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🌹 दर्द दिल का उत्तर गया। (ग़ज़ल) विक्रांत राजलीवाल।

दर्द दिल का उत्तर गया, हर अल्फ़ाज़ में मोहब्ब्त कोई खामोशी सी साथ अपने लिए। हर जख्म भी आतुर है बिकने को, नाम ए मोहब्ब्त वो नाम महबूब का कर दिया बदनाम सरेराह, हर अश्क़ भी मेरे बन गए, खुद एक मोहब्ब्त की कोई दास्ताँ।। ये कलम धड़कती है मेरी, हर धड़कन से एक शोरContinue reading “🌹 दर्द दिल का उत्तर गया। (ग़ज़ल) विक्रांत राजलीवाल।”

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🌹 शायरी। (विक्रांत राजलीवाल की कलम से।)

💔 ना जिन्हें दिन को है सकूँ साँसों में; ना रातों को है आराम। हम है वो जो रहते है हर लम्हा लेकर धधकती धड़कनों में सुलगता एक  अंगार।। विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। 🌹 टूटा गुलाब, बिखुड़ी जो पंखुड़ियां; हर जख्म महोब्बत के नासूर हो गए।याद में एक सितमगर कि ए दोस्त; हम जीते जीContinue reading “🌹 शायरी। (विक्रांत राजलीवाल की कलम से।)”

दर्द ए जिंदगी। (पुनः प्रकाशित)

जब खाई शिखस्त हमनें, अपनो के हाथों ही खाई, नही पाए पहचान जो हाथ वो खंजर उतारा दिल मे बेदर्दी से जो गया। हो कर बेपरवाह ज़िन्दगी से, सलूख ज़िन्दगी के हम सीखते रहे, जान हर सलूख जिंदगी के, जान जिंदगी की निकलती रही।। दर्द हर हक़ीक़त का करते रहे जान कर भी नज़रंदाज़ हमContinue reading “दर्द ए जिंदगी। (पुनः प्रकाशित)”

शराबों। (पुनः प्रकाशित)

ना वो प्याला रहा सलामत, ना वो दौर ए दस्तूर ही रह पाया कायम, बदलते समय से बदल गए हर यार यहाँ। देखें इस दुनियां में यार बहुत, ढूंढे ना ढूंढ़ पाए फिर भी यार शराबों सा हम यार यहाँ।। हर घुट से उतरता ज़हर, घुट घुट से चढ़ता ज़हर, तासीर है तिलस्मी, जिसका हरContinue reading “शराबों। (पुनः प्रकाशित)”

🌹 मोहब्ब्त करना हर एक हसीन गुलाब से, काटो को चूम कर सीने से लगाना। प्रेम पुजारी की प्रेम प्रतिज्ञा, हर हसीना को दिल मे बसाना, नैन लड़ाना गाना गाना।। हर तीर मोहब्ब्त के दिल चिर ना दे, परीक्षा प्रेमी के प्रेम की, धड़कने तुम्हारी ना रोक दे। दर्द जिंदगी के देख कर तुम मुड़Continue reading

❤️ दिल से।

💔 दिल, धड़कन, एहसास और जुदाई, सब के सब हर लम्हा हम अपने साथ लिए फिरते है। हर सबक एक एहसास है जिंदगी, और हर एहसास में हम अपनी जिंदगी को अपने साथ लिए फिरते है। विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। ✍️27 जनवरी 4:47 बजे।

✍️ विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित शायरी…एक एहसास।

💌[ विषय एव 2 लाइन की शायरी।🌹3(कुछ का सेट) ] 🌹सुन कर धड़कने तेरी रुक गई सांसे, ठहर गई धड़कने मेरी हर एक। न दे आवाज ए साकी अब मुझ को तू मेरे नाम से, भूल गया हूं अपना नाम, घुला जहर सांसो में जो, मर गई आरज़ू मेरी अब हर एक।। विक्रांत राजलीवाल द्वाराContinue reading “✍️ विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित शायरी…एक एहसास।”

एहसास

💔 दर्द ए दिल की अपने कोई दवा अभी तक जो मुझे मिली नही। हर जख्म फट गए मेरे बेअसर हर मरहम को कर के खुद ही।। टूट कर मासूम एहसास हर लम्हा मेरे जो मरते गए; हर लम्हा ही हम टूटे एहसासों से जो टूटते गए। सितम ज़िंदगी के हंसते हुए हम सहते गए;Continue reading “एहसास”

🌹 टूटा गुलाब, बिखुड़ी जो पंखुड़ियां; हर जख्म महोब्बत के नासूर हो गए।याद में एक सितमगर कि ए दोस्त; हम जीते जी ही जो फ़ना हो गए। विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। 💗हम तुम्हें ना पा सकें और तुम हर बार हमारे मासूम एहसासों का कत्ल करते गए। नही एतबार अब हमें ख़ुद के एहसासों परContinue reading

🌹 सुलगते एहसास।

ना जिन्हें दिन को है सकूँ साँसों में; ना रातों को है आराम। हम है वो जो रहते है हर लम्हा लेकर धधकती धड़कनों में सुलगता एक अंगार।। विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।