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💏 मासूम मोहब्ब्त। (चौथी दर्दभरी दास्ताँ)

नमस्कार प्रिय पाठकों एवं मित्रों, आपके अपने मित्र विक्रांत राजलीवाल (स्वयं) जी के द्वारा लिखित उनकी दर्दभरी नज़म दास्ताँ “मासूम मोहब्ब्त।” का रचना कार्य उन्होंने वर्ष 2015-16 में अपनी प्रकाशित अत्यधिक संवेदनशील काव्य पुस्तक “एहसास” एवं अपनी पूर्व प्रकाशित दास्तानों के साथ ही किया था। “मासूम मोहब्ब्त।” मेरे (विक्रांत राजलीवाल) द्वारा लिखित अब तक कि […]

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💥 कर्म फल।

दम था बहुत उड़ने का ऊँची उड़ान उसमें, जब जब उड़ना चाहा उसने, तो हर बार आसमान सिमट कर सिमट गया। टूटे परों में थी जो जान कुछ बाकी, वक़्त की हर चाल पर बच ना सकी, बच गई फिर भी अधूरी जो, वो थी एक ख़्वाहिश, एक ख्वाहिश, एक ख़्वाहिश… एक ख़्वाहिश एक उन्मुक्त […]

💥 चेतना। (नवीन काव्य)

हमनें खाया है दगा बहुत एतबार से यारों, दुआ है यही की अब कोई कभी अपनो से दगा ना करें। जो करें विशवास तो निभा देना उसका साथ, भूल से भी विशवास से किसी के अब कोई कभी घात ना करें।। हर ज़ख्म जज्बातों के दिल ही नही धड़कनों को भी तोड़ने जब लगें, वार […]

💥 One Truth. 5 (Fifth Blog) A true Experience. (Republish)

💥 One True. 5 (Fifth blog) was (trash) deleat by mistake. That is why I am republishing a true Fifth blog. Now further …   And I open the door. At that time, I could not understand anything properly in the saroor of Pudia (bhang, dhatura). Yes, still remember so much that maybe I open […]

💥 सत्य कर्म। (नवीन काव्य-कविता।)

सत्य भृम ले जान ए पथिक, लक्ष्य स्वयं झुकते नही, पथ ए पथिक सरलता से जीवन में स्वयं तुम्हारे। ज्ञान अज्ञान ये भाव ए पथिक, लक्ष्य स्वयं आएंगे चलकर, बांधे हाथ सरलता से निकट स्वंय तुम्हारे।। विजय तिलक भाग्य में तुम्हारे, भृम विजय स्वयं ही मिल जाएगी, आ कर निकट सरलता से स्वयं तुम्हारे। कर्म, […]

🌹 अश्क़। (एक दर्द भरी प्यारी सी सौगात के साथ)

ये अश्क़ है दिवाने (विक्रांत राजलीवाल।) के जो करते है बयां दर्द मोहब्ब्त का मोहब्ब्त से मेरे। हर दर्द से छलकता है अश्क़ मोहब्ब्त का मोहब्ब्त से मेरे।। आज अपनी इस नज़म को एक दर्द भरी प्यारी सी सौगात के साथ आप सभी मित्रों के लिए पुनः प्रकाशित कर रहा हु। जिसमे आपको दर्द ए […]

💥 सत्य। // 💥 Truth.

🕯️ दुसरो के गुणों को एव स्वंय के अवगुणों को जो स्वीकार करने की क्षमता रखता है वास्तव में वही स्वयं के प्रति एक ईमानदारी का व्यवहार बरतता है। यदि आप सत्य को स्वीकार नही कर सकते तो शीघ्र ही सत्य की दिव्य अग्नि की तपिस से आपकी अन्तर्रात्मा आपको निरन्तर तपाते हुए जीते जी […]

💥 सत्य। // 💥 Truth.

🕯️ जिस सड़क पर आप अपने जीवन के प्रारम्भ से एक दौड़ लगते हुए दौड़ते जा रहे है ना प्रियजनों! इस जीवन मार्ग पर आपकी सांसे तो टूट सकती है परंतु आपकी यह दौड़ नही रुक सकती! जब तक आपको आपकी उस दिव्यता का अनुभव प्राप्त नही हो जाता जिस के साथ ईष्वर ने आपकी […]

💥 सत्य। // 💥 Truth.

🕯️ अपने दिव्य व्यक्त्वि के विपरीत किया गया हर समझौता स्वयं आपको आपकी प्रत्येक उपलब्धियों को नकारते हुए आपकी अंतरात्मा में एक आत्मग्लानि की भावना सहज ही उतपन कर देगा। विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। 🕯️ Every compromise made against your divine person, by denying you every one of your achievements, will instill a feeling of […]

💥 सत्य। // 💥 Truth.

यदि आप सर्वप्रथम स्वयं के विकास के लिए कोई सकरात्मक प्रयत्न नही करते है तो आप शीघ्र ही पतन को प्राप्त हो जाएंगे। एवं जब आपका आपके व्यक्त्वि का पतन हो जाएगा। तब आपके जीवन मे प्रारंभ होता है गृह कलेश। इसके साथ ही समाज एव परिवार के जन मानस आप के ऊपर एक तिरस्कार […]