Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

Poetry, Kavya, Shayari, Sings, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

May 20, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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चेतना। // Senses

यदि आप इस सुंदर संसार का वास्तविक दृश्य देखना एव महसूस करना चाहते है तो आपका आपके होश में रहना बहुत जरूरी है। विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित 20/05/2019 at 12:11 pm If you want to see and feel the real scene of this beautiful world then it is very important to be in your senses. […]

May 20, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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💥 सकरात्मक परिवर्तन का नाम ही जीवन है। // 💥 Life’s name is a positive change.

वास्तविक जीवन ऊर्जा अकस्मात ही प्राप्त नही हो जाती। इसके लिए सत्य कर्मो के द्वारा जलना पड़ता है। विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। 20/05/2019 at 11: 41 pm Real life energy does not get accidentally. For this it has to be burnt by truthful deeds. Written by Vikrant Rajliwal (translated) 20/05/2019 at 11:41 am

May 19, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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Feelings

I would like to share the feelings of my heart at this time before the results of the election today. If I did not even share this entire world at this time, then I would probably not be able to forgive myself so that I had heard Modi’s name for the first time before the […]

May 19, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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ह्रदय एहसास

मैं आज चुनाव के नतीजे आने से पूर्व एक बार को अपने ह्रदय के भाव अवश्य इस संसार से सांझा करना चाहूंगा। जिसको यदि मैने इस समय भी इस समस्त संसार से सांझा नही किया तो शायद मैं स्वम् को कदापि क्षमा ना कर सकूंगा कि हा 2014 आम लोकसभा के चुनावों से पूर्व मोदी […]

May 18, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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सुलगते एहसास।

आज फिर से मौसम ने अँगड़ाई ली है बदलते वख्त ने भी वख्त की दुहाई दी है। मिज़ाज अपना ना बदल देना कोई, देख कर बदलता रंग ए आसमां, रंग अपना ना बदल देना कोई।। कायम एहसासों से कायम है एहसास जितने, बदलते वख्त से मिटा ना देना तुम कायम एहसास अपने। असूल ये दुनियादारी […]

May 18, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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Religion and language.

It is true that languages ​​have been often banned in the name of religion since the ages.   When selfish politics happens, language ends up tempers.   I wish every language would be independent from selfish politics.   Everyone gets free freedom and every language is called language only ..   The relationship between the […]

May 18, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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जुबां

सत्य है यही सदियोँ से धर्म के नाम पर जुबां अक्सर बट जाती है। होती है सियासत जब घिनोनी तो जुबां दम अपना तोड़ जाती है।। काश ये होता कि हर जुबां घिनोनी सियासत से आजाद होती। मिलती सबको खुली आजादी और हर जुबां भी सिर्फ जुबां होती।। जुबां का जुबां से रिश्ता नज़र कुछ […]