदल गए हर यार यहाँ।

देखें इस दुनियां में यार बहुत, ढूंढे ना ढूंढ़ पाए फिर भी यार शराबों सा हम यार यहाँ।।

हर घुट से उतरता ज़हर, घुट घुट से चढ़ता ज़हर, तासीर है तिलस्मी, जिसका हर तिलस्म लाजवाब।

महक से चढ़ती मदहोशी कोई ख़ुमारी सी सवार, स्वाद से है जिंदा जिसके मरते हर ख़्वाब।।

हर लम्हा एक सरूर, सरूर से कायम एक ख़ुमारी, हर ख़ुमारी बुलाती है करीब अपने, यारों में यार मेरा यार शराबों।

सरूर से मह के कायम है सरूर हर लम्हा जो महोबत, हर लम्हा पहुचाता है सकूँ तड़पती चाहतो को मेरे, मेरा यार शराबों।।

कभी टूटते तो कभी जुड़ते टार टूटे दिल के मेरे, हर बार जोड़ जाता है टूटे दिल के तार मेरे, मेरा यार शराबों।

उजाड़ गुलिस्तां, बंजर ख़्वाब, ज़िंदगी भी है मेरी बेज़ार, खिलते गुल, महकते ख़्वाब, बदल देता है जिंदगी हर घुट से अपनी मेरा यार शराबों।।

आबाद है वीराना ज़िन्दगी का जिससे, हर एहसास है जिससे मेरे रूहानी, रंगीन है कण कण जिसका हर बून्द एक पानी।

यारो में यार मेरा यार शराबों, रंगीन ख्वाबों का एक ख्वाब मेरा यार शराबों, टूटे एहसासों से मुर्दा ख्वाहिशों की जिंदा एक जिंदगानी।

हा बोतल में बंद है मेरा यार शराबों, तड़पता है एक मुलाक़ात को हर लम्हा, हर लम्हा करता है इंतज़ार शिदत से मेरा, मेरा यार शराबों।

हा कहते है मुझे शराबी, तलब है हर लम्हा ही मुझे शराब की, शराब से ही जिंदा है मेरी धड़कती ये जो जिंदगानी,

लिख दिया हर धड़कती धड़कनो पर नाम यारो का अपने, यारो में यार मेरा यार शराबों, यारो में यार मेरा यार शराबों…यार शराबों।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

15/03/2019 at12:37pm

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Mar 15, 2019
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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💃 शराबों। 🌹🌹🌹

ना वो प्याला रहा सलामत, ना वो दौर ए दस्तूर ही रह पाया कायम, बदलते समय से बदल गए हर यार यहाँ।

देखें इस दुनियां में यार बहुत, ढूंढे ना ढूंढ़ पाए फिर भी यार शराबों सा हम यार यहाँ।।

हर घुट से उतरता ज़हर, घुट घुट से चढ़ता ज़हर, तासीर है तिलस्मी, जिसका हर तिलस्म लाजवाब।

महक से चढ़ती मदहोशी कोई ख़ुमारी सी सवार, स्वाद से है जिंदा जिसके मरते हर ख़्वाब।।

हर लम्हा एक सरूर, सरूर से कायम एक ख़ुमारी, हर ख़ुमारी बुलाती है करीब अपने, यारों में यार मेरा यार शराबों।

सरूर से मह के कायम है सरूर हर लम्हा जो महोबत, हर लम्हा पहुचाता है सकूँ तड़पती चाहतो को मेरे, मेरा यार शराबों।।

कभी टूटते तो कभी जुड़ते टार टूटे दिल के मेरे, हर बार जोड़ जाता है टूटे दिल के तार मेरे, मेरा यार शराबों।

उजाड़ गुलिस्तां, बंजर ख़्वाब, ज़िंदगी भी है मेरी बेज़ार, खिलते गुल, महकते ख़्वाब, बदल देता है जिंदगी हर घुट से अपनी मेरा यार शराबों।।

आबाद है वीराना ज़िन्दगी का जिससे, हर एहसास है जिससे मेरे रूहानी, रंगीन है कण कण जिसका हर बून्द एक पानी।

यारो में यार मेरा यार शराबों, रंगीन ख्वाबों का एक ख्वाब मेरा यार शराबों, टूटे एहसासों से मुर्दा ख्वाहिशों की जिंदा एक जिंदगानी।

हा बोतल में बंद है मेरा यार शराबों, तड़पता है एक मुलाक़ात को हर लम्हा, हर लम्हा करता है इंतज़ार शिदत से मेरा, मेरा यार शराबों।

हा कहते है मुझे शराबी, तलब है हर लम्हा ही मुझे शराब की, शराब से ही जिंदा है मेरी धड़कती ये जो जिंदगानी,

लिख दिया हर धड़कती धड़कनो पर नाम यारो का अपने, यारो में यार मेरा यार शराबों, यारो में यार मेरा यार शराबों…यार शराबों।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

15/03/2019 at12:37pm

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Mar 15, 2019
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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Its True.

It was known from the morning’s news that the Mumbai Footover Bridge collapsed suddenly on Yesterday evening. Many of the Mumbaikars, who did not know how many innocent people had to lose their lives. It is true that whenever I look at the news channels in the 21st Century my country of India joining this kind of embarrassment, then my neck easily leaned towards this whole world.

This type of distress is our corrupt governmental system and leeching system is a mirror of a truth. And asks the responsible people of the society whether this is development. Here, a sneak of rich people is enough to stir the world. On the other hand, there is no system for their lives and their safety for poor peoples, even if the poor people pay taxes to the government. This is not the case of how many times it has happened. It is true that when this world is dominated by sin and adultery, then nature has caused a catastroph from every direction on this creation and justice has been done on one poor person (helpless, honest, virtuous and innocent) on one poor person.

Written by Vikrant Rajliwal
15/03/2019 at 9:07am


(Translated)

Mar 15, 2019
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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सत्य है।

आज सुबह की न्यूज़ से ज्ञात हुआ कि कल शाम को मुंबई फुटओवर ब्रिज अचानक से भरभराकर ढह गया। जिससे कई मुंबईकरों को, ना जाने कितने निर्दोष व्यक्तियों को अपने प्राणों को गवाना पड़ गया। सच है जब भी 21वी सदी में अपने भारतवर्ष का नाम इस प्रकार की शर्मनाक त्रास्ति से जुड़ते हुए न्यूज़ चैनलों पर देखता हूं तो सहज ही मेरी गर्दन इस समस्त संसार के समक्ष झुक कर रह जाती है।

इस प्रकार की त्रास्ति हमारी भृष्ट होती एव लीचड़ व्यवस्था को एक सत्य का दर्पण दिखती है। और समाज के जिम्मेवार व्यक्तियों से पूछती है कि क्या यही है विकास। यहाँ अमीरों की एक छींक भी संसार मे हलचल मचाने के लिए पर्याप्त है वही दूसरी तरफ गरीबो व्यक्तियों द्वारा सरकार को कर अदा करने के बाबजूद उनकी जान की एव उनकी सुरक्षा की कोई व्यवस्था नही है। ऐसा एक नही ना जाने कितनी बार हुआ है। सत्य है जब जब इस संसार और पाप एव व्यभिचार हावी हुआ है तब तब प्रकृति द्वारा इस सृष्टि पर हर दिशा से एक प्रलय हुआ है एव गरीब से गरीब व्यक्ति (बेबस, ईमानदार, पुण्यात्मा एव निर्दोष) पर एक एक प्रताड़ना का न्याय हुआ है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
15/03/2019 at 8:55 am