एहसास ए ज़िन्दगी। With YouTube Video Link.

रुक गए है जो लम्हे, ठहर गयी ये जिंदगी, 
टूट गया जो राही, जुड़ती अब किसी उम्मीद के साथ।

छूट गए है जो साथ, धुंधला गए जो अक्स, 
नजरो से छलकते, हर पैमानों के साथ।।

उड़ते हौसलो से एक उम्मीद, रुकी सांसो से, छीलते जख़्म, 
हर ज़ख्म नासूर है मेरे, घुटती हर उम्मीद के साथ।

एक निसान, दर्द ए ज़िन्दगी, दब गई जो चाहते, 
दम तोड़ते  अक्षर, जलती किताब, टूटती अपनी कलम के साथ।।

एक पथ है अंधेरे से कायम, टूटे कदम, चल रहा एक राही,
हर कदम से दबाए है साए कई, उठे जो ज़हरीले काटो के साथ।

हर आह से मिला है जख़्म ए दिल, आईना ए हकीकत, लगा जो ख़ंजर जख्मों पर मेरे, मासूम अहसासों के साथ।।

क़लम तड़पती है मेरी, अश्क ए श्याही, हाल ए दिल करते है बयां, 
साए जिंदगी के, बैठे जो राही मेरी कब्र के साथ।

चल रही है सांसे, बेरुखिया जो खुद से, चटका जो आईना ए दिल,
जख़्म रूह पर मेरे, टूटी अपनी कलम के साथ।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
(Republish at vikrantrajliwal.com)

YouTube Video Link is https://youtu.be/RX9_9T9X_Ec

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दर्द ए मोहब्ब्त। With वाच "दर्द ए मोहब्ब्त। ( विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित एवं ओरसरित। )" on YouTube

हो गया हैं फ़ना, एक दीवाना जो कहि,
सनम से अपने, बिछुड़ जाने के बाद।

बिखर गयी हैं चाहते, अश्क़ जख्मो पर जो कहि,
टूट गयी सांसे, दिल उसका टूट जाने के बाद।।

हो गया है दफ़न, परत समय कि में जो कही,
रह गए निसान ए इश्क़ बाकी, उसके चले जाने के बाद।

जल गयी है चिता, मासूम-अरमानो की उस के जो कहि,
एक अहसास ये जुदाई, बाकी ये चीखती तन्हाई, उसके खो जाने के बाद।।

एहसास है धड़कनो को, खामोश धड़कनो का, ज़ुल्म धड़कनो पर उस के जो कहि,
सो गया जो मुसाफ़िर, राह ए महोबत, अपनी लूट जाने के बाद।

चाहत हैं ज़िन्दगी, मजबूरी अब भी ये महोबत, चल रही  जो जिंदगी जो कहि,
उखड़ रही जो सांसे, एक दर्द बन्द सीने में कहि, धड़कने 
उस की रुक जाने के बाद।।

विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।
(Publish at vikrantrajliwal.com)

क़त्ल ए एहसास। With YouTube video link.

नशा है फ़िज़ाओं में आज, बहकी-बहकी सी सांसे, कुछ-कुछ मदहोश सी है।

साथी है साथ में आज, उफ़ान ए धड़कन, अंजाम ए हक़ीक़त, हैरानी सी है।।

रास्ते है साथ में आज, तलाश ए हौसले, मंजिले कुछ-कुछ अंजान सी है।

जशन है साथ माहौल में आज, निसान ए उदासी, अब भी मेरे साथ सी है।।

आरज़ू है साथ मे आज, अक्स ए जुदाई, पहेलु में खुशियां, धड़कने फिर भी हैरान सी है।

अल्फ़ाज़ है साथ रूह में आज, ख़ामोश ये जुबां, कत्ल ए एहसास, कलम मेरी दम तोड़ने को है।।

कलम है हाथ मे आज, नासूर ए जख़्म, खून ए श्याही, फड़कती हर एक नब्ज़, गुम सी है।

यक़ीन है साथ साए में आज, उदास ये लम्हे, इंतज़ार अब भी सांसो में, हर साया साथ छोड़ने को हैं।।

विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।

💥 एक संकल्प एक योगदान।

मित्रों मेरे जीवन का केवल एकलौता मकसद यही है कि मैं अपने जीवन अनुभवो से उन मासूम बालको को एक उचित दिशा का ज्ञान करवा सकूँ जो आज भी किसी ना किसी नशे की गिरफ्त में फंस कर अपना उज्वल भविष्य अनजाने ही बर्बाद कर रहे है।

काव्य शायरी नज़म ग़ज़ल दास्ताने लिखना एवं गाना केवल मेरा निजी शोक है एवं मैं जो पोस्ट करता हु की आप मेरा काव्य नज़म ग़ज़ल दस्तानों का कार्यक्रम बुक कर सकते है तो इसके पीछे केवल और केवल एकलौता कारण यही है कि मुझ को उन मासूम नशे से पीड़ित उन अबोध बालको की मदद करने हेतु बहुत सा रुपया चाहिए। जिससे मैं उन्हें कुछ मूलभूत सुविधाए प्रदान कर सकूँ। जिससे उनका उनके परिवार में पुनर्वास हो कर उनका जीवन  स्तर कुछ सुधर सके।

इसीलिए आप मेरा साहित्यिक काव्य शायरी का कार्यक्रम बुक कर के सीधे उन मासूम बच्चों को एक नया जीवन सहज ही प्रदान कर सकते है। इसके साथ ही यदि आप स्वयं किसी नशा मुक्ति या बाल सुधार कार्यक्रम के संचालक है तो आप आप ही मेरा साहित्यिक काव्य शायरी का कार्यक्रम निःशुल्क बुक कर अपना स्थान सुनिचित कर सकते है। मुझ को पूरी उम्मीद है कि जब आपके पेशेंट अपने बीच मे से ही निकले हुए किसी साहित्यकार की रचनाओँ को सुनेंगे तो उन्हें अवश्य ही आत्मशांति प्राप्त होएगी।
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अंतः एक बार पुनः आप सभी को सूचित करता हु की यदि आप उपरोक्त विषय नशा मुक्ति एवं पारिवारिक कलेश मुक्ति की समस्या का एक स्थाई समाधान प्राप्त करना चाहते है तो आज ही विक्रांत राजलीवाल जी से यानी कि मुझ से सीधा सम्पर्क कीजिए।

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धन्यवाद।
विक्रांत राजलीवाल।

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🌹 Book A Nazam Dastan’s And Poetry program By Vikrant Rajliwal.

कवि, शायर एवं उपन्यासकार श्री विक्रांत राजलीवाल।

Book A Nazam Dastans And Poetry program By Vikrant Rajliwal

श्री विक्रांत राजलीवाल के रोमानी स्वरों के साथ उनके द्वारा लिखित उनकी सैकड़ो नज़म, ग़ज़ल, काव्य, कविताएं एवं बहुत सी सदाबहार विस्तृत अत्यधिक दर्दभरी मोहब्ब्त की नज़म दास्तानो के साथ एक कामयाब कार्यक्रम करवाने के लिए, आप आज ही निम्लिखित मोबाईल नंबर पर सम्पर्क करें। व्हाट्सएप नंबर है 91+9354948135.

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विक्रांत राजलीवाल एक लघु परिचय।

अ) काव्य पुस्तक एहसास : अत्यधिक संवेदनशील काव्य पुस्तक एहसास, जिसका केंद्र बिंदु हम सब के असंवेदनशील होते जा रहे सभ्य समाज पर अपनी काव्य और कविताओं के द्वारा एक प्रहार की कोशिश मात्र है।

Sanyog (संयोग) प्रकाशन घर शहादरा द्वारा प्रकाशित एव ए वन मुद्रक द्वरा प्रिंटिड। प्रकाशन वर्ष जनवरी 2016. प्रकाशित मूल्य 250:00₹ मात्र।

आ) नज़म दास्ताने:: विक्रांत राजलीवाल जी के द्वारा लिखी एवं उनकी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित करि गई, अत्यधिक दर्दभरी विस्तृत नज़म दास्तानो का जल्द ही एक संग्रह पुस्तक के रूप में आप सभी प्रियजनों को एक भरी भेंट स्वरूप प्रदान कर दी जाएगी। उनकी दर्दभरी नज़म दस्तानों के नाम इस प्रकार से है। कि जैसे अ) एक इंतज़ार… मोहब्ब्त। आ) पहली नज़र। इ) बेगुनाह मोहब्ब्त। ई) एक दीवाना। उ) मासूम मोहब्ब्त। ऊ) सितमगर हसीना। ए) अक्सर सोचता हूं तन्हा अंधेरी रातो में। ऐ) एक खेल जिंदगी। ओ) धुंधलाता अक्स। इत्यादि। इनमें से कुछ की रिकॉर्डिड वीडियो लिंक इस प्रकार है। 1) एक इंतज़ार…मोहब्ब्त। https://youtu.be/aOBlMrmejqk 2) पहली नज़र। https://youtu.be/A_5bLVHS9yo 3) सितमगर हसीना। https://youtu.be/F8TKFt7G4Us 4) अक्सर सोचता हूं तन्हा अंधेरी रातो में कि… https://youtu.be/ElipaWVQOrw 5) धुंधलाता अक्स। https://youtu.be/_tKFIu1onQw 6) एक खेल जिंदगी। https://youtu.be/02TpemeSFsA इत्यादि।

आशा करता हु आपको पसन्द आए।

इ) नज़म, ग़ज़ल और शायरी:: वर्ष 2016-17 से अब तक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित कई सैकड़ो दर्दभरी नज़म, ग़ज़ल एवं सैकड़ो शायरी। को उन्होंने अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर एवं कुछ को अन्य सोशल मीडिया के समूह में प्रकाशित किया है। जिनका एक संग्रह पुस्तक के रूप में आप सभी प्रियजनो को एक प्रेमभरी भेंट स्वररूप प्रदान कर दिया जाएगा। आशा करता हु आपको पसंद आए। विक्रांत राजलीवाल। उनकी बहुत से रिकॉर्डिड नज़म, ग़ज़ल एव गीतों को आप उनके YouToube चैनल Voice Of Vikrant Rajliwal पर कर उनकी रचनाओं को स्वयं उनकी आवाज़ के साथ देख और सुन कर लुफ्त प्राप्त कर सकते है। उनके चैनल का यूआरएल पता है। https://www.youtube.com/channel/UCs02SBNIYobdmY6Jeq0n73A आशा करता हु आपको पसंद आए।

ई) ह्रदय स्पर्शी काव्य कविताए:: जनवरी 2016 में अपनी प्रथम काव्य कविताओं की पुस्तक “एहसास” के संयोग प्रकाशन(sanyog publication) के द्वारा प्रकाशन के उपरांत। अक्टूबर 2016 से अब तक बहुत सी ह्रदय स्पर्शी काव्य एवं कविताओं की रचना करि तदोपरांत उन्हें अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित किया। उनमे से कुछ काव्य कविताओं की रिकॉर्डिड वीडियो आप उनके YouTube चैनल Voice Of Vikrant Rajliwal पर देख एवं सुन कर उनके काव्य-कविताओं का आनन्द प्राप्त कर सकते है। उनके चैनल का लिंक है। https://www.youtube.com/channel/UCs02SBNIYobdmY6Jeq0n73A आशा करता हु आपको पसंद आए।

उ)”मसखरे”:: “मसखरे” विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित एक अत्यधिकमनोरंजक व्यंग्यात्मक किस्सा है। जिसको उन्होंने कुछ समय पूर्व ही अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित किया है। व्यंग्यात्मक किस्से “मसखरे” की रिकॉर्डिड वीडियो लिंक इस प्रकार से है। https://youtu.be/LSGHIitR1Bg आशा करता हु आपको पसंद आए।

ऊ) भोंडा।:: वर्ष 2019 में 2 अक्टूबर की रात्रि 10:20 बजे, विक्रांत राजलीवाल जी ने अपनी एक विस्तृत अत्यधिक दिलचस्प एवं मनोरंजक कहानी ‘भोंडा।” (लघु उपन्यास) का अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशन किया है। जिसके शरुआती भूमिया के कुछ अंश इस प्रकार से है कि… नमस्कार प्रिय पाठकों, आज अपनी एक अत्यंत ही दिलचस्प और भावनात्मक प्रेम कहानी “भोंडा।” का आपकी अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रथम प्रकाशन करते हुए, मुझ को अत्यधिक हर्ष एवं रोमांच की अनुभूति प्राप्त हो रही है। भोंडा केवल एक कहानी ही भी है बल्कि यह स्वयं के भीतर एक ऐसे भावनात्मक एहसासों को, संजोए हुए है जिसको लिखते समय मैं स्वयं अत्यधिक भावुक हो गया था। … [ 16,335 more words ]
https://vikrantrajliwal.com/2019/10/02/ आशा करता हु आपको पसंद आए।

ए) भोंडा। 2 Upcoming Soon:: विक्रांत राजलीवाल जी द्वारा लिखित उनका प्रथम लघु उपन्यास “भोंडा।” का 2 अक्टूबर 2019 रात्रि 10:20 बजे उनकी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशन के उपरांत, अब भोंडा। 2 का लेखन कार्य प्रारम्भ किया है। जब भी भोंडा। 2 का लेखन कार्य अपने अंजाम तक पहुच जाएगा, उसी क्षण भोंडा। 2 को आपकी अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित कर दिया जाएगा। धन्यवाद।

क) आज वर्ष 2016-17 से वर्तमान वर्ष तक, अपनी कई सैकड़ो नज़म, ग़ज़ल, बहुत सी काव्य, कविताओं, गीत, कुछ व्यंग्य किस्से, सैकड़ो शेर, बहुत से सामाजिक, आध्यात्मिक एवं मनोवैज्ञानिक विस्तृत एवं लघु लेखों को आपकी अपनी इस साइट पर लिखने एवं प्रकाशित करने के उपरांत!

ख) एवं सबसे महत्वपूर्ण अपनी बहुत सी विस्तृत एवं लघु नज़म दास्ताँ को लिखने के उपरांत!

ग) एवं 2/10/2019 की रात्रि अपनी विस्तृत (long term), अत्यधिक दिलचस्प एवं रोमांचक प्रेम कहानी “भोंडा।” को आपकी अपनी ब्लॉग साइट https://vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित करने के उपरांत!

घ) आज पुनः मेरे हाथों में मेरी वह अधूरी कहानी आ गई है जिसके 300+ A4 साइज के पृष्ठ (75% कहानी) वर्ष 2016 में लिखने के उपरांत मुझ को कुछ निजी कारणों से उसको रोक कर अपने लॉकर में रखना पड़ा था।

अब मेरा पुरजोर प्रयास रहेगा कि अब मैं अपनी उस अधूरी कहानी जो कि पूर्णतः अति संवेदनशील एवं रोमाचक संवादों सहित है को पूर्ण कर आपको एक ऐसी भेंट उपलब्ध करवा सकूँ। जिसको आप हमेशा अपने एहसासो में महसूस कर सके।

इसके लिए मुझ को आप सभी के आशीर्वाद की अति आवश्यकता रहेगी।

आशा करता हु आप मेरी भावनाओं को समझ सकें।

विक्रांत राजलीवाल।

अपना प्रेम एवं आशीर्वाद आपके अपने मित्र विक्रांत राजलीवाल की ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर यू ही बनाए रखें।

एहसास

हम लिखते है, हम गाते है, हम गीत खुशियों के गुनगुनाते है।

साथ पल दो पल का नही, ये एहसास ह्रदय से खनखनाते है।।

मौसमो की बारिश नही, ये अश्क़, यादों की एक निशानी है।

हर पल एहसासो को अपने संजोए, हर दर्द, हर दास्ताँ, मोहब्ब्त की एक कहानी है।।

आज फिर से तेरी याद आ गई सितमगर, गुजरे महखाने की गली से होकर जब हम।

गर गुनाह है तेरी याद में मह को पीना, तो ये गुनाह करते हुए मह को पीते जाएंगे अब हम।।

बोतल शराब की एक साथी रह गई बाकी, जो साथी थे हमारे वो साथ छोड़ गए सब के सब।

हर घुट से शराब की जिंदा होते गए हम, जिंदा थी जो सांसे हर घुट से शराब की उन्हें मारते गए हम।।

दर्द और दवा का असर, हमे मालूम नही, हर दवा को ज़हर और हर ज़हर को जिंदगी में शराब से घोलते गए हम।

आज वक़्त पूछता है पता, खुद हमसे हमारा, हम उसको बतलाए तो बतलाए क्या, दो घुट भी शराब की जो पीए नही अभी हम।।

ज़ख्म जिंदगी के हज़ार मिले, हर ज़ख्म एक निशान हक़ीक़त का लगा, हर निशान पर देकर एक निशान नया, हर ज़ख्म को ज़ख्म से अपने मिटाते गए हम।।।

फ़क़त हर ज़ख्म एहसासों का, आज भी ताज़ा है हमारा, हर एहसास करता है बयां, दर्द एहसासो का हमारा, हर दर्द से झलकता है एक एहसास अधूरा हमारा।

एहसास जो अधूरे रह गए, वक़्त की बिसात पर कहि जो खो गए, ढूंढता है आज भी उन एहसासों को, एहसासों में अपने कहि, एहसास अधूरा हमारा।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
13/10/2019 at 3:31 pm

ख़ामोशीया।

ज़िद है उन्हें क़त्ल करने की हमारे और हम एक नज़र मोहब्ब्त, नज़रो में उनकी देखने को तरसते है आज भी।

वो कहते है हमें की भूल जाए हम उनको और हम यक़ीन मोहब्ब्त का अपनी उन्हें दिलाते है आज भी।।

हर हादसा एक सबक जिंदगी का और हर सबक एक ज़ख्म है नासूर हमारा, नासूर हर ज़ख्म एक सौगात जिंदगी की समझते है हम आज भी।

लम्हा लम्हा हर लम्हा साए में मौत के साया जिंदगी का ढूंढते हुए, हर लम्हा जिंदगी को बेहद नज़दीक से देखते जा रहें है हम आज भी।।

हर ख़्वाब जिंदगी का हमारा टूटा हुआ, देखता है ख़्वाब एक हक़ीक़त का एहसास वो ख़्वाब हमारा टूटा हुआ जो आज भी।

तड़प साँसों की तड़पती है बेताब धड़कती धड़कने, हर धड़कती धड़कन एक आह है जिंदगी की हमारे जो आज भी।।

एक राह अंजानी मैं उसका हु मुसाफ़िर, ना साथ है कोई, ना आस पास है कोई, चलता चला जा रहा हु बेहिंतिया मैं आज भी।

तन्हा समा ये बंजर माहौल, दिखाता है अक्स हक़ीक़त का नज़दीक से टूटा एक आईना, दूर तलक है ख़ामोशी आज भी।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

21/09/2019 at 11:17 pm

💏 मासूम मोहब्ब्त। (चौथी दर्दभरी दास्ताँ)

नमस्कार प्रिय पाठकों एवं मित्रों, आपके अपने मित्र विक्रांत राजलीवाल (स्वयं) जी के द्वारा लिखित उनकी दर्दभरी नज़म दास्ताँ “मासूम मोहब्ब्त।” का रचना कार्य उन्होंने वर्ष 2015-16 में अपनी प्रकाशित अत्यधिक संवेदनशील काव्य पुस्तक “एहसास” एवं अपनी पूर्व प्रकाशित दास्तानों के साथ ही किया था।

“मासूम मोहब्ब्त।” मेरे (विक्रांत राजलीवाल) द्वारा लिखित अब तक कि मेरी समस्त नज़म दस्तानों में से अंतिम दर्दभरी नज़म दास्ताँ है एवं “मासूम मोहब्ब्त।” मेरे ह्रदय में अपना एक ख़ास स्थान रखती है। उम्मीद है आपको मेरी यह दर्दभरी दास्ताँ पसन्द आ आए।

आपका मित्र विक्रांत राजलीवाल।

💏 मासूम मोहब्ब्त। (चौथी दास्ताँ।)

दर्द ए दिल को दे कोई जमीं फिर अपने दिवाने।

ये महकता गुलिस्तां, ये खुला आसमां, ये सारा जहां है तेरा दीवाने।।

दीदार ए सनम जो अधूरी हर मुलाक़ात है उनसे दीवाने।

ये ख़्वाब ए मोहब्ब्त, ये प्यासी सांसे, ये धड़कता दिल है तेरा दीवाने।।

दर्द ए दिल ये दर्द ए मोहब्ब्त अब कम ना हो पाएगी।

हर मोड़ जिंदगी मोहब्ब्त की एक नई दास्ताँ अब दोहराएगी।।

दौड़ रही है श्याही जो बन के लहू बदन में रग-रग के जो तेरे।

हर दर्द ए दिल बन कर मोहब्ब्त जल्द ही जो बरस जाएगा, तन्हा पन्नों पर जिंदगी के जो तेरे।।

रह गई मोहब्ब्त की जो अधूरी तेरी दास्ताँ, दीवाना कोई फिर से उसे जरूर दोहराएगा।

दे देगा शायद अंजाम उसे वो आखरी, दर्द ए दिल दिवाने का शायद फिर फ़ना हो जाएगा।।

तन्हा काली रातों में इत्तफाक से जो आ जाए कभी हसीन ख़्वाब।

आ जाती है तड़पाने दिल वो मेरा, बन कर सुर्ख ग़ुलाबी महकता कोई ख़्वाब।।

एक नही ऐसा कई बार हुआ है।

धड़कते दिल पर जब वार हुस्न का हुआ है।।

बंजर जमीं पर अरमानों की खिलता है जब भी कोई ग़ुलाब।

बन कर सितमगर अपना ही फेक देता है तब वहाँ कोई तेज़ाब।।

बन कर वहाँ कोई साया काला, खिलती मोहब्ब्त का दम घोट देता है।

मार कर ख़ूनी ख़ंजर हर चाल मोहब्ब्त पर वो, बगिया मोहब्ब्त की महकने से पहले ही उजाड़ देता है।।

कभी कभी कुछ अपने भी सितमगर का काम करते है।

जिंदा मौत मोहब्ब्त को दे देने की एक जिंदा मिसाल बनते है।।

हैरान है अब भी दीवाना बेहिंतिया, सब कुछ कैसे वो भांप लेते है।

वो वक़्त, वो हसीन समा, वो मिजाज़ ए मौसम क्या वो नाप लेते है।।

आकर के बीच मे दीवानों के क्यों दीवानों को मार देते है।

मोहब्ब्त की पहली मुलाक़ात को कैसे एक आख़री अंजाम देते है।।

पहली मुलाक़ात को क्यों आख़री बना जाते है।

हसीन उन पलों में कोई हड्डी हलक में अटका जाते है।।

सही करते है या ग़लत वो लोग ये वो ही जानते है।

दम तोड़ती मोहब्ब्त की उस पल मिसाल जहनुम की बनते है।।

जानता नही ये कोई, तड़पा है मोहब्ब्त में दीवाना जो उनकी पल पल।

मिलता है दीदार उनका नसीब से, जला है दीवाना उनके लिए हर पल।।

“एक पल वो हर पल याद आता है।
वो मासूम एहसास, वो मासूम ख्याल,
आज भी बहुत सताता है।”

हम दोनों के उस हालात पर खुद मोहब्ब्त भी रोई थी।

फट गया था कलेजा आसमां का भी, धड़कती धड़कने हमारी जब खोई थी।।

बेदर्द ज़माने को आता नही रहम मोहब्ब्त के दीवानों पर।

हर चाल जो क़ामयाब बेदर्द सी उनकी, नाज है बहुत उन्हें इस बात पर।।

बेदर्द जिंदगी में दिवाने की नसीब से मुलाकाते कुछ हूरों से आई थी।

ऐसा लगा उस लम्हा दीवानों को जैसे बंजर रेगिस्तान में कोई हसीन बाहार आई थी।।

यक़ीन अब भी नही की कैसे मोहब्ब्त अंजाने ही महरबान हो सकती है।

हुस्न ए शबाब वो नादानियां उनकी, कैसे अंजाने ही हसीन कोई सौगात मिल सकती है।।

याद है तक़दीर का आज भी अपनी हर एक वो वाक्या।

हर जीत को हार में बदलते देखने का बेदर्द हर एक वो वाक्या।।

एक नही ऐसा हुआ है कई बार, जीते जी जब मार गया हमे हर एक वो वाक्या।

दिखा कर चाँद हथेली पर कर दिया मज़बूर इस क़दर से की लूट कर ले गया मुझे हर एक वो वाक्या।।

आते है हालात जिंदगी में ऐसे कभी कभी, हो जाता है फ़ना ख़ुद ही जब मोहब्ब्त का वाक्या।

दे कर दर्द ए मोहब्ब्त अधूरा सा कोई, छोड़ जाता है तड़पता जब मोहब्ब्त का वाक्या।।

जख़्मी है दिल मेरा उन अधूरी मुलाकातों से आज तलक।

तन्हा है जिंदगी मेरी उन अधूरे एहसासों से आज तलक।।

मोहब्ब्त जब खुद मोहब्ब्त का इज़हार करने वाली थी।

मोहब्ब्त जब ख़ुद इश्क से मिलने वाली थी।।

फिर क्यों दे कर प्याला जहर का कोई अपना ही हमे, जुदा कर जाता है।

कर के क़त्ल उस मोहब्ब्त की पहली मुलाक़ात का, किसी पँछी की तरह वही पर मंडराता है।।

देख कर साया सितमगर का, वो हुस्न भी घबराता है।

दिल की बात दिल मे दबाए, क़त्ल हर अरमानो का कर वो कहि खो जाता है।।

वो दिलकश खुशनुमा मौसम वो हसीन पल फिर लौट कर ना आए।

खड़ा है दीवाना अब भी वही राह पर, वो हुस्न वाले फिर लौट कर ना आए।।

हक़ीक़त है ज़माने में मिलता है नसीब से किसी हूर का प्यार।

रहता है ज़माने में हर किसी को उनका हमेशा से हमेशा ही इंतज़ार।।

वो चाह, वो जनून दिवाने में भी जाग जाता है।

होता है दीदार जब किसी हूर का तो दिल धड़क जाता है।।

दिल ये पाक-साफ है दिवाने का, शायद कुछ परेशान है।

हर बार की अधूरी उन मुलाकातों से शायद कुछ हैरान है।।

हुआ है एहसास कई बार की दोनों जहां अब पा जाएंगे।

लो वह वक़्त भी आ गया, दीवाना जब मोहब्ब्त को जान जाएंगे।।

हैरान है दीवाना क्यों अंजाम तक नही वो पहुच पाता।

हर बार भरी महफ़िल में कैसे खुद को तन्हा ही है वो पाता।।

वो ज़ालिम सितमगर मोहब्ब्त के क्यों एहसास ए मोहब्ब्त को समझ नही पाते।

ये हसीन लम्हे, ये धड़कते एहसास, जिंदगी में मोहब्ब्त के फुर्सत से ही नसीब होते।।

एक नही ऐसा हुआ है दिवाने कई बार।

कई हूरो को जब एकदम से हुआ है दिवाने से जब प्यार।।

नसीब से होती है मोहब्ब्त ख़ुद मोहब्ब्त पर ए दिवाने महरबान।

हार जाती है दिल दिवाने पर अपना, हूर जब सरेराह कोई,

लुटाती है कदमो पर दिवाने के अपने फिर वो अपनी जान।।

कोई हसीना जब अचानक ही महरबान हो जाती है।

दिखा कर आईना ए मोहब्ब्त निग़ाहों से मदहोश, दिल को थाम लेती है।।

बुला लेती है खुद ही दिवाने को वो अपने करीब।

चाहती है देना मोहब्ब्त की सौगात, बैठा कर वो अपने करीब।।

देखा जो नशीली निग़ाहों में उनकी अजीब सा उनमे एक नशा था।

देख तो रही थी वो नज़रो से दर्द मग़र दिल मे दिवाने के हो रहा था।

एक दम से अज़ीब से जो हालात हो गए।

देख साया एक अजनबी नज़दीक हमारे, वो ख़ामोश हो गए।।

एहसास ए दीवाना खामोशी से अपनी उन्हें कोई इक़रार हो गया।

ऐसा क्यों लगा कि उनको दिवाने से प्यार हो गया।।

कोई कांटा आकर के सीधा धड़कते दिल पर हमेशा पहली मुलाक़ात में क्यों चुभ जाता है।

होना था इक़रार ए मोहब्ब्त उनसे और दीवाना उनका जुदा उनसे हो जाता है।।

जाना है दर्द ए जुदाई को दिवाने ने दिल के करीब से जो बेहिंतिया।

मिलती है वीरान जिंदगी को जीवन कोई ओस बून्द नसीब से जो बेहिंतिया।।

झलक अधूरे अपने प्यार की ना जाने क्यों दे कर एक, हर बार किसी मोड़ पर हुस्न कहि खो जाता है।

क्या ऐसा तो नही ख़ौफ़ किसी साए का उन्हें लेकर दूर हमसे जुदा कर जाता है।।

तड़पता है दीवाना हालात उन पहली हसीन मुलाकातों से, मोहब्ब्त हुई थी हर बार महरबान, फिर क्यों है तन्हा आज भी दीवाना।

नादां है दीवाना आज भी क्यों हो जाता है परेशान, मोहब्ब्त की उन पहली अधूरी मुलाकातों का जान अंजाम ए दिवाने जो ये दीवाना।।

याद है हर एक मुलाकात दिवाने को आज भी…

हा याद है दिवाने को मुलाक़ात एक हुस्न से अपने शबाब पर थी जो उनसे पहली।

हा याद है दिवाने को मोहब्ब्त ख़ुद ही जब अपने अंजाम पर थी जो उनसे पहली।।

बदनसीबी छा जाते है वो बादल काले।

कर के जुदा उनसे एक पल में दूर कहि,

छोड़ आते है हमे वो बादल काले।।

कैसे क़ातिल हसीं उन हूरों से दिवाने की यू ही मुलाक़ात हुई।

पहली ही मुलाक़ात में उनसे मोहब्ब्त की कुछ तो बात हुई।।

जान कर हर बार उन हसीनाओं से दिवाने की जो नज़रे चार हुई।

चाल क़ातिलाना जो दिल के हाथों दिवाने से अपने वो लाचार हुई।।

ये मसला है हुस्न से हूर के उन हसीं मुलाकातों का जो पहली।

ये मसला है हुस्न और इश्क के उस इम्तेहां का जो एक पहेली।।

मसला ये हुस्न और इश्क का जो अभी शुरू ही हुआ था।

सितम ये धडकती धड़कनो पर कहर जो अभी शुरू ही हुआ था।।

हुस्न और इश्क की पहली है वो मुलाक़ात।

चल रहे है तीर ए मोहब्ब्त नज़रो से उनकी मदहोश,

दिल के जो आर पार।।

यक़ीन ए दीवाना, अंजाम ए मोहब्ब्त वो अंजाम अपना आज पा जाएगा।

महरबान है खुद जो मोहब्ब्त, दरिया ए मोहब्ब्त के पार दीवाना, किश्ती मोहब्ब्त की अपनी आज ले जाएगा।।

सितम ए मोहब्ब्त हर बार दिल पर फ़ांस सी कोई चुभ जाती है।

हो जाते है जुदा हर बार दिवाने, कोई अटकान सी बीच मे आ जाती है।।

करते हुए याद दीवाना नाम ए मोहब्ब्त नाम से उनके फिर उन्हें पुकारता है वो।

पर्दा है महीन सा शराफ़त जो एक उनकी, पार उसके आती नही फिर से जो वो।।

गुजर जाए जो घटा मोहब्ब्त से भरी जो, नही लौटती जिंदगी में दोबारा फिर से वो।

चिर दे चाहे दिल या बहादे आँसू फिर दीवाना, मिलती नही मुलाक़ात पहली उनसे फिर वो।।

चाहें कोई प्यार से दिवाने को फिर कभी ना देख पाया हो।

समझता उसे कोई फिर चाहें मोहब्ब्त का साया काला हो।।

हक़ीक़त ये जिंदगी रुक नही सकती किसी हसीना की अधूरी मुलाक़ात में उस अधूरे से प्यार में उसके एक इंतज़ार में।

सितम ये जिंदगी कट नही सकती बेमतलब किसी के इंतज़ार में जो उसकी मोहब्ब्त के उस अधूरे से एक इक़रार में।।

दर्द ए दिल जो दफ़न है धड़कते सीने में, ढूंढता है दीवाना नया फिर कोई मोहब्ब्त का अपने वो एक आसमां।

वीरान ये जिंदगी, तन्हा है एक दीवाने की जो, ढूंढ़ लेगी जल्द ही नया फिर कोई मोहब्ब्त का वो एक गुलिस्तां।।

रखना महफूज़ ख़ुशबू हर अधूरी मुलाकातों के अधूरे अरमानो की अब भी जो महकती।

यक़ीन रख दिखेगा जल्द ही कोई हसीन चाँद, लुटाएगा तुझ पर चाँदनी जो अपनी जान।।

ना हो मायूस ए दिल ए दिवाने, धड़कते दिल मे धड़कने है बहुत जिंदगी में धडकती जो बाकी।

ज़रा देख उठा कर नज़रे अपनी, बगिया मोहब्ब्त में है बहुत महकते गुलाब अब भी जो बाकी।।

ना हो हताश और उदास ए यार दिवाने, ज़माने में है अभी कई और मुकाम तेरे अब भी जो बाकी।

हक़ीक़त है अधूरा हर मुक़ाम बिन मोहब्ब्त के, हर मुकाम है बेमाना सा ए दिवाने, बिन मोहब्ब्त के ज़माने में है जितने अब भी जो बाकी।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
19/09/2019 at 9:50 pm

💗 पल पल हर पल। // 💗 Remember Every Moment.

उन्हें गरूर है हुस्न पर अपने आज भी बेहिंतिया,

और हम आज भी उनकी राह देखते है बेहिंतिया।

उन्हें नाज है खुद के पर्दानशीं होने का आज भी बेहिंतिया,

और हम आज भी मदहोश निग़ाहों से उनके घायल है बेहिंतिया।।

वो कहते है कि ए दिवाने तू अपनी औकात में रहो,

और हम आज भी उनके कदमो के निशान चूमते है बेहिंतिया।

वो कहते है कि कौन हो तुम, हट जाऊ नही तो मारे जाओंगे राह ए मोहब्ब्त पर दिवाने,

और हम आज भी उनके नाम पर मर जाते है बेहिंतिया।।

वो मासूम मोहब्ब्त, मासूमियत उनकी, रुला देती है हमें आज भी,

और वो मासूम मोहब्ब्त को हमारी एक खिलवाड़ समझते है आज भी बेहिंतिया।

वो हुस्न, वो शबाब उनका, ये दीवाना है ग़ुलाम उनका, और वो मासूम मोहब्ब्त, वो मासूम ख़्याल आज भी हर पल, पल पल है तो बस…मासूम मोहब्ब्त।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

19/09/2019 at 9:27 am

💗 Remember every moment.

He is proud of his beauty even today, and we still see his path today.

They are proud to be self-effacing even today, and we are still injured by their drunken bodies.

They say that you stay in your line, and even today, we kiss their footsteps.

They say who you are, if you don’t move away, you will be killed on Rah e mohabbat (Pathof love) e deewane (lover), and we still die in his name today.

That innocent love, his innocence, makes us cry even today, and he considers innocent love to be a mess of ours, even today.

That beauty, that youthfulness, this crazy is his slave, and that innocent love, that innocent thought even today, every moment, every moment is just… innocent love.

Written by Vikrant Rajliwal.

19/09/2019 at 9:27 am

💥 कर्म फल।

दम था बहुत उड़ने का ऊँची उड़ान उसमें, जब जब उड़ना चाहा उसने, तो हर बार आसमान सिमट कर सिमट गया।

टूटे परों में थी जो जान कुछ बाकी, वक़्त की हर चाल पर बच ना सकी, बच गई फिर भी अधूरी जो, वो थी एक ख़्वाहिश, एक ख्वाहिश, एक ख़्वाहिश… एक ख़्वाहिश एक उन्मुक्त उड़ान की, एक आत्मस्वाभिमान भरी पूर्ण एक अधूरी पहचान की!

घाव एहसासो के एहसासो को तोड़ देते है। चक्रव्यूह जीवन का कभी कभी अर्जुन को भी पीछे मोड़ देते है। ज्ञान को अज्ञान और हर अज्ञान एक सार्थी ए पथिक द्वार ज्ञान से मुक्त कर देते है।

सत्य शक्ति का एहसास अब जग को सत्य स्वयं करवाएगा। असत्य सत्य अग्नि से अब बच ना पाएगा। आज और अभी होगा निर्णय, सत्य प्रतिबिंब स्वयं विजय दर्पण से विजय एवं पराजय का दिखलाएगा।

ये सृष्टि, ये ब्रह्मांड, ये अनन्त एहसास, भृम है ये जीवन, ये जीवित प्राण। जीव जीवन से मुक्त है, मुक्त है हर श्वास, मुक्त है हर श्वास। सत्य एवं असत्य दर्पण सत्य एहसासों का, सत्य है जिनके हर एहसास, सत्य है जिनके हर एहसास।

वायु प्राण, अग्नि श्वास, शीतल आत्मज्ञान, रोग द्वेष, पाप एवं पुण्य फल कर्मो का ज्ञान, फल कर्मो का ज्ञान, फ़ल कर्मो का ज्ञान।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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