एहसास

💔 दर्द ए दिल की अपने कोई दवा अभी तक जो मुझे मिली नही। हर जख्म फट गए मेरे बेअसर हर मरहम को कर के खुद ही।। टूट कर मासूम एहसास हर लम्हा मेरे जो मरते गए; हर लम्हा ही हम टूटे एहसासों से जो टूटते गए। सितम ज़िंदगी के हंसते हुए हम सहते गए;Continue reading “एहसास”

🌹 टूटा गुलाब, बिखुड़ी जो पंखुड़ियां; हर जख्म महोब्बत के नासूर हो गए।याद में एक सितमगर कि ए दोस्त; हम जीते जी ही जो फ़ना हो गए। विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। 💗हम तुम्हें ना पा सकें और तुम हर बार हमारे मासूम एहसासों का कत्ल करते गए। नही एतबार अब हमें ख़ुद के एहसासों परContinue reading

काल चक्र।

चक्र काल से छूट ना कोई पाएगा, प्रत्येक कदम, प्रत्येक श्वास, गुजरता प्रत्येक क्षण, एहसास चक्र काल का करवाएगा। होनी-अनहोनी, साक्षी कर्म कांड, सहभागी सत्य कर्म साथ-साथ, मृत्यु-जीवन से साक्षात्कार, ध्वनि ह्रदय जो धड़काएगा।। भावना-प्रेम, अश्रु-क्रोध, चेतन एहसास, स्मृति-विस्मृति, जो साथ साथ, अंधकार में सूर्य नया, चेतना मृत जगाएगा। राह सत्य पर पथिक अनजान, मंजिलContinue reading “काल चक्र।”

एहसास

हम लिखते है, हम गाते है, हम गीत खुशियों के गुनगुनाते है। साथ पल दो पल का नही, ये एहसास ह्रदय से खनखनाते है।। मौसमो की बारिश नही, ये अश्क़, यादों की एक निशानी है। हर पल एहसासो को अपने संजोए, हर दर्द, हर दास्ताँ, मोहब्ब्त की एक कहानी है।। आज फिर से तेरी यादContinue reading “एहसास”

Watch “नंगे भ्रष्टाचारी ( Poetry by Vikrant Rajliwal )” on YouTube ^read Poerty and Video link^

नंगे भ्रष्टाचारी काव्य कविता के जरिए श्री विक्रांत राजलीवाल ने उन भ्रष्टाचारी व्यक्तियों एव संगठनों पर एक प्रहार करने का प्रयत्न किया है जो आज भी हमारी मातृभूमि भारतवर्ष के उज्ज्वल इतिहास पर अपनी भ्रष्टाचारी प्रवर्ति के जरिए एक कलंक मलते हुए गरीब एवं ईमानदार व्यक्तियोँ का शोषण कर रहे है। आशा करता हु आपContinue reading “Watch “नंगे भ्रष्टाचारी ( Poetry by Vikrant Rajliwal )” on YouTube ^read Poerty and Video link^”

ख़ामोशीया।

ज़िद है उन्हें क़त्ल करने की हमारे और हम एक नज़र मोहब्ब्त, नज़रो में उनकी देखने को तरसते है आज भी। वो कहते है हमें की भूल जाए हम उनको और हम यक़ीन मोहब्ब्त का अपनी उन्हें दिलाते है आज भी।। हर हादसा एक सबक जिंदगी का और हर सबक एक ज़ख्म है नासूर हमारा,Continue reading “ख़ामोशीया।”

💥 कर्म फल।

दम था बहुत उड़ने का ऊँची उड़ान उसमें, जब जब उड़ना चाहा उसने, तो हर बार आसमान सिमट कर सिमट गया। टूटे परों में थी जो जान कुछ बाकी, वक़्त की हर चाल पर बच ना सकी, बच गई फिर भी अधूरी जो, वो थी एक ख़्वाहिश, एक ख्वाहिश, एक ख़्वाहिश… एक ख़्वाहिश एक उन्मुक्तContinue reading “💥 कर्म फल।”

💥 चेतना। (नवीन काव्य)

हमनें खाया है दगा बहुत एतबार से यारों, दुआ है यही की अब कोई कभी अपनो से दगा ना करें। जो करें विशवास तो निभा देना उसका साथ, भूल से भी विशवास से किसी के अब कोई कभी घात ना करें।। हर ज़ख्म जज्बातों के दिल ही नही धड़कनों को भी तोड़ने जब लगें, वारContinue reading “💥 चेतना। (नवीन काव्य)”

💥 One Truth. 5 (Fifth Blog) A true Experience. (Republish)

💥 One True. 5 (Fifth blog) was (trash) deleat by mistake. That is why I am republishing a true Fifth blog. Now further …   And I open the door. At that time, I could not understand anything properly in the saroor of Pudia (bhang, dhatura). Yes, still remember so much that maybe I openContinue reading “💥 One Truth. 5 (Fifth Blog) A true Experience. (Republish)”

💥 सत्य कर्म। (नवीन काव्य-कविता।)

सत्य भृम ले जान ए पथिक, लक्ष्य स्वयं झुकते नही, पथ ए पथिक सरलता से जीवन में स्वयं तुम्हारे। ज्ञान अज्ञान ये भाव ए पथिक, लक्ष्य स्वयं आएंगे चलकर, बांधे हाथ सरलता से निकट स्वंय तुम्हारे।। विजय तिलक भाग्य में तुम्हारे, भृम विजय स्वयं ही मिल जाएगी, आ कर निकट सरलता से स्वयं तुम्हारे। कर्म,Continue reading “💥 सत्य कर्म। (नवीन काव्य-कविता।)”