Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

June 7, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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सत्य अनुभव।

आपकी संगत का और आपके आस पास के सामाजिक वातावरण का प्रभाव आपके चेतन एव अचेतन मस्तिक्ष को अवश्य ही प्रभाविक करता है। इसीलिए एक सकारात्मक व्यक्त्वि के व्यक्तियों की संगत एव सभ्य समाजिक वातावरण आपके व्यक्तित्व को प्रत्यक्ष एव अप्रत्यक्ष रूप से प्रभाविक करते हुए आपके जीवन मे प्रत्यक्ष एव अप्रत्यक्ष रूप से एक […]

June 2, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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ट्वीट्स। My Twittes (एक लघु संग्रह )

✍️ यह एक लघु संग्रह है बीते कुछ दिनों में मेरे मैन ट्विटर अकाउंट और बैकअप ट्विटर अकाउंट के कुछ दिल को छू देने वाले ट्वीट्स के। 1) @vikrantrajliwal 2) @RajliwalVikrant 3rd one है @VRajliwala This is a short collection of my main Twitter Twitter accounts and some of my backup Twitter Twitter accounts that […]

May 28, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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दर्द। (नई ग़ज़ल)

जब खाई शिखस्त हमनें, अपनो के हाथों ही खाई, नही पाए पहचान जो हाथ वो खंजर उतारा दिल मे बेदर्दी से जो गया। हो कर बेरवाह ज़िन्दगी से, सलूख ज़िन्दगी के हम सीखते रहे, जान हर सलूख जिंदगी के, जान जिंदगी की निकलती रही।। दर्द हर हक़ीक़त का करते रहे जान कर भी नज़रंदाज़ हम […]

May 27, 2019
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An important notification.

This is a translation of my Hindi-speaking article in the English language. If there is an error in translation in error, then I apologize. 🙏 Hello all my dear readers who read this blog, Friends, today I have come to share some very interesting topics with you, friends, I will soon be your own friend, […]

May 27, 2019
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एक महत्वपूर्ण सूचना।

🙏 नमस्कार इस ब्लॉग का पाठन करने वाले मेरे समस्त प्रिय पाठको को, मित्रों आज मैं आपसे कुछ अत्यंत ही जटिल विषय सांझा करने आया हु, मित्रों शीघ्र अति शीघ्र ही मैं आपका अपना मित्र विक्रांत राजलीवाल आपकी अपनी इस ब्लॉग साइट https://vikrantrajliwal.com पर बाल मनोवैज्ञानिक से सम्बंधिक पूर्ण बाल मानसिक स्थितियों पर प्रभाव एव […]

May 26, 2019
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एहसास

ये रात भी बीत जाएगी और एक एक कर के दिन तमाम, भागते रहे करने को ख़िदमत, खड़े बांध कतार में तुम अपने हाथ। करि ख़िदमत शहंशाहों की उम्र तमाम, मिला एक लम्हा भी सकूँ का फिर भी नही, करा नज़रंदाज़ साए को अपने, छोड़ अपनो का साथ।। कर दिए हर लव्ज़ महोबतों के बेअसर […]

May 24, 2019
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अधुरे एहसास। (नई ग़ज़ल)

ज़िन्दगी में चेहरे धुंधलाते से पड़ गए जितने, देखा है हमने ज़िन्दगी में अक्सर हमे वही चेहरे याद रहे। रहे ना रहे हम ज़िन्दगी में ए ज़िन्दगी फ़क़त रह जाएंगे निसान ज़िन्दगी में ज़िन्दगी के जो हमने कभी मिटने नही दिए।। एहसास हैं मुझे हर लम्हा उन एहसासों का अपने, धूल जिन पर बदलते वक़्त […]