शंकर मदारी। (ह्रदय को छूती हुई एक रोमांचक कहानी।)

                    आज आपके अपने विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित दूसरा ऑनलाइन उपन्यास शंकर मदारी। (ह्रदयको छूती हुई एक रोमांचक कहानी) का पहला भाग प्रकाशित किया जा रहा है। जल्द ही आपके पढ़ने के लिए दूसरा भाग भी प्रकाशित कर कर दिया जाएगा। इसीलिए अधिक से अधिक आप सभी आपके अपने “शंकर मदारी।” episode 1 को likeContinue reading “शंकर मदारी। (ह्रदय को छूती हुई एक रोमांचक कहानी।)”

मोहब्ब्त।/Love (Mohabbat)

यह मेरी यानी कि आपके अपने विक्रांत राजलीवाल की नई ग़ज़ल है।

एक एहसास-ज़िंदगी।

ज़िंदगी की कसौटियों से रूबरू होती हुई एक ग़ज़ल।

🌹 दर्द दिल का उत्तर गया। (ग़ज़ल) विक्रांत राजलीवाल।

दर्द दिल का उत्तर गया, हर अल्फ़ाज़ में मोहब्ब्त कोई खामोशी सी साथ अपने लिए। हर जख्म भी आतुर है बिकने को, नाम ए मोहब्ब्त वो नाम महबूब का कर दिया बदनाम सरेराह, हर अश्क़ भी मेरे बन गए, खुद एक मोहब्ब्त की कोई दास्ताँ।। ये कलम धड़कती है मेरी, हर धड़कन से एक शोरContinue reading “🌹 दर्द दिल का उत्तर गया। (ग़ज़ल) विक्रांत राजलीवाल।”

रहे आबाद ये दुनिया। (ग़ज़ल)

रहे महफूज़ ये दुनिया, घरों में रोक लो दुनिया, बचा लो खुद को क्रोना से, रहे आबाद ये दुनिया। घिर आई घटा है जो, जहरीली जहरीली, दम घोट देगी वो, धड़कने रोक देगी वो, हो कर दूर दुनिया से, बचा लो ये दुनिया।। वो खुली हवा, वो आज़ादी, जल्द ही लौट आएगी, देखना एक रोज़Continue reading “रहे आबाद ये दुनिया। (ग़ज़ल)”

🎻 एक दर्द। (दर्दभरी नज़म) *पुनः प्रकाशित*

नही आती है नींद दीवाने को क्यों आज-कल। भूल गया है रंगीन हर ख़्वाब वो क्यों आज-कल।। हो गया है खुद से ही बेगाना वो क्यों आज-कल। रह गया है तन्हा भरे संसार में वो क्यों आज-कल।। लेता है रुसवा बेदर्द रातो में नाम वो किसका आज-कल। तड़पता है देख हाल ए दीवाना सा वोContinue reading “🎻 एक दर्द। (दर्दभरी नज़म) *पुनः प्रकाशित*”

एहसास। (ग़ज़ल)

हम लिखते है, हम गाते है, हम गीत खुशियों के गुनगुनाते है। साथ पल दो पल का नही, ये एहसास ह्रदय से खनखनाते है।। मौसमो की बारिश नही, ये अश्क़, यादों की एक निशानी है। हर पल एहसासो को अपने संजोए, हर दर्द, हर दास्ताँ, मोहब्ब्त की एक कहानी है।। आज फिर से तेरी यादContinue reading “एहसास। (ग़ज़ल)”

दर्द ए जिंदगी। (पुनः प्रकाशित)

जब खाई शिखस्त हमनें, अपनो के हाथों ही खाई, नही पाए पहचान जो हाथ वो खंजर उतारा दिल मे बेदर्दी से जो गया। हो कर बेपरवाह ज़िन्दगी से, सलूख ज़िन्दगी के हम सीखते रहे, जान हर सलूख जिंदगी के, जान जिंदगी की निकलती रही।। दर्द हर हक़ीक़त का करते रहे जान कर भी नज़रंदाज़ हमContinue reading “दर्द ए जिंदगी। (पुनः प्रकाशित)”

काल चक्र।

चक्र काल से छूट ना कोई पाएगा, प्रत्येक कदम, प्रत्येक श्वास, गुजरता प्रत्येक क्षण, एहसास चक्र काल का करवाएगा। होनी-अनहोनी, साक्षी कर्म कांड, सहभागी सत्य कर्म साथ-साथ, मृत्यु-जीवन से साक्षात्कार, ध्वनि ह्रदय जो धड़काएगा।। भावना-प्रेम, अश्रु-क्रोध, चेतन एहसास, स्मृति-विस्मृति, जो साथ साथ, अंधकार में सूर्य नया, चेतना मृत जगाएगा। राह सत्य पर पथिक अनजान, मंजिलContinue reading “काल चक्र।”

दर्द ए मोहब्ब्त। With वाच “दर्द ए मोहब्ब्त। ( विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित एवं ओरसरित। )” on YouTube

हो गया हैं फ़ना, एक दीवाना जो कहि,सनम से अपने, बिछुड़ जाने के बाद। बिखर गयी हैं चाहते, अश्क़ जख्मो पर जो कहि,टूट गयी सांसे, दिल उसका टूट जाने के बाद।। हो गया है दफ़न, परत समय कि में जो कही,रह गए निसान ए इश्क़ बाकी, उसके चले जाने के बाद। जल गयी है चिता,Continue reading “दर्द ए मोहब्ब्त। With वाच “दर्द ए मोहब्ब्त। ( विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित एवं ओरसरित। )” on YouTube”