💥 एक सत्य। 6 (छटवा ब्लॉग) सत्य अनुभवों से प्रेरित एक सत्य।

अब आगे…

स्कूटर के एक सुनसान सड़क पर, एक तरफ खाली स्थान पर रुकते ही, हम एक, एक कर के सभी जन स्कूटर से उतर कर सड़क के किनारे खड़े हो जाते है। तदोपरांत प्रथम अंकल एक्स, (काल्पनिक नाम) लगभग 50 मीटर की दूरी पर स्थित, एक ऑफिस को देखते हुए कहते है कि वह रहा ऑफिस, आओ वही चलते है। उनके इतना कहते ही मुझे विशवास हो गया कि उस ऑफिस में ही आज पार्टी है और वहाँ पहले से ही दौर ए शराब के जाम की महफ़िल सजी हुई होगी। यह विचार करते ही मैं अत्यंत ही उत्साह से उनके साथ उस ऑफिस की ओर चल देता हूं। परन्तु वहाँ पहुँच कर मेरा माथा कुछ ठनक जाता है। वहाँ एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति सुकेश शोन्थि (काल्पनिक नाम) कुर्सी पर बैठे हुए थे। हमे देखते ही वह मुस्कुराते हुए हमारा स्वागत करते है। और उसके आस पास कुछ सभ्य से दिखाई देते हए अन्य व्यक्ति भी खड़े थे। हम ऑफिस में प्रवेश करते हुए उनके सामने की कुर्सी पर विराजमान हो जाते है। हमारे कुर्सी पर बैठते ही वह अधेड़ उम्र के व्यक्ति मुस्कुराते हुए मुझ से पूछते है कि क्या मुझ को जानते हो? मुझे यह सब कुछ अत्यंत ही अज़ीब से महसूस हो रहा था। अपनी उस बेचैनी पर किसी प्रकार नियन्त्रण करते हुए मैं उनसे अत्यन्त ही सहज भाव से कहता हूं कि नही! मैं आपको नही जानता। तब वह मुझ से पूछते है कि सिगरेट या शराब पीते हो। उनके इस प्रकार के वार्तालाप से मेरी छुपी हुई बेचैनी कुछ कुछ प्रकट होने लगी। उस समय मैं यह नही समझ पा रहा था कि वह मुझ से ऐसा प्रश्न क्यों पूछ रहे है। जब हम यहाँ पार्टी करने आए है तो जाहिर है कि शराब पिएंगे ही, फिर वह ऐसा अज़ीब व्यवहार क्यों कर रहे है। इन सभी विचारो से झुझते हुए तब मैं उनसे कहता हु की हा पिता हु। मंगवा लीजिए। मेरे इतना कहते ही अंकल एक्स कुर्सी से खड़े हो जाते है एवं उनके साथ ही अंकल वाई (मौसा जी) और मैं भी अपनी अपनी कुर्सी से खड़े होते हुए ऑफिस से बाहर निकल जाते है। फिर जहा अंकल एक्स ने अपना स्कूटर खड़ा किया था ठीक वही आकर एक बन्द दरवाजे के समीप खड़े हो जाते है। तब अंकल एकस मुझ से कहते है कि विक्की (मेरा पेट नाम) आओ अंदर चलते है। उनके इतना कहते ही मुझ को ऐसा लग की हा अब पार्टी शुरू होने वाली है। और मैं उनके पीछे जैसे ही मुड़ा तभी अंकल वाई (मौसा जी) ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बहुत ही आत्मविश्वास के साथ जोर देते हुए, मुझ से कहा कि विक्की अंदर मत जाइओ। यही मेरे पास खड़ा रहे। अंकल वाई (मौसा जी) जो कि दिल्ली पुलिस विभाग में कार्य करते है। उनके इस प्रकार के अज़ीब व्यवहार से मुझ को अत्यंत ही हैरानी हुई। उस समय मुझ को किंचित मात्र भी एहसास नही हो सका कि वह मुझ से ऐसा क्यों कह रहे है। तभी अंकल एक्स एक आवाज़ लगाते हुए कहते है कि विक्की आ जा। और मैं अंकल वाई (मौसा जी) से कहता हूं कि कुछ नही होगा आ जाओ अंदर ही पार्टी है। इतना कहते हुए मैं अंकल एक्स के साथ उस बन्द दरवाजे से होते हुए अंदर घुस जाता हूं।

उस समय मुझ को ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उस बन्द दरवाजे के पीछे अवश्य ही शराब और नशे का कोई रंगारंग कार्यक्रम चल रहा होगा या ऐसा ही कोई रंग रंगीला कार्यक्रम आज अवश्य ही होने को है। तभी तो ऐसे सुनसान एवं ख़ुफ़िया स्थान पर हम पार्टी करने के लिए आज इस प्रकार से स्कूटर पर बैठ कर आए है। मैं तो लगभग स्टेपनी पर बैठ कर वहा पहुचा था। परन्तु जैसे ही मैं उस बन्द दरवाजे से होते हुए भीतर प्रवेश करता हु, तो मेरे होश ओ हवास उड़ जाते है। उस बन्द दरवाजे के अंदर प्रवेश करते ही मेरी नज़रो के सामने मेरी हम उम्र नोजवान लड़को एवं कुछ मुश्तण्डो की तरह दिखाई देने वाले जवान लड़को कि एक पूरी फ़ौज थी। उन्हें देख कर प्रथम विचार मुझ यही आया था कि यह जरूर कोई बच्चा जेल है। और आज यही पार्टी करने के लिए हम आए है। इस एक एहसास के साथ अंकल एक्स के पीछे पीछे मैं उस बन्द दरवाजे से होते हुए समीप के एक कमरे में प्रवेश कर जाता हु। जहाँ एक बिस्तर और कुछ अन्य छूट पुट सा साज समान मौजूद था। उस कमरे मैं प्रवेश करते ही मुझ को ऐसा लगा कि हा यही वह स्थान है जहाँ पार्टी होगी। अंकल एक्स और मैं उस कमरे में मौजूद बैठने लायक एकमात्र स्थान उस बिस्तर पर बैठ जाते है। तब अंकल एक्स कहते है कि अपने जूते उतार कर आराम से बैठ जाओ, मैं अभी आता हूं। उनके इतना कहते ही मुझ को ऐसा एहसास हुआ कि जरूर वह अंकल वाई (मौसा जी) को बुलाने के साथ ही पार्टी कि व्यवस्था करने के लिए गए है। उनके जाने के उपरांत, मैं लगभव पांच मिनट तक, वैसे ही बैठा रहा तदोपरांत मैं अपनी जुराबें उतार कर एक बीड़ी सुलगाते हुए, उस बिस्तर पर बहुत ही इत्मीनान से लेट जाता हूं। उसी समय एक कमजोर शरीर का एक व्यक्ति अत्यंत ही साधारण से कपड़ो में उस कमरे के भीतर प्रवेश करता है। वह मुझ को देख कर ना जाने क्यों मुस्कुरा रहा था। मैं उससे कुछ कहता उससे पूर्व ही वह उस कमरे में पोचा लगाना प्रारम्भ कर देता है। तब मैं उसी प्रकार से लेटे हुए उससे कहता हूं कि जिन अंकल एक्स के साथ मैं अंदर आया था वह कहा है? मेरे इतना कहते ही वह बिना एक क्षण भी गवाए मुस्कुराते हुए कहता है कि वह तो गए!

उस समय उसके कहने का क्या मतलब था! वह मेरी समझ मे नही आ रहा था। लगभग पांच से दस मिनट या कुछ समय तक मैं तन्हा उस कमरे के भीतर लेता हुआ, उस व्यक्ति के द्वारा कह गए उन शब्दों को समझने का प्रयास करता रहा कि वह तो गए। अचानक से एक झटके के साथ उस कमरे के भीतर मेरे पिता की उम्र का एक पहलवान के जेसा दिखाई देने वाला, बाड़ी बिल्डर व्यक्ति और उसके साथ कुछ अन्य हट्टे कट्टे युवा प्रवेश करते है। उन्हें इस प्रकार से उस कमरे के भीतर प्रवेश करते देख, मुझे कुछ हैरानी हुई। परंतु मैं उसी प्रकार से लेटा रहा। वह सभी व्यक्ति मेरे समीप ही आ कर खड़े हो जाते है तब मैं उठ कर बैठ जाता हूं एवं उनसे कहता हूं कि अंकल एक्स कहा है? तब वह भी उस प्रथम व्यक्ति के समान ही मुझ से कहते है कि वह तो गए। उनके इतना कहते ही मैं अपनी जुराबें पहनना प्रारम्भ कर देता हूं। वह मुझ से कुछ कह रहे थे परन्तु उनकी उस बात को सुनकर कि वह तो गए। मेरा रोम रोम जलते हुए अंगार के समान जलने लगा था। और मुझे उनके किसी भी शब्द को सुनने में अब कोई भी दिलचसबी नही थी। अपनी जुराबें पहनने के उपरांत अब में अपने जूते पहन कर खड़ा हो जाता हूं। अब हम सब एक दूसरे के आमने सामने अड़ कर खड़े थे। उस समय मेरा रोम रोम क्रोध से ज्वलित था और वह सब अब भी मेरी ओर देखते हुए मुस्कुरा रहे थे। मुझ को यह सब कुछ अत्यंत ही अज़ीब सा प्रतीत ही रहा था। इसी अजीबो गरीब मनोस्थिति के साथ मैं उनसे कहता हूं कि मुझ को बाहर जाना है। तभी एक हटा कट्टा मुस्टंडा युवक उस कमरे का पर्दा हटा कर अंदर देखते हुए मुझ को घूरता है। तभी मुझ को वह दृश्य जो मैने उस बन्द दरवाज़े के भीतर प्रवेश करते हुए देखा था एक बार पुनः दिखाई देता है कि यहाँ ऐसे बहुत से मुस्टंडे मौजूद गए।

अकस्मात ही मुझ को एहसास होता है कि मैं बहुत ही बुरी तरह यहाँ फंस गया हूं। कुछ देर तक उस बाड़ी बिल्डर अंकल की उम्र के उस व्यक्ति को क्रोध से घूरने के उपरांत में उनके बाजू से उस कमरे के बाहर निलने का प्रयास करता हु। तब वह उसी प्रकार से मुस्कुराते हुए कहते है कि अब आप बाहर नही जा सकते हो। वह सब अब भी निरन्तर मुस्कुरा रहे थे जिससे मैं अब कुछ सहज महसूस कर रहा था। परन्तु अपनी उस सहजता को छुपाते हुए मैं उसी प्रकार से बाहर जाने के लिए कहता हूं। फिर वह बिना एक क्षण भी गवाए अपने समीप खड़े एक मुस्टंडे की तरह दिखाई देने वाले मेरे हम उम्र नवयुवक से वह कहते है कि सर्चिंग लो। उनके ऐसा कहते ही वह सर्चिंग के लिए आगे बढ़ता है परन्तु मैं उसको एक ओर को हटा कर कहता हूं कि मेरे पास कुछ भी नही है। तब वह बाड़ी बिल्डर की तरह दिखाई देने वाले महोदय स्वयँ सर्चिंग प्रारम्भ कर देते है। सर्वप्रथम वह कमीज की जेब तलाशते है परंतु उन्हें वहा कुछ भी प्राप्त नही होता। तब मैं उन्हें कहता हूं कि मैने कहा था ना कि मेरे पास कुछ नही है। तब वह मेरी पेंट की जेब तलाशी करते है अचानक ही उनके चेहरे पर एक मुस्कुराहट आ जाती है और उन्हें एक पुड़िया प्राप्त हो जाती है। तब मैं उनसे कहता हूं अब आपको पुड़िया मिल गई ना। अब मुझ को बाहर जाने दीजिए। परन्तु वह अपनी सर्चिंग जारी रखते हुए एक और पुड़िया की प्राप्ति करते हुए पुनः मुस्कुराते है। तब मैं उनसे कहता हूं कि बस यही पुड़िया थी अब और नही है। अब मुझ को बाहर जाने दीजिए। परन्तु वह उसी प्रकार से अपनी सर्चिंग जारी रखते हुए तीसरी और अंतिम पुड़िया भी प्राप्त कर लेते है। मैं एक बार और उनसे कहता हूं कि अब यह आखरी पुड़िया थी और यह सब मेरी पुड़िया नही है। किसी ने मुझ को रखने के लिए पकड़ाई थी। कुछ क्षण और सर्चिंग के उपरांत उन्हें अब यकीन हो जाता है कि मैं सत्य कह रहा था। तब वह मुझ से कहते है कि अब तुम्हें यहीं रहना है। यह सुनते ही मैं भी उनकी ओर मुस्कुराते हुए स्वयँ पर एक नियन्त्रण रखते हुए कहता हूं कि ऐसा कैसे हो सकता है! मुझ को तो अभी जाना है। तब वह महोदय अत्यंत ही सहज भाव से कहते है कि यह नशा मुक्ति केंद्र है। एवं अब आपको यही रहना होगा। उनके मुंह से यह सुनते ही मेरे रग रग में एक बार पुनः क्रोध की अग्नि ज्वलित हो उठती है। परंतु उस स्थिति की गम्भीरता को समझते हुए, मैं एक मौन धारण कर लेता हूं।

तब वह एक युवक शाक़िर (काल्पनिक नाम) को कहते है कि इनका फैमली के साथ इंट्रोडक्शन (पहचान) करवा आओ। उस समय मुझ को ऐसा लगा कि मेरे माता जी और पिता जी यहाँ मौजूद है एवं मुझ को यहाँ रखने से पूर्व एक बार उनसे मेरा वार्तालाव करवाने के लिए ले जा रहे है। यदि ऐसा हुआ तो मैं आज और अभी यहाँ से बाहर निकल जाऊंगा क्यों कि यह अभी मुझे जानते नही है कि मैं कितना खूंखार एवं मेनोप्लेटिड हो सकता हु। मैं अभी यह सब कुछ विचार कर ही रहा था कि तभी शाक़िर मेरे समीप आ कर मुझ से कहता है कि आओ फैमली से इंट्रोडक्शन कर लेते है। वहाँ पहुच कर आप क्या कहोंगें? कुछ क्षण की ख़ामोशी के उपरांत वह मुझ को पुनः समझाते हुए कहता है कि तुम्हारा क्या नाम है? मैं जी विक्की। तब वह कहता है कि ऐसे मत बोलना, कहना मेरा नाम है नशेबाज विक्की। उसके मुँह से यह सुनते ही मुझ को ऐसा लग की वह मेरा मजाक बनाने को कोशिश कर रहा है। फिर मैं उसके पीछे पीछे समीप के एक बन्द पर्दे के पीछे मौजूद हॉल में प्रवेश कर जाता हूं।

शेष अगले ब्लॉग से…

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

21 अक्टूबर 2019 समय दोपहर 2:42 बजे।

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